प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री से टेलीफोन पर बातचीत की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री श्री क्रिस्टोफर लक्सन से टेलीफोन पर बातचीत की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त रूप से ऐतिहासिक, महत्वाकांक्षी और पारस्परिक रूप से लाभकारी भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के सफल समापन की घोषणा की। मार्च 2025 में प्रधानमंत्री लक्सन की भारत यात्रा के दौरान वार्ता शुरू होने के […]
रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा के लिए अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी सहायता में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए डीआरडीओ और आरआरयू ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) ने रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी सहायता के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस एमओयू पर विशिष्ट वैज्ञानिक एवं महानिदेशक (उत्पादन समन्वय एवं सेवा अंतःक्रिया) डॉ. […]
IP&TAFS ने संचार वित्त लेखा दिवस के रूप में 51वाँ स्थापना दिवस मनाया और कम्युनिकेशन फाइनेंस समिट 2025 का आयोजन किया

भारतीय डाक एवं दूरसंचार लेखा एवं वित्त सेवा (IP&TAFS)—जो कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से भर्ती की जाने वाली एक केंद्रीय सिविल सेवा है—ने अपना 51वाँ स्थापना दिवस, संचार वित्त लेखा दिवस के रूप में मनाया तथा इस अवसर पर कम्युनिकेशन फाइनेंस समिट 2025 का आयोजन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कंट्रोलर जनरल ऑफ कम्युनिकेशन अकाउंट्स (CGCA), सुश्री वंदना गुप्ता ने IP&TAFS की 51 वर्षों की संस्थागत यात्रा और भारत के दूरसंचार एवं डाक क्षेत्रों में वित्तीय शासन को सुदृढ़ करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने आर्थिक सुधारों, उदारीकरण तथा तीव्र तकनीकी प्रगति के प्रभावों का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार इन परिवर्तनों ने दूरसंचार विभाग (DoT) और डाक विभाग (DoP) की भूमिकाओं को नया स्वरूप प्रदान किया है। CGCA ने राजस्व आश्वासन, लाइसेंस शुल्क एवं स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के आकलन एवं संग्रह, दूरसंचार ऑपरेटरों की वित्तीय निगरानी, आंतरिक लेखा परीक्षा, पेंशन प्रबंधन, तथा नीति–आधारित वित्तीय परामर्श में IP&TAFS की विस्तारित जिम्मेदारियों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेवा की प्रतिबद्धता और व्यावसायिक दक्षता के कारण DoT और DoP, दोनों ही प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा प्रकाशित शिकायत निवारण रैंकिंग में लगातार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विभागों में शामिल रहे हैं। क्षमता निर्माण पर विशेष बल देते हुए सुश्री गुप्ता ने बताया कि IP&TAFS के अधीन नेशनल कम्युनिकेशन अकादमी–फाइनेंस (NCA-Finance) आज सरवोत्तम–क्षमता निर्माण आयोग द्वारा उच्चतम रेटिंग प्राप्त केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान के रूप में प्रतिष्ठित है। अकादमी ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) के सहयोग से 15 अखिल भारतीय सेवाओं एवं केंद्रीय सेवाओं के 176 अधिकारियों के लिए विशेष आधारभूत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का सफल आयोजन किया है, जिसे LBSNAA द्वारा सराहा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि IP&TAFS अधिकारियों की भूमिका अब पारंपरिक लेखा एवं वित्त कार्यों से आगे बढ़कर दूरसंचार एवं डाक क्षेत्रों में मुख्य परिचालन, प्रशासनिक, लेखा परीक्षा एवं नीति–सहायक दायित्वों तक विस्तारित हो चुकी है। सलाहकार (वित्त), सुश्री दर्शन एम. डाबराल ने स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए सेवा की यात्रा पर समय-समय पर आत्ममंथन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि IP&TAFS ने 1990 के दशक के उदारीकरण काल और 2020 के दशक की डिजिटल परिवर्तन अवधि में महत्वपूर्ण विकास चरणों का अनुभव किया है, जिनके दौरान सेवा की भूमिका सेवा प्रदाता से नियामक एवं रणनीतिक वित्तीय साझेदार के रूप में परिवर्तित हुई। उन्होंने फुर्ती और अनुकूलनशीलता को सेवा की दो प्रमुख विशेषताएँ बताया और डाक विभाग में IT 2.0, तीव्र लेखा सुधारों तथा SAMPANN, IT 2.0 और SARAS जैसे प्रमुख डिजिटल अनुप्रयोगों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इन