प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां करीब 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैं नियमित रूप से और हर बार किसी को रिवाइज करता हूं, किसी से मिलता हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 वर्षों में, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत ने लगातार जीत हासिल की, आपके प्रयास के कारण और नई दिल्ली में उत्तरोत्तर सफलता मिली, जो कि काम करने के लिए पर्याप्त थी, लेकिन हमने जो काम किया, उसमें कहा गया कि कोई भी काम नहीं करना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम करने वालों के लिए हम कर सकते हैं, आपका बहुत सारा पदक प्रेरित करता है।
प्रधानमंत्री – मुझसे वादा किया गया था कि पिछली बार दो लड़कियां दोनों खिलाड़ी बनी थीं?
खिलाड़ी – हां जी अभी वे उमर के छोटे हैं, बाकी कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल शामिल हैं।
प्रधानमंत्री – पक्का।
खिलाड़ी- हाँ जी।
खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा कार्यक्रम 29 को था, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरु को मैंने एक भगवान दे दिया।
प्रधानमंत्री- बड़ी शान चाहत आपने । जिस तरह से तूफ़ानी बूँदें गिर रही हैं, मुझे ऐसा लग रहा है कि हर बूँद सोने के सिक्के की तरह बरस रही है।
खिलाड़ी – मुझे बहुत खुशी हुई थी, इमोशनल भी उसी दिन थे, खुशी सबसे ज्यादा थी और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस ओलंपिक में मेरा 1 किलो का मेडल रह गया था और एक खिलाड़ी की लाइफ में हमको फेसबुक पर क्या करना है। तो ये 4 साल के अंदर मुझे क्या-क्या करना पड़ा, हर बार चोट ही चल रही थी और पारिवारिक समस्या, वो सब हो रहे थे। तो बहुत मुश्किल से मैंने ये 4 साल का सफर तय किया। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो लटकी हुई ऊपर जाती हैं और हमारा राष्ट्रीय गान जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप अनोखा पाते हैं।
प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया
प्रधानमंत्री – आपकी इस उपलब्धि को सिर्फ आपकी उपलब्धि का दर्जा दिया गया है, ऐसा नहीं है, ये आपकी विजय वाली यात्रा के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाती है।
खिलाड़ी- सब डर रहे थे अमेरिका कि इंडिया के साथ फाइट करने आए थे, अब तो हम पहली बार फाइट ही हारेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आएगा।
प्रधानमंत्री – यानि मन के बने हुए हैं।
खिलाड़ी – हां सर.
प्रधानमंत्री- क्या हुआ , वो रेस्टोरेंट वालों से झगड़ा कर रही थी?
खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा उदाहरण था, लास्ट डे था और सब जीत गए थे और पूरे भारत के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा है। तो मैंने एक बार फिर से पूछा था सर, फिर उन्होंने भी ले लिया, अभी चांग भी हो गया सर।
प्रधानमंत्री- इस विजय की परिस्थिति में खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और खेल पूरा हो गया है। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय में उस पेज पर नजर डालें और रजिस्टर करें और तुरंत सिर्फ मेडल लेना समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, अंदर से देश का भाव मैं सच बताता हूं ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग खिलाड़ी अब भी डरने लगे हैं दुनिया के खिलाड़ी।
खिलाड़ी – जरूर सर, पूरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब आखिरी बार ऐसा धमाका बिल्कुल हुआ था। जिस तरह से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपनी मिल रही है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे सहयोगी भी युवा एथलीट हैं वो लोग सभी गेम जैसे इंडिया स्कॉच से आए हैं और ये एक बहुत बड़ा बदलाव पूरे स्पोर्ट्स में ही आ रहा है।
प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो भारत की प्रतिष्ठा और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां के ग्राहकों के रिबन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे कि एक छोटा सा खिलाड़ी, एक छोटा सा द्वीप, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा संविधानब्यूशन है। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?
