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विभाग-संबंधित गृह कार्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की 257वीं तथा 258वीं रिपोर्ट पर प्रेस विज्ञप्ति

डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल, संसद सदस्यराज्य सभा की अध्यक्षता में विभागसंबंधित गृह कार्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने आज दिनांक 17 मार्च, 2026 को संसद में निम्नलिखित प्रतिवेदन प्रस्तुत किए:-

i. ‘गृह मंत्रालय की अनुदान मांगें (2026–27)’ संबंधी 257वां प्रतिवेदन; तथा
ii. ‘उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय की अनुदान मांगें (2026–27)’ संबंधी 258वां प्रतिवेदन।

समिति ने इन प्रारूप प्रतिवेदनों पर विचार किया तथा दिनांक 16 मार्च, 2026 को आयोजित अपनी बैठक में इन्हें स्वीकार किया। इन प्रतिवेदनों में समिति द्वारा की गई सिफारिशें/समुक्तियाँ संलग्न हैं।

समिति की सिफारिशें/समुक्तियाँ – एक नज़र में

‘गृह मंत्रालय की अनुदान मांगें (2026–27)’ संबंधी 257वां प्रतिवेदन

गृह मंत्रालय की अनुदान मांगों (2025-26) का समग्र मूल्यांकन

अनुदान मांग संख्या 51 के लिए शीर्षवार प्रक्षेपण तथा बजट अनुमान 2026–27 में आबंटन

समिति नोट करती है कि यद्यपि अनुदान मांग संख्या 51 के अंतर्गत वर्ष 2026–27 के बजट अनुमान में समग्र आबंटन में वृद्धि हुई हैतथापि अनेक आधुनिकीकरण तथा अवसंरचना संबंधी शीर्षों के अंतर्गत आबंटन प्रक्षेपित आवश्यकता से कम है। समिति का मत है कि विशेषकर पुलिस अवसंरचना, सीमा अवसंरचना तथा प्रौद्योगिकी उन्नयन के अंतर्गत प्रक्षेपित स्तरों की तुलना में  बजट आबंटन में सतत कमी क्षमता संवर्द्धन की गति को प्रभावित कर सकती है।

(पैरा 2.5.6)

          अत: समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय महत्त्वपूर्ण शीर्षों के अंतर्गत व्यय की समय-समय पर समीक्षा करे तथा यदि आवश्यक हो तो अतिरिक्त आवश्यकताओं को संशोधित अनुमान चरण में उठाएताकि आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन तथा आधुनिकीकरण से संबंधित प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों पर निधियों की कमी के कारण प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

(पैरा 2.5.7)

          समिति प्रभावी वित्तीय प्रबंधननिधियों के समयोचित उपयोग तथा वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में असंतुलित व्यय से बचने के महत्त्व पर भी बल देती है, ताकि किए गए आबंटनों से सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

(पैरा 2.5.8)

 

संघ शासित प्रदेशों के लिए मांग सं. (52 59) के अंतर्गत किए गए बजटीय आबंटन  (2026–27)                                                                                              

           वित्तीय वर्ष 2025–26 के संशोधित अनुमान के विरुद्ध विधानमंडल सहित संघ शासित प्रदेशों (दिल्लीजम्मू और कश्मीर तथा पुडुचेरी) द्वारा 31 जनवरी, 2026 तक किया गया कुल व्यय    42,882.63 करोड़ हैजो संशोधित अनुमान आबंटन का 93.02% है। समिति नोट करती है कि इन संघ शासित प्रदेशों के बीच उपयोगिता स्तर तुलनात्मक रूप से अधिक है। समिति इस बात पर बल देती है कि योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए निधियों की समय पर रिहाई तथा मंत्रालय और संबंधित संघ शासित प्रदेश प्रशासन के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है। समिति समुक्ति करती है कि संघ शासित प्रदेशों के लिए किए गए आबंटन मंत्रालय के समग्र बजट का एक महत्त्वपूर्ण भाग बने हुए हैं। संघ शासित प्रदेशों की विकासात्मक आवश्यकताओंविशेषकर भौतिक अवसंरचनासामाजिक क्षेत्र की सेवाओं तथा प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के संदर्भ मेंपूंजीगत शीर्ष के अंतर्गत पर्याप्त प्रावधान का विशेष महत्त्व है। विशेष रूप से उन संघ शासित प्रदेशों पर ध्यान दिया जाना अपेक्षित है जिनकी पारिस्थितिक और भौगोलिक परिस्थितियाँ संवेदनशील हैं, जहाँ अवसंरचना विकास में अतिरिक्त वित्तीय दायित्व निहित होते हैं।

(पैरा 2.6.7)

          समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय संघ शासित प्रदेशों में पूंजीगत व्यय की निकटता से निगरानी करे तथा किसी भी उभरती हुई कमी को संशोधित अनुमान चरण में दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाएताकि प्रचलित परियोजनाओं और विकासात्मक पहलों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। समिति यह भी सिफारिश करती है कि भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील संघ शासित प्रदेशों में पूंजी-प्रधान परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए, जिससे कार्यान्वयन में विलंब से बचा जा सके।

(पैरा 2.6.8)

          समिति नोट करती है कि यद्यपि समीक्षाधीन वर्ष के दौरान मंत्रालय के लिए समग्र बजटीय आबंटन में वृद्धि हुई हैतथापि कुछ शीर्षों के अंतर्गत अनुमानित आवश्यकताओं और अंतिम बजट अनुमान के बीच संयम दृष्टिगोचर होता है। समिति का मत है कि आंतरिक सुरक्षाजनगणना संचालनआपदा प्रबंधन की तैयारी तथा अवसंरचना के आधुनिकीकरण राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हैं और इनके लिए सतत तथा समयोचित वित्तीय समर्थन आवश्यक है। समिति अपेक्षा करती है कि उपयोगिता की प्रवृत्तियों के आधार पर अतिरिक्त आवश्यकताओं पर संशोधित अनुमान चरण में विचार किया जाए, ताकि प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

(पैरा 2.6.9)

राजभाषा

समिति वर्ष 2026–27 के लिए राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित मापन योग्य लक्ष्यों को नोट करती हैजिनमें 20,000 पत्रों और 40,000 पृष्ठों का अनुवाद, 25,000 कर्मियों को हिंदी प्रशिक्षण प्रदान करनाकेंद्रीय अनुवाद ब्यूरो द्वारा 1,175 अधिकारियों को प्रशिक्षण देनाहिंदी शब्द सिंधु भंडार का 7.5 लाख शब्दों तक विस्तार, 15 भारतीय भाषाओं में चिकित्सा शब्द सिंधु शब्दकोश की तैयारी तथा क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालयों द्वारा लगभग 852 कार्यालयों/बैंकों/उपक्रमों का निरीक्षण सम्मिलित है। समिति मात्रात्मक भौतिक लक्ष्यों के निर्धारण में परिलक्षित परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण की सराहना करती है तथा प्रस्तावित लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा करती है। साथ हीमंत्रालय को विशेष रूप से डिजिटल शासनकृत्रिम बुद्धिमत्तासाइबर सुरक्षा तथा स्वास्थ्य विज्ञान जैसे उभरते क्षेत्रों में क्षेत्र-विशिष्ट पारिभाषिक शब्दावली के विस्तार की संभावनाओं का अन्वेषण करना चाहिए, ताकि तकनीकी और प्रशासनिक संप्रेषण में हिंदी की व्यावहारिक उपयोगिता को सुदृढ़ किया जा सके।

(पैरा 3.2.5)

समिति विभाग द्वारा किए गए प्रौद्योगिकीय हस्तक्षेपों को भी नोट करती है, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुवाद मंच भारती – बहुभाषी अनुवाद सारथी के उन्नयनइसके ई-ऑफिस के साथ एकीकरण तथा केंद्र और राज्यों के बीच बहुभाषीय पत्राचार को सुगम बनाने के लिए भारतीय भाषा अनुभाग की स्थापना को। समिति का मत है कि यद्यपि ये पहलें सराहनीय हैंतथापि मंत्रालय को मंत्रालयों और विभागों में अनूदित सामग्री की गुणवत्ता, समयबद्धता तथा वास्तविक उपयोगिता का आकलन करने के लिए एक सुदृढ़ प्रदर्शन-निगरानी रूपरेखा स्थापित करने पर विचार करना चाहिए। समिति यह भी सिफारिश करती है कि हिंदी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता तथा प्रशिक्षित कार्मिकों के राजकीय कार्यों में वास्तविक उपयोग का मूल्यांकन करने के लिए समय-समय पर प्रभाव आकलन अध्ययन भी किए जाएँ।

(पैरा 3.2.6)

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ)

 

समिति नोट करती है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान संचालित अभियानों की बढ़ती संख्या से एनडीआरएफ की परिचालन प्रतिबद्धताओं में उल्लेखनीय वृद्धि परिलक्षित होती है। समिति विभिन्न राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में आपदाओं के दौरान प्रतिक्रिया देने तथा अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता अभियानों में इस बल द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना करती है। तथापि समिति समुक्ति करती है कि बढ़ती परिचालन जिम्मेदारियों के बावजूद पिछले तीन वर्षों के दौरान कोई अतिरिक्त बटालियन स्थापित नहीं की गई है और तैनात संख्या (14,837) अधिकृत संख्या (18,581) की तुलना में काफी कम है। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय जनशक्ति अंतराल का व्यापक आकलन करे तथा रिक्तियों को शीघ्र भरने के लिए आवश्यक कदम उठाए, जिससे परिचालन तत्परता को सर्वोत्तम स्तर पर सुनिश्चित किया जा सके। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) से अधिक कर्मियों को एनडीआरएफ में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रतिनियुक्ति की शर्तों में संशोधन किया जा सकता है।

 (पैरा 3.3.6 )

          समिति आपदा प्रतिक्रिया में एनडीआरएफ की महत्त्वपूर्ण भूमिका की सराहना करती है तथा विशेष रूप से अतिरिक्त कार्मिकों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इसकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त वित्तपोषण की आवश्यकता पर बल देती है। ऐसे महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिए निधियों की कमी से एनडीआरएफ के कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। समिति सिफारिश करती है कि आवश्यकता होने पर गृह मंत्रालय संशोधित अनुमान चरण में अतिरिक्त निधियों की प्राप्ति के लिए वित्त मंत्रालय से संपर्क करे, ताकि आपात स्थितियों के दौरान परिचालन दक्षता और तैयारी से कोई समझौता न हो।

(पैरा 3.3.7)

          समिति आगे समुक्ति करती है कि वर्ष 2026–27 के बजट अनुमान में कुल आबंटन का केवल लगभग 10% भाग ही पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किया गया है। प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता को दृष्टिगत रखते हुए समिति सिफारिश करती है कि पूंजीगत परिसंपत्तियों के सुदृढ़ीकरणउन्नत बचाव उपकरणोंसूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी समर्थित प्रतिक्रिया प्रणालियों तथा क्षेत्रीय अवसंरचना के विकास पर अधिक बल दिया जाए, जिससे प्रतिक्रिया समय में कमी लाई जा सके तथा आपदा तैयारी को सुदृढ़ बनाया जा सके।

(पैरा 3.3.8)

प्रवासियों और प्रत्यावर्तित व्यक्तियों के लिए राहत और पुनर्वास

 

          समिति प्रवासियों और प्रत्यावर्तित व्यक्तियों को राहत और पुनर्वास प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों की सराहना करती है। आबंटन में कमी को दृष्टिगत रखते हुए समिति सिफारिश करती है कि पुनर्वासित लाभार्थियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाएविशेषकर आजीविका सहायता, आवास तथा समेकन के संदर्भ में।

(पैरा 3.4.4)

स्वतंत्रता सेनानी (पेंशन और अन्य लाभ)

 

          समिति भारत के महापंजीयक के साथ स्वतंत्रता सेनानी सम्मान योजना पोर्टल के एकीकरण, नीति दिशा-निर्देशों के सरलीकरण तथा वृद्ध लाभार्थियों के साथ निकट संपर्क सुनिश्चित करने हेतु मानक संचालन प्रक्रिया जारी करने जैसे प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना करती है। समिति शेष लाभार्थियों की गरिमा और कल्याण को बनाए रखने के उद्देश्य से पेंशन, रेल यात्रा सुविधा तथा स्वतंत्रता सेनानी भवनों के रख-रखाव की निरंतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय की प्रशंसा करती है।

(पैरा 3.5.2)

हेलीकॉप्टर सेवाएँ

          समिति नोट करती है कि राज्य और संघ शासित प्रदेश सरकारों से मांग में कमी के कारण हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए बजटीय आबंटन में कमी आई है तथा दूरस्थ क्षेत्रों में संपर्क उपलब्ध कराने में इन सेवाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करती है। समिति जम्मू संभाग में जम्मू–मेंढरजम्मू जैसे नए क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाओं के परिचालन की सराहना करती है। समिति समुक्ति करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र में व्यय तुलनात्मक रूप से अधिक हैजबकि 31.12.2025 तक जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में उपयोगिता कम रही है। समिति सिफारिश करती है कि हेलीकॉप्टर सेवाओं की इष्टतम तैनाती तथा आबंटित निधियों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र-वार मांग का आकलन तथा मौसमी उपयोगिता की समीक्षा की जाए। साथ ही, निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने के लिए जम्मू और लद्दाख में नए मार्गों की संभावनाओं का भी अन्वेषण किया जाए।

 (पैरा 3.6.4)

 

आपदा प्रबंधन के लिए अवसंरचना

समिति नोट करती है कि आपदा प्रबंधन योजनाओं के अंतर्गत कुछ उप-योजनाएँ मार्च, 2026 के पश्चात् उनकी निरंतरता के लिए वर्तमान में पुनरीक्षणाधीन हैं। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय संशोधित योजना के उद्देश्योंपरिधिवित्तीय व्यय तथा मापन योग्य परिणामों को स्पष्ट रूप से निरूपित करते हुए एक व्यापक रूपरेखा पूर्व में ही अंतिम रूप देताकि कार्यान्वयन में किसी प्रकार का अंतराल उत्पन्न न हो तथा अवसंरचना विकास की निरंतरता निर्बाध रूप से सुनिश्चित की जा सके। समिति यह भी सिफारिश करती है कि संशोधित योजना में एक परिणाम-आधारित मूल्यांकन रूपरेखा सम्मिलित की जाएजिससे अवसंरचना सुदृढ़ीकरण के प्रभाव का आकलन प्रतिक्रिया समयपरिचालन तत्परता तथा आपदा सहनशीलता के संदर्भ में किया जा सके। इस संबंध में समिति का मत है कि आपदा मित्र योजना जैसी सामुदायिक आधारित पहलों से प्राप्त अनुभवों का व्यवस्थित रूप से प्रलेखन किया जाए तथा उन्हें भावी योजना-निर्माण में समाविष्ट किया जाएविशेषकर अंतिम स्तर की तैयारीसामुदायिक सहभागिता तथा प्रशिक्षित स्वयंसेवकों और प्रतिक्रिया बलों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने के संदर्भ में। संशोधित योजना का उद्देश्य अखिल भारतीय स्तर पर बहु-आपदा प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करना होना चाहिए। नीति निर्माताओं को सूचित निर्णय लेने में सहायता के लिए सूचना एकत्र करनेसंकलित करने और विश्लेषण करने हेतु भारत को एक मजबूत आपदा डेटा अवसंरचना की आवश्यकता है।      

