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MATTU की दुनिया “कौन थी वह ?”

कौन थी वह ?

बात बहुत पुरानी है लेकिन याद करता हूं तो लगता है अभी कल की ही घटना है. 1983 में मैं लखनऊ में स्टेट बैंक में नियुक्त होकर अपने शहर फ़ैज़ाबाद से आया था. यहां मेरा बैंक हज़रतगंज के बीचोबीच हलवासिया बिल्डिंग में था. मैं एक दोस्त के पास रुका था और रोज़ शाम को मकान खोजने में व्यस्त हो जाता था. मुश्किल असल में यह थी कि तब मेरी शादी नहीं हुई थी और कुंवारे लड़कों को जल्दी कमरे किराये पर मिलते नहीं थे. मकान मालिक पचासों सवाल पूछते थे, दुनिया भर की वॉर्निंग देते थे और फिर आख़िर में कह देते थे कि तुमको कमरा नहीं दे पायेंगे. आख़िर एक मकान मालिक ऐसे मिले जिनके घर में तीन बेटियां थीं लेकिन उन्हें शायद मैं सज्जन लगा और बिना ज़्यादा पूछ्ताछ के उन्होंने मुझे एक कमरा किराये पर दे दिया. यह कमरा हज़रतगंज से करीब 6 किलोमीटर दूर कुर्सी रोड, अलीगंज में था.

    आज तो वह जगह बेहद चहल पहल वाली है, ढेरों दुकानें हैं, रेस्टोरेन्ट्स हैं लेकिन उस समय वहां कुछ भी नहीं मिलता था. हद यह थी कि रात में खाना खाने के लिये भी वहां से करीब तीन किलोमीटर दूर एक मामूली से रेस्टोरेन्ट में आना पड़ता था. मैंने इसका तोड़ यह निकाला कि दोपहर में मैं ख़ूब ठूंस ठूंस कर खाना खा लिया करता था और शाम को एक पैकेट मैगी ख़रीद कर ले जाता था जिसे रात में उबाल कर खा लिया करता था. कुछ समय इसी तरह बिताया फिर जाड़े का मौसम शुरु हो गया. बैंक से कुर्सी रोड तक साईकिल से आना जाना ठंड से जकड़ कर रख देता था. मगर और कोई चारा भी तो नहीं था.

     एक दिन ऐसा हुआ कि मैंने रोज़ की तरह दिन में ख़ूब ज़्यादा खाना खाया. शाम होते होते पता नहीं क्यों मैं बड़ा अकेलापन सा महसूस करने लगा. लखनऊ में तब मेरे बैंक के बाहर कोई दोस्त भी नहीं थे जब कि फ़ैज़ाबाद में मेरे ढेरों मित्र थे. अकेलेपन का अहसास जब ज़्यादा सताने लगा तो बैंक से छूटने के बाद मैं बैंक के पास ही स्थित तुलसी टॉकीज़ में शराराफ़िल्म देखने चला गया. वहां भी मैंने इन्टरवल में कुछ स्नैक्स वगैरह खा लिये. रात में करीब सवा नौ बजे जब फ़िल्म छूटी तो मैं साइकिल लेकर अलीगंज की ओर चल पड़ा. खाना कुछ ज़्यादा ही हो गया था तो उस दिन मैंने मैगी भी नहीं ख़रीदा और ठंड से बचने के लिये तेज़ी से साइकिल चलाता हुआ अपने कमरे पर पहुंच गया. वहां जा कर मैंने कपड़े बदले और एक किताब ले कर बिस्तर पर लेट कर पढ़ने लगा. पढ़ना मेरा पुराना शौक है और मैं किताब में एकदम रम गया था.