प्लेटफॉर्म्स के अन्य मंत्रालयों, राज्य सरकारों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) ढाँचों तक विस्तार का भी सुझाव दिया। अपने विचार साझा करते हुए श्री राजीव कुमार, वरिष्ठ उप महानिदेशक (PAF) ने दूरसंचार और डाक क्षेत्रों में हुए विभिन्न परिवर्तनों, चुनौतियों और सफलताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि IP&TAFS ने निरंतर स्वयं को विकसित किया है, जिसमें सेवा के वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों की मार्गदर्शक भूमिका और संस्थागत स्मृति का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस अवसर पर अपर नियंत्रक महालेखाकार, सुश्री आस्था सक्सेना ने शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि लेखा एवं वित्त सेवाएँ सदैव शासन व्यवस्था का अनिवार्य अंग रही हैं। उन्होंने पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) और IP&TAFS के बीच सहयोग को रेखांकित किया तथा कहा कि संचार वित्त भविष्य में भी सरकारी कार्यप्रणाली के केंद्र में बना रहेगा। सम्मेलन के दौरान सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों ने IP&TAFS के विकास से जुड़े अपने अनुभव साझा किए, जिससे कार्यरत अधिकारियों को दीर्घकालिक दृष्टि और संस्थागत स्मृति का लाभ मिला। साथ ही SAMPANN 2.0 द्वारा पेंशन प्रबंधन, डाक सुधारों हेतु IT 2.0, तथा राजस्व आश्वासन और वित्तीय चुनौतियों के समाधान जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। भविष्य की ओर दृष्टि डालते हुए डिजिटल भारत निधि, डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता, इनोवेशन सेल तथा Performace Audit जैसी पहलों को संचार क्षेत्र में समावेशी विकास और सकारात्मक प्रणालीगत परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के अधिकारियों की सहभागिता से समग्र सरकारी दृष्टिकोण (Whole-of-Government Approach) को बल मिला, जो सुदृढ़ सार्वजनिक वित्तीय शासन के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौता वार्ता संपन्न होने की घोषणा की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत और न्यूजीलैंड ने एक व्यापक, संतुलित और भविष्योन्मुखी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ भारत की सहभागिता में एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक उपलब्धि है। यह ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण अनुरूप, भारत के सबसे शीघ्र संपन्न हुए मुक्त […]
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया, जिसमें वर्तमान में जीने के ज्ञान पर जोर दिया गया है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया- “गते शोको न कर्तव्यो भविष्यं नैव चिन्तयेत्। वर्तमानेन कालेन वर्तयन्ति विचक्षणाः।” मतलब, किसी को अतीत पर शोक नहीं करना चाहिए और न ही भविष्य के बारे में चिंता करनी चाहिए। बुद्धिमान व्यक्ति केवल वर्तमान में ही कार्य करते हैं। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा; “गते शोको […]
पेसा महोत्सव

पंचायती राज और जनजातीय मामलों का मंत्रालय हर साल 23 और 24 दिसंबर को संयुक्त रूप से पेसा महोत्सव मनाता है। अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों का विस्तार (पेसा)अधिनियम, 1996 की वर्षगांठ पर ये महोत्सव मनाया जाता है। पेसा अधिनियम जनजातीय समुदायों की अनुसूचित भूमि पर पंचायती राज के प्रावधानों को लागू करके उन्हें सशक्त बनाता है और उन्हें उनकी भूमि से बेदखल य़ा अलग किये जाने से बचाता है। 2025 का पेसा महोत्सव विशाखापत्तनम में आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य अधिनियम के बारे में जागरूकता फैलाना और अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय निकायों की क्षमताओं को बढ़ाना है। परिचय भारत में जनजातीय समुदाय की आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 8.6 प्रतिशत है। संविधान के अनुच्छेद 244 के तहत,भारत के राष्ट्रपति द्वारा अधिक जनजातीय आबादी वाले क्षेत्रों को अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया जाता है ताकि जनजातीय लोगों का अपने स्थानीय संसाधनों,अपने विकास और सामाजिक जीवन पर नियंत्रण हो सके। 1993 में, ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर पर पंचायती राज संस्थाओं या स्थानीय शासन निकायों की स्थापना के लिए भारत के संविधान में संशोधन (73वां संशोधन) किया गया। इस संशोधन ने स्थानीय स्तर की संस्थाओं को शक्ति प्रदान की जिससे ग्रामीणों को अपने विकास और समुदायों से संबंधित निर्णय लेने का अधिकार मिला। हालांकि, 73वां संशोधन अधिनियम आदिवासी अनुसूचित क्षेत्रों पर अपने आप लागू नहीं हुआ। 