भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने मेसर्स टेकइन्वेंशन लाइफकेयर लिमिटेड, नवी मुंबई को स्वदेशी रूप से विकसित 16-वैलेंट न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी-16) के उत्पादन हेतु व्यावसायिक स्तर की सीजीएमपी सुविधा की स्थापना हेतु वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। इस समर्थित परियोजना का उद्देश्य अगली पीढ़ी के कंजुगेट टीकों में भारत की क्षमता को मज़बूत करना और घरेलू नवाचार एवं विनिर्माण के माध्यम से आयातित उत्पादों पर दीर्घकालिक निर्भरता को कम करना है।
पीसीवी-16 तकनीक 16 न्यूमोकोकल सीरोटाइप के एक रणनीतिक रूप से चयनित पैनल पर आधारित है, जो भारत और अन्य निम्न व मध्यम आय वाले देशों में आक्रामक न्यूमोकोकल रोग (आईपीडी), रोगाणुरोधी प्रतिरोध और उच्च मृत्यु जोखिम से जुड़े उपभेदों का प्रतिनिधित्व करते हैं। जबकि 13 सीरोटाइप मौजूदा वैश्विक पीसीवी प्लेटफॉर्म के साथ ओवरलैप करते हैं, तीन उभरते सीरोटाइप—12एफ, 15ए और 22एफ—को शामिल करने से विकसित हो रहे गैर-टीकाकरण सीरोग्रुप के विरुद्ध व्यापक कवरेज मिलता है, जो इस स्वदेशी दृष्टिकोण के जन-स्वास्थ्य मूल्य को पुष्ट करता है।
यह परियोजना सीरोटाइप प्राथमिकता के विज्ञान-आधारित पुनर्मूल्यांकन को दर्शाती है, जिसे बच्चों, बुजुर्गों और संवेदनशील आबादी के लिए किफ़ायती टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्रारंभिक अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम विकास टेकइन्वेंशन की बीएसएल-2 सुविधा में बीएससी बायोनेस्ट बायो-इनक्यूबेटर, आरसीबी फरीदाबाद में किया गया था, और बाद में कंपनी के जीएमपी-संरेखित उच्च-नियंत्रण अनुसंधान एवं विकास केंद्र, ‘होराइज़न’, नवी मुंबई में आगे बढ़ा। अद्वितीय सीरोटाइप डिज़ाइन और प्रक्रिया नवाचारों की सुरक्षा के लिए एक भारतीय पेटेंट दायर किया गया है।
टीडीबी के सहयोग से, यह परियोजना अब पूर्ण पैमाने पर सीजीएमपी निर्माण की ओर अग्रसर होगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि उन्नत संयुग्मित टीका प्रौद्योगिकियों का देश में ही विकास, सत्यापन और व्यावसायीकरण हो। इस पहल से महत्वपूर्ण टीकों में भारत की आत्मनिर्भरता में उल्लेखनीय वृद्धि, घरेलू जैव-विनिर्माण क्षमता में वृद्धि और भविष्य के बहु-संयोजी प्लेटफार्मों के लिए मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।
टेकइन्वेंशन लाइफकेयर लिमिटेड ने अपनी बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है, 15 से ज़्यादा पेटेंट हासिल किए हैं और भारत के पहले 6-इन-1 मेनिंगोकोकल कंजुगेट वैक्सीन सहित कई स्वदेशी वैक्सीन उम्मीदवारों पर काम कर रही है। कंपनी को अगली पीढ़ी के वैक्सीन नवाचार में योगदान के लिए राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा भी मान्यता दी गई है।
इस अवसर पर बोलते हुए, टीडीबी के सचिव, श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा: “पीसीवी-16 परियोजना उच्च-प्रभावी, अगली पीढ़ी की वैक्सीन तकनीक का प्रतिनिधित्व करती है जिसका समर्थन करना टीडीबी का लक्ष्य है। स्वदेशी विकास और व्यावसायिक पैमाने पर विनिर्माण को सक्षम बनाकर, हम राष्ट्रीय तैयारियों को मज़बूत कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारत का टीकाकरण पारिस्थितिकी तंत्र विश्वसनीय, घरेलू समाधानों द्वारा समर्थित हो।”
टेकइन्वेंशन के प्रवर्तकों ने आगे कहा: “टीडीबी का समर्थन हमारे पीसीवी-16 को उन्नत अनुसंधान एवं विकास से बड़े पैमाने पर, किफायती उत्पादन में बदलने में तेज़ी लाएगा। यह साझेदारी भारत और छोटे और मध्यम आकार के देशों (एलएमआईसी) के लिए व्यापक कवरेज वाले टीके उपलब्ध कराने के हमारे प्रयास का केंद्रबिंदु है।”