      एकाएक मेरी नज़र घड़ी पर पड़ी तो करीब ग्यारह बज रहे थे. मुझे एकदम से भूख लगने लगी. शायद मेरा शरीर रात में कुछ खाने का अभ्यस्त हो चुका था. ठन्ड बहुत ज़्यादा थी और मेरे पास खाने के लिये कुछ भी नहीं था. मैंने सोचा कि वह ख़स्ताहाल रेस्टोरेन्ट अभी खुला ही होगा क्योंकि वह काफ़ी देर तक चलता रहता था. ठन्ड में जाने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी लेकिन भूख बढ़ती ही जा रही थी. कुछ समय तो मैंने यूंही गुज़ार दिया लेकिन फिर भूख सहन नहीं हुई तो मैं फिर से स्वेटर और जैकेट पहन कर साईकिल ले कर बाहर निकला मगर मेरी हिम्मत जवाब देने लगी क्योंकि चारों ओर घना कोहरा भी दिख रहा था. मैंने ख़ुद को तसल्ली दी कि जवान आदमी हूं, भूख लगी है तो ठन्ड और कोहरे में भी खाना खाने तो जा ही सकता हूं. नतीजतन बर्फ़ जैसा ठन्डा ताला कमरे में लगा कर मैं हिम्मत कर के साईकिल से चल पड़ा. चारों तरफ़ सन्नाटा था. यहां तक कि सड़क के कुत्ते भी कहीं कहीं दुबके बैठे थे और भौंकने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे. कोहरे वाली बेहद ठन्डी रात, भूखा पेट, सूनी सन्नाटी सड़क, टिमटिमाती हुई सी स्ट्रीट लाइट्स कुल मिलाकर अजब नज़ारा था. ठन्ड के मारे हाथ पैर सुन्न हुए जा रहे थे, साइकिल का हैंडल ऐसा लग रहा था ज्यों बर्फ़ का बना हो. मेरे पास न तो ग्लव्ज़ थे और न ही टोपी तो ठन्ड से बचने के लिये मैं ज़ोर ज़ोर से एक फ़िल्मी गीत गाने लगा.

     जब मैं करीब एक किलोमीटर दूर पहुंच गया तो एकाएक मुझे लगा कि मेरी साइकिल कुछ भारी चल रही है जबकि वहां कोई चढ़ाई भी नहीं है. मैंने सोचा कि ठन्ड की वजह से पैर सुन्न हो रहे हैं शायद इसलिये ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ रहा है लेकिन फिर भी एकदम से इतना अन्तर तो नहीं आना चाहिये था. थोड़ी देर में मुझे लगा कि शायद साइकिल के पहिये में कुछ फंस गया होगा जिसे निकाल देने पर साईकिल सामान्य रूप से चलने लगेगी. मैं साईकिल से उतरा तो मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. मेरी साईकिल के पिछले पहिये के पास करीब बीस वर्ष की एक युवती खड़ी थी जो सलवार कुर्ता और एक जैकेट पहने थी. मुझे उतरता देख कर वह बोली, “तुम रुक क्यों गये ? मैं तो बस अभी अभी ही बैठी ही थी साईकिल के कैरियर पर.मुझे एकदम से क्रोध आ गया और मैं बोला, “तुम हो कौन और मेरी साईकिल पर कब बैठ गयी? मैंने तो तुम्हें रास्ते में कहीं खड़े हुए भी नहीं देखा और मैडम, बिना पूछे मेरी साईकिल पर तुम बैठी ही क्यों ? तुम्हें शरम नहीं आती किसी अजनबी लड़के की साईकिल पर अचानक बैठ जाने में ?”