 (पैरा 3.7.4)

जनगणना, सर्वेक्षण और सांख्यिकी/भारत के महापंजीयक

          समिति नोट करती है कि जनगणना 2027 के पूर्ण क्रियान्वयन के कारण बीई 2026–27 में      6,000 करोड़ का पर्याप्त वृद्धि के साथ प्रावधान किया गया है और भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना आरंभ करने के लिए सरकार की तैयारी की सराहना करती है। समिति का मत है कि इस उपक्रम के आकार और संवेदनशीलता को दृष्टिगत रखते हुए सूक्ष्म योजनाअंतर-सरकारी समन्वय तथा प्रौद्योगिकीय सुदृढ़ता इसके सफल संचालन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय लगभग 30 लाख जनगणना कार्मिकों के प्रशिक्षणसुरक्षित डिजिटल अवसंरचना की तैनाती तथा राज्य सरकारों के साथ निर्बाध समन्वय सहित सभी पूर्वतैयारी गतिविधियों को समयबद्ध रूप से अंतिम रूप प्रदान करना सुनिश्चित करेताकि परिचालन संबंधी अवरोधों से बचा जा सके। समिति आगे सिफारिश करती है कि प्रारंभिक तथा अंतिम जनगणना आँकड़ों के प्रकाशन के लिए एक स्पष्ट प्रसारण कैलेंडर तैयार किया जाए, जिससे साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को यथाशीघ्र सुविधा प्रदान की जा सके।

(पैरा 3.8.5)

 

          समिति सुदृढ़ आँकड़ा संरक्षण उपायों के महत्त्व पर भी बल देती है, जिनमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शनसाइबर सुरक्षा लेखा-परीक्षण तथा वास्तविक समय निगरानी तंत्र सम्मिलित हैंताकि आँकड़ों की अखंडता तथा जनविश्वास को सुरक्षित रखा जा सके। डिजिटल उपकरणों तथा स्व-गणना सुविधाओं को अपनाने के परिप्रेक्ष्य में समिति सिफारिश करती है कि पर्याप्त जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जाएँ, जिससे सूचित सहभागिता सुनिश्चित हो सके तथा डिजिटल मंचों के दुरुपयोग को रोका जा सके।

(पैरा 3.8.6)

 

गृह रक्षक (होम गार्ड)

 

          समिति नोट करती है कि यद्यपि “गृह रक्षक शीर्ष के अंतर्गत बीई 2026–27 में आबंटन में वृद्धि हुई हैतथापि निर्वाचनआपदा प्रत्युत्तर तथा आंतरिक सुरक्षा दायित्वों में गृह रक्षकों की विस्तारित भूमिका की तुलना में यह अभी भी सीमित बना हुआ है। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ परामर्श कर वित्तीय तथा परिचालन आवश्यकताओं का एक व्यापक आकलन करेताकि केंद्रीय सहायता बल की बढ़ती तैनाती संबंधी जिम्मेदारियों के अनुरूप हो सके। समिति आगे सिफारिश करती है कि प्रस्तावित डिजिटल पहलेंजिनमें सेवा पथ मंच तथा वेतन वितरण का डिजिटलीकरण सम्मिलित हैंराज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित की जाएँताकि पारदर्शिता, समानुपातिक तैनाती तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से मानदेय का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित किया जा सके।

(पैरा 3.9.4)

 

समिति आगे सिफारिश करती है कि प्रशिक्षण मॉड्यूल के आधुनिकीकरण तथा गृह रक्षकों को राज्य आपदा प्रत्युत्तर बलों (एसडीआरएफ) के साथ प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता के रूप में एकीकृत करने की प्रक्रिया को संरचित संयुक्त अभ्यासों तथा आवधिक पुनर्ताज़गी प्रशिक्षण के माध्यम से संस्थागत रूप प्रदान किया जाए। साथ ही, जलवायु के अनुकूल वर्दियोंआधुनिक सुरक्षात्मक उपकरणों तथा आवश्यक साधनों की उपलब्धता पर भी बल दिया जाएताकि आपदाओं, निर्वाचन तथा आंतरिक सुरक्षा अभियानों के दौरान दायित्वों का प्रभावी निर्वहन किया जा सके और इस प्रकार बल की परिचालन दक्षता तथा मनोबल को सुदृढ़ किया जा सके।

(पैरा 3.9.5 )

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल

 

          समिति नोट करती है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए आबंटन पिछले तीन वर्षों में लगातार बढ़ा है, जिसमें कुल आबंटन वास्तविक 2024–25 में 1,04,824.10 करोड़ रुपये से बढ़कर बजट अनुमान 2026–27 में 1,16,789.30 करोड़ रुपये हो गया है। समिति समुक्ति करती है कि यह वृद्धि मुख्यतः भत्तोंचिकित्सा व्ययआपूर्ति वस्तुओंआईसीटी और मशीनरी एवं उपकरण के उच्च प्रावधानों के कारण हैजो बलों की बढ़ती परिचालन जिम्मेदारियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं को दर्शाती है। समिति आगे नोट करती है कि जबकि राजस्व व्यय आबंटन का प्रमुख हिस्सा है, पूंजी अनुभाग के तहत मशीनरी एवं उपकरण और मोटर वाहनों के लिए भी उच्च प्रावधान किए गए हैं।

 

          सीमा प्रबंधन, आतंकवाद रोधीआंतरिक सुरक्षा और चुनावीय कर्तव्यों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की बढ़ती भूमिका को ध्यान में रखते हुएसमिति सिफारिश करती है कि परिचालन दक्षता और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने के लिए उपकरणों के आधुनिकीकरणप्रौद्योगिकी उन्नयन और अवसंरचना सुदृढ़ीकरण पर सतत ध्यान दिया जाए। मंत्रालय समय-समय पर राजस्व और पूंजी व्यय के अनुपात की समीक्षा करे ताकि आधुनिक उपकरण, गतिशीलता और निगरानी प्रणाली में पूंजी निवेश बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप बना रहे।

(पैरा 4.2.5)

 

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व

 

         समिति नोट करती है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा पद आरक्षण और अन्य सहायक उपाय किए गए हैं। तथापि, समिति यह अवलोकन करती है कि केवल भर्ती के अतिरिक्तमहिलाओं के प्रतिनिधित्व में सतत सुधार उनके क्षयन को कम करने पर भी निर्भर करता है। समिति यह भी जोर देती है कि अधिकारियों के कैडर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक हैताकि निर्णय-निर्धारण और नेतृत्व स्तर पर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। समिति का मानना है कि सेवा की परिस्थितियों में सुधार, स्थायित्व बढ़ाना और अधिकारियों के कैडर में महिलाओं के अधिक समावेश को बढ़ावा देना केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महिलाओं के उच्च और सतत प्रतिनिधित्व को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

          अत: समिति सिफारिश करती है कि सरकार बलों में अधिक महिला-अनुकूल कार्य वातावरण सृजित करने हेतु केन्द्रित उपाय करें ताकि महिलाओं का सेवा में बने रहना सुनिश्चित हो सके। मंत्रालय संस्थागत सहायता तंत्रों को सशक्त करे, पर्याप्त सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करे और कार्यस्थल से संबंधित चिंताओं का प्रभावी समाधान करे, ताकि महिला कर्मचारी बिना किसी अत्यधिक कठिनाई के सेवा जारी रख सकें। मंत्रालय विशिष्ट जीवन चरणों के दौरान लचीले तैनाती विकल्प या नरम पोस्टिंग पर विचार कर सकता है ताकि स्थायित्व बढ़ाया जा सके।

(पैरा 4.3.5)

 

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कैडर की समीक्षा

 

          समिति ने विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और असम राइफल्स में किए गए कैडर समीक्षा उपायों पर ध्यान दिया, जिसमें अतिरिक्त पदों का सृजनपद संरचनाओं का तर्कसंगतरण और पदोन्नति में ठहराव को दूर करने के लिए उठाए गए कदम शामिल हैं। समिति नोट करती है कि यद्यपि इन उपायों ने कुछ कैडरों में करियर प्रगति को सुगम बनाया हैकई समीक्षाएँ अभी प्रक्रिया में हैं और उनके लाभ केवल समय पर लागू होने के पश्चात ही प्राप्त होंगेजिसमें भर्ती नियमों की स्वीकृतिनए शांति प्रतिष्ठान का निर्माण और विभागीय पदोन्नति समिति की बैठकें शामिल हैं। समिति ने यह भी देखा कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में निरीक्षक (समूह ‘) से सहायक कमांडेंट (समूह ‘) तक पदोन्नति में ठहराव के संबंध में चिंताएँ हैं।

 

समिति सिफारिश करती है कि पर्यवेक्षी स्तर पर दीर्घकालिक ठहराव से कर्मियों के मनोबल, प्रेरणा और करियर प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मंत्रालय संबंधित रैंक का समग्र कैडर समीक्षा करके पदोन्नति के अवसररिक्ति स्थिति और पदोन्नति की समयसीमा का मूल्यांकन कर सकता है। उचित उपायों पर विचार किया जाना चाहिएजिसमें पदोन्नति कोटे का तर्कसंगतरणविभागीय पदोन्नति समिति की बैठकें समय पर आयोजित करना और कैडर संरचना की समीक्षा शामिल होताकि निष्पक्ष और समयबद्ध करियर प्रगति सुनिश्चित हो सके। विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों/कर्मचारियों के बीच करियर प्रगति में समानता सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जा सकते हैं। सहायक कमांडेंट पद के लिए सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में भी संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से आयोजित की जा सकती हैकेंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की वर्तमान व्यवस्था के अनुरूपताकि चयन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता, एकरूपता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 4.4.7)

 

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के लिए कल्याण उपाय

 

          समिति केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और असम राइफल्स कर्मियों के परिवारों के लिएजो ड्यूटी के दौरान शहीद हुएतथा सेवानिवृत्त कर्मियों के पुनर्वास के लिए स्थापित व्यापक कल्याण ढाँचे की सराहना करती है। समिति नोट करती है कि कल्याण एवं पुनर्वास बोर्ड (वार्ब) के माध्यम से संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया है और देशभर में केंद्रीयराज्य एवं जिला कल्याण अधिकारियों की तैनाती की गई है। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय वित्तीय सहायतापेंशन लाभछात्रवृत्ति योजनाओं और पुनःरोजगार पहल की प्रभावशीलता का समय-समय पर मूल्यांकन करने हेतु संरचित परिणाम-निगरानी तंत्र विकसित करे, ताकि लाभार्थी परिवारों को समय पर सहायता और दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 4.5.6)

समिति सिफारिश करती है कि “केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल पुनर्वास” योजना के तहत पुनःरोजगार पहल को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी क्षेत्र की संस्थाओं के साथ अधिक समन्वय के माध्यम से सुदृढ़ किया जाए, तथा नियुक्तियों और स्वरोजगार परिणामों का डेटा समय-समय पर संकलित और समीक्षा किया जाए। विशेष रूप से विधवाओं और आश्रितों के लिए कौशल विकास और परामर्श सहायता पर जोर दिया जाए ताकि सतत आजीविका के अवसर सुनिश्चित हो सकें।

(पैरा 4.5.7)

          समिति नोट करती है कि आवासीय इकाइयों की उपलब्धता अधिकृत संख्या की तुलना में काफी कम हैवर्तमान में केवल 1,35,544 आवासीय इकाइयाँ उपलब्ध हैं जबकि अधिकृत क्षमता 2,68,346 इकाइयाँ है। इसके अतिरिक्त, 10,430 इकाइयाँ वर्तमान में निर्माणाधीन हैंजिनके पूरा होने पर स्थिति में केवल मामूली सुधार होगा। वर्तमान में आवास संतोष स्तर 50.14% हैजो अधिकृत आवश्यकताओं की पूर्ति में पर्याप्त कमी को दर्शाता है। चल रहे परियोजनाओं के पूरा होने पर यह आंकड़ा 54.03% तक पहुँचने का अनुमान हैजिससे कुछ प्रगति दिखती है, लेकिन अधिकृत संख्या और वास्तविक उपलब्धता के बीच लगातार अंतर को उजागर करता है। मौजूदा आवासीय अंतर को सतत और समयबद्ध रूप से पूरा करना आवश्यक है।

 

          समिति सिफारिश करती है कि कठिन-ड्यूटी, सीमा और उच्च जोखिम वाले परिचालन क्षेत्रों में तैनात कर्मियों को आवासीय आवंटन में प्राथमिकता दी जाए। चल रहे आवासीय परियोजनाओं की प्रगति पर कड़ी निगरानी रखी जाए और बलों में आवास संतोष स्तर को क्रमिक रूप से बढ़ाने हेतु चरणबद्ध रोडमैप तैयार किया जाए।

(पैरा 4.5.8)

 

          अतिरिक्त रूप सेसमिति सिफारिश करती है कि बढ़ते परिचालन दबाव और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में तैनाती को ध्यान में रखते हुएकेंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कर्मियों और उनके परिवारों के लिए गुणवत्ता पूर्ण और समयोचित चिकित्सकीय देखभाल तक पहुँच सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए समय-समय पर मान्यता प्राप्त अस्पतालों की समीक्षा, दावे निपटान समयसीमा और लाभार्थी कवरेज का मूल्यांकन किया जाना चाहिए ताकि सेवा में तथा सेवानिवृत्त कर्मियों और उनके आश्रितों को समग्र और समयोचित चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 4.5.9)

          समिति केंद्रीय आकस्मिक अनुग्रह मुआवजा में वृद्धि और विभिन्न स्रोतों से न्यूनतम वित्तीय सहायता पैकेज की उपलब्धता को भी नोट करती है। वर्तमान संरचना को मान्यता देते हुएसमिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय आकस्मिक अनुग्रह मुआवजे की स्पष्टसरल और व्यापक वर्गीकरण विकसित करने की व्यवहार्यता पर विचार करेताकि स्पष्टता, समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। यह ढाँचा परिचालन वास्तविकताओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और श्रेणियों के अत्यधिक खंडन से बचना चाहिए।

(पैरा 4.5.10)

असम राइफल्स एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफमें जनशक्ति 

          समिति चिंता के साथ नोट करती है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलोंतथा असम राइफल्स (असम राइफल्समें कुल रिक्तियों की संख्या 93,139 हैजिसमें विशेष रूप से अन्य रैंकों (अन्य रैंक्सकी श्रेणी में उल्लेखनीय कमी है। कर्मचारी चयन आयोग (एसएससीएवं संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससीके माध्यम से भर्ती में समन्वयसमयबद्ध चिकित्सीय परीक्षण तथा भर्ती के लिए नामित बल की व्यवस्था जैसे उपायों की सराहना करते हुए भी समिति का मत है कि निरंतर उच्च स्तर की रिक्तियाँ परिचालन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैंतैनाती का दबाव बढ़ा सकती हैं तथा कार्मिकों के मनोबल को प्रभावित कर सकती हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय रिक्तियों की पूर्ति हेतु एक समयबद्ध योजना तैयार करेजिसमें स्पष्ट वार्षिक लक्ष्य निर्धारित हों तथा उच्चतम स्तर पर समयसमय पर निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

