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Wednesday, September 23, 2026
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राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण ने जलसंभर विकास और प्रबंधन के लिए उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया

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कृषि एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (एनआरएए) ने कल (22.09.26) नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स में रिवार्ड (नवीन विकास के माध्यम से कृषि लचीलेपन के लिए जलक्षेत्रों का कायाकल्प) कार्यक्रम के तहत एक राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी समिति (एनएलटीसी) की बैठक का आयोजन किया।

एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. चंद्र शेखर कुमार, आईएएस ने बैठक की अध्यक्षता की। आईसीएआर के डीडीजी (एनआरएम) डॉ. एके नायक, डीआरए के संयुक्त सचिव (डब्ल्यूएम), श्री नितिन खाडे, आईएएस, ओडिशा के निदेशक (डीएससी एवं डब्लूडी), डॉ. सुब्रत पांडा, आईएएस, और कर्नाटक के डब्ल्यूडीडी आयुक्त श्री उपेंद्र प्रताप सिंह (ऑनलाइन) भी बैठक में उपस्थित थे। ओडिशा और कर्नाटक की राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी (एसएलएनए) के वैज्ञानिक और प्रतिनिधि, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, आईआईटी, गैर सरकारी संगठनों, कंसोर्टियम भागीदारों, डीआरए और एनआरएए की रिवार्ड पीएमयू टीम और सीओई-डब्ल्यूएम (लगभग 45 प्रतिभागी) के तकनीकी भागीदार बैठक में शामिल हुए। बैठक का समन्वय एनआरएए की तकनीकी विशेषज्ञ (जलसंभर विकास) और पीआई-रिवार्ड डॉ. सुसमा सुधिश्री ने किया।एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने रिवार्ड कार्यक्रम में एकत्रित आंकड़ों के आधार पर एनटीजी के मसौदे में किए गए कथन/दावे के सत्यापन पर जोर दिया। उन्होंने ओडिशा और कर्नाटक की राज्य सरकारों को जलसंभर डेटा और निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) को सभी हितधारकों के साथ साझा करने की सलाह दी। डॉ. एके नायक ने जलसंभरों की बेहतर योजना के लिए भूमि संसाधन सूची (एलआरआई) और जल विज्ञान के एकीकरण पर बल दिया।

आईसीएआर के डीडीजी (एनआरएम) डॉ. एके नायक ने कहा कि कुछ परिणामों/निष्कर्षों तक पहुंचने के लिए अपनाई गई कार्यप्रणालियों को एनटीजी में स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए और वेब पोर्टल जल्द से जल्द विकसित किए जाने चाहिए।

श्रम विभाग के संयुक्त सचिव (वन प्रबंधन) श्री नितिन खाडे, आईएएस ने राय दी कि कार्यों के क्रियान्वयन के लिए अधिक समय प्राप्त करने हेतु डीपीआर तैयार करने का समय 6 महीने से घटाकर 3 महीने किया जा सकता है। विभिन्न क्षेत्रों के अभिसरण के पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए और उन्हें एनटीजी में शामिल किया जा सकता है।

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बैठक की शुरुआत में, डॉ. सुसमा सुधिश्री ने पिछली एनएलटीसी बैठक की कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत की और साथ ही राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश (एनटीजी) के दूसरे मसौदे में किए गए संशोधनों को भी प्रस्तुत किया।

डॉ. सुसमा ने ओडिशा और कर्नाटक की राज्य स्तरीय नोडल एजेंसियों से एनआरएए और कंसोर्टियम भागीदारों के साथ रिकॉर्ड किए गए डेटा को विश्लेषण, रिपोर्ट तैयार करने और एनटीजी के सत्यापन के लिए साझा करने का अनुरोध किया। विकसित किया जा रहा एनटीजी, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 के जलसंभर विकास घटक के तहत देश में भावी पीढ़ी के जलसंभर विकास के लिए उपयोग किया जाएगा।

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