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विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक ‘विकित गांव’ बनाएं: राज्य मंत्री श्री पेम्मासानी चन्द्रशेखर


केंद्रीय मंत्री श्री पेम्मासानी ने दिल्ली में ग्रामीण विकास मंत्रालय की कार्य निष्पादन समीक्षा समिति की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा ग्रामीण बेरोजगारी के खिलाफ एक हथियार के रूप में काम कर रहा है

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ‘विकसित गाँव’ के निर्माण का आह्वान किया है। आज नई दिल्ली में ग्रामीण विकास मंत्रालय की कार्यनिष्पादन समीक्षा समिति की पहली बैठक को संबोधित करते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि एक ‘विकसित गाँव’ जहाँ हर परिवार के पास बुनियादी सुविधाओं वाला एक पक्का घर हो, हर गाँव गुणवत्तापूर्ण सड़कों से जुड़ा हो, हर ग्रामीण युवा के पास रोजगार के अवसर हों और हर महिला सशक्त और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो, कोई दूर का सपना नहीं बल्कि एक प्राप्त करने योग्य वास्तविकता है, लेकिन इसके लिए हमें नई ऊर्जा, नवीन सोच और गहरी प्रतिबद्धता के साथ काम करने की आवश्यकता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में ग्रामीण विकास मंत्रालय की भूमिका पर ज़ोर देते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि हम केवल योजनाओं को लागू नहीं कर रहे हैं, बल्कि भारत की विकास गाथा का अगला अध्याय लिख रहे हैं।

मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, श्री पेम्मासानी ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीण बेरोजगारी और विशेष रूप से कृषि के कमज़ोर मौसम में होने वाले संकटपूर्ण पलायन के विरुद्ध एक सशक्त हथियार के रूप में कार्य कर रही है। 90,000 से 1,00,000 करोड़ रुपये के वार्षिक निवेश के परिणामस्वरूप, टिकाऊ और उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ है, प्रतिवर्ष 250 करोड़ से अधिक मानव-दिवस सृजित हुए हैं, 36 करोड़ से अधिक जॉब कार्ड जारी किए गए हैं और 15 करोड़ से अधिक श्रमिक सक्रिय लाभार्थी बने हुए हैं। मंत्री ने वेतन भुगतान के बजाय सार्थक परिसंपत्ति निर्माण, विविध कार्यों को अपनाने और अन्य विकास योजनाओं के साथ उनके अभिसरण तथा कार्य चयन में सामुदायिक भागीदारी का सुझाव दिया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) का उल्लेख करते हुए, मंत्री महोदय ने बताया कि इसकी शुरुआत के बाद से, कच्चे या जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले ग्रामीण परिवारों के लिए 3.22 करोड़ से ज़्यादा पक्के घर बनाए जा चुके हैं और परिवार वृद्धि तथा ग्रामीण जनसंख्या विस्तार के कारण बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए 2029 तक 2 करोड़ अतिरिक्त घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री महोदय ने पर्यावरण-अनुकूल और क्षेत्र-विशिष्ट निर्माण तकनीकों और लागत-प्रभावी आवास डिज़ाइनों के उपयोग को बढ़ावा देने का सुझाव दिया है।

यह बताते हुए कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत अब तक 7.56 लाख किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है, मंत्री ने राज्य स्तरीय सड़क रखरखाव निधि की स्थापना, समुदाय आधारित निगरानी प्रणालियों के कार्यान्वयन और स्थिरता के लिए अभिनव वित्तपोषण मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया है। मंत्री ने कहा कि डीएवाई-एनआरएलएम सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के एक शक्तिशाली साधन के रूप में उभरा है, जिसमें 10.05 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 91 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में बनाया गया है और संचयी बैंक लिंकेज 11 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। मंत्री ने कहा कि लखपति दीदी पहल के तहत, 3 करोड़ महिलाओं के लक्ष्य के मुकाबले 1.5 करोड़ महिलाएं पहले ही सालाना एक लाख रुपये से अधिक कमाने में सक्षम हैं। मंत्री ने लक्षित ऋण, उन्नत कौशल और बाजार तैयार समर्थन के माध्यम से  लखपति दीदी” को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है

इस अवसर पर केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान, ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह, भारत सरकार एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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आरसी/केएसआर/एआर

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