(पैरा 4.6.5)

          समिति तनाव प्रबंधन हेतु उठाए गए उपायों की सराहना करती हैजिनमें वार्षिक चिकित्सीय परीक्षण (वार्षिक चिकित्सीय परीक्षणके अंतर्गत मनोवैज्ञानिक मूल्यांकनमानसिक स्वास्थ्य के लिए आयुष्मान केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों योजना का कवरेजविशिष्ट संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन तथा योग एवं मानसिक कल्याण कार्यक्रमों का आयोजन सम्मिलित है। 

          तथापिउच्च परिचालन तनाव एवं कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनाती को ध्यान में रखते हुए समिति का मत है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओंविशेषकर क्षेत्रीय संरचनाओं में तैनात अन्य रैंकों (अन्य रैंक्सके बीचको निरंतर एवं संस्थागत ध्यान की आवश्यकता है। संरचित मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंगगोपनीय परामर्श व्यवस्था तथा क्षेत्रीय स्तर पर सुदृढ़ मनोचिकित्सीय सहयोग सभी संरचनाओं में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। तनावसंबंधी मामलोंपरामर्श हस्तक्षेपों तथा पुनर्वास परिणामों से संबंधित आँकड़ों की समयसमय पर समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि वर्तमान उपायों की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके और बलों की दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक दृढ़ता सुनिश्चित की जा सके।

(पैरा 4.6.6)

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों हेतु आधुनिकीकरण योजना–IV 

          समिति नोट करती है कि मानव रहित हवाई वाहन (मानव रहित हवाई वाहनतथा एंटीड्रोन उपकरण आधुनिकीकरण योजना–IV का अभिन्न अंग हैंविशेषकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर उभरते खतरों और आंतरिक सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए। ड्रोन का बढ़ता उपयोग निगरानीतस्करी तथा शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। समिति सिफ़ारिश करती है कि ड्रोन एवं प्रतिरोधीड्रोन प्रणालियों की खरीद एवं तैनाती को प्राथमिकता दी जाए तथा इसे शीघ्रता से संपन्न किया जाएविशेषकर सीमा सुरक्षा बलों में। स्वदेशी प्रौद्योगिकी समाधानों को प्रोत्साहित किया जाए तथा वास्तविक समय निगरानीखुफ़िया जानकारी साझा करने और परिचालन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने हेतु एकीकृत कमांडएवंनियंत्रण तंत्र विकसित किया जाए। इसके अतिरिक्तमानव रहित हवाई वाहन एवं प्रतिरोधीड्रोन प्रणालियों के संचालन एवं प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण उपायों पर विशेष बल दिया जाना चाहिए।

(पैरा 4.7.8)

 

          समिति समुक्ति करती है कि आधुनिकीकरण योजना–IV का उद्देश्य वर्तमान शस्त्रागार और समकालीन परिचालन आवश्यकताओं के बीच तकनीकी अंतर को पाटना है। तथापितकनीकी जटिलताओं एवं निविदा संबंधी समस्याओं के कारण क्रय प्रक्रिया में विलंब हुआ हैजिससे कार्यान्वयन में देरी हुई है। 

          समिति सिफ़ारिश करती है कि एक सुव्यवस्थित क्रय ढाँचा तैयार किया जाएजिसमें बेहतर तकनीकी परीक्षणअग्रिम योजना तथा आपूर्ति समयसीमा की निगरानी सम्मिलित होताकि अंतिम समय की जल्दबाज़ी और प्रतिबद्ध देयताओं का संचय रोका जा सके। योजना एवं सामान्य बजटीय मदों के अंतर्गत सतत पूँजी आवंटन सुनिश्चित किया जाएताकि हथियारोंसंचार प्रणालियों, निगरानी उपकरणों एवं सुरक्षात्मक सामग्री का क्रमिक आधुनिकीकरण किया जा सके और विविध एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की परिचालन तत्परता को सुदृढ़ किया जा सके।

(पैरा 4.7.9)

दिल्ली पुलिस 

          समिति नोट करती है कि पुलिस बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी लैंगिकसंवेदनशील पुलिसिंग को प्रोत्साहित करनेजनविश्वास को सुदृढ़ करने तथा महिलाओं एवं कमजोर वर्गों के विरुद्ध अपराधों पर प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाने के लिए अत्यावश्यक है। समिति का मत है कि दिल्लीजो विविध एवं घनी आबादी वाली राष्ट्रीय राजधानी हैमें एक सुदृढ़ एवं संतुलित बल संरचना की आवश्यकता हैजिसमें सभी स्तरों पर पर्याप्त महिला कार्मिकों का प्रतिनिधित्व परिलक्षित हो। 

          अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालयदिल्ली पुलिस के साथ समन्वय करचरणबद्ध एवं समयबद्ध रोडमैप तैयार करे ताकि कुल स्वीकृत बल संरचना में महिला कार्मिकों की संख्या न्यूनतम 33 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सके। इसके लिए केंद्रित भर्ती अभियानपर्याप्त प्रशिक्षण क्षमताउपयुक्त अधोसंरचना (अलग आवास एवं सुविधाओं सहिततथा सक्षम सेवा शर्तों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि इस उद्देश्य की सतत प्राप्ति हो सके।

(पैरा 4.8.6)

          समिति अवलोकन करती है कि नागरिकों में पुलिस थानों पर जाने की हिचकिचाहट अक्सर पहुँच की कठिनाईपारदर्शिता की कमी तथा कार्मिकों के साथ संवाद में असुविधा की धारणा से उत्पन्न होती है। ऐसे अवरोध अपराध की रिपोर्टिंग को हतोत्साहित कर सकते हैंसामुदायिक भागीदारी को कमजोर कर सकते हैं तथा कानून प्रवर्तन में विश्वास को घटा सकते हैं। 

          अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि दिल्ली पुलिस नागरिककेंद्रित पुलिसिंग मॉडल अपनाएजिससे पुलिस थाने अधिक सुलभपारदर्शी और उत्तरदायी बन सकें। इस संदर्भ में मंत्रालय एवं दिल्ली पुलिस को सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन एवं अंगीकरण करना चाहिएजैसे कि पुलिस थानों पर समर्पित वनस्टॉप नागरिक सेवा डेस्क की स्थापनाजो आगंतुकों को पूछताछ एवं रिपोर्टिंग प्रक्रिया में सहायता प्रदान करेंस्थानीय समुदायों के साथ संपर्क एवं अनुवर्ती कार्य हेतु सामुदायिक संपर्क अधिकारी की नियुक्तिमहिलाओंबच्चों एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए निजी एवं सहायक स्थान उपलब्ध कराने हेतु पीड़ित सहायता कोने की स्थापनापरिभाषित समयसीमा के साथ संरचित प्रतिक्रिया एवं शिकायत निवारण तंत्र का संस्थापनतथा शिकायतकर्ताओं की प्रक्रियाओं एवं अधिकारों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने वाले सेवा घोषणापत्र का प्रमुखता से प्रदर्शन।

(पैरा 4.8.7)

          समिति सिफ़ारिश करती है कि मोबाइल एवं सामुदायिक पुलिसिंग पहलों का विस्तार किया जाएजिसके अंतर्गत बाज़ारों एवं आवासीय क्षेत्रों में नियमित सहभागिता सुनिश्चित की जाए। साथ हीनागरिकों की पहुँच को सुगम बनाने हेतु ऑनलाइन रिपोर्टिंग एवं अपॉइंटमेंट प्रणाली को सुदृढ़ किया जाएताकि शारीरिक रूप से थाने जाने की आवश्यकता न रहे। इसके अतिरिक्तपुलिस कार्मिकों को संचार कौशलसंवेदनशीलता तथा जनसंपर्क प्रबंधन में नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। सेवा प्रदायगी का मूल्यांकन एवं सुधार सुनिश्चित करने हेतु समयसमय पर सामुदायिक संतुष्टि सर्वेक्षण भी आयोजित किए जाएँ।

(पैरा 4.8.8)

          समिति समुक्ति करती है कि लापता व्यक्तियों से संबंधित मामलेविशेषकर महिलाओंबच्चों एवं कमजोर वर्गों केदिल्ली जैसे महानगर में गंभीर सामाजिक एवं सुरक्षा निहितार्थ रखते हैं। समिति का मत है कि ऐसे मामलों में योगदान देने वाले अंतर्निहित सामाजिकआर्थिकजनसांख्यिकीय एवं व्यवहारगत कारकों को समझने के लिए आँकड़ाआधारित एवं शोधउन्मुख दृष्टिकोण आवश्यक है। 

          अत: समिति सिफ़ारिश करती है कि दिल्ली पुलिस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के सहयोग से एक व्यापक समाजशास्त्रीय अध्ययन करेताकि लापता व्यक्तियों के मामलों के पैटर्न एवं मूल कारणों का विश्लेषण किया जा सके। अध्ययन में दिल्ली में लापता व्यक्तियों की दर का अन्य महानगरों तथा चयनित अंतरराष्ट्रीय शहरों के साथ तुलनात्मक विश्लेषण भी सम्मिलित किया जाएजिससे सर्वोत्तम प्रथाओं एवं तंत्रगत कमियों की पहचान हो सके। ऐसे अध्ययन के निष्कर्षों का उपयोग नीतिगत निर्माणनिवारक रणनीतियोंबेहतर ट्रैकिंग तंत्र तथा सामुदायिकआधारित हस्तक्षेपों के लिए किया जा सकता है।

(पैरा 4.8.9)

इसके अलावा, समिति समुक्ति करती है किभारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बी.एन.एस.एस.) के अंतर्गत प्ली बार्गेनिंग संबंधी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन मामलों की लंबित संख्या को कम करनेलघु अपराधों के शीघ्र निस्तारण तथा जाँच एजेंसियोंन्यायालयों एवं सुधारात्मक संस्थानों पर बोझ घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। समिति यह भी समुक्ति करती है कि प्ली बार्गेनिंग तंत्र का संरचित उपयोग मामलों के शीघ्र समाधान, विचाराधीन कैदियों की संख्या में कमी तथा आपराधिक न्याय प्रणाली की दक्षता में सुधार में योगदान दे सकता है।

          अत: समिति सिफ़ारिश करती है कि दिल्ली पुलिस जाँच अधिकारियों एवं पर्यवेक्षण अधिकारियों को बी.एन.एस.एसके अंतर्गत प्ली बार्गेनिंग की परिधि एवं प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने हेतु सक्रिय कदम उठाए। अभियोजन एवं विधिक सेवा प्राधिकरणों के साथ समन्वय कर जागरूकता उपाय किए जाएँताकि पात्र अभियुक्तों की सूचित भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्तप्ली बार्गेनिंग के माध्यम से निस्तारित मामलों की समयसमय पर समीक्षा की जाए, ताकि लंबित मामलों एवं कारावास संबंधी बोझ को कम करने में इसकी प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके।

(पैरा 4.8.10)

          समिति यह भी नोट करती है कि दिल्ली पुलिस द्वारा आधुनिकीकरण एवं स्मार्ट पुलिसिंग पहलों के अंतर्गत सी.सी.टी.वीकैमरोंबॉडीवॉर्न कैमरोंयातायात निगरानी प्रणालियों, आई..टी. सक्षम उपकरणों तथा एकीकृत संचार प्लेटफॉर्मों की बढ़ती तैनाती की जा रही है। समिति ने इन तकनीकी प्रगतियों की सराहना करते हुए यह भी रेखांकित किया कि दुरुपयोगअनधिकृत पहुँचडेटा उल्लंघन तथा संवेदनशील परिचालन एवं व्यक्तिगत जानकारी के समझौते को रोकने हेतु सुदृढ़ डेटा संरक्षण एवं साइबर सुरक्षा उपाय अत्यावश्यक हैं। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि दिल्ली पुलिस एक व्यापक डेटा सुरक्षा ढाँचा अपनाएजिसमें एन्क्रिप्शन मानकसुरक्षित डेटा भंडारणनियंत्रित पहुँच प्रोटोकॉलसमयसमय पर साइबर सुरक्षा ऑडिट तथा निगरानी प्रणालियों का वास्तविक समय पर्यवेक्षण सम्मिलित हो।

(पैरा 4.8.11)

          समिति सिफ़ारिश करती है कि निजी व्यक्तियों एवं प्रतिष्ठानों द्वारा स्थापित किए जा रहे सी.सी.टी.वीप्रणालियों हेतु यह सुनिश्चित किया जाए कि उपकरण केवल उन्हीं निर्माताओं से खरीदे जाएँ जो अधिसूचित डेटा सुरक्षाएन्क्रिप्शन तथा सुरक्षित सर्वर मानकों का अनुपालन करते हों। इसके अतिरिक्तसुरक्षित प्रणालियों को अपनाने तथा दुरुपयोगहैकिंग अथवा निगरानी डेटा तक अनधिकृत पहुँच को रोकने के लिए समयसमय पर परामर्श एवं जागरूकता अभियान भी जारी किए जाएँ।

(पैरा 4.8.12)

दिल्ली में यातायात प्रबंधन

          समिति नोट करती है कि दिल्ली में 62 प्रमुख यातायात जाम बिंदुओं की पहचान की जा चुकी है तथा नागरिक एजेंसियों के सहयोग से सुधारात्मक उपाय किए जा रहे हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि सभी पहचाने गए हॉटस्पॉट्स के लिए प्रत्येक हितधारक एजेंसी की स्पष्ट जिम्मेदारियों के साथ एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए।इसके अतिरिक्तप्रगति की सार्वजनिक रिपोर्टिंग समयसमय पर की जाए तथा औसत यात्रा समयकतार की लंबाई और दुर्घटना दर में कमी जैसे मापनीय संकेतकों को शामिल किया जाएताकि हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके। यातायात प्रबंधन रणनीतियों में दीर्घकालिक शहरी गतिशीलता दृष्टिकोण को भी सम्मिलित किया जाएजिसमें शहरी नियोजन प्राधिकरणों के साथ समन्वय सुनिश्चित हो। सतत डीकंजेशन के लिए एक ट्रैफिक फ्लाइंग स्क्वाड प्रणाली भी स्थापित की जाए, जिसे पीक आवर्स के दौरान निर्दिष्ट बिंदुओं पर तैनात किया जा सके।

(पैरा 4.9.5)

          समिति समुक्ति करती है कि कार्यालय परिसरोंन्यायालयोंअस्पतालों तथा वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के आसपास अनियंत्रित पार्किंग से यातायात जाम एवं सड़क अवरोध की स्थिति गंभीर रूप से बढ़ती है। समिति सिफ़ारिश करती है कि दिल्ली पुलिसनगर निगम एवं शहरी विकास प्राधिकरणों के साथ समन्वय कर एक व्यापक पार्किंग प्रबंधन रणनीति तैयार करे। इसमें सड़कों एवं आवासीय क्षेत्रों में अवैध पार्किंग के विरुद्ध सख्त प्रवर्तननिर्धारित पार्किंग क्षेत्रों को बढ़ावा देना तथा प्रौद्योगिकीसक्षम पार्किंग निगरानी प्रणालियों का उपयोग सम्मिलित हो। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को यह अनिवार्य किया जाए कि वे पर्याप्त ऑफस्ट्रीट पार्किंग सुविधाएँ सुनिश्चित करें, ताकि सार्वजनिक सड़कों पर वाहनों का फैलाव कम किया जा सके।

