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Friday, September 25, 2026
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संयुक्त राष्ट्र महासभा 81 में भारत ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, हेपेटाइटिस उन्मूलन और सिकल सेल देखभाल पर हुई प्रगति को उजागर किया।

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संयुक्त राष्ट्र महासभा 81 में भारत ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को आगे बढ़ाने में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, एबी-पीएमजेएवाई और ई-संजीवनी का प्रदर्शन किया। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा

कि 1.8 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, 90 करोड़ से अधिक विशिष्ट स्वास्थ्य आईडी और 49 करोड़ से अधिक टेलीकंसल्टेशन के साथ भारत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को आगे बढ़ा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव

श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा 81 में 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन की दिशा में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा 81 में वनएससीडी लॉन्च करने के लिए वैश्विक भागीदारों के साथ मिलकर काम किया, जिससे समान और सुलभ सिकल सेल देखभाल को बढ़ावा मिला। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा

81 में वनएससीडी वैश्विक साझेदारी के शुभारंभ के अवसर पर व्यापक सिकल सेल प्रतिक्रिया और 2047 उन्मूलन लक्ष्य पर प्रकाश डाला।

भारत ने न्यूयॉर्क में आयोजित 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA81) के दौरान दो प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य सम्मेलनों में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और प्राथमिकता वाली स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को सुलभ और किफायती बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) और वैश्विक स्वास्थ्य के मित्रों के समूह की सातवीं वार्षिक मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया , जहां उन्होंने व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल से लेकर माध्यमिक और तृतीयक देखभाल तक, स्वास्थ्य सेवा वितरण को सुदृढ़ करने के लिए भारत के प्रयासों पर प्रकाश डाला, साथ ही लोगों को वित्तीय कठिनाइयों से बचाने पर भी जोर दिया।

उन्होंने भारत के 18 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के नेटवर्क पर प्रकाश डाला, जो समुदायों को स्वास्थ्य सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक आसानी से पहुँचाते हैं। इनमें प्रजनन और बाल स्वास्थ्य, गैर-संक्रामक रोगों की जांच और प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, वृद्धावस्था और उपशामक देखभाल, साथ ही निवारक, प्रोत्साहक और उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में गुणवत्ता मानकों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने पर भी बल दिया।

श्रीमती श्रीवास्तव ने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने निःशुल्क औषधि एवं निदान सेवा पहल और प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के महत्व को भी रेखांकित किया, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ कम होता है और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच में सुधार होता है।

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एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवा से जोड़ता है, जिसे रेफरल व्यवस्था द्वारा समर्थित किया जाता है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य निवारक, संवर्धक और उपचारात्मक सेवाओं को लोगों के करीब लाना है, साथ ही आवश्यकता पड़ने पर विशेष देखभाल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

भारत के बढ़ते डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि 90 करोड़ से अधिक नागरिकों की विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान है। स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्य पेशेवरों के परस्पर संचालित डिजिटल रजिस्टर, साथ ही ABHA-सक्षम स्वास्थ्य रिकॉर्ड, स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को सुगम बनाने में सहायक हैं।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में भौगोलिक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग पर भी प्रकाश डाला। ई-संजीवनी के माध्यम से 497 मिलियन से अधिक टेलीकंसल्टेशन की सुविधा प्रदान की गई है, साथ ही टेलीरेडियोलॉजी, एआई-सक्षम एक्स-रे और मोबाइल मेडिकल यूनिट जैसी सेवाओं और नवाचारों का भी उपयोग किया जा रहा है। ये पहल दूरस्थ और कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मदद कर रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा 81 के “हेपेटाइटिस उन्मूलन के लिए वैश्विक कार्रवाई को आगे बढ़ाना” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए , केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों के रूप में हेपेटाइटिस बी और सी को 2030 तक समाप्त करने के देश के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस लक्ष्य की दिशा में प्रगति को गति देने के लिए शीघ्र निदान, किफायती उपचार तक पहुंच और रोकथाम एवं देखभाल के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत, लगभग 18 लाख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र सहित) से लेकर तृतीयक स्वास्थ्य केंद्रों तक वायरल हेपेटाइटिस की जांच सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। यह कार्यक्रम 1039 उपचार केंद्रों तक विस्तारित हो चुका है। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के शुभारंभ के बाद से अब तक लगभग 22 करोड़ लाभार्थियों की जांच की जा चुकी है।

