काशी तमिल संगमम् 4.0 के द्वितीय समूह ने काशी विश्वनाथ मंदिर में किया दर्शन पूजन , अन्नक्षेत्र में ग्रहण किया श्री विश्वेश्वर का प्रसाद

काशी तमिल संगमम् 4.0 के द्वितीय समूह के आगमन पर काशी विश्वनाथ मंदिर के अधिकारियों ने परंपरागत गरिमा के साथ सभी अतिथियों का स्वागत किया। मंदिर प्रशासन द्वारा पुष्प वर्षा और डमरू वादन की ध्वनि के बीच सम्पूर्ण समूह का स्वागत किया गया जिससे सभी सदस्यों ने काशी की समृद्ध आध्यात्मिक धारा का अनुभव किया। […]
काशी तमिल संगमम् 4.0 के लिए तमिलनाडु से आया दूसरा दल, डमरू वादन और पुष्पवर्षा के बीच हुआ भव्य स्वागत

काशी तमिल संगमम् 4.0 में दक्षिण भारत से आने वाले आगंतुकों का सिलसिला जारी है। बुधवार की देर रात दूसरा दल विशेष ट्रेन से बनारस रेलवे स्टेशन पहुंचा जिसमें बड़ी संख्या में अध्यापक (टीचर्स डेलिगेशन) शामिल थे। स्टेशन पर उतरते ही मेहमानों का पारंपरिक तरीके से डमरू वादन,पुष्प वर्षा और ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘वणक्कम काशी’ के […]
कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण के माध्यम से देश के नेट ज़ीरो लक्ष्यों को सक्षम करने के लिए अनुसंधान एवं विकास रूपरेखा का शुभारंभ किया गया

कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस) के माध्यम से भारत के नेट जीरो लक्ष्यों को सक्षम करने के लिए अपनी तरह का पहला अनुसंधान एवं विकास रूपरेखा 2 दिसंबर, 2025 को शुभारंभ किया गया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा तैयार कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण के माध्यम से देश के नेट जीरो लक्ष्यों को सक्षम करने के लिए अनुसंधान […]
नेस्ट्स द्वारा आंध्र प्रदेश के केएल विश्वविद्यालय में छठे राष्ट्रीय ईएमआरएस सांस्कृतिक एवं साहित्यिक उत्सव और कला उत्सव – उद्भव 2025 का आयोजन

राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति (नेस्ट्स) ने आंध्र प्रदेश आदिवासी कल्याण आवासीय शैक्षणिक संस्थान सोसाइटी (एपीटीडब्ल्यूआरईआईएस) की मेजबानी में छठे राष्ट्रीय ईएमआरएस सांस्कृतिक एवं साहित्यिक उत्सव और कला उत्सव – उद्भव 2025 का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम और जनजातीय कल्याण एवं महिला एवं बाल कल्याण मंत्री श्रीमती […]
श्रम संहिताओं से बीओसीडब्ल्यू वेलफेयर संरचना में बदलाव
कोई भी नियोक्ता किसी भी कर्मचारी को न्यूनतम वेतन से कम वेतन नहीं देगा। न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जाएगा और समय पर वेतन भुगतान का प्रावधान होगा। निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच, प्रवासी श्रमिकों के लिए लाभों की पोर्टेबिलिटी होगी और लैंगिक भेदभाव समाप्त किया जाएगा। नियुक्ति पत्रों के माध्यम से कार्य को औपचारिकता मिलेगी। चार संहिताएं, एक सुव्यवस्थित प्रणाली नवीनतम श्रम सुधारों के साथ, भारत ने सभी क्षेत्रों में श्रम प्रशासन को सुदृढ़ किया है। श्रम संहिताएं, जैसे वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता 2020 (ओएसएच), भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) क्षेत्र के श्रमिकों के लिए विशेष महत्व रखती हैं, क्योंकि यहां कार्यबल बहुत बड़ा है और निर्माण गतिविधि जटिल और स्थल-आधारित है। ये सुधार वेतन संरक्षण, कार्यस्थल सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और औपचारिक दस्तावेजीकरण को एक एकीकृत दृष्टिकोण में लाते हैं। इसके चलते, निर्माण श्रमिक अधिक सुसंगत कार्य मानकों, कल्याणकारी उपायों तक बेहतर पहुंच और भारत की विकास यात्रा में अपनी भूमिका की बेहतर पहचान की उम्मीद कर सकते हैं। बीओसीडब्ल्यू श्रमिकों के