10 सितंबर, 2024 को कोलकाता, भारत में एक सरकारी अस्पताल में प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ बलात्कार और हत्या की निंदा करते हुए चिकित्सक नारे लगाते हुए बैठे हैं। रॉयटर्स
कोलकाता, 22 अक्टूबर (रायटर) – भारत के पूर्वी शहर कोलकाता में जूनियर डॉक्टरों ने एक सहकर्मी के बलात्कार और हत्या के विरोध में 17 दिनों से जारी भूख हड़ताल सोमवार को समाप्त कर दी। उन्होंने बताया कि यह कदम पीड़िता के माता-पिता की अपील पर उठाया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने विपक्ष के नेतृत्व वाले राज्य के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की, जो यौन अपराधों से निपटने के अपने तरीके के लिए आलोचना का शिकार रहा है, तथा उन्होंने सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुरक्षा और स्थिति तथा महिला के लिए न्याय की मांग पर जोर दिया।
इस अपराध के लिए एक पुलिस स्वयंसेवक को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद 9 अगस्त को शहर के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला का शव पाया गया था, तथा अगस्त और सितंबर में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए थे।
डॉक्टरों के प्रवक्ता डॉ. देबाशीष हलदर ने कहा, “उन्होंने (पीड़ित के माता-पिता ने) अनशन कर रहे जूनियर डॉक्टरों के स्वास्थ्य के साथ-साथ बंद पड़ी स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में भी चिंता व्यक्त की, जिससे सैकड़ों आम नागरिक प्रभावित हुए होंगे।”
हड़ताल में भाग लेने वाले कुछ लोगों को गंभीर निर्जलीकरण का सामना करना पड़ा और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा ।
डॉक्टरों ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को जब उनसे मुलाकात की तो उनकी अधिकांश मांगों पर सहमति जताई।
हलदर ने कहा, “न्याय और स्वस्थ, सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए हमारा आंदोलन जारी रहेगा।” उन्होंने कहा कि डॉक्टर उनके आश्वासनों और बदलाव के आदेशों पर प्रगति पर नजर रखेंगे।
डॉक्टरों का कहना है कि भारत भर के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के लिए शौचालय, सुरक्षा कर्मियों और क्लोज सर्किट टेलीविजन कैमरे (सीसीटीवी) जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस मामले को उठाया, लेकिन जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए उसके प्रयास पर्याप्त नहीं रहे हैं।
रॉयटर्स ने बताया है कि पश्चिम बंगाल सरकार ऐसे अपराधों के लिए नए न्यायाधिकरणों की स्थापना करने में धीमी रही है, साथ ही 2019 में डॉक्टरों से किए गए बेहतर सुरक्षा उपायों के अपने वादों को पूरा करने में भी विफल रही है।
भारत ने 2012 में अपनी राजधानी नई दिल्ली में एक महिला के साथ हुए भयानक सामूहिक बलात्कार और हत्या के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कानून अपनाए, लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिलाएं अभी भी यौन हिंसा का शिकार हैं ।
लेखक: साक्षी दयाल; संपादन: क्लेरेंस फर्नांडीज