सुश्री श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में वायरल हेपेटाइटिस संबंधी उपायों को एकीकृत करके रोकथाम को मजबूत करने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य ढांचे के तहत मां से बच्चे में संक्रमण को रोकने के उपाय शामिल हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हेपेटाइटिस उन्मूलन की दिशा में निरंतर प्रगति के लिए स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और मौजूदा सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में हस्तक्षेपों को एकीकृत करने के साथ-साथ पहुंच बढ़ाने, शीघ्र निदान को बढ़ावा देने और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होगी।

संयुक्त राष्ट्र महासभा 81 के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रम में, भारत ने वनएससीडी: इक्विटी को आगे बढ़ाने और सिकल सेल देखभाल को बदलने के लिए एक वैश्विक साझेदारी की सह-मेजबानी की , जिसमें सिकल सेल रोग (एससीडी) के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए वैश्विक भागीदारों को एक साथ लाया गया।

इस पहल में नाइजीरिया सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, अफ्रीका सीडीसी, सिकल सेल रोग पर विश्व गठबंधन और सेंट जूड चिल्ड्रन्स रिसर्च हॉस्पिटल सहित कई साझेदार एक साथ आए, जिनका साझा लक्ष्य सिकल सेल देखभाल के लिए अधिक न्यायसंगत और सुलभ दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना था।

लॉन्च के अवसर पर बोलते हुए, सुश्री पुण्या सलीला श्रीवास्तव ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के माध्यम से सिकल सेल रोग के प्रति भारत की व्यापक प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला, जिसका लक्ष्य 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करना है।

उन्होंने जनसंख्या स्तर पर स्क्रीनिंग, प्रारंभिक निदान, परामर्श, उपचार, अनुवर्ती कार्रवाई और डिजिटल ट्रैकिंग को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत करने के भारत के दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस मिशन का उद्देश्य रोग और वाहक स्थिति की शीघ्र पहचान करना, उचित परामर्श की सुविधा प्रदान करना और यह सुनिश्चित करना है कि सिकल सेल रोग से पीड़ित व्यक्ति स्वास्थ्य सेवा से जुड़े रहें।

इस मिशन के तहत 72 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, 2 लाख से अधिक वाहकों की पहचान की गई है और 25 लाख लोगों में सिकल सेल रोग का निदान किया गया है, जबकि 49 लाख से अधिक सिकल सेल कार्ड वितरित किए गए हैं। ये प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता को मजबूत करने और व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों में इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने में सहायक हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने किफायती प्वाइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक्स और हाइड्रोक्सीयूरिया थेरेपी की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों के साथ-साथ स्वदेशी जीन-एडिटिंग थेरेपी की दिशा में चल रहे शोध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने सिकल सेल रोग से पीड़ित लोगों के लिए समय पर निदान, उचित उपचार और निरंतर फॉलो-अप के महत्व पर बल दिया।

इन दोनों पहलों में भारत की भागीदारी भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में लोगों के लिए सुलभ स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने के उसके निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। जहां सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) की चर्चाओं में व्यापक, किफायती और डिजिटल रूप से सक्षम स्वास्थ्य सेवाओं के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया, वहीं वनएससीडी पहल ने सिकल सेल रोग से निपटने में निरंतर वैश्विक सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।

भारत ने समान, किफायती और जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ काम करने और वैश्विक स्तर पर मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में योगदान देने वाले अनुभवों और दृष्टिकोणों को साझा करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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