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प्रधानमंत्री ने नामीबिया की संसद को संबोधित किया

नेशनल असेम्‍बली की स्‍पीकर, महामहिम सारा कुगोंगेल्वा के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नामीबिया की संसद को संबोधित किया। नामीबिया की ओर से इस तरह के विशेष भाव ने प्रधानमंत्री की नामीबिया की राजकीय यात्रा को और भी सार्थक बना दिया।

संसद को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने “लोकतंत्र की जननी” और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ओर से इस प्रतिष्ठित सदन के सदस्यों और नामीबिया की मैत्रीपूर्ण जनता को शुभकामनाएं दीं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों और स्वतंत्रता के लिए अपने साझा संघर्ष को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने नामीबिया के संस्थापक डॉ. सैम नुजोमा की विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संस्थापकों द्वारा समर्थित लोकतांत्रिक मूल्य और सिद्धांत दोनों देशों में प्रगति के पथ को प्रकाशित करते रहेंगे। उन्होंने देश में लोकतंत्र को मजबूत करने में नामीबिया की सरकार और जनता की भूमिका की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने नामीबिया का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने के लिए वहां की जनता को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह विशेष भाव भारतीय और नामीबियाई लोकतंत्रों की उपलब्धियों के प्रति एक श्रद्धांजलि है। स्वतंत्रता, समानता और न्याय के प्रहरी के रूप में, उन्होंने दोनों देशों से वैश्विक दक्षिण की बेहतरी के लिए काम करने का आह्वान किया, ताकि वहाँ के लोगों की आवाज़ न केवल सुनी जाए, बल्कि उनकी आशाओं और आकांक्षाओं को भी पूरी तरह साकार किया जा सके। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत हमेशा अफ्रीका की प्रगति के लिए काम करेगा, जैसा कि उसने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान किया था, जब अफ्रीकी संघ को इस समूह का स्थायी सदस्य बनाया गया था। उन्होंने कहा कि भारत को नामीबिया और महाद्वीप के अन्य देशों के साथ अपने विकास के अनुभव साझा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। भारत क्षमता निर्माण, कौशल विकास, स्थानीय नवाचार को बढ़ावा देने और अफ्रीका के एजेंडा 2063 का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने उन्हें दिए गए सम्मान के लिए स्‍पीकर का धन्यवाद किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच लोगों के बीच बेहतर संपर्क का आह्वान किया ताकि दोनों लोकतंत्र सदैव समृद्ध रहें। उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा, “हमारे बच्चों को न केवल वह आज़ादी विरासत में मिले जिसके लिए हमने संघर्ष किया, बल्कि वह भविष्य भी मिले जिसका निर्माण हम मिलकर करेंगे।”

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