    लड़की ने मुस्करा कर मेरी तरफ़ देखा और कहा, “इतने सारे सवाल एक साथ कर रहे हो तुम. अरे, किसी ज़रूरतमन्द की मदद कर रहे हो तो इसका फल भी तो तुमको मिलेगा ही.मेरा ग़ुस्सा अभी भी बरक़रार था इसलिये मैं फिर तेज़ आवाज़ में बोला, “अरे तुम हो कौन जो मुझे उपदेश दे रही हो बजाय माफ़ी मांगने के? एक तो मेरी साईकिल पर चढ़ कर बैठ गयी बिना पूछे हुए और सुनो, तुम इतनी सूनी रात में आ कहां से गयी? ” लड़की गम्भीर हो गयी और बोली, “मुझे ग़लत न समझो. मैं आगे अवध गर्ल्स हॉस्टल में रह कर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करती हूं. अलीगंज में अपनी एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में आयी थी जहां काफ़ी देर हो गयी और वापसी के लिये कोई रिक्शा नहीं मिल रहा था. मेरी दोस्त के भाई ने मुझे मेरे हॉस्टल तक पहुंचा देने के लिये कहा लेकिन मुझे वह ठीक नहीं लगा तो मैं यह कह कर निकल आयी कि बाहर रिक्शा मिल जायेगा. अब मेरी किस्मत देखो, तीन पहिये का रिक्शा नहीं मिला मगर दो पहिये वाली तुम्हारी साइकिल तो मिल ही गयी.कह कर वह बड़ी निश्छल सी मोहक हंसी हंस दी.

    अब मेरा क्रोध कम होने लगा और मैंने उससे कहा, “कोई बात नहीं लेकिन तुमको कम से कम मुझ से पूछ कर बैठना चाहिये था.उसने उत्तर में कहा, “तुम इतनी तेज़ी से साइकिल चला रहे थे कि जब तक मैं पूछती, तब तक तो तुम पता नहीं कहां पहुंच जाते तो मैं जल्दी से बैठ गयी. मगर तुम इतनी ठन्डी रात में कहां जा रहे हो ?” मैंने उससे कहा, “देखो, मुझे बहुत भूख लगी है और मैं आगे के होटल में खाना खाने जा रहा हूं लेकिन तुम्हारे साथ इतना टाइम वेस्ट हो गया कि अब पता नहीं खाना मिलेगा भी या नहीं ?” इतना कह कर मैंने उसे पीछे बैठने को बोला और तेज़ी से साइकिल चलाते हुए अवध गर्ल्स हॉस्टल के गेट तक पहुंच गया. नीचे उतर कर वह लड़की बोली, “खाने की तो तुम चिन्ता न करो भैया. खाना तो तुम को मैं बहुत बढ़िया खिलाऊंगी आज.मैंने हंस कर कहा, “बहन जी, तुम खिलाओगी ? हॉस्टल में इतनी रात तो तुम्हारे मेस में भी कुछ नहीं होगा. बातें न बनाओ. तुम्हारा हॉस्टल आ गया, अब मैं चलता हूं.

    इतना कह कर मैं साईकिल की सीट पर सवार हो गया. वह लड़की बोली, “तुमको मुझ पर विश्वास नहीं हो रहा है तो अपने साईकिल के कैरियर पर देखो.मैंने पीछे निगाह डाली तो मेरी साइकिल के कैरियर पर एक दफ़्ती का डिब्बा रखा हुआ था. मैंने बैठे बैठे ही उस डिब्बे को उठाया तो वह काफ़ी गर्म लगा. मैं बेहद ख़ुश हो गया और जब उस लड़की को थैंक्स बोलने के लिये पलटा तो वह कहीं दिखाई ही नहीं दी. मेरी समझ में नहीं आया कि वह कब हॉस्टल में चली गयी और वह भी कोई थैंक्यू-गुडनाइट कहे बग़ैर. ख़ैर गयी तो गयी, मैंने अब खाने की ओर ध्यान दिया. डिब्बे को खोला तो उसमें छोटी छोटी प्लास्टिक की कटोरियों में दाल, सब्ज़ियां, चावल, रोटियां, सलाद और एक गुलाबजामुन रखा नज़र आया. मुझसे भूख बर्दाश्त नहीं हो रही थी तो सोचा यहीं किनारे खड़ा हो कर पहले खाना खा लूं. ज्यों ही मैंने वह रोटी उठाई तो वह इतनी गर्म थी जैसे अभी अभी तवे से उतारी गयी हो. अब मेरा माथा ठनका और मैंने बाकी कटोरियों को छू कर देखा तो वे सब गर्मागर्म थीं. मुझे एकाएक डर सा लगने लगा. अन्धेरी रात, चारों ओर व्याप्त कोहरा, साइकिल पर अचानक किसी का आकर बैठ जाना, खाने की बात करने पर इतना गर्मागर्म खाना देना, अचानक ग़ायब हो जाना; सब सोच कर मेरा शरीर थरथराने लगा. किस चक्कर में फंस गया मैं ? कौन थी वो ? क्यों मिली मुझे ? खाना कहां से लाकर दिया उसने ? उफ्फ, आश्चर्य और डर से मैं कांप उठा.