1996 में, पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम (पेसा) लागू हुआ,जिसने अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों को स्वशासन के लिए समान शक्तियां प्रदान कीं। यह ऐतिहासिक कानून जनजातीय समुदायों के भूमि, जल, वन संसाधन, संस्कृति और शासन प्रणालियों पर उनके अधिकारों को बहाल करता है और उन्हें संरक्षण देता है। यह आदिवासी ग्राम सभाओं को सशक्त बनाकर जनजातीय समुदायों तक विकेंद्रीकृत लोकतंत्र का विस्तार करता है। पेसा अधिनियम जनजातीय समुदायों की अलग पारंपरिक शासन प्रणालियों और विशेष विकास संबंधी आवश्यकताओं को भी मान्यता देता है। जनजातीय अनुसूचित क्षेत्रों वाले दस राज्यों में से आठ ने अपने पेसा नियम बना लिए हैं, जबकि ओडिशा और झारखंड ने मसौदा नियम तैयार किए हैं। पेसा महोत्सव 2025, 23-24 दिसंबर, विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश पंचायती राज मंत्रालय 23-24 दिसंबर 2025 को विशाखापत्तनम में पेसा महोत्सव का आयोजन करेगा, जो पेसा अधिनियम, 1996 की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित हो रहा है। इस महोत्सव को एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें चक्की खेल, उप्पन्ना बारेलू, चोलो और पुली मेका, मल्लखंबा, पिठूल, गेडी दौड और सिकोर जैसे पारंपरिक खेलों के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी व्यंजनों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसका उद्देश्य जनजातीय समुदायों को उनकी समृद्ध परंपराओं का जश्न मनाने, उन्हें संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मंच प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाना है। भारत में पंचायती राज — 73वां संवैधानिक संशोधन (1993) 73वें संवैधानिक संशोधन (1993) ने संविधान में भाग 9 और 11वीं अनुसूची को जोड़ा। संविधान का भाग 9 ग्राम और जिला स्तर पर स्थित संस्थाओं को शक्तियां प्रदान करता है जिन्हें पंचायत के नाम से भी जाना जाता है। ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय सूचीबद्ध हैं जिन पर इन स्थानीय संस्थाओं को निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है। इस संशोधन ने अधिक विकेंद्रीकृत लोकतंत्र का मार्ग प्रशस्त किया। संविधान संशोधन के भाग 9 ने पंचायती राज संस्थाओं की त्रिस्तरीय ढांचा स्थापित किया – ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायतें, मध्यवर्ती या ब्लॉक स्तर पर पंचायत समितियां (ग्रामों के समूह का प्रतिनिधित्व करने वाली) और जिला स्तर पर जिला परिषदें। इन तीनों निकायों के सभी सदस्य निर्वाचित होते हैं। इसके अलावा, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों के अध्यक्ष निर्वाचित सदस्यों में से अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। लेकिन ग्राम स्तर पर, पंचायत सरपंच का चुनाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से हो सकता है। पंचायत के प्रत्येक स्तर पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित होती हैं। ग्राम सभा ग्राम पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले किसी भी गांव की मतदाता सूची में पंजीकृत सभी व्यक्तियों से मिलकर बनी एक संस्था है। ग्राम सभाओं की शक्तियां और कार्य राज्य विधानमंडलों द्वारा तय कानून के माध्यम से निर्धारित किए जाते हैं। 1996 का पेसा अधिनियम पेसा अधिनियम पंचायती राज व्यवस्था या 73वें संवैधानिक संशोधन के प्रावधानों का आदिवासी बहुल पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार करता है। यह अधिनियम इन क्षेत्रों में ग्राम सभाओं और पंचायतों को उनकी पारंपरिक शासन प्रणाली को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त शक्तियां प्रदान करता है। पेसा अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं ग्राम सभाओं की बढ़ी हुई शक्तियां पेसा अधिनियम का मूल आधार हैं, जो जनजातीय समुदायों को अपने ग्राम शासन व्यवस्था पर अधिक अधिकार प्रदान करती हैं। यद्यपि पंचायतों और ग्राम सभाओं के लिए संवैधानिक नियम हैं,फिर भी पेसा अधिनियम उन्हें निष्प्रभावी कर देता है,और राज्य विधानमंडल इन नियमों का उल्लंघन करने वाला कोई भी पंचायत कानून नहीं बना सकता है। अनुसूचित क्षेत्र और पेसा अधिनियम […]