लिए सुदृढ़ कल्याण श्रम संहिताएं बीओसीडब्ल्यू श्रमिकों के लिए एक सुदृढ़ कल्याण फ्रेमवर्क प्रस्तुत कर, कार्यस्थल की स्थितियों में सुधार कर और अधिक सुरक्षा सुनिश्चित कर भारत के निर्माण कार्यबल के लिए एक समेकित सुरक्षा तंत्र निर्मित करती हैं। वेतन और मुआवजा ये सुधार आय स्थिरता को बढ़ाते हैं, समय पर वेतन सुनिश्चित करते हैं, श्रमिकों की कमजोरियों को कम करते हैं और पूरे क्षेत्र में वित्तीय सुरक्षा को बेहतर करते हैं। न्यूनतम मजदूरी का सार्वभौमिकरण: कोई भी नियोक्ता किसी भी कर्मचारी को सरकार की ओर से अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन नहीं देगा। न्यूनतम मजदूरी, जो पहले केवल “अनुसूचित रोजगारों” पर लागू होती थी, अब सभी श्रेणियों के कर्मचारियों पर लागू होगी। सरकार इन दरों को अधिकतम पांच वर्ष के अंतराल पर संशोधित या समीक्षा करेगी। न्यूनतम मजदूरी, श्रमिक के कौशल स्तर और कार्य की प्रकृति के आधार पर, समय-कार्य और खंड-कार्य के लिए प्रति घंटा, दैनिक या मासिक मजदूरी अवधि में निर्धारित की जाएगी। न्यूनतम वेतन: सरकार की ओर से कर्मचारी के जीवन स्तर, जैसे भोजन और कपड़े, के आधार पर एक निश्चित न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जाएगा और नियमित अंतराल पर इसमें संशोधन किया जाएगा। संबंधित सरकार (केंद्र/राज्य) की ओर से निर्धारित न्यूनतम वेतन दरें ‘न्यूनतम वेतन’ से कम नहीं होंगी। यदि संबंधित सरकार की ओर से पहले निर्धारित न्यूनतम वेतन दरें “न्यूनतम वेतन” से अधिक थीं, तो उन्हें कम नहीं किया जाएगा। ओवरटाइम वेतन: सामान्य कार्य घंटों से अधिक किए गए किसी भी कार्य के लिए नियमित वेतन दर के दोगुने से कम का भुगतान नहीं किया जाएगा। मजदूरी भुगतान की समय सीमा: नियोक्ता निम्नलिखित निर्धारित समयसीमा के अंतर्गत मजदूरी का भुगतान करेगा: क्रम संख्या कर्मचारी का प्रकार मजदूरी भुगतान की समय सीमा 1 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी पाली की समाप्ति पर 2 साप्ताहिक वेतन भोगी कर्मचारी साप्ताहिक अवकाश से पहले 3 पाक्षिक वेतन भोगी कर्मचारी पखवाड़े की समाप्ति के 2 दिन के भीतर 4 […]
बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025

जमाकर्ताओं को अपनी पसंद के अनुसार जमा और लॉकर के लिए नॉमिनी को नामित करने की सुविधा मिलेगी। पब्लिक सेक्टर बैंकों में सुदृढ़ प्रशासनिक मानक और बेहतर ऑडिट गुणवत्ता बिना दावे वाली धनराशि को विनिधानकर्ता शिक्षा और संरक्षण निधि में स्थानांतरित किया जाएगा अधिक पारदर्शिता के लिए आधुनिक सीमा और रिपोर्टिंग मानकों के साथ अपडेटेड नियामक मानदंड। प्रस्तावना किसी देश की आर्थिक सफलता काफी हद तक उसकी वित्तीय प्रणाली पर निर्भर करती है। आमतौर पर, बैंकिंग संस्थान कई तरह की सेवाएं, जैसे जमा स्वीकार करना, लोन देना, लेन-देन में मदद करना, और जनता को क्रेडिट कार्ड, बचत खाते और लोन सहित विभिन्न वित्तीय सुविधाएं प्रदान करना, प्रदान करते हैं। भारत की बैंकिंग प्रणाली निवेश और व्यक्तिगत वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है और इसलिए, देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत के बैंकिंग क्षेत्र में वास्तव में विशेष बदलाव आया है, जो कागज-आधारित, शाखा-केंद्रित प्रणाली से प्रमुख तकनीकी और नीतिगत उपलब्धियों की मदद से कार्यान्वित एक अग्रणी डिजिटल परिदृश्य में विकसित हुआ है। इसने पारंपरिक बैंकिंग और प्रारंभिक कंप्यूटरीकरण से बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली – आधार – तक का रूपांतरण किया है और प्रधानमंत्री जन–धन योजना के जरिए लाखों बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में शामिल किया