     तभी मेरी नज़र हॉस्टल के गार्ड के केबिन पर पड़ी तो देखा कि वहां एक उम्रदराज़ गार्ड हीटर पर हाथ सेंक रहा था. मैं डिब्बे को साईकिल के कैरियर पर ही रख कर, साईकिल खड़ी कर के गार्ड के पास पहुंचा और उस से बोला, “चाचा, अभी अभी अभी एक लड़की मेरे साथ आई थी और वह अन्दर कब चली गयी, मैं देख ही नहीं पाया. वह कौन है?” इतना कह कर मैं भी हीटर पर हाथ सेंकने लगा. गार्ड ने मुझे ग़ौर से देखा, एक पुराना सा थर्मस उठाया और उसमें से एक कुल्हड़ में चाय उंडेल कर मेरी तरफ़ बढ़ाई और बोला, “पहले चाय पियो, ठन्ड बहुत है फिर बात करता हूं तुमसे.मैंने कृतज्ञ दृष्टि से उसे देखा और चाय पीने लगा. दो घूंट के बाद मुझे थोड़ी राहत मिली और मेरी सांसें भी कन्ट्रोल होने लगीं.जब गार्ड ने मेरे चेहरे पर शान्ति आते हुए देखी तो बोला, “ पहले तुम बताओ कि तुम कौन हो ? क्या करते हो और इतनी ठन्डी रात में कहां जा रहे हो?” मैंने उसे पूरी बात बताई. सुन कर गार्ड ने मुझे बड़ी अच्छी निगाहों से देखा और बोला, “बेटा, तुम्हारी भलमनसाहत ने ही आज तुम्हारे प्राण बचाये हैं वरना कहीं रास्ते में सड़क किनारे तुम्हारी लाश पड़ी होती.मैं फिर से कांप उठा और हाथ जोड़ कर बोला, “मेहरबानी से मुझे पूरी बात बताइये चाचा जी.

    अब गार्ड ने बोलना शुरु किया, “देखो बेटा, यह चार साल पहले की बात है. इसी गर्ल्स हॉस्टल की एक लड़की ऐसी ही ठन्डी और कोहरे वाली रात में वॉर्डन से अनुमति लेकर अपनी किसी दोस्त की बर्थडे पार्टी में गयी थी. लौटने में उसे देर होने लगी. दोस्त के भाई ने उसे छोड़ने की बात कही लेकिन लड़की को लगा कि वह कुछ नशे में था इसलिये उसने कहा कि वह ख़ुद ही कोई रिक्शा कर के चली जायेगी. आगे क्या हुआ किसी को पता नहीं लेकिन सवेरे लड़की की लाश इसी रास्ते में पड़ने वाली लकड़ी की टाल के पास पड़ी पायी गयी. उसके कपड़े अस्त व्यस्त थे और प्रत्यक्षतः उसके साथ बलात्कार किया गया था. लड़की के बैग से पुलिस को उसका हॉस्टल का कार्ड मिला. इसके बाद उसके घर वालों को बुलाकर पोस्टमॉर्टम के बाद उसका अन्तिम संस्कार कर दिया गया. लाश के पास मिले हुए एक दर्ज़ी के लेबल के आधार पर जो शायद लड़की के साथ हाथापाई में निकल गया होगा, पुलिस कई दिन तक खोज बीन करती रही मगर न तो उस दर्ज़ी का और न ही उस व्यक्ति का पता चला जिसने यह घिनौना काम किया था. तंग आ कर पुलिस ने इस केस की फ़ाइल बन्द कर दी.