(पैरा 4.9.6)

          समिति चिंता के साथ नोट करती है कि राष्ट्रीय राजधानी में अनावश्यक हॉर्न बजाने की बढ़ती घटनाएँ ध्वनि प्रदूषण एवं जनअसुविधा का कारण बन रही हैंविशेषकर आवासीय क्षेत्रों तथा विद्यालयोंअस्पतालों एवं न्यायालयों के आसपास। समिति सिफ़ारिश करती है कि दिल्ली पुलिस हॉर्न एवं प्रेशर हॉर्न के उपयोग से संबंधित प्रावधानों के प्रवर्तन को और अधिक सख्ती से लागू करेविशेषकर अधिसूचित नोहॉर्न ज़ोन” में। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि आदतन एवं गैरआवश्यक हॉर्न बजाने को हतोत्साहित करने हेतु सतत संवेदनशीलता एवं जनजागरूकता अभियान चलाए जाएँ तथा अनुपालन सुनिश्चित करने एवं जिम्मेदार सड़क व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकीसक्षम प्रवर्तन उपायों का भी परीक्षण एवं अंगीकरण किया जाए।

(पैरा 4.9.7)

समिति यह भी नोट करती है कि मोटरसाइकिलों में संशोधित अथवा गैरमानक साइलेंसर लगाए जाने की घटनाएँ बढ़ रही हैंजो अत्यधिक शोर उत्पन्न करती हैं और ध्वनि प्रदूषण का कारण बनती हैं। इससे यात्रियों एवं निवासियों को असुविधा तथा अशांति का सामना करना पड़ता है। समिति सिफ़ारिश करती है कि दिल्ली पुलिस ऐसे उल्लंघनों के विरुद्ध प्रवर्तन को सुदृढ़ करे। इसके लिए नियमित जाँच अभियान चलाए जाएँकठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा परिवहन प्राधिकरणों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्धारित वाहन शोर मानकों का अनुपालन हो। 

(पैरा 4.9.8)

          समिति समुक्ति करती है कि यातायात सिग्नल पर भीख माँगने की घटनाएँ न केवल सुरक्षा जोखिम उत्पन्न करती हैं बल्कि यातायात प्रवाह को भी बाधित करती हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि दिल्ली पुलिस सामाजिक कल्याण विभागों एवं नागरिक समाज संगठनों के साथ समन्वय कर इस समस्या का समाधान मानवीय एवं पुनर्वासउन्मुख दृष्टिकोण से करे। प्रमुख चौराहों पर सतत प्रवर्तन को पुनर्वासपरामर्श तथा आजीविका सहायता पहलों के साथ जोड़ा जाए, ताकि समस्या के मूल कारणों का समाधान किया जा सके।

(पैरा 4.9.9)

केंद्रीय पुलिस संगठन

समिति नोट करती है कि मादक पदार्थों की तस्करी मार्ग भूमि एवं तटीय सीमाओं के संवेदनशील हिस्सों का बढ़ते हुए दुरुपयोग कर रहे हैं। मादक पदार्थों की तस्करी के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप तथा इसके संगठित अपराध एवं आंतरिक सुरक्षा चिंताओं से जुड़े होने को ध्यान में रखते हुए समिति सिफ़ारिश करती है कि नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (एन.सी.बी.) सीमा राज्यों की पुलिस बलों तथा अन्य सीमा सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करेताकि संवेदनशील सीमा जिलों में सतत क्षेत्रीय प्रभुत्व एवं खुफ़ियाआधारित अवरोधन सुनिश्चित किया जा सके। समिति आगे सिफ़ारिश करती है कि संयुक्त कार्यबलवास्तविक समय खुफ़िया साझाकरण तंत्र तथा समन्वित क्षेत्रीय अभियानों को सम्मिलित किया जाएताकि मादक पदार्थों एवं मन:प्रभावी पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्रोत एवं पारगमन बिंदुओं पर ही बाधित किया जा सके। 

(पैरा 4.10.14)

समिति समुक्ति करती है कि उच्च जोखिम वाले मादक पदार्थविरोधी अभियानों में संलग्न अग्रिम पंक्ति के प्रवर्तन अधिकारियों को उपयुक्त मान्यता एवं प्रेरणा मिलनी चाहिए। समिति सिफ़ारिश करती है कि महत्वपूर्ण जब्ती अभियानों में संलग्न अधिकारियों एवं टीमों के लिए संरचित एवं पारदर्शी पुरस्कार तंत्र को सुदृढ़ किया जाएजो आवश्यक सुरक्षा एवं जवाबदेही मानकों के अधीन हो। ऐसे प्रोत्साहन मनोबल को बढ़ानेसक्रिय प्रवर्तन को प्रोत्साहित करने तथा सरकार की मादक पदार्थों के प्रति शून्यसहनशीलता नीति को सुदृढ़ करने में सहायक होंगे।

(पैरा 4.10.15)

 समिति समुक्ति करती है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एन.आई..) में 1,901 स्वीकृत पदों के विरुद्ध वर्तमान में 379 पद रिक्त हैं। समिति का मत है कि ऐसी रिक्तियाँ परिचालन क्षमताजाँच समयसीमा तथा क्षेत्रीय प्रवर्तन की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती हैं। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय प्रत्यक्ष भर्तीप्रतिनियुक्ति एवं पदोन्नति के माध्यम सेजहाँ लागू होपरिभाषित समयसीमा के भीतर रिक्त पदों को शीघ्र भरने के कदम उठाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि मानवबल योजना को प्रस्तावित क्षेत्रीय विस्तार के अनुरूप बनाया जाएताकि नवनिर्मित ज़ोन में पर्याप्त स्टाफिंग सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 4.10.16  )

 समिति नोट करती है कि बी.पी.आरएंड डीने न्याय संहिताओं पर आपराधिक न्याय प्रणाली के पाँचों स्तंभों के अधिकारियों हेतु प्रशिक्षण पहलें की हैं।भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.)भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बी.एन.एस.एस.) तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम के रूपांतरणकारी स्वरूप को ध्यान में रखते हुए समिति का मत है कि पुलिस कर्मियों का सतत एवं संरचित क्षमताविकास सभी स्तरों पर आवश्यक है।

          अत: समिति सिफ़ारिश करती है कि बी.पी.आरएंड डीनए आपराधिक कानूनों पर विशेषीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक विस्तारित एवं संस्थागत करेजिसमें जाँच प्रक्रियाएँसाक्ष्य संकलनडिजिटल दस्तावेज़ीकरणफॉरेंसिक एकीकरण तथा संशोधित विधिक ढाँचे के अंतर्गत न्यायिक प्रक्रिया पर विशेष बल दिया जाए। पुनश्चर्या पाठ्यक्रमपरिदृश्यआधारित सिमुलेशन तथा क्षेत्रीय व्यावहारिक मॉड्यूल भी सम्मिलित किए जाएँ, ताकि राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में समान समझ एवं अनुप्रयोग सुनिश्चित हो सके।

          तेज़ी से विकसित हो रहे अपराध स्वरूपविशेषकर साइबरसक्षम एवं प्रौद्योगिकीआधारित अपराधों को ध्यान में रखते हुए समिति आगे सिफ़ारिश करती है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (.आई.)बिग डेटा एनालिटिक्ससाइबर अपराध जाँचडिजिटल फॉरेंसिक तथा प्रौद्योगिकीआधारित पुलिसिंग पर समर्पित पाठ्यक्रम पुलिस प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में सम्मिलित एवं मुख्यधारा में लाए जाएँ। उन्नत प्रमाणन कार्यक्रम तथा तकनीकी संस्थानों के साथ साझेदारी भी की जाएताकि अधिकारियों को आधुनिक पुलिसिंग हेतु आवश्यक विश्लेषणात्मक एवं तकनीकी दक्षताओं से लैस किया जा सके। प्रशिक्षण परिणामों का समयसमय पर मूल्यांकन किया जाए, ताकि प्रभाव का आकलन हो सके और उभरती हुई कौशल आवश्यकताओं की पहचान की जा सके।

(पैरा 4.10.17)

अपराधविज्ञान एवं न्यायवैज्ञानिक विज्ञान

समिति नोट करती है कि संशोधित अनुमान 2025–26 में ₹99.57 करोड़ से बढ़कर बजट अनुमान 2026–27 में ₹132.89 करोड़ का आवंटन किया गया है तथा वर्तमान में कार्यरत 07 केंद्रीय न्यायवैज्ञानिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (सी.एफ.एस.एल.) के अतिरिक्त 08 नई प्रयोगशालाओं की स्थापना का प्रस्ताव है। मामलों की बढ़ती संख्या एवं जटिलताविशेषकर नए आपराधिक कानूनों के अंतर्गत वैज्ञानिक साक्ष्यों पर अधिक निर्भरता को ध्यान में रखते हुए समिति सिफ़ारिश करती है कि प्रस्तावित सी.एफ.एस.एलकी स्थापना एवं परिचालन समयबद्ध ढंग से किया जाए। अधोसंरचना निर्माण के साथ पर्याप्त मानवबल की नियुक्ति एवं उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएताकि प्रयोगशालाएँ शीघ्र पूर्णतः कार्यशील हो सकें। स्वीकृत पदों पर भर्ती शीघ्र की जाएजिससे दीर्घकालिक संस्थागत क्षमता सुनिश्चित हो। मंत्रालय को एक संरचित कैडर प्रबंधन एवं करियर प्रगति ढाँचा तैयार करने की भी सिफ़ारिश की जाती हैताकि योग्य न्यायवैज्ञानिक पेशेवरों को आकर्षित एवं बनाए रखा जा सके। 

(पैरा 4.11.6)

          समिति प्रयोगशालाओं में उन्नत डी.एन.प्रणालीसाइबर न्यायवैज्ञानिक उपकरण तथा आधुनिक डेटा विश्लेषण सॉफ़्टवेयर के तकनीकी उन्नयन की सराहना करती है। डिजिटल एवं साइबरसक्षम अपराधों की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए समिति सिफ़ारिश करती है कि न्यायवैज्ञानिक प्रयोगशालाओं को सुरक्षित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से जाँच एवं अभियोजन प्रणालियों के साथ पूर्णतः एकीकृत किया जाएताकि साक्ष्यों का निर्बाध हस्तांतरण एवं समयबद्ध प्रतिवेदन सुनिश्चित हो सके।राष्ट्रीय न्यायवैज्ञानिक डेटा केंद्र (एन.एफ.डी.सी.) तथा शेष राष्ट्रीय साइबर न्यायवैज्ञानिक प्रयोगशालाओं (एन.सी.एफ.एल.) के परिचालन पर निकट निगरानी रखी जाएताकि साइबर एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के निपटान में उनकी उपयोगिता अधिकतम हो। बढ़ी हुई वित्तीय आवंटन से न्यायवैज्ञानिक लंबित मामलों में मापनीय कमी तथा प्रतिवेदन की शीघ्रता सुनिश्चित होनी चाहिए। औसत प्रतिवेदन प्रस्तुतिकरण समयमामलों के निपटान दर तथा आधुनिक उपकरणों के उपयोग जैसे प्रदर्शन मानकों की समयसमय पर समीक्षा की जाए। दोषसिद्धि दर को बढ़ाने में डी.एन.एवं साइबर न्यायवैज्ञानिक क्षमताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए इन क्षेत्रों को विशेष बल दिया जाए।

(पैरा 4.11.7)

सीमा सुरक्षा 

समिति बजट अनुमान 2026–27 में सीमा सुरक्षा के अंतर्गत पर्याप्त पूँजी आवंटन को नोट करती है और समुक्ति करती है कि कई सीमाओं पर बाड़बंदीबाढ़ प्रकाश व्यवस्था एवं सीमा चौकियों (बी..पी.) के निर्माण में प्रगति हुई हैकिंतु कुछ घटकोंविशेषकर भारतपाकिस्तान एवं भारतम्यांमार सीमाओं पर सड़कों के निर्माण में अपेक्षाकृत धीमी प्रगति हुई है। समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय लंबित सड़क एवं अधोसंरचना घटकों के लिए समयबद्ध पूर्णता रोडमैप तैयार करेविशेषकर रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों मेंतथा नियमित प्रगति अद्यतन प्रस्तुत करे। 

(पैरा 4.12.10)

समिति समुक्ति करती है कि दुर्गम भूभागनदीय क्षेत्रप्रतिकूल मौसम परिस्थितियाँ एवं बिना बाड़ वाले अंतराल जैसी परिचालन चुनौतियाँ प्रभावी सीमा प्रबंधन को बाधित करती हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि अधोसंरचना विकासविशेषकर पार्श्व संपर्कहेलीपैड समर्थनसंचार उन्नयन एवं अक्षय ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति को दूरस्थ एवं उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में प्राथमिकता दी जाएताकि सीमा सुरक्षा बलों की गतिशीलता एवं परिचालन दक्षता बढ़ सके। 

(पैरा 4.12.11)

समिति ने जम्मू एवं कश्मीर के सीमा जिलों में 9,663 बंकरों के निर्माण तथा प्रभावित नागरिकों को क्षतिपूर्ति एवं अनुग्रह राहत प्रदान किए जाने का संज्ञान लिया। समिति सिफ़ारिश करती है कि सीमा गाँवों में नागरिक सुरक्षा तैयारियों का समयसमय पर आकलन किया जाएताकि सुरक्षात्मक अधोसंरचना की पर्याप्तता एवं राहत सहायता का समय पर वितरण सुनिश्चित हो सके। 

(पैरा 4.12.12)

समिति ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर ड्रोन देखे जाने एवं घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं तथा उसके परिणामस्वरूप हुई जब्ती का अवलोकन किया। समिति सिफ़ारिश करती है कि ड्रोनरोधी क्षमताओंजिनमें पहचाननिष्क्रियकरण एवं न्यायवैज्ञानिक विश्लेषण सम्मिलित हैंको उन्नत तकनीकों के समावेश एवं अंतरएजेंसी समन्वय तंत्र को सुदृढ़ कर और अधिक मजबूत किया जाए।

(पैरा 4.12.13)

       समिति समुक्ति करती है कि भारतम्यांमार एवं भारतबांग्लादेश सीमाओं पर अवैध प्रवासनतस्करी एवं सीमापार अपराध चिंता का विषय बने हुए हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि राज्य पुलिस एवं केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वित खुफ़िया साझाकरण ढाँचे को सुदृढ़ किया जाए तथा सीमा जिलों में मानव तस्करी विरोधी इकाइयों की क्षमता को बढ़ाया जाए। 

(पैरा 4.12.14)

महिला सुरक्षा हेतु योजनाएँ

          समिति इस बात की सराहना करती है कि मंत्रालय राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में अन्वेषण अधिकारियोंअभियोजकों तथा चिकित्सकों के प्रशिक्षण एवं क्षमताविकास कार्यक्रमों को प्रोत्साहित कर रहा हैताकि वे डी.एन.साक्ष्यों के उचित संकलनभंडारण एवं प्रबंधन के ज्ञान एवं कौशल से लैस हों। यह साक्ष्य महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में दोषसिद्धि दर सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। 

          समिति सिफ़ारिश करती है कि इन पहलों के अतिरिक्त एक सुव्यवस्थित प्रशिक्षण एवं क्षमताविकास कार्यक्रम तैयार किया जाएजिसमें विधिक ज्ञान, संवेदनशीलता प्रशिक्षण तथा व्यावहारिक कौशल का समावेश हो। इससे पुलिस कर्मी ऐसे अपराधों से प्रभावी एवं दक्षतापूर्वक निपट सकेंगे और पीड़िताओं की सुरक्षा एवं न्याय सुनिश्चित किया जा सकेगा।

(पैरा 4.13.6)

अंतरसंचालित आपराधिक न्याय प्रणाली (आई.सी.जे.एस.)