है। सरकार की ऐसी पहलों ने शहरी और ग्रामीण आबादी के बीच की खाई को पाटकर और लाखों लोगों तक औपचारिक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाकर वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहन देने में बड़ी भूमिका निभाई है। बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025, पब्लिक सेक्टर बैंकों (पीएसबी) में बेहतर ऑडिट गुणवत्ता के साथ-साथ भारतीय रिजर्व बैंक को बैंकों की ओर से रिपोर्टिंग में एकरूपता तय करके बैंकिंग क्षेत्र में शासन मानकों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। यह अधिनियम बेहतर नामांकन सुविधाओं के माध्यम से ग्राहक सुविधा को बढ़ावा देकर जमाकर्ताओं और निवेशकों की सुरक्षा को बेहतर करता है। भारत के बैंकिंग कानूनों का क्रम–विकास भारत का बैंकिंग रेगुलेशन देश के आर्थिक और संस्थागत विकास के साथ-साथ विकसित हुआ है, जो पांच आधारभूत कानूनों के आधार पर निर्देशित है, जो इसके वित्तीय ढांचे को परिभाषित करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक देश का केंद्रीय बैंक है। भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का दूसरा अधिनियम) बैंक के संचालन के लिए कानूनी आधार स्थापित करता है। इसका गठन मुख्य रूप से बैंक नोटों के निर्गमन को विनियमित करने, मौद्रिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आरक्षित निधियों को बनाए रखने और देश की क्रेडिट एवं मुद्रा प्रणाली को संचालित करने के लिए किया गया था। राष्ट्र के वित्तीय ढांचे को मजबूत करने के लिए, बैंक ने यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया, भारतीय औद्योगिक विकास बैंक, राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक आदि जैसे संगठनों की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजादी के तुरंत बाद बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 लागू हुआ, जिसने बैंकिंग गतिविधियों पर एक समान कानूनी ढांचे के अंतर्गत नियंत्रण स्थापित किया। यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण विधायी ढांचों में से एक है, जो स्थिरता, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए बैंकिंग क्षेत्र को विनियमित करता है। भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की औपचारिक स्थापना की, जिसने इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया के उपक्रम को बड़े पैमाने पर, विशेष तौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, और विविध अन्य सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार करने के अधिदेश के साथ बदलाव किया। राष्ट्रीय नीति उद्देश्यों के अनुसार अर्थव्यवस्था के विकास की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए, 1969 में 50 करोड़ रुपये से अधिक जमा राशि वाले 14 महत्वपूर्ण भारतीय अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। इसके अतिरिक्त, एक नया अध्यादेश जारी किया गया था जिसे बाद में बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 से बदला गया था। लोगों को सहयोग देने के लिए, कुछ बैंकिंग कंपनियों के उपक्रमों के अधिग्रहण और हस्तांतरण के लिए बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम, 1980 पारित किया गया। इनके अतिरिक्त, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम में बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 1994, बैंकिंग कंपनियां (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) संशोधन अधिनियम, 1994 और बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2007, बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2012 