     इतना कह कर गार्ड ने थर्मस से और चाय निकाली और एक कुल्हड़ मुझे दे कर एक स्वयं ले कर दो घूंट चाय के भरे. मेरे चेहरे पर उत्सुकता और भय के भाव देख कर वह बोला, “मेरी बात अभी खत्म नहीं हुई है. अगले साल आज ही की तारीख़ को जब फिर ऐसी ही ठन्ड और कोहरा पड़ रहा था, ठीक उसी लकड़ी की टाल के पास सुबह सुबह एक युवक की लाश मिली. लाश को देखकर लगता था कि उसे मारने से पहले बुरी तरह घायल किया गया था. पुलिस ने जब अपनी जांच शुरु की तो पता चला कि यह लड़का लालबाग़ का रहने वाला था और कुछ काम धाम नहीं करता था. उसका चालचलन भी बहुत ख़राब था. जब उसके दोस्तों से पूछताछ शुरु हुई तो मालूम हुआ कि वह अक्सर उनके बीच में एक लड़की के ठन्डी रात में मिलने का ज़िक्र करता था लेकिन कभी पूरी बात नहीं बताता था और दोस्त अनुमान लगाते रह जाते थे. अब इन्स्पेक्टर को उस दर्ज़ी के लेबल की याद आयी जो उसे पिछले साल इसी स्थान पर एक युवती की लाश के पास मिला था. तलाशने पर उस दर्ज़ी की दुकान लालबाग़ के ही इलाके में मिली और आगे अधिक खोज बीन करने, मृतक के दोस्तों के साथ सख़्ती से पेश आने पर इन्स्पेक्टर को समझ में आ गया कि यही वह व्यक्ति था जिसने पिछले साल उस युवती के साथ बलात्कार कर के उसकी हत्या कर दी थी. एक साल पुराना केस तो सुलझ गया लेकिन इस युवक की मौत का राज़ राज़ ही रह गया.

      इतना कह कर गार्ड ने चाय का घूंट भरा और आगे बोला, “फिर पिछले साल आज ही की तारीख़ को ऐसी ही भयानक ठन्डी और कोहरे वाली रात को उसी स्थान पर एक और युवक बहुत अधिक घायलावस्था में मिला. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका. मगर मरने से पहले उसने लड़खड़ाती ज़बान से बताया कि उसे रात में कोई लड़की मिली थी जिसे उसने अपनी साइकिल पर बैठा लिया और रास्ते में उससे छेड़खानी शुरु की. अचानक लड़की भयानक रूप से उग्र हो गयी और अपने नाखूनों से उसको बुरी तरह घायल कर दिया. इसके बाद वह अदृश्य हो गयी. पुलिस झक मार कर रह गयी मगर उस हत्यारिन का पता नहीं लगा सकी. बेटा, बड़ी अजीब सी बात है कि फिर से ठीक एक साल बाद उसी तारीख़ और उसी दिन वहीं एक और लड़के की लाश वैसी ही नोची खसोटी हुई हालत में मिली. तब इन्स्पेक्टर सहित सबको यह विश्वास हो गया कि ज़रूर उस लड़की की आत्मा ही प्रेत योनि में भटक रही है और गलत काम करने वाले युवकों को सज़ा दे रही है. तुम तो किसी भले घर के लगते हो जो तुमने उसके साथ कोई बदतमीज़ी नहीं की, उसे यहां तक ले कर आये और देखो वह तो तुम्हें खाने का डिब्बा तक दे कर गयी.

