नवाब विर्क की फर्जी पहचान के तहत तुर्की की नागरिकता प्राप्त करके, वह अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथम्फेटामाइन की तस्करी करता रहा।
आज उसे वापस भारत लाया गया है और मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अपराधों से जुड़े मामलों में उसे जेल में डाल दिया गया है।
मोदी सरकार दिसंबर 2029 से पहले हर नार्को कार्टेल को नष्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मोदी सरकार 2019 से अगस्त 2026 तक 36 देशों से कुल 288 भगोड़ों को वापस लाने में सफल रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कुख्यात नशीले पदार्थों की तस्करी के सरगना नवप्रीत सिंह को तुर्की से निर्वासित करने में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने के लिए सभी एजेंसियों को बधाई दी।
X प्लेटफॉर्म पर अपने पोस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, “मोदी सरकार ने कुख्यात नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले सरगना नवप्रीत सिंह को तुर्की से निर्वासित करके एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। नवाब विर्क की फर्जी पहचान के तहत तुर्की की नागरिकता प्राप्त करके, वह अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथम्फेटामाइन की तस्करी करता रहा। हमारी एजेंसियों ने उसकी पहचान उजागर करने के लिए हर संभव प्रयास किया और उसे निर्वासित करवाया। आज उसे भारत वापस लाया गया है और उस पर नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य अपराधों से जुड़े मामलों में जेल में डाल दिया गया है। इस सफलता के लिए सभी एजेंसियों को बधाई। मोदी सरकार दिसंबर 2029 से पहले हर नशीले पदार्थों के गिरोह को नष्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
मोदी सरकार ने भगोड़ों को वापस लाने के लिए एक समन्वित अभियान शुरू किया है। 2019 से अगस्त 2026 तक, 36 देशों के कुल 288 भगोड़ों को भारत वापस लाया जा चुका है।
पूर्व सरकारों में भगोड़ों को वापस लाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव था; मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को ‘राष्ट्रीय प्राथमिकता’ बना दिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने भगोड़ों के खिलाफ तीन-सूत्री रणनीति पर जोर दिया है: वैश्विक संपर्क, मजबूत समन्वय और कुशल कूटनीति। श्री अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ बताया है।
मोदी सरकार ने 2019 में एनआईए (संशोधन) अधिनियम और यूएपी (संशोधन) अधिनियम पारित किए, और 2020 से भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया मिशन मोड में शुरू की गई। इसके परिणामस्वरूप, प्रवर्तन प्रयास अब केवल प्रतिबंधित संगठनों तक ही सीमित नहीं रहे। कार्रवाई का दायरा बढ़ाकर इसमें विदेशों में स्थित व्यक्तिगत आतंकवादियों, उनके संचालकों, वित्तपोषण नेटवर्क और समर्थन प्रणालियों को भी शामिल किया गया, जिससे भगोड़ों का पीछा करने और उनके नेटवर्क को नष्ट करने की भारत की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
भारत और वैश्विक कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय, संपर्क और सूचना-साझाकरण को मजबूत करने के लिए, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने जनवरी 2025 में भारतपोल का शुभारंभ किया। भारतपोल ने सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालयों (इंटरपोल संपर्क अधिकारियों – आईएलओ के माध्यम से) और जिला पुलिस मुख्यालयों को एक ही मंच पर एकीकृत करके एक व्यापक सूचना अवसंरचना का निर्माण किया है। इस पहल के तहत, राज्य और केंद्रीय एजेंसियों की 1,400 से अधिक इकाइयों को पोर्टल के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे सूचना का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित होता है। परिणामस्वरूप, सीबीआई और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सूचना-साझाकरण का समय काफी कम हो गया है। आज, सीबीआई द्वारा मांगी गई जानकारी आमतौर पर अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा 10 से 20 दिनों के भीतर, और कुछ मामलों में 3 से 10 दिनों के भीतर साझा की जाती है, जिससे जांच और प्रत्यर्पण कार्यवाही की दक्षता में काफी सुधार हुआ है।
मोदी सरकार ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) को और अधिक सख्ती से लागू किया है। पीएमएलए के कड़े प्रवर्तन के माध्यम से, मोदी सरकार ने 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों से संबंधित ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की है।
पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं। जुलाई 2026 तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