जैसे कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए, जो शासन, पूंजी में लचीलेपन, सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) या नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) आधारित तरलता प्रबंधन से जुड़े हैं, जिससे भारत के बैंकिंग ढांचे में सुधार हुआ। बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 के साथ, सहकारी बैंकों के प्रभावी विनियमन को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को अतिरिक्त शक्तियां प्रदान की गईं। इस गति को जारी रखते हुए, हाल ही में किए गए एक सुधार में, बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 पांच अधिनियमों में संशोधन करता है, अर्थात भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949, भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955, बैंकिंग कंपनियां (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 और बैंकिंग कंपनियां (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम, 1980। इस कदम का उद्देश्य बैंकिंग प्रशासन को बढ़ाना, लेखा परीक्षा पारदर्शिता में सुधार करना, जमाकर्ता संरक्षण को मजबूत करना और सहकारी बैंकों को अधिक मजबूत नियामक ढांचे के अंतर्गत लाना है। आने वाली चुनौतियों का समाधान: बैंकिंग संशोधन अधिनियम, 2025 की आवश्यकता हाल के दिनों में बैंकिंग प्रणाली पर घरेलू निर्भरता बढ़ी है, क्योंकि सरकार देश की अब तक वंचित रही बड़ी आबादी तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने का उद्देश्य लेकर अपनी विकास क्षमता को बेहतर कर रही है। वित्तीय समावेशन के गहन होने और देश भर में बैंकिंग तक पहुंच के विस्तार के साथ बढ़ती जटिलता के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए, शारीरिक श्रम को कम करना, उद्योग के पैमाने और तकनीक के साथ संचालन का मिलान करना और बेहतर अनुपालन के लिए वैधानिक समय-सीमाओं में बदलाव करना जरूरी हो जाता है। बैंकिंग संशोधन अधिनियम, 2025, तेज डिजिटल विकास और आने वाली वित्तीय चुनौतियों के बीच पेश किया गया है। यह सुधार शासन और अनुपालन ढांचों को समकालीन उद्योग की गतिशीलता और उभरती तकनीक के साथ संरेखित करने का प्रयास करता है। ये प्रावधान मुख्य रूप से निम्नलिखित के लिए आवश्यक हैं: बैंकों और जमाकर्ताओं, दोनों के लिए परिसंपत्तियों के सरल हस्तांतरण के लिए परिसंपत्तियों के उत्तराधिकार में स्पष्टता प्राप्त करें, विवादों को कम करें और न्यायिक हस्तक्षेप को कम करें। नियामक अनुपालन को सुव्यवस्थित करने और बैंकिंग इकोसिस्टम के भीतर आ रही प्रौद्योगिकियों के अनुकूलन को सरल बनाने के लिए एक समान शब्दावली तय करें। मानवीय कार्यभार को कम करने, स्वचालन को प्रोत्साहन देने और प्रणालीगत दक्षता को मजबूत करने के लिए लेखांकन चक्रों के अनुरूप वैधानिक समय–सीमाओं को संशोधित करें। बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025: प्रमुख सुधार बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 जमाकर्ताओं की सुरक्षा, शासन की मजबूती और दबाव के तुरंत समाधान पर केंद्रित प्रमुख सुधारों को प्रस्तुत करता है। संरचनात्मक अपडेशन के अतिरिक्त, 2025 का अधिनियम बैंकिंग निगरानी और शासन को बेहतर बनाने के भारत के निरंतर प्रयासों को और मजबूत करता है। ये बदलाव बीते दशक में सामने आई व्यावहारिक चुनौतियों पर आधारित हैं। अधिनियम के प्रावधानों को दो चरणों में अधिसूचित किया गया था: धारा 3 से 5 और 15-20 को चरण 1 (1 अगस्त, 2025) में शामिल किया गया था, जबकि धारा 10 से 13 को चरण 2 (1 नवंबर 2025) में शामिल किया गया था। प्रमुख सुधारों को नीचे विस्तार […]