केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात कर राज्य में इस्पात संबंधी विकास, विशेष रूप से राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) के संचालन और विस्तार की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम भी उपस्थित थे।
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने बातचीत को “सार्थक” बताते हुए कहा कि चर्चा ओडिशा को एक प्रमुख इस्पात और खनन केंद्र के रूप में मज़बूत करने पर केंद्रित रही। इस्पात मंत्रालय और ओडिशा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस विचार-विमर्श में भाग लिया।
मंत्री महोदय ने बताया कि बातचीत में तीन प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा, “हमने राउरकेला इस्पात संयंत्र के कामकाज, संयंत्र के नियोजित विस्तार और ओडिशा में इस्पात एवं खनन उत्पादन बढ़ाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अपने समृद्ध खनिज संसाधनों और मज़बूत औद्योगिक आधार के साथ, ओडिशा भारत की इस्पात विकास रणनीति का एक अनिवार्य स्तंभ बना हुआ है।
मीडिया से बात करते हुए, केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने आरएसपी के विस्तार और इस्पात क्षेत्र के व्यापक विकास में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने 2030 तक 300 मिलियन टन इस्पात क्षमता तक पहुँचने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न को साकार करने में राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।”
यह बैठक ओडिशा में औद्योगिक विस्तार को गति देने में केन्द्र और राज्य नेतृत्व के बीच बढ़ते तालमेल को दर्शाती है, जो भारत के इस्पात और खनन उत्पादन में प्रमुख योगदान देता है।
निरंतर सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि समन्वित प्रयास उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने, बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय आर्थिक लक्ष्यों को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस चर्चा से भारत के सबसे महत्वपूर्ण इस्पात उत्पादक क्षेत्रों में से एक के रूप में ओडिशा की भूमिका को मजबूत करने और देश को 300 मीट्रिक टन इस्पात क्षमता के लक्ष्य की ओर अग्रसर करने में एक और कदम आगे बढ़ा।