     यह किस्सा सुन कर मेरे तो रोंगटे खड़े हो गये. आज तो साक्षात मौत हीमेरी साईकिल पर सवार थी, मेरी एक भी ग़लती आज मेरी जान ले सकती थी लेकिन यह मेरे पारिवारिक संस्कार ही थे जिन्होंने मुझे आज जीवन दिया था. मैंने कांपती आवाज़ में कहा, “चाचा क्या आपको लगता है कि मुझे भी वही प्रेतात्मा मिली थी?” उसने कहा, “मेरा न केवल यह विश्वास है कि तुमको वही मिली थी बल्कि यह भी विश्वास है कि आज तुम्हारे व्यवहार से उसे प्रेत योनि से मुक्ति मिल गयी होगी. उसे पता चल गया होगा कि सारे मर्द एक से नहीं होते असलियत जाननी हो तो एक साल तक इन्तज़ार करो. अगले साल आज ही के दिन अगर किसी युवक की लाश नहीं मिलती तो समझ लेना कि मेरी बात सोलह आने सच निकली.इतना सुन कर भी मैं डरा हुआ ही रहा और गार्ड से बोला, “क्या आप आज रात मुझे यहीं रहने देंगे ? मैं सवेरे अपने कमरे पर चला जाऊंगा. मेरी भूख प्यास सब ख़त्म हो चुकी है अब. बस मुझे अपने जीवन की चिन्ता है.गार्ड ने कहा, “तुम बेखटके मेरे पास रहो.सवेरे करीब सात बजे जब मौसम थोड़ा बेहतर हुआ, मैं अपने कमरे पर वापस आया. रास्ते से ब्रेड मक्खन ख़रीदा, नाश्ता करके दस बजे बैंक गया. इस घटना का ज़िक्र मैंने किसी से भी नहीं किया क्योंकि कोई मेरी बात पर विश्वास ही नहीं करता.

     अगले साल फिर आज ही की तारीख़ को मैं सवेरे से उस लकड़ी की टाल के पास घूमता रहा कि शायद आज फिर कोई लाश बरामद हो जाये लेकिन ऐसा कुछ न हुआ. इस घटना को चालीस साल गुज़र गये हैं और फिर कभी वहां कोई शव नहीं मिला. अब तो वह लकड़ी की टाल भी बन्द हो चुकी है लेकिन आज भी मैं उस जगह से गुज़रता हूं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं. उस प्रेतात्मा ने मुझे भैया कहा था और भले ही मैंने मज़ाक में उसे बहन जीकहा लेकिन अगर कहीं मैं कोई ग़लती कर बैठता तो आज आप यह कहानी न पढ़ रहे होते.

Disclaimer – यह कहानी लेखक की अपनी कल्पनाओं पर आधरित है और इसका किसी भी जीवित अथवा मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है.

