जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग [डीओडब्ल्यूआर, आरडी एवं जीआर] में आर्थिक सलाहकार एवं आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के अध्यक्ष की अध्यक्षता में यौन उत्पीड़न निवारण (पीओएसएच) अधिनियम, 2013 पर एक अभिमुखीकरण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। अधिवक्ता एवं आईसीसी की बाह्य सदस्य सुश्री जानवी सतपाल बब्बर ने पीओएसएच अधिनियम के प्रावधानों और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों पर एक प्रस्तुति दी।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के कर्मचारियों को न केवल अधिनियम के कानूनी प्रावधानों की गहरी समझ प्रदान करना था, बल्कि इसके व्यापक उद्देश्य – कार्यस्थल पर सम्मान और समानता की संस्कृति को बढ़ावा देना – से भी परिचित कराना था।
यौन उत्पीड़न निवारण अधिनियम, 2013, महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने हेतु सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक विशाखा निर्णय के अनुरूप लागू किया गया था। यह अधिनियम यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने, प्रतिषेध करने और उनके निवारण हेतु एक व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, अपराध को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है और अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु नियोक्ताओं की ज़िम्मेदारियों को रेखांकित करता है।
यह दस या अधिक कर्मचारियों वाले संगठनों में आंतरिक शिकायत समितियों (ICC) की स्थापना को अनिवार्य बनाता है और न केवल एक संरचित निवारण तंत्र पर बल्कि जागरूकता, संवेदनशीलता और क्षमता निर्माण जैसे सक्रिय उपायों पर भी ज़ोर देता है। इन प्रावधानों के माध्यम से, अधिनियम सभी कर्मचारियों के लिए एक लैंगिक-संवेदनशील, सम्मानजनक और समतापूर्ण कार्य वातावरण को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।