          समिति समुक्ति करती है कि यद्यपिआई.सी.जे.एस2.0 का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली के हितधारकों के बीच अंतरसंचालन एवं पारदर्शिता को बढ़ाना हैतथापि पीड़ित अपने मामले की प्रगति संबंधी जानकारी हेतु अभी भी मध्यस्थों पर निर्भर रहता है। पीड़ितकेंद्रित न्याय वितरण को सुदृढ़ करने के लिए समिति सिफ़ारिश करती है कि एक सुरक्षित डिजिटल इंटरफ़ेस विकसित किया जाएजिससे पीड़ित सीमित मामले की स्थिति संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकेजैसेजाँच की अवस्थाआरोपपत्र दाखिल होनान्यायालय में सूचीबद्धता तथा समन की सेवा। यह पहुँच प्रमाणित पहचान सत्यापन तंत्रोंजैसे आधारआधारित या पैनआधारित सत्यापन के माध्यम से प्रदान की जा सकती हैबशर्ते लागू डेटा संरक्षण एवं गोपनीयता मानकों का अनुपालन सुनिश्चित हो। पहुँच प्रोटोकॉल सावधानीपूर्वक इस प्रकार तैयार किए जाएँ कि संवेदनशील जाँच सामग्री का प्रकटीकरण न होगवाहों की गोपनीयता सुरक्षित रहे तथा चल रही कार्यवाहियों की अखंडता बनी रहे। यह उपाय पारदर्शिता को बढ़ाएगा, पीड़ितों के लिए प्रक्रियागत अनिश्चितता को कम करेगा तथा न्याय वितरण प्रणाली में जनविश्वास को सुदृढ़ करेगा।

(पैरा 4.14.5)

कारागारों का आधुनिकीकरण

          समिति नोट करती है किकारागारों के आधुनिकीकरण परियोजना का मुख्य ध्यान उच्च सुरक्षा कारागारों की स्थापना एवं सुरक्षा अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण पर है। यद्यपि उच्च जोखिम वाले अपराधियों की सुरक्षित अभिरक्षा आवश्यक हैसमिति ने देखा कि भीड़भाड़पुरानी अधोसंरचना तथा मौजूदा कारागारों में जीवनस्थितियाँ अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।

          समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से परामर्श कर मौजूदा कारागार अधोसंरचना के उन्नयन हेतु आधुनिकीकरण समर्थन बढ़ाने की व्यवहार्यता का परीक्षण करेजिसमें स्वच्छतास्वास्थ्य सुविधाओं, डिजिटल अभिलेख प्रबंधन तथा पृथक्करण सुविधाओं में सुधार सम्मिलित हो। सुरक्षा एवं मानवीय अभिरक्षा स्थितियों दोनों को संबोधित करने वाला संतुलित दृष्टिकोण समग्र कारागार प्रशासन एवं आंतरिक सुरक्षा उद्देश्यों को सुदृढ़ करेगा।

(पैरा 4.15.4)

समिति नोट करती है कि कारागार जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा विचाराधीन कैदियों का है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि विचाराधीन एवं दोषसिद्ध कैदियों के बीच उपयुक्त पृथक्करण सुनिश्चित किया जाए, जो स्थापित विधिक एवं सुधारात्मक सिद्धांतों के अनुरूप हो। कारागार आधुनिकीकरण के दौरान राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अधोसंरचना योजना में प्राथमिकता देनी चाहिएजिससे इन श्रेणियों के लिए पृथक आवास एवं उपयुक्त अभिरक्षा व्यवस्था उपलब्ध हो सके। ऐसे उपाय विचाराधीन कैदियों के अधिकारों की रक्षा करेंगेदोषसिद्ध अपराधियों के नकारात्मक प्रभाव के जोखिम को कम करेंगे तथा कारागार प्रबंधन एवं अनुशासन में सुधार में योगदान देंगे। 

(पैरा 4.15.5)

 गरीब कैदियों को सहायता

          समिति नोट करती है कि गरीब कैदियों को सहायता योजना उन विचाराधीन कैदियों को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान करती है जो जमानत राशि जमा करने में असमर्थ हैं। तथापियोजना के प्रारंभ से अब तक लाभार्थियों की संख्या सीमित रही है। समिति संशोधित दिशानिर्देशों एवं मानक संचालन प्रक्रिया की सराहना करती हैजिनसे प्रत्येक चरण में परिभाषित समयसीमाएँ सुनिश्चित हुई हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि इस योजना के संबंध में अधिक जागरूकता उत्पन्न की जाएविशेषकर जेल प्राधिकरणोंविधिक सहायता संस्थानों एवं पात्र कैदियों के बीच, ताकि योग्य लाभार्थी सूचना के अभाव में वंचित न रह जाएँ।

(पैरा 4.16.4)

जीवंत ग्राम कार्यक्रम

समिति जीवंत ग्राम कार्यक्रम  (वी.वी.पी.) की सराहना करती हैजो सीमावर्ती गाँवों के चरणबद्ध अधोसंरचना सुदृढ़ीकरणआजीविका सृजन एवं संपर्क विस्तार के माध्यम से व्यापक विकास का एक महत्वपूर्ण उपक्रम है। समिति ने अवलोकन किया कि वी.वी.पी.–I के अंतर्गत सड़क संपर्कपर्यटन अधोसंरचना एवं अभिसरणआधारित विकासात्मक गतिविधियों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है तथा वी.वी.पी.–II ने अतिरिक्त सीमा क्षेत्रों तक कवरेज का विस्तार किया है। कार्यक्रम का सामाजिकआर्थिक लचीलापन सुदृढ़ करनेपलायन रोकने एवं सीमा जनसंख्या को राष्ट्रीय मुख्यधारा में समाहित करने पर बल देना प्रशंसनीय है और व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप है। समिति सिफ़ारिश करती है कि वी.वी.पी.–II के अंतर्गत आजीविका पहलों को स्थानीय भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं के साथ निकटता से जोड़ा जाएजिसमें सीमा पर्यटनकृषिआधारित उद्योगहस्तशिल्प एवं पारिस्थितिक पर्यटन को बढ़ावा देना सम्मिलित हो। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को बाज़ार संपर्क के साथ एकीकृत किया जाएताकि सतत आय सृजन सुनिश्चित हो सके। सीमा सुरक्षा बलों एवं सामुदायिक संस्थाओं के साथ समन्वय को भी सुदृढ़ किया जाए, जिससे सहभागी सुरक्षा को बढ़ावा मिले और सीमा प्रबंधन में साझा उत्तरदायित्व की भावना विकसित हो।

(पैरा 4.17.7 )

पुलिस बलों का आधुनिकीकरण

          समिति सिफ़ारिश करती है कि आधुनिकीकरण पहलों को उभरती हुई सुरक्षा चुनौतियों जैसे साइबर अपराधवित्तीय धोखाधड़ी एवं अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों के अनुरूप बनाया जाएताकि पुलिस बल केवल पारंपरिक कानूनव्यवस्था संबंधी कर्तव्यों के लिए ही नहींबल्कि प्रौद्योगिकीआधारित एवं खुफ़ियानिर्देशित पुलिसिंग के लिए भी सक्षम हो सकें। इससे बदलते सुरक्षा वातावरण में पुलिस बलों की दक्षता एवं प्रभावशीलता सुनिश्चित होगी। 

(पैरा 4.18.2)

मांग संख्या 52 से 59 – संघ राज्य क्षेत्र – परिचय

          समिति ने मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए समग्र बजटीय प्रावधानों तथा व्यय के विवरण का परीक्षण करने पर यह समुक्‍ति किया कि अधिकांश केंद्र शासित प्रदेशों ने संशोधित अनुमान  2025–26 के अंतर्गत किए गए आवंटन के सापेक्ष निधियों के उपयोग के संबंध में संतोषजनक प्रदर्शन किया है। यद्यपि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूहदादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव तथा लक्षद्वीप में निधियों का उपयोग तुलनात्मक रूप से कम रहा हैतथापि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह तथा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव ने संशोधित अनुमान  2025–26 के अंतर्गत किए गए आवंटन के सापेक्ष क्रमशः लगभग 70 प्रतिशत तथा 77 प्रतिशत निधियों का उपयोग करने में सफलता प्राप्त की है। समिति आवंटित निधियों के दक्षतापूर्ण उपयोग के लिए संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करती है।

(पैरा 5.1.3)

समिति यह भी नोट करती है कि इन केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुख क्षेत्रों के लिए बजट अनुमान  2026–27 में पिछले वर्ष की तुलना में आवंटन में वृद्धि की गई है। समिति सिफारिश करती है कि इन बजटीय प्रावधानों के परिणामस्वरूप योजनाओं एवं परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तथा आवंटित निधियों का वित्तीय वर्ष के भीतर पूर्ण एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नियमित रूप से निगरानी की जाए।

(पैरा 5.1.4)

मांग संख्या 52 – अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

समिति नोट करती है कि संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा ग्रामीण सड़कों के सुधार, बसों की खरीदबंदरगाहों तथा जहाजरानी अवसंरचना के रखरखाव एवं सुदृढ़ीकरणपेयजल आपूर्तिविद्युत उत्पादनस्वास्थ्य सुविधाओं तथा विद्यालयी अवसंरचना के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है। ये योजनाएँ संघ राज्य क्षेत्र के अवसंरचनात्मक विकास के साथसाथ स्थानीय जनसंख्या के जीवन को सुगम बनाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। समिति यह भी समुक्‍ति करती है कि किसी भी योजना के क्रियान्वयन की दिशा में बजट का आवंटन प्रथम चरण होता हैकिन्तु यदि परियोजनाओं की स्थिति की नियमित एवं आवधिक निगरानी नहीं की जाती हैतो बजट का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता। अतः समिति सिफारिश करती है कि संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन बजट अनुमान  2026–27 में सम्मिलित योजनाओं एवं परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करे तथा वित्तीय वर्ष के भीतर आवंटित संपूर्ण राशि का उपयोग किया जाए।

(पैरा 5.2.4)

 

हवाई संपर्क

समिति ने सदस्यों द्वारा उठाई गई उन चिंताओं पर भी विचारविमर्श किया जिनमें संघ राज्य क्षेत्र के लिए हवाई किराए के अधिक होने तथा वाणिज्यिक सीटों की सीमित उपलब्धता का उल्लेख किया गया था। समिति सिफारिश करती है कि इन मार्गों पर बड़े विमानों की तैनाती की जाएजिससे यात्री क्षमता में वृद्धि हो तथा हवाई किराए में कमी लाई जा सके। साथ हीयूडीएएन योजना के अंतर्गत स्वीकृत  को सुनिश्चित किया जाएजिससे संघ राज्य क्षेत्र के दूरस्थ द्वीपों तक अंतिम मील संपर्क में सुधार हो सके। समिति यह भी सिफारिश करती है कि उपयुक्त किराया युक्तिकरण उपायों की संभावनाओं का अन्वेषण किया जाए, ताकि निवासियों एवं पर्यटकों के लिए हवाई यात्रा सुलभ एवं किफायती बनी रहे।

(पैरा 5.2.8)

 

पर्यटन

समिति सिफारिश करती है कि पीपीपी मॉडल के अंतर्गत पर्यटन परियोजनाएँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त पर्यावरणीय तथा निर्माण मानकों का पालन करें। परियोजनाओं के क्रियान्वयन से पूर्व समग्र पर्यावरणीय प्रभाव आकलन तथा वहन क्षमता अध्ययन कराया जाए। साथ हीसमझौतों में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन तथा कौशल विकास के प्रावधान शामिल किए जाएँताकि पर्यटन विकास का लाभ स्थानीय जनसंख्या को प्राप्त हो सके। समिति यह भी सिफारिश करती है कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के दौरान पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने हेतु एक प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।

(पैरा 5.2.11)

समिति सिफारिश करती है कि पर्यटन क्षेत्र में विकास का संघ राज्य क्षेत्र की राजस्व सृजन क्षमता तथा स्थानीय जनसंख्या के सामाजिकआर्थिक विकास पर पड़ने वाले प्रभाव का समुचित आकलन किया जाए। संघ राज्य क्षेत्र में होने वाली आर्थिक प्रगति का लाभ स्थानीय निवासियों तक भी पहुँचना चाहिएक्योंकि वे भी इसके लिए समान रूप से पात्र हैं। समिति यह भी सिफारिश करती है कि संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन उन द्वीपों में पर्यटन संबंधी गतिविधियों के विकास की संभावनाओं का अन्वेषण करे जो वर्तमान में निर्जन हैंकिन्तु जिनमें सुंदर समुद्र तट तथा पारिस्थितिकपर्यटन की पर्याप्त संभावनाएँ मौजूद हैं, और उन्हें संघा राज्य क्षेत्रों बढ़ती पर्यटक संख्या को ध्यान में रखते हुए पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाए।

(पैरा 5.2.12)

 

 

पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता

समिति सिफारिश करती है कि पाइपलाइन पुनर्वास, निस्पंदन अवसंरचना और जल भंडारण क्षमता वृद्धि से संबंधित कार्यों के लिए निर्धारित समयसीमा का पालन किया जाए। आपूर्ति की विश्वसनीयता और जल गुणवत्ता के मानकों का समयसमय पर आकलन किया जाना चाहिए ताकि विशेषकर दूरस्थ और जलसंकटग्रस्त द्वीपों में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 5.2.15)

आपदा तत्परता 

समिति का मत है कि ऐसे द्वीपीय क्षेत्र में, जहाँ निकासी के लिए समय सीमित होता हैप्रारंभिक चेतावनियों का समय पर प्रसार और समुदाय की तैयारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। समिति सिफारिश करती है कि सभी संवेदनशील तटीय स्थानों तक स्वचालित सायरन कवरेज का विस्तार किया जाएविभिन्न संचार माध्यमों में चेतावनी प्रसार के समय का नियमित ऑडिट किया जाए तथा चेतावनी अवसंरचना के लिए रखरखाव नयाचार स्थापित किए जाएँ। निरंतर तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए नियमित मॉक ड्रिल तथा क्षमताविकास कार्यक्रम जारी रखे जा सकते हैं।