खिलाड़ी – जिस दिन कारगिल डे था वैसा ही और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक भारतीय सेना से हूं, तो मैंने उस दिन पहले से बहुत कहा था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान को एक तरफ से 5-0 से हराया, तो मैंने अपनी भारतीय सेना के कारगिल हीरोज़ को डेडिकेट किया था सर।
प्रधानमंत्री – आपको यह याद है और आप स्वयं फौजी से हैं तो, मैं निश्चित रूप से कहता हूं कि देश के वीर हथियारों को आपने जो प्रदर्शित किया है ना कि, मैं कारगिल के गौरव को अपना पदक समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगाए और तीन पराजय करना वही किया जो तुमने किया था।
खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड जनरल गेम थे और मेरे पाकिस्तान के साथ पहला फाइट आया था और वर्ल्ड जनरल जनरल गेम थे तो जनरल जनरल के फोन आया था कि भाई पाकिस्तान से हारना नहीं है। तो फिर पहला राउंड 4-1 से जीता। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए इन में, दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।
प्रधानमंत्री – हाँ
खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों टंकी धारक के लिए अस्पताल चले गए। फिर 2014 में आप पहली बार प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ सेना का कोच बने थे उनका नाम नरेंद्र राणा था और फिर कुछ देर तक सोचा कि मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेन्द्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेन्द्र है, तो मुझे नरेन्द्र नाम से आपत्तिजनक हो गया है।
प्रधानमंत्री- सिर्फ आपके मेडल की संख्या का आंकड़ा ऐसा नहीं है । आपकी एक पीढ़ी तैयार हो गई।
खिलाड़ी- मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर ।
प्रधानमंत्री- आप चिंता मत कीजिए।
खिलाड़ी – पर..
प्रधानमंत्री- अगर आप साइन अप करते हैं तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।
खिलाड़ी – मेरे मित्र मंडली में किसी ने बोला था कि मैंने कुछ बोला था भाई ठीक है के लिए तुम करो। तो बार-बार मुझसे कहा जाता है कि तू के मोदी ते मिल रही है?
प्रधानमंत्री – हाँ
खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं बोलूंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।
खिलाड़ी – कॉमनवेल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बैट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा था, इसलिए बहुत खुशी हुई कि मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत कुछ हुआ।
प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़े सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद आई, मैं आपका बहुत बड़ा सम्मान का विषय हूं।
प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम अभ्यास कर रही थी ना?
खिलाड़ी- जी सर।
प्रधानमंत्री- स्टेडियम कैसा बना है ?
खिलाड़ी- सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन की ट्रेनिंग कर रहा था, क्योंकि मैं मंदिर गया था तो वहीं पर ट्रेनिंग करना था। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी चाहता हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।
प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?
खिलाड़ी- जी सर।
प्रधानमंत्री – तो मसायन गये थे कि नहीं?
खिलाड़ी – जी सर मस्जिद भी गया था सर।
प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी देखें।
खिलाड़ी- जी सर।
प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो एक बार।
खिलाड़ी- जी सर।
प्रधानमंत्री- सावन माह तो अभी है।
खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।
प्रधानमंत्री- ठीक है .
खिलाड़ी – साई ने भी सर को बहुत सपोर्ट किया है। इसका कारण मैं यहां तक हूं सर। और मैं गेमो इंडिया स्कॉच में भी था 2018 में जो पहली बार गेमो इंडिया में हुआ था, जिसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था प्लायाज सेरेमनी में, तो इसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कॉच भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंच गया हूं सर।
प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल टेबल तब प्राप्त होता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया गया है। मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं और आपको विश्वास है कि आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार हम आपसे मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।
खिलाड़ी- धन्यवाद सर।
प्रधानमंत्री- बहुत – बहुत आशीर्वाद बेटा।
खिलाड़ी – और धन्यवाद सो मच मैं सर के हाथ से दूध खा रही मेरा कल देर रात था तो आज सर के हाथ से…
प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बधाई वाह।
प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।
प्रधानमंत्री- जो खेलेगा वो खिलेगा।









