वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव के खिलाफ़ एक नियोजित विरोध-प्रदर्शन के कारण पुलिस को राजधानी नई दिल्ली में लगभग पूरी तरह से शटडाउन का आदेश देना पड़ा। देश की सर्वोच्च अदालत ने इसमें दखल दिया।
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तस्वीर का विवरण: पीली बैरिकेडिंग के पास वर्दीधारी पुलिसकर्मी खड़े हैं और चलते हुए दिखाई दे रहे हैं। बैरिकेडिंग पर “दिल्ली पुलिस” लिखा है। इसके पीछे मेटल डिटेक्टर भी दिखाई दे रहे हैं।
तस्वीर का श्रेय: अरुण शंकर / एजेंस फ्रांस-प्रेस — गेटी इमेजेज
लेखक: सोमिनी सेनगुप्ता, प्रगति के.बी. और सुहासिनी राज
नई दिल्ली से रिपोर्टिंग
9 अक्टूबर, 2026, सुबह 9:46 बजे (अमेरिकी पूर्वी समय)
भारत में कानून लागू कराने वाली एजेंसियों ने शुक्रवार को राजधानी में प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए असाधारण कदम उठाए। अधिकारियों ने दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने का आदेश दिया और शहर में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को निलंबित कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने कई ऐसे लोगों को प्रभावी रूप से उनके घरों में नजरबंद कर दिया, जो प्रदर्शन में शामिल होने वाले थे।
ये कदम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janta Party) नामक Gen Z आंदोलन की उस अपील के जवाब में उठाए गए, जिसमें देशभर के लोगों से शनिवार को मध्य दिल्ली में इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने का आह्वान किया गया था। यह आंदोलन भारत की मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया का विरोध कर रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है।
शनिवार को होने वाली रैली जंतर-मंतर नामक स्मारक स्थल पर आयोजित की जानी है। यह स्थान कई वर्षों से विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन फिलहाल सुरक्षा बलों ने इसे चारों ओर से घेरकर बंद कर दिया है।
कानून लागू कराने वाली एजेंसियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत के सर्वोच्च न्यायालय को शुक्रवार दोपहर एक दुर्लभ आपातकालीन आदेश जारी करना पड़ा। अदालत ने सरकार से प्रतिबंधों पर दोबारा विचार करने और प्रदर्शन के लिए कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
विपक्षी दल के एक नेता की अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह भी कहा कि शहर की मेट्रो सेवा को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “आपको कुछ चीजों को रोकना होगा।”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप एक मक्खी को मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल करें।”
(अनजाने में इसी न्यायाधीश सूर्यकांत के बयान से कॉकरोच आंदोलन को जन्म मिला था। उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। इसके जवाब में, उस समय बोस्टन में रहने वाले स्नातक छात्र अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर सभी कॉकरोच एक साथ आ जाएँ तो क्या होगा?” इसी विचार से कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म हुआ।)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सप्ताह हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पूरे देश में एक सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी भारत के निर्वाचन आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
निर्वाचन आयोग को लंबे समय तक निष्पक्ष चुनाव कराने वाली एक प्रतिष्ठित संस्था माना जाता रहा है। लेकिन हाल ही में मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर उसे जनता की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
मतदाता सूचियों को साफ-सुथरा करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह प्रक्रिया पिछली गर्मियों में शुरू हुई थी और अंततः इसमें से 13 करोड़ नाम हटा दिए गए।
आलोचकों का कहना है कि यह प्रक्रिया प्रधानमंत्री मोदी की सत्ता को और मजबूत करने का प्रयास है।
तस्वीर का विवरण: लोगों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है। कुछ लोग झंडे उठा रहे हैं, जिनमें भारत का तिरंगा भी शामिल है। भीड़ के आसपास नीले और नारंगी रंग की एक बस दिखाई दे रही है।
तस्वीर का विवरण: गुरुवार को नई दिल्ली में भारत के निर्वाचन आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया।
तस्वीर का श्रेय: भविका छाबड़ा / रॉयटर्स
राजधानी में विपक्षी दलों और अन्य कार्यकर्ता समूहों ने पिछले एक सप्ताह से हर दिन विरोध प्रदर्शन किए हैं। हालांकि, पुलिस ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से रोक दिया और बाद में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
शुक्रवार को सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो फैल गए, जिनमें पुलिस अधिकारी देश के अलग-अलग हिस्सों में दिल्ली जाने वाली ट्रेनों से उन युवाओं को जबरन उतारते दिखाई दिए, जो प्रदर्शन में शामिल होने वाले थे।
शुक्रवार को मध्य दिल्ली में भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। जंतर-मंतर के आसपास पीले रंग की ऊँची पुलिस बैरिकेडिंग को एक-दूसरे से जंजीरों के जरिए जोड़ दिया गया था।
यातायात चौराहों पर लाउडस्पीकर लगाए गए थे, जिनके माध्यम से लोगों को इकट्ठा न होने की चेतावनी दी जा रही थी।
घोषणाओं में कहा जा रहा था, “नियमों का उल्लंघन करने पर आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।”
भारत लंबे समय से खुद को एक मजबूत और जीवंत लोकतंत्र के रूप में प्रस्तुत करता रहा है, भले ही प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल के कार्यकाल में असहमति जताने और विरोध करने की स्वतंत्रता के लिए उपलब्ध स्थान सीमित हुआ है।
इस सप्ताह सरकार द्वारा उठाए गए कठोर कदम हाल के उन प्रयासों से कहीं आगे हैं, जिनका उद्देश्य सरकार-विरोधी आंदोलनों को रोकना था।
इस गर्मी में कॉकरोच पार्टी के विरोध प्रदर्शनों ने कॉलेज प्रवेश परीक्षा की खराब व्यवस्था को लेकर युवाओं के गुस्से को सामने ला दिया था। इन प्रदर्शनों के बाद सरकार के एक मंत्री को पद छोड़ना पड़ा, जो एक दुर्लभ घटना थी।
उस समय सरकार ने प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने से नहीं रोका था, लेकिन उसने उनके खिलाफ बल प्रयोग किया था।

शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसने रैली आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस का कहना था कि आयोजकों ने पर्याप्त समय पहले अनुमति के लिए आवेदन नहीं किया था और पिछली बार प्रदर्शन के दौरान नियमों का उल्लंघन किया था। हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया कि आखिर किन नियमों का उल्लंघन किया गया था।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी नूपुर प्रसाद ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए “उचित निवारक प्रतिबंध” लगाए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कॉकरोच पार्टी के नेता आशुतोष रांका ने शुक्रवार शाम द न्यूयॉर्क टाइम्स को भेजे गए एक वॉइस नोट में कहा कि प्रदर्शन फिर भी जारी रहेगा।
उन्होंने वॉइस नोट में कहा, “सरकार पूरी तरह घबराई हुई है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से कैसे निपटा जाए। यही वजह है कि वे पूरी तरह तानाशाही वाले कदम उठा रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “यह शर्म की बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में आपको निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर जाकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए भी प्रदर्शन करना पड़ता है।” उनका इशारा जंतर-मंतर की ओर था।
पुलिस की रणनीति कुछ हद तक सफल रही है और उसने प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पहुँचने से रोकने में कामयाबी हासिल की है।
26 वर्षीय कुणाल चौधरी बस से लगभग तीन घंटे की दूरी पर स्थित एक कस्बे से करीब 30 लोगों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए दिल्ली आने की योजना बना रहे थे।
लेकिन उन्होंने बताया कि गुरुवार शाम पुलिस अधिकारी उनके घर पहुँच गए और उसके बाद से वहाँ से नहीं गए। उन्होंने उनकी गिरफ्तारी के संबंध में कोई वारंट भी नहीं दिखाया।
“उन्होंने मुझे एक व्हाट्सऐप ग्रुप दिखाया, जिसमें एक सूची थी और उसमें मेरा नाम भी शामिल था। पुलिस को उन सभी लोगों के घर जाने के आदेश दिए गए थे, जिनके नाम उस सूची में थे,” उन्होंने कहा।
जब कुणाल चौधरी स्पीकरफोन पर पूरी घटना बता रहे थे, तब पुलिस अधिकारी मानवेंद्र सिंह भी उनकी बातें सुन रहे थे। उन्होंने कॉल पर अपनी पहचान बताई।
हालाँकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि वह वहाँ क्यों मौजूद थे। उन्होंने केवल इतना कहा कि कुणाल चौधरी को शनिवार शाम तक उनके घर में ही हिरासत में रखा जाएगा।
कुणाल चौधरी की माँ मितिका ने नाश्ते में पुलिस अधिकारी को चाय और ओरियो बिस्कुट परोसे।
कुणाल ने कहा, “मेरी माँ अब इन सबकी आदी हो चुकी हैं। पहले वह काफी डर जाती थीं।”
यह एक महीने के भीतर तीसरी बार था, जब पुलिस उनके घर पहुँची थी।