(पैरा 5.2.18)

वन, वन्यजीव और जैव विविधता संरक्षण

 

समिति ने नोट किया कि द्वीपों में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील तटीय और समुद्री पारितंत्र मौजूद हैं, जिनमें प्रवाल भित्तियाँमैंग्रोव वन और संकटग्रस्त प्रजातियों के घोंसले शामिल हैं। बढ़ते पर्यटनअवसंरचना विस्तार और जलवायु संबंधी संवेदनशीलताओं को देखते हुए, सतत संरक्षण प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

(पैरा 5.2.24)

समिति सिफारिश करती है कि आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा के उपायों को मजबूत किया जाए, जिसके लिए समयसमय पर वैज्ञानिक जनसंख्या मूल्यांकनघोंसले स्थलों की निगरानी और अतिक्रमण तथा अनियंत्रित गतिविधियों पर सख्त प्रवर्तन किया जाए। संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनपर्यावरणवन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा अन्य संबंधित प्राधिकरणों के बीच अंतरएजेंसी समन्वय संस्थागत रूप में स्थापित किया जाना चाहिए ताकि कार्यान्वयन सुसंगत हो। समुदाय आधारित संरक्षण पहल और जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार किया जाना चाहिए ताकि द्वीपों की दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 5.2.25)

कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ

समिति स्पाइस प्रवाह’ पहल की सराहना करती है और सिफारिश करती है कि कृषि मंत्रालय के साथ तकनीकी समर्थन, द्वीपों में मसाला प्रसंस्करण और ब्रांडिंग यूनिटों की स्थापना और जीआई टैग प्रचार व निर्यात बाजार संबंधी लिंक स्थापित करने के लिए समन्वय किया जाए ताकि मूल्य सृजन और किसानों की आय अधिकतम हो।

(पैरा 5.2.29)

समिति ने नोट किया कि भारत सरकार ने अंडमान और निकोबार द्वीपों में एक एकीकृत मछली पकड़ने वाले बंदरगाह परियोजना 199 करोड़ की अनुमानित लागत पर मंजूरी दी है। समिति यह भी गौर करती है कि द्वीपों में मत्स्य उद्योग आयरोजगार और मछली उत्पादों के निर्यात बढ़ाने की पर्याप्त संभावना रखता है। समिति सिफारिश करती है कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाए और एकीकृत मछली पकड़ने वाले बंदरगाह का कार्य समयबद्ध और समन्वित तरीके से पूरा किया जाए। संबंधित अवसंरचना जैसे कोल्डचेन सिस्टममछली प्रसंस्करण और पैकेजिंग सुविधाएँ समानांतर रूप से विकसित की जानी चाहिए ताकि संपूर्ण प्रक्रिया में दक्षता सुनिश्चित हो। निर्यातसंबंधी अवसंरचना को भी मजबूत किया जाए ताकि राजस्व सृजन अधिकतम हो और क्षेत्रीय समुद्री संसाधनों की पूरी क्षमता का उपयोग हो सके।

(पैरा 5.2.30)

विद्युत क्षेत्र

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में उष्णकटिबंधीय जलवायु और भौगोलिक स्थिति के कारण कई नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की मजबूत क्षमता मौजूद है। समिति सिफारिश करती है कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि को शीघ्रता से लागू किया जाए ताकि डीज़ल पर निर्भरता में पर्याप्त कमी आ सके और साथ ही ग्रिड कनेक्टिविटी के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। गृह मंत्रालय, संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के साथ मिलकर संबंधित मंत्रालय/विभाग से संपर्क कर सकता है ताकि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से बिजली उत्पादन के नए प्रस्ताव लाए जा सकें और गैरनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सके। नवीकरणीय ऊर्जा हिस्से को बढ़ाने के लिए वार्षिक मापनीय लक्ष्य निर्धारित किए जाएँ और नियमित रूप से निगरानी की जाए।

(पैरा 5.2.35)

 

सड़क संपर्क

समिति सिफारिश करती है कि गृह मंत्रालय इस मामले को ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ उठाए ताकि यह जांच की जा सके कि द्वीप क्षेत्रों और अन्य समान परिस्थितियों वाले क्षेत्रों के लिए पीएमजीएसवाई के अंतर्गत वर्तमान जनसंख्या मानदंडों को ढील देने की संभावना है या नहीं। योजना में एक विशेष लचीला प्रावधान शामिल किया जा सकता है ताकि उन आबादियों को भी शामिल किया जा सके जिन्हें सड़क संपर्क की अत्यधिक आवश्यकता है, भले ही उनकी जनसंख्या निर्धारित सीमा से कम हो।

(पैरा 5.2.37)

 

मांग संख्या 53 – चंडीगढ़

समिति नोट करती है कि पुनर्गठन संचालन दक्षता में सुधार कर सकता है, लेकिन यह आवश्यक है कि ग्रिड आधुनिकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण में पूंजी निवेश बाधित न हो। समिति सिफारिश करती है कि संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन विद्युत क्षेत्र के पुनर्गठन से जुड़े वित्तीय प्रभावों की व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करेजिसमें प्राप्त बचत, दायित्वों में कमी और नवीकरणीय ऊर्जा में पुनर्निवेश योजनाएँ शामिल हों।

(पैरा 5.3.7)

समिति नोट करती है कि कार्यों का समय पर पूरा होना और उपकरणों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। समिति सिफारिश करती है कि परियोजना समयसीमाओं का सख्ती से पालन किया जाए और विशेषज्ञ चिकित्सा कर्मियों की रिक्त पद स्थिति का समयसमय पर खुलासा किया जाए ताकि प्रभावी स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 5.3.11)

समिति इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली पर दिए गए महत्व की सराहना करती है, जो चंडीगढ़ की शहरी स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। समिति सिफारिश करती है कि संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन इलेक्ट्रिक बसों के चरणबद्ध परिचालन को तेज करे और चार्जिंग अवसंरचना के सर्वोत्तम उपयोगभीड़भाड़ स्तर और वाहनों के उत्सर्जन रुझानों का समयसमय पर मूल्यांकन सुनिश्चित करे, साथ ही परिवहन और यातायात सुधार के उपायों या पहलों के मूल्यांकन के लिए मापनीय संकेतक निर्धारित किए जाएँ।

(पैरा 5.3.16)

समिति नोट करती है कि अवसंरचना निर्माण को शिक्षा परिणामों में मापनीय सुधार के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। समिति सिफारिश करती है कि संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन संशोधित अनुमान  चरण में परिणामआधारित संकेतक प्रदान करेजिसमें कक्षा क्षमता में वृद्धि, डिजिटल कवरेज और छात्र प्रदर्शन मेट्रिक्स शामिल हों।

(पैरा 5.3.21)

समिति मानती है कि अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों का जनसांख्यिकीय मानचित्रण आवश्यक है ताकि लक्षित हस्तक्षेप और विभागों के बीच समन्वित सेवा वितरण सुनिश्चित किया जा सके। इसलिए समिति सिफारिश करती है कि चंडीगढ़ संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन एक संरचित सर्वेक्षण करे ताकि ऐसे घरों की पहचान की जा सके जहाँ 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोग अकेले रह रहे हैंऔर इसे आयु समूहलिंग और संवेदनशीलता के आधार पर वर्गीकृत किया जाए। निष्कर्षों का उपयोग एक एकीकृत समर्थन ढांचा तैयार करने के लिए किया जा सकता हैजिसमें समयसमय पर कल्याण जांच, आपातकालीन प्रतिक्रिया संपर्क मजबूत करना और सामाजिक कल्याण योजनाओं तक बेहतर पहुँच शामिल हो।

(पैरा 5.3.23)

समिति नोट करती है कि अतिरिक्त आवासीय इकाइयों का निर्माण सकारात्मक विकास है, लेकिन लंबित मांग यह दर्शाती है कि और संवर्धन की आवश्यकता है। समिति सिफारिश करती है कि संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन पुलिस और अन्य कर्मचारियों की शेष आवासीय मांग को पूरा करने के लिए चरणबद्ध योजना तैयार करे। समिति यह भी सिफारिश करती है कि कर्मचारी कल्याण संकेतकों का समयसमय पर मूल्यांकन किया जाएजिसमें आवास संतोष, चिकित्सा सुविधाओं का उपयोग और सेवा स्थितियों में सुधार शामिल हों।

(पैरा 5.3.26)

मांग संख्या 54 – दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव

समिति नोट करती है कि तटीय क्षेत्रों में जल आपूर्ति एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है और सिफारिश करती है कि इन कार्यों की भौतिक प्रगति पर गहन निगरानी रखी जाए ताकि सुरक्षित पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। पीने का सुरक्षित पानी की आपूर्ति अवसंरचना संवर्धन के माध्यम से की जाए।

(पैरा 5.4.6)

सड़क और पुल

समिति नोट करती है कि सड़क और पुल अवसंरचना मांग में सबसे बड़ा पूंजीगत खंड है। सड़क और पुलों के तहत पर्याप्त आवंटन को देखते हुए, समिति सिफारिश करती है कि प्रमुख कार्यों का समर्थन यातायात प्रक्षेपणलागतलाभ विश्लेषण और जिलावार पूर्णता कार्यक्रमों द्वारा किया जाए। ऐसा संपर्क पर जोर दिया जा सकता है जो औद्योगिक क्लस्टर, पर्यटन सर्किट और ग्रामीण पहुँच को मजबूत करे।

(पैरा 5.4.9)

 

चिकित्सा और स्वास्थ्य

समिति नोट करती है कि स्वास्थ्य क्षेत्र एक महत्वपूर्ण पूंजी और राजस्व प्रतिबद्धता है। समिति सिफारिश करती है कि नए अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों का कमीशनिंग चिकित्सा और पैरामेडिकल स्टाफ की समय पर भर्ती, उपकरण की खरीद और संचालन तत्परता की योजना के साथ समन्वयित हो। प्रदर्शन संकेतकों जैसे बिस्तर भरने की दर, विशेषज्ञ उपलब्धता और रोगी रेफरल में कमी की निगरानी की जानी चाहिए।

(पैरा 5.4.11)

 

विद्युत क्षेत्र

विद्युत विभाग के डीएनएचडीडी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड में निगमित होने के दृष्टिगत, समिति सिफारिश करती है कि वित्तीय स्थिरतासंचरण हानिटैरिफ समायोजन और आपूर्ति विश्वसनीयता संकेतकों पर समयसमय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए ताकि उपभोक्ता हित सुरक्षित रह सके।

(पैरा 5.4.13)

 

पुलिस कल्याण योजनाएँ

समिति सिफारिश करती है कि पुलिस थाना, आवासीय क्वार्टर और सुधारात्मक सुविधाओं के निर्माण का शीघ्र समापन किया जाए ताकि कार्य स्थितियों और कानून प्रवर्तन क्षमता में सुधार हो। पूरा होने की समयसीमा और अधिभोग तत्परता की स्थिति पर एक विवरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

(पैरा 5.4.16)

 

मांग संख्या 55 – लद्दाख

स्वास्थ्य

समिति लद्दाख के दूरस्थ और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना करती हैजिनमें पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्रों का आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उन्नयनचिकित्सा कर्मियों की तैनातीटेलीमेडिसिन सेवाओं का संचालन तथा एक संरचित रेफरल प्रणाली की स्थापना शामिल है। हालांकिसमिति यह भी देखती है कि लद्दाख अभी भी विशिष्ट भौगोलिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा हैजो स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति को सीधे प्रभावित करती हैं। संघ राज्य क्षेत्र में तृतीयक स्वास्थ्य सुविधा की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को उन्नत उपचार के लिए संघ राज्य क्षेत्र के बाहर जाना पड़ता है। यद्यपि यात्रा सहायता प्रदान की जा रही हैफिर भी ऐसे रेफरल गंभीर उपचार में देरी का कारण बन सकते हैं, विशेषकर सर्दियों के महीनों में जब संपर्क व्यवस्था अत्यधिक प्रभावित होती है।

(पैरा 5.5.8)

समिति यह भी नोट करती है कि 2026-27 के लिए चिकित्सा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य के अंतर्गत आवंटन का एक बड़ा हिस्सा राजस्व व्यय पर हैजिसमें तापन खर्च और आवश्यक आपूर्ति की खरीद शामिल है, जबकि पूंजीगत व्यय सीमित है। संघ राज्य क्षेत्र की रणनीतिक और संवेदनशील स्थिति तथा इसकी बिखरी हुई आबादी को देखते हुए स्थायी स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

(पैरा 5.5.9)

 

समिति सिफारिश करती है कि लद्दाख में तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना की संभावना का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण किया जाएताकि संघ राज्य क्षेत्र के बाहर रेफरल पर निर्भरता कम की जा सके। विशेषज्ञ और सुपरविशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को प्रोत्साहन आधारित नियुक्तियोंरोटेशनल प्रतिनियुक्ति या टेलीस्पेशलिस्ट समर्थन के माध्यम से मजबूत किया जा सकता है। जिला अस्पतालों और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं सहित महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अवसंरचना में पूंजी निवेश को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाना चाहिए। अत्यधिक मौसम परिस्थितियों और पहुंच संबंधी बाधाओं को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्तआयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के कार्यान्वयन की समयसमय पर समीक्षा की जानी चाहिए ताकि सार्वभौमिक कवरेज सुनिश्चित हो सके और दावों का समय पर निपटान हो। लद्दाख के भौगोलिक, जलवायु और रणनीतिक महत्व को देखते हुए वहाँ स्वास्थ्य सेवाओं पर निरंतर और केंद्रित ध्यान अत्यंत आवश्यक है।

(पैरा 5.5.10)

पर्यटन

समिति ने यह नोट किया कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने पर्यटन विकास के लिए एडवेंचरप्रकृतिसांस्कृतिक और अनुभवात्मक स्तंभों पर आधारित एक संरचित दृष्टिकोण अपनाया हैसाथ ही एडवेंचर गतिविधियों के नियमन और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत ढाँचा भी विकसित किया है। समिति विशेष रूप से पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में कैरीइंग कैपेसिटी अध्ययन तथा डार्क स्काई संरक्षण पहलों पर दिए गए ध्यान की सराहना करती है। समिति का मत है कि कैरीइंग कैपेसिटी आकलन समयबद्ध तरीके से पूर्ण किए जाने चाहिए और उन्हें योजना निर्माण तथा नियामक निर्णयों में समाहित किया जाना चाहिए। समिति का यह भी मत है कि अवसंरचना विस्तारकचरा प्रबंधन प्रणालीजल उपयोग का विनियमन तथा कार्बन फुटप्रिंट में कमी जैसे मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर संबोधित किया जाना चाहिए।

(पैरा 5.5.19)

समिति सिफारिश करती है कि सतत पर्यटन के सिद्धांतों को दिशानिर्देशोंनिरंतर पर्यावरणीय निगरानी और अधिक मजबूत समुदायआधारित पर्यटन मॉडलों के माध्यम से अपनाया जाएताकि लाभों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित हो सके। समिति यह भी  सिफारिश करती है कि कौशल विकास पहलों का विस्तार किया जाए, जिससे स्थानीय रोजगार को अधिकतम किया जा सके और बाहरी निर्भरता कम हो। समिति इस बात पर जोर देती है कि लद्दाख में पर्यटन की वृद्धि पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदारसांस्कृतिक रूप से सम्मानजनक और समुदायकेंद्रित बनी रहे।