उत्तम सिंह

सब-एडिटर 

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चीन का जियांग्सू प्रांत एआई औद्योगिक विकास को बढ़ावा दे रहा है, वहीं शी जिनपिंग ने प्रांत से नेतृत्व करने का आग्रह किया है।एक व्यक्ति 26 जुलाई, 2025 को शंघाई, चीन में आयोजित विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन में भाग लेने गया। रॉयटर्स/गो नाकामुरा/फाइल फोटो। लाइसेंसिंग अधिकार खरीदें।नया टैब खुलता है बीजिंग, 7 मार्च (रॉयटर्स) – चीन के पूर्वी आर्थिक महाशक्ति जियांग्सू के सरकारी अधिकारियों ने शनिवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बुनियादी ढांचे के विस्तार और विनिर्माण को उन्नत करने की योजनाओं पर प्रकाश डाला, राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा प्रांत से प्रौद्योगिकी संचालित विकास में अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह करने के बाद । जियांगसू चीन की दूसरी सबसे बड़ी प्रांतीय अर्थव्यवस्था है और इसके सबसे महत्वपूर्ण विनिर्माण और निर्यात केंद्रों में से एक है। रॉयटर्स ईरान ब्रीफिंग न्यूज़लेटर आपको ईरान युद्ध के नवीनतम घटनाक्रमों और विश्लेषणों से अवगत कराता है। यहां साइन अप करें । इस प्रांत ने 2025 में लगभग 14 ट्रिलियन युआन (2 ट्रिलियन डॉलर) का उत्पादन किया, जिससे इसकी अर्थव्यवस्था स्पेन जैसे देशों से बड़ी हो गई और पश्चिम के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक और व्यापारिक तनाव के बीच विकास और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने के लिए बीजिंग के प्रयासों में यह केंद्रीय भूमिका निभाती है। विज्ञापन · जारी रखने के लिए स्क्रॉल करें • जियांग्सू प्रांत के गवर्नर लियू शियाओताओ, जो चीन की राष्ट्रीय जन कांग्रेस में प्रांत के प्रतिनिधिमंडल के नेता हैं, ने शनिवार को कहा कि प्रांत में 1,500 से अधिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनियां हैं और कंप्यूटिंग क्षमता में देश भर में दूसरे स्थान पर है, जिसमें 66 बड़े एआई मॉडल और 283 एल्गोरिदम नियामकों के साथ पंजीकृत हैं। • परिवहन क्षेत्र के अधिकारी वू योंगहोंग ने कहा कि जियांग्सू “एआई प्लस” परिवहन पहलों को और गहरा करेगा, और बुनियादी ढांचे के प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एआई का उपयोग करते हुए लगभग 50 प्रायोगिक अनुप्रयोग विकसित करेगा। जियांग्सू के यांग्ज़ोऊ के मेयर झेंग हैताओ ने कहा कि एआई को पहले से ही स्थानीय विनिर्माण क्षेत्र में लागू किया जा रहा है, जिसमें ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और पर्यावरण उपकरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में 186 स्मार्ट उत्पादन लाइनें स्थापित की गई हैं। विज्ञापन · जारी रखने के लिए स्क्रॉल करें • झेंग ने कहा कि यांग्ज़ोऊ कंपनियों को आकर्षित करने और स्थानीय एआई इकोसिस्टम बनाने के लिए कंप्यूटिंग सब्सिडी और एआई टैलेंट प्रोग्राम सहित कई प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू कर रहा है। • राष्ट्रपति शी स्वयं जियांग्सू प्रतिनिधिमंडल के प्रतिनिधि हैं और नियमित रूप से इसकी चर्चाओं में भाग लेते हैं। गुरुवार को जियांग्सू के सांसदों से बात करते हुए, उन्होंने प्रांत से तकनीकी नवाचार द्वारा संचालित आर्थिक विकास के लिए बीजिंग द्वारा प्रयुक्त “नई गुणवत्तापूर्ण उत्पादक शक्तियों” के विकास में देश का नेतृत्व करने का आग्रह किया। • शी जिनपिंग की टिप्पणियों को गुरुवार को चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना में और भी बल मिला, जिसमें एआई का 50 से अधिक बार उल्लेख किया गया और इसमें चीन की अर्थव्यवस्था और समाज में इस तकनीक को समाहित करने के उद्देश्य से एक विस्तृत “एआई प्लस” कार्य योजना शामिल की गई। • चीन की राष्ट्रीय जन कांग्रेस में प्रांतीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधिमंडलों से लगभग 3,000 प्रतिनिधि भाग लेते हैं, जिनमें अधिकारी, कार्यपालिका, शिक्षाविद और श्रमिक शामिल होते हैं। ये प्रतिनिधि बीजिंग में वार्षिक संसदीय सत्र के दौरान कानून और नीतिगत प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हैं और उन्हें पारित करते हैं।

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