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एसओएआर एआई-संचालित शिक्षा और कौशल विकास को प्रोत्साहन

परिचय

एआई, मशीन लर्निंग, डेटा विज्ञान और स्वचालन (ऑटोमेशन) में प्रगति के कारण वैश्विक कार्यबल एक गहन परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। जैसे-जैसे एआई स्वास्थ्य सेवा, वित्त, शिक्षा, विनिर्माण और सार्वजनिक सेवाओं जैसे उद्योगों में अंतर्निहित होता जा रहा है, व्यापक एआई साक्षरता और विशिष्ट प्रतिभा की तत्काल आवश्यकता है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) का एआई तत्परता के लिए कौशल विकास (एसओएआर) कार्यक्रमएक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य भारत की शैक्षिक व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता दक्षताओं को एकीकृत करना है। यह सरकार के वैश्विक तकनीकी प्रगति में अग्रणी होने के लक्ष्य के अनुरूप है। स्किल इंडिया मिशन के 10 साल पूरे होने के अवसर पर, जुलाई 2025 में इस कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है। स्किल इंडिया मिशन ने 2015 से विभिन्न कौशल योजनाओं के जरिये लोगों को सशक्त बनाया है, जिसमें प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 4.0 के तहत एआई जैसे उभरते क्षेत्र भी शामिल किये गये हैं।

एसओएआर का मिशन: भविष्य को सशक्त बनाना

  • एआई जागरूकता को बढ़ावा देना: एसओएआर पहल स्कूली छात्रों और शिक्षकों के बीच एआई साक्षरता को बढ़ावा देने को प्राथमिकता देती है। मशीन लर्निंग (एमएल) की मूल बातें और एआई के नैतिक उपयोग जैसी मूलभूत एआई अवधारणाओं को प्रस्तुत करके, इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा शिक्षार्थियों में जिज्ञासा और आकांक्षा जगाना और उन्हें तकनीक-संचालित भविष्य के लिए तैयार करना है। शिक्षकों के लिए, एसओएआर मौजूदा पाठ्यक्रम में एआई मॉड्यूल को शामिल करने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिससे प्रभावी सेवा अदायगी और उद्योग की आवश्यकताओं के साथ समन्वय सुनिश्चित होता है।
  • आर्थिक आत्मनिर्भरता का समर्थन: एसओएआर युवाओं को आईटी, डिजिटल नवाचार और एआई -संचालित उद्योगों जैसे उच्च-मांग वाले क्षेत्रों के लिए कौशल से लैस करके भारत के आर्थिक आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) विज़न का रणनीतिक रूप से समर्थन करता है। यह पहल पीएमकेवीवाई 4.0 जैसी प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है, जो रोज़गार क्षमता और उद्यमिता को बढ़ाने के लिए उभरती तकनीकों के कौशल विकास पर केंद्रित है।
  • तकनीक-संचालित भारत का निर्माण: एसओएआर का दीर्घकालिक दृष्टिकोण भारत को एआई के क्षेत्र में एक वैश्विक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करना है और इसके लिए युवाओं को एआई -संचालित करियर और उद्यमशीलता के लिए तैयार करना है। एआई -साक्षर छात्रों और शिक्षकों के एक मज़बूत इकोसिस्टम को बढ़ावा देकर, इस पहल का उद्देश्य एआई विकास, डेटा विश्लेषण और तकनीकी नवाचार में विभिन्न भूमिकाओं के लिए कुशल पेशेवरों का एक समूह तैयार करना है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता: भारत के शिक्षा परिदृश्य में बदलाव

कृत्रिम बुद्धिमत्ता; नवाचार को बढ़ावा देकर, डिजिटल साक्षरता को बढ़ाकर और छात्रों को प्रौद्योगिकी-संचालित भविष्य के लिए तैयार करके भारत के शिक्षा क्षेत्र में क्रांति ला रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप, एआई को कक्षाओं और कौशल विकास रूपरेखाओं में सहजता से एकीकृत किया जा रहा है। इस परिवर्तन को गति देने वाले कुछ प्रमुख विकास कार्यक्रम इस प्रकार हैं:

  • स्कूली पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता:

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020, छात्रों में नवाचार और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए, उचित चरणों में, स्कूली पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे समकालीन विषयों को शामिल करने पर ज़ोर देती है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पहले ही संबद्ध स्कूलों में एआई को एक विषय के रूप में लागू कर चुका है। 2019-2020 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 में शुरू किया गया और 2020-2021 सत्र से कक्षा 11 तक विस्तारित किया गया, यह विषय कौशल विकास और व्यक्तिगत शिक्षण उपकरणों जैसे व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर केंद्रित है।

  • एआई में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना:

भारत सरकार शिक्षा में एआई को अपनाने को बढ़ावा देने की एक प्रमुख पहल के रूप में एआई उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना कर रही है। इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं के लिए एआई का लाभ उठाना, कक्षाओं में आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना और पारंपरिक शिक्षण विधियों के स्थान पर “चॉकबोर्ड से चिपसेट तक” जैसे तकनीक-संचालित दृष्टिकोणों की ओर आगे बढ़ना है।

यह केंद्र एआई अवसंरचना और मानव संसाधन निर्माण के व्यापक राष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करेगा। इसमें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) द्वारा अनुमोदित संस्थानों को विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में एआई को एक वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल करने की सिफ़ारिशें भी शामिल हैं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) उन्नत एआई-संबंधित पाठ्यक्रम, जैसे डीप लर्निंग, मशीन लर्निंग और प्रेडिक्टिव डेटा एनालिटिक्स, प्रदान करके इसे पूरक बनाता है।

  • स्किल इंडिया मिशन (एसआईएम) में एआई और डिजिटल लर्निंग का एकीकरण:

भारत सरकार भविष्य के लिए प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करने हेतु स्किल इंडिया मिशन (एसआईएम) में एआई और डिजिटल लर्निंग कार्यक्रमों को सक्रिय रूप से शामिल कर रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 4.0, राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस), औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (एनएसटीआई) तथा स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) प्लेटफ़ॉर्म के अंतर्गत लक्षित पहलें की जा रही हैं।

पीएमकेवीवाई 4.0: 2015 में शुरू किया गया यह कार्यक्रम अल्पकालिक प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और पूर्व-शिक्षण की मान्यता पर केंद्रित है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे भविष्य के कौशल को प्राथमिकता दी जाती है।

एनएपीएस: राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस-2), जो वर्तमान में अपने दूसरे चरण में है, अगस्त 2016 से, न्यूनतम निर्धारित राशि के 25% तक, अधिकतम ₹1,500 प्रति माह वजीफा प्रदान करके प्रशिक्षुता का समर्थन करती है।

यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से प्रदान की जाती है। एआई से संबंधित व्यवसायों के अंतर्गत, वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2025-26 (जून 2025 तक) तक देश भर में 1,480 प्रशिक्षुओं को जोड़ा गया है, जिनमें एआई डेटा इंजीनियर, मशीन लर्निंग इंजीनियर और पायथन एआई प्रशिक्षु जैसी भूमिकाएँ शामिल हैं।

मार्च 2025 तक, लगभग 60 निजी प्रतिष्ठान वर्तमान में एनएपीएस के तहत एआई से संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।

एसआईडीएच प्लेटफॉर्म: कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तहत कौशल विकास का एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो भारतीय युवाओं को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न विशेषज्ञता स्तरों पर एआई/एमएल और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में उद्योग-प्रासंगिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ नौकरी और उद्यमिता के अवसर प्रदान करता है।
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