(पैरा 5.5.20)

ऊर्जा

समिति यह नोट करती है कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादनविशेष रूप से सौर ऊर्जाकी अत्यधिक संभावना हैक्योंकि यहां उच्च ऊंचाईसाफ आकाश और अनुकूल जलवायु परिस्थितियां मौजूद हैं। समिति सराहना करती है कि संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन ने क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के उपयोग के लिए कदम उठाए हैं।
हालांकिबढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं और बाहरी स्रोतों पर निर्भरता को देखते हुएस्थानीय रूप से उपलब्ध नवीकरणीय ऊर्जा का अधिकतम उपयोग और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

(पैरा 5.5.24)

समिति  सिफारिश करती है कि संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन क्षेत्र में सौर और पवन ऊर्जा के विकास के लिए एक व्यापक रणनीति अपनाएताकि उपलब्ध नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का योजनाबद्ध और समयबद्ध उपयोग किया जा सके।
सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली की हिस्सेदारी को धीरेधीरे बढ़ाया जाना चाहिए और पवन ऊर्जा क्षमता का आकलन तथा विकास करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
साथ हीनवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जानी चाहिए ताकि समय पर कार्यान्वयन और संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 5.5.25)

जल आपूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन

          समिति यह नोट करती है कि 2026-27 के बजट अनुमान (BE) में जल आपूर्ति और स्वच्छता के अंतर्गत आवंटन में कमी मुख्यतः व्यय के तर्कसंगतकरण तथा पिछले वर्ष की लंबित देनदारियों के निपटान के कारण हुई है। समिति यह भी नोट करती है कि इस आवंटन का प्रमुख भाग राजस्व व्यय की मदों जैसे ईंधन एवं स्नेहकजल आपूर्ति योजनाओं की मरम्मत एवं रखरखावजल उठान बिंदुओं के लिए बिजली देयकों का भुगतान तथा आवश्यक सामग्रियों की खरीद पर व्यय किया जाता है। दूरस्थ तथा उच्चऊंचाई वाले क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता संबंधी आवश्यकताओं को जनजातीय क्षेत्र घटक के माध्यम से तथा जल जीवन मिशन और अमृत जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाओं के साथ समन्वय के माध्यम से पूरा करने का प्रस्ताव है। जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के माध्यम से जल जीवन मिशन के अंतर्गत जलवायुलचीले उपाय किए जा रहे हैंजिनमें स्रोत की स्थिरता सुनिश्चित करने के उपायझरनों और हिमपोषित जलधाराओं का संरक्षणजलाशयों जैसे भंडारण आधारित समाधानशीतकालीन जल संचयन प्रणालियाँकृत्रिम ग्लेशियर और आइस स्तूप, जल गुणवत्ता की निगरानी तथा सामुदायिक सहभागिता शामिल हैं।

(पैरा 5.5.37)

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के संबंध में समिति यह नोट करती है कि लेह और कारगिल में एकीकृत ठोस अपशिष्ट  प्रबंधन सुविधाएँ संचालित हैंलेह में एक वैज्ञानिक लैंडफिल सुविधा का निर्माण किया गया है तथा कारगिल में सैनिटरी लैंडफिल सुविधा के लिए भूमि आवंटित की गई है। लेह में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा कारगिल में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपीकी स्थापना के लिए एसबीएम-अर्बन 2.0 के अंतर्गत प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए हैं।

(पैरा 5.5.38)

समिति यह समुक्‍त‍ि करती है कि लद्दाख का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र, उच्चऊंचाई वाला भूभागकम वर्षा तथा बढ़ते पर्यटन और शहरीकरण के दबाव को देखते हुए पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता तथा ठोस और तरल अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन में निरंतर और दूरदर्शी निवेश की आवश्यकता है।

(पैरा 5.5.39)

 

समिति  सिफारिश करती है कि पेयजल सुरक्षा तथा जल स्रोतों की स्थिरता को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में लिया जाए और भंडारण, जल पुनर्भरण तथा जलवायुलचीले अवसंरचना में लक्षित पूंजी निवेश किया जाए। स्वच्छ भारत मिशनशहरी 2.0 के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और उपयोग किए गए जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने हेतु प्रस्तुत प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए। विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रसंस्करणसुरक्षित लैंडफिल प्रथाओंकारगिल में प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन तथा जल गुणवत्ता और अपशिष्ट निपटान प्रणालियों की कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाए। जल आपूर्तिस्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन को एकीकृत तथा जलवायुलचीले दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाना चाहिए, ताकि लद्दाख के नाजुक हिमालयी पर्यावरण की रक्षा करते हुए दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

(पैरा 5.5.40)

नागर विमानन  

समिति इन प्रयासों की सराहना करते हुए यह समुक्‍त‍ि करती है कि लद्दाख जैसे उच्चऊंचाई और रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में नागरिक उड्डयन केवल परिवहन का साधन नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा सेवा के रूप में कार्य करता है। इसलिए समिति  सिफारिश करती है कि लेह और कारगिल हवाई अड्डों के अवसंरचना को सुदृढ़ करने को प्राथमिकता दी जाएजिसमें पर्यटन के चरम समय और आपातकालीन यातायात को कुशलतापूर्वक संभालने के लिए टर्मिनल और एप्रन क्षमता का विस्तार शामिल हो। कारगिल तथा अन्य दूरस्थ क्षेत्रों के लिए स्थायी और विश्वसनीय हवाई संपर्क उचित नीतिगत समर्थन के माध्यम से सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्तबागवानी तथा अन्य शीघ्र नष्ट होने वाले उत्पादों के परिवहन को सुगम बनाने के लिए समर्पित एयर कार्गो सुविधाओं का विकास भी किया जाना चाहिएजिससे स्थानीय आजीविका को समर्थन मिल सके। साथ ही, क्षेत्र की अत्यधिक कठोर जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शीतकालीन संचालन क्षमता को बढ़ाने तथा सभी मौसमों में विश्वसनीय विमानन सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

(पैरा 5.5.45)

रोजगार

          समिति नोट करती है कि निरंतर भर्ती प्रयासों के बावजूद संघ राज्य क्षेत्र में भर्ती प्रक्रिया की गति और दक्षता को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। लद्दाख के सामरिक महत्वबढ़ती प्रशासनिक जिम्मेदारियों तथा सेवा वितरण की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समिति सिफारिश करती है कि भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध और सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाए। इसके लिए स्पष्ट रूप से निर्धारित परीक्षा कैलेंडर का पालन तथा लद्दाख अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड और अन्य भर्ती एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

(पैरा 5.5.50)

समिति सिफारिश करती है कि मानव संसाधन योजना को उभरती क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाएविशेषकर स्वास्थ्यशिक्षाअवसंरचनापर्यटन और तकनीकी सेवाओं के क्षेत्रों में। भर्ती की प्रगति की निगरानी तथा पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक नियमित समीक्षा तंत्र विकसित किया जा सकता है। समय पर भर्ती से शासन क्षमता सुदृढ़ होगी और लद्दाख के शिक्षित युवाओं को संघ राज्य क्षेत्र के भीतर सार्थक रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

(पैरा 5.5.51)

मांग संख्या 56 – लक्षद्वीप

          समिति सिफारिश करती है कि संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा परियोजनाओं की प्रगति तथा निधियों के उपयोग की नियमित रूप से निगरानी की जानी चाहिए, ताकि संशोधित आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित अनुमान चरण में अतिरिक्त निधि की मांग की जा सके।

(पैरा 5.6.2)

परिवहन और संपर्कता

समिति नोट करती है कि लक्षद्वीप में परिवहन संपर्क जीवनरेखा सेवा के समान है और अवसंरचना विस्तार के साथसाथ आवश्यक सेवाओं की वहनीयताविश्वसनीयता और निरंतरता सुनिश्चित की जानी चाहिए। समिति सिफारिश करती है कि प्रशासन अगात्तीकोच्चि जैसे वाणिज्यिक रूप से मूल्यांकित किंतु सामाजिक रूप से आवश्यक मार्गों के लिए उड़ानवायबिलिटी गैप फंडिंग अथवा सीट सबवेंशन जैसे समर्थन तंत्रों की संभावनाओं का अन्वेषण करे। सागरमाला योजना के अंतर्गत प्रस्तुत प्रस्तावों को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाना चाहिए तथा सभी मौसमों में संचालित होने वाले जहाजों के अधिग्रहण को प्राथमिकता दी जानी चाहिएताकि मौसम संबंधी अलगाव की स्थिति को कम किया जा सके।

(पैरा 5.6.9)

 

 

शहरी विकास, आवास, जल आपूर्ति और बाढ़ नियंत्रण

समिति समुक्ति करती है कि छोटे द्वीपीय क्षेत्रों में शहरी विकास और जल आपूर्ति सीधे तौर पर जन स्वास्थ्यपर्यटन की स्थिरता और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़े होते हैं। लवण-उन्मूलन (डिसैलिनेशन) या जल निकासी परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की देरी का जीवन की गुणवत्ता और आर्थिक गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है। समिति यह भी नोट करती है कि लक्षद्वीप में शहरी विकास संबंधी पहलों की सफलता सतत योजनातटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरज़ेडमानकों के कड़ाई से पालन तथा परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। विशेष रूप से जल सुरक्षा उपायोंखासकर डिसैलिनेशन संयंत्रों, के लिए निरंतर तकनीकी पर्यवेक्षण और नियमित रखरखाव आवश्यक है।

(पैरा 5.6.13)

समिति सिफारिश करती है कि चल रही डिसैलिनेशन तथा जल संवर्धन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए तथा जल की गुणवत्ता और आपूर्ति के घंटों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। जलवायु संबंधी जोखिमों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील द्वीपों में शहरी जल निकासी और बाढ़ शमन कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। तटीय संरक्षण परियोजनाओं को पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए पर्यावरण-संवेदनशील विधियों के माध्यम से लागू किया जाना चाहिए। शहरी अवसंरचना परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की समय-समय पर रिपोर्ट निगरानी प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जानी चाहिएताकि निधियों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित किया जा सके।

(पैरा 5.6.14)

 

शिक्षाखेलकला और संस्कृति

समिति नोट करती है कि लक्षद्वीप में शिक्षा की योजना बनाते समय भौगोलिक सीमाओं और संस्थागत विकल्पों की कमी को ध्यान में रखना आवश्यक है। ऐसे परिप्रेक्ष्य में अवसंरचना के पुनर्विकास कार्य चरणबद्ध और समन्वित तरीके से किए जाने चाहिएताकि शैक्षणिक गतिविधियों की निरंतरता बनी रहे। समिति सिफारिश करती है कि विद्यालयी अवसंरचना के पुनर्निर्माणध्वस्तीकरण अथवा स्थानांतरण का कार्य तभी किया जाए जब पूर्ण रूप से कार्यशील अंतरिम व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कर ली जाएँतथा उचित सार्वजनिक सूचना भी दी जाए, ताकि शैक्षणिक गतिविधियों में किसी प्रकार का व्यवधान न आए।

(पैरा 5.6.18)

समिति आगे यह भी समुक्ति करती है कि तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को द्वीपों में उभरते आर्थिक क्षेत्रों के साथ समन्वित किया जाना चाहिएजिससे स्थानीय युवाओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि हो सके। समिति विचार-विमर्श के दौरान दिए गए इस सुझाव का भी संज्ञान लेती है कि जहाँ आवश्यकता हो वहाँ शैक्षणिक क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी तंत्र तथा मुख्यभूमि के संस्थानों से अल्पकालिक अवधि के लिए संकाय की प्रतिनियुक्ति की संभावनाओं का अन्वेषण किया जा सकता है।समिति सिफारिश करती है कि अवसंरचना के उपयोग तथा शैक्षिक परिणामों की समय-समय पर समीक्षा की जाएताकि निधियों के आवंटन की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके।

(पैरा 5.6.19)

स्वास्थ्य

          समिति नोट करती है कि द्वीपों के भीतर तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता के कारण निवासी काफी हद तक रेफरल सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। इसलिए प्राथमिक या द्वितीयक स्वास्थ्य सुविधाओं में किसी भी प्रकार का व्यवधान गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकता है। समिति यह भी समुक्ति करती है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित पैरामेडिकल कर्मियों की कमी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करती है और मुख्यभूमि के संस्थानों पर निर्भरता बढ़ाती है।

(पैरा 5.6.23)

समिति सिफारिश करती है कि अस्पताल अवसंरचना के किसी भी पुनर्निर्माणस्थानांतरण या पुनर्विकास को तभी किया जाए जब पूर्णतः कार्यशील अंतरिम स्वास्थ्य व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाए तथा उचित सार्वजनिक सूचना भी दी जाए। मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए मुख्यभूमि के तृतीयक चिकित्सा संस्थानों से विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा टीमों की अल्पकालिक रोटेशनल आधार पर तैनाती की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त टेलीमेडिसिन सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाए तथा द्वीपों के अस्पतालों में पर्याप्त नैदानिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएँताकि अनावश्यक रेफरल को कम किया जा सके। समिति यह भी सिफारिश करती है कि रेफर किए गए रोगियों और उनके सहायताकर्मियों के लिए एक संरचित सहायता तंत्र विकसित किया जाएजिसमें कोच्चि जैसे मुख्यभूमि के शहरों में आवास और लॉजिस्टिक सहायता शामिल होताकि रोगियों को होने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सके। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार का आकलन करने के लिए सेवा वितरण से संबंधित संकेतकों की समय-समय पर निगरानी भी की जानी चाहिए।

(पैरा 5.6.24)

विद्युत

समिति नोट करती है कि लक्षद्वीप में विद्युत आपूर्ति मुख्यतः डीज़ल आधारित विद्युत उत्पादन पर निर्भर हैक्योंकि मुख्यभूमि ग्रिड से इसका कोई सीधा संपर्क नहीं है। यद्यपि विद्युत संयंत्रों के संचालन एवं रखरखाव तथा नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की शुरुआत के लिए आवंटन किया गया हैफिर भी ईंधन पर होने वाला आवर्ती व्यय एक महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ बना हुआ है। समिति यह भी अवलोकन करती है कि लॉजिस्टिक सीमाएँ तथा मौसम संबंधी व्यवधान समय पर ईंधन आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैंजिससे द्वीपों में विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता पर प्रभाव पड़ता है।

(पैरा 5.6.29)

                     समिति सिफारिश करती है कि यद्यपि बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए कदम उठाए गए हैंफिर भी दीर्घकालिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण का विस्तार आवश्यक है। संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन चरणबद्ध एवं समयबद्ध रणनीति अपनाकर डीज़ल आधारित विद्युत उत्पादन पर निर्भरता को क्रमशः कम करने के लिए पर्याप्त बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के साथ सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार पर कार्य कर सकता है। पूंजीगत निवेश को नवीकरणीय आधारभूत क्षमता को सुदृढ़ करने तथा संचरण एवं वितरण अवसंरचना के आधुनिकीकरण की दिशा में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त द्वीप-वार ऊर्जा संक्रमण योजना तैयार की जानी चाहिएजिसमें डीज़ल खपत में कमी तथा प्रणाली की दक्षता में सुधार के लिए मापनीय लक्ष्य निर्धारित किए जाएँ। ईंधन व्यय और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के बीच तुलनात्मक समीक्षा की समय-समय पर निगरानी की जाएताकि वित्तीय विवेकआपूर्ति की विश्वसनीयता तथा दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

(पैरा 5.6.30)

सूचना प्रौद्योगिकी

          समिति नोट करती है कि बजट प्राक्कलन 2026–27 में आवंटन में कमी मुख्यतः संशोधित प्राक्कलन 2025–26 में एकमुश्त देनदारियों के निपटान के कारण प्रतीत होती हैन कि डिजिटल अवसंरचना से संबंधित मूलभूत पहलों में किसी कटौती के कारण। तथापिद्वीपीय क्षेत्र में डिजिटल संपर्क की रणनीतिक महत्ता को देखते हुए सबमरीन केबल अवसंरचना के रखरखाव, विश्वसनीय ब्रॉडबैंड सेवाओं तथा ई-गवर्नेंस प्रणालियों के संचालन के लिए निरंतर वित्तीय समर्थन आवश्यक है।

(पैरा 5.6.33)

          समिति सिफारिश करती है कि सबमरीन केबल नेटवर्क तथा डिजिटल सेवा प्लेटफार्मों के निर्बाध संचालन और रखरखाव के लिए पर्याप्त प्रावधान सुनिश्चित किया जाए। लक्षद्वीप की भौगोलिक अलगाव की स्थिति को देखते हुए डिजिटल संपर्क एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपयोगिता के रूप में कार्य करता है। सेवा की विश्वसनीयता और अंतिम छोर (लास्ट-माइल) कनेक्टिविटी से संबंधित प्रदर्शन मानकों की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए। यदि अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होतो संशोधित अनुमान चरण में समय पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि सेवाओं में किसी प्रकार का व्यवधान न आए।

(पैरा 5.6.34)

मांग संख्या 57 – दिल्ली को अंतरण

          समिति  नोट करती है कि साल 2026-27 के लिएराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकार (जीएनसीटीडी) की बताई गई अनुमानित आवश्यकता ₹17,997.00 करोड़ से काफ़ी ज़्यादा हैजबकि बजट प्राक्कलन 2026-27 के तहत आवंटन ₹1,348.01 करोड़ ही रखा गया है। समिति  समुक्ति करती है कि अनुमानित डिमांड और एलोकेटेड फंड के बीच यह बड़ा गैप है। समिति  समुक्ति करती है कि अनुमानित मांग और आवंटित निधियों के बीच यह उल्लेखनीय अंतर अवसंरचना तथा कल्याणकारी परियोजनाओंखासकर पानी की सप्लाई और दूसरी ज़रूरी सर्विसेज़ से जुड़े प्रोजेक्ट्स के समय पर लागू होने पर असर डाल सकता है।

(पैरा 5.7.3)

           इसलिएसमिति सिफारिश करती है कि वित्तीय वर्ष के दौरान संसाधनों की आवश्यकता की मंत्रालय द्वारा समयसमय पर समीक्षा की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर इस विषय को संशोधित अनुमान चरण में उठाया जाएताकि प्राथमिकता वाली परियोजनाएँ धन की कमी के कारण प्रतिकूल रूप से प्रभावित न हों।

(पैरा 5.7.4)

समिति यह नोट करती है कि मांग संख्या 57 के अंतर्गत आवंटन का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली को केंद्रीय सहायता से संबंधित हैजो कि अनटाइड प्रकृति का है। समिति सिफारिश करती है कि ऐसी निधियों की सावधानीपूर्वक निगरानी की जाए ताकि उनका पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।मंत्रालय यह सुनिश्चित करे कि संघ राज्य क्षेत्रों को केंद्रीय सहायता के अंतर्गत प्रस्तावित चल रही तथा नई योजनाओं और परियोजनाओं की नियमित एवं समय-समय पर निगरानी की जाएजिसके अंतर्गत दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के लिए ₹951.00 करोड़ का आवंटन किया गया है।इससे आवंटित निधियों के पूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करनेलागत वृद्धि से बचने तथा परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने में सहायता मिलेगी।

(पैरा 5.7.6)

 

चंद्रावल जल शोधन संयंत्र

समिति नोट करती है कि चंद्रावल जल शोधन संयंत्र परियोजना के पैकेज–1 (चंद्रावल में 477 एमएलडी जल शोधन संयंत्र का निर्माण) के संबंध मेंजो कि कुल छह पैकेजों में क्रियान्वित किए जाने का प्रस्ताव हैकार्य प्रगति पर है और इसके शीघ्र ही चालू होने की संभावना है। इसी प्रकार पैकेज–2 –पश्चिम – (जल आपूर्ति प्रणाली में सुधार) से संबंधित कार्य दिसम्बर, 2026 तक पूरा होने की संभावना है। समिति यह भी समुक्ति करती है कि यह एक लंबे समय से चल रही परियोजना है और अतीत में इसकी निर्धारित समय-सीमाओं में देरी हुई है। अतः समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालयसंघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के साथ मिलकर कार्यों की प्रगति की नियमित एवं समय-समय पर निगरानी सुनिश्चित करेताकि निर्धारित समय-सीमाओं का पालन हो सके और परियोजना के कार्यों में आगे कोई विलंब न हो।

(पैरा 5.7.9)

 

मांग संख्या 58-  जम्मू और कश्मीर को अंतरण

समिति नोट करती है कि 31 जनवरी 2026 तक व्यय ₹38,349.77 करोड़ रहा हैजबकि संशोधित प्राक्कलन ₹41,340.22 करोड़ हैजिससे यह संकेत मिलता है कि अंतिम तिमाही में निधियों का एक महत्वपूर्ण भाग अभी व्यय किया जाना शेष था। समिति यह भी अवलोकन करती है कि पूंजीगत व्यय के लिए सहायता का पूर्ण उपयोग किया जा चुका हैजो सीमित पूंजीगत अनुदानों के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है। किरू जलविद्युत परियोजना के लिए इक्विटी निवेश तथा झेलमतवी बाढ़ पुनर्प्राप्ति परियोजना (जेटीएफआरपीईएपी) के अंतर्गत आवंटन संशोधित अनुमान चरण में किया गया था और इनका व्यय परियोजना की प्रगति पर निर्भर करता है। आपदा प्रतिक्रिया कोष के अंतर्गत व्यय मांग-आधारित है तथा यह आपदाओं की घटना पर निर्भर करता है।

(पैरा 5.8.5)

समिति सिफारिश करती है कि परियोजना-आधारित आवंटनों, विशेषकर जलविद्युत परियोजनाओं तथा बाह्य सहायता प्राप्त बाढ़ पुनर्प्राप्ति परियोजनाओं के अंतर्गत निधियों को व्यावहारिक क्रियान्वयन समय-सीमा के साथ समन्वित किया जाए। अंतिम तिमाही में व्यय के अत्यधिक संकेंद्रण से बचने के प्रयास किए जाएँ। साथ ही, नियमित समीक्षा तंत्र को सुदृढ़ किया जाए ताकि आवंटन विशेष रूप से अवसंरचना और पुनर्प्राप्ति परियोजनाओं में ठोस भौतिक परिणामों में परिवर्तित हो सकें।

(पैरा 5.8.6)

 

जेटीएफआरपी-ईएपी (झेलमतवी बाढ़ पुनर्प्राप्ति परियोजना) के संबंध में बजट प्राक्कलन 2026–27 में ₹259.25 करोड़ का आवंटन किया गया हैजो प्रक्षेपित राशि के अनुरूप है। समिति यह अवलोकन करती है कि यह परियोजना मौसम संबंधी बाधाओं, संविदात्मक मुद्दों तथा सीमित कार्य-ऋतु के कारण प्रभावित हो सकती है। अतः समिति सिफारिश करती है कि परियोजना की नजदीकी निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि वित्तीय निर्गम और भौतिक प्रगति के बीच उचित सामंजस्य बना रहे।

(पैरा 5.8.7)

आपदा प्रतिक्रिया कोष के अंतर्गत आवंटन ₹279 करोड़ पर यथावत रखा गया हैजो पिछले वर्षों के अनुरूप है। समिति यह नोट करती है कि इस मद के अंतर्गत उपयोग मांग-आधारित होता है और अधिसूचित आपदाओं की घटना पर निर्भर करता है। तथापिबाढ़ तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संघ राज्य क्षेत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए समिति सिफारिश करती है कि राहत व्यय के साथ-साथ तैयारी, शमन और आपदा-प्रतिरोधक क्षमता निर्माण उपायों पर भी पर्याप्त ध्यान दिया जाए।

(पैरा 5.8.8)

आपदा प्रबंधन

समिति समुक्ति करती है कि लगातार वर्षों में आपदा प्रतिक्रिया कोष का पूर्ण उपयोगतथा हाल ही में आई बाढ़ से हुई तबाहीयह दर्शाती है कि संघ राज्य क्षेत्र बाढ़भूकंपभूस्खलन तथा चरम मौसम घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। समिति के विचार मेंचूंकि केंद्र शासित प्रदेश ने संकेत दिया है कि यदि किसी अतिरिक्त राशि की आवश्यकता हैतो संशोधित अनुमान चरण में निधि की मांग की जाएगी। मंत्रालय कड़ी नजर रख सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके।

(पैरा 5.8.11)

समिति द्वारा उठाए गए सुदृढ़ीकरण उपायों की सराहना की जाती है, जिनमें संघ राज्य क्षेत्र स्तर के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का पुनर्गठनयूटी आपदा प्रबंधन योजना तथा जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं की तैयारी और अद्यतनतथा समर्पित आपदा प्रबंधन निदेशालय की स्थापना शामिल है। समिति यह भी नोट करती है कि एसडीआरएफ बटालियनों की तैनातीएनडीआरएफ कंपनियों की स्थिति निर्धारणप्रशिक्षण शिविरोंमॉक ड्रिल और बचाव अभियानों का संचालन, तथा सामुदायिक स्वयंसेवी नेटवर्क के विस्तार के माध्यम से प्रतिक्रिया क्षमता को सुदृढ़ किया गया है। ये उपाय बेहतर तैयारी और सुव्यवस्थित प्रतिक्रिया तंत्र की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देते हैं।

(पैरा 5.8.15)

समिति कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी) प्रणाली को अपनानेविभिन्न चेतावनी जारी करने वाली एजेंसियों के साथ इसके एकीकरणबड़े पैमाने पर एसएमएस अलर्ट प्रसारहाइड्रो-मौसमीय निगरानी अवसंरचना के विस्तारतथा “कश्मीर फ्लड वॉच” प्रणाली के विकास को भी नोट करती है। समिति इन कदमों को प्रारंभिक चेतावनी और अंतिम छोर तक संचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखती है। तथापिसमिति का मत है कि प्रणाली की विश्वसनीयता, चेतावनी की सटीकता तथा समुदाय की प्रतिक्रिया क्षमता का समय-समय पर मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो सकें।

(पैरा 5.8.16)

प्रभावित सड़कों की बहाली, बाढ़ सुरक्षा कार्यों तथा भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम को स्वीकार करते हुए समिति यह अवलोकन करती है कि शमन उपायों को निरंतर और अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग–44 तथा अन्य जीवनरेखा मार्गों जैसे महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को जलवायु-प्रतिरोधी रूप से सुदृढ़ करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिएताकि चरम मौसम घटनाओं के दौरान व्यवधान को न्यूनतम किया जा सके। समिति सिफारिश करती है कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), आवास एवं शहरी विकास विभाग (एचयूडीडीतथा सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (आईएंडएफसीजैसे विभागों द्वारा संचालित सभी प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की योजना, डिजाइन और क्रियान्वयन में मुख्यधारा में शामिल किया जाए।

(पैरा 5.8.17)

समिति वर्ष 2026–27 के लिए प्रस्तावित पहलोंजैसे बहु-आपदा संवेदनशीलता आकलन और मानचित्रणअत्याधुनिक यूटी आपात संचालन केंद्र (यूटी –ईओसीका पूर्ण संचालनउन्नत उपकरणों के साथ एसडीआरएफ का सुदृढ़ीकरणतथा निरंतर क्षमता निर्माण और सिमुलेशन अभ्यासको भी नोट करती है। समिति सिफारिश करती है कि इन पहलों को समयबद्ध तरीके सेस्पष्ट माइलस्टोन और परिणाम संकेतकों के साथ लागू किया जाए। संवेदनशीलता मानचित्रण के परिणामों को भूमि उपयोग योजना, अवसंरचना के स्थान निर्धारण और नियामकीय ढाँचों के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए।

(पैरा 5.8.18)

समिति इस बात पर जोर देती है कि ध्यान को धीरे-धीरे राहत-केंद्रित व्यय से हटाकर दीर्घकालिक शमन, लचीलापन निर्माण और जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में स्थानांतरित किया जाए। ढलान स्थिरीकरणतटबंधों को सुदृढ़ करनाहिमनद और जीएलओएफ निगरानी, बाढ़ मैदान प्रबंधन तथा सामुदायिक आधारित तैयारी में निवेश करने से क्षतिग्रस्त अवसंरचना की पुनर्बहाली और मुआवजे पर होने वाले पुनरावृत्त व्यय में कमी आएगी।

(पैरा 5.8.19)

पर्यटन

समिति 2022 से 2024 के दौरान पर्यटक आगमन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि पर संतोष व्यक्त करती हैजिसमें कुल पर्यटक संख्या 1.88 करोड़ से बढ़कर 2.36 करोड़ हो गई है। विशेष रूप से विदेशी पर्यटकों की संख्या 2022 में लगभग 20,000  से बढ़कर 2024 में 65,000 से अधिक होना उल्लेखनीय है और यह संघ राज्य क्षेत्र को एक पर्यटन गंतव्य के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

(पैरा 5.8.25)

 

समिति यह भी समुक्ति करती है कि यद्यपि 2025 में पर्यटक आगमन 2024 की तुलना में कुछ कम रहाजिसका मुख्य कारण पहलगाम की घटना थाफिर भी इस क्षेत्र ने लचीलापन प्रदर्शित किया है और जून 2025 से पुनरुद्धार के संकेत दिखाई दिए हैं। दिसंबर 2025 तक लगभग 1.78 करोड़ पर्यटकों की कुल संख्या यह दर्शाती है कि पर्यटकों का विश्वास पुनः स्थापित हुआ है और आगंतुकों की रुचि बनी हुई है।

(पैरा 5.8.26)

समिति का विचार है कि पर्यटन संघ राज्य क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार सृजन का एक प्रमुख प्रेरक क्षेत्र बना हुआ है। हाल के वर्षों में पर्यटक आगमन में वृद्धि से आतिथ्य, परिवहनहस्तशिल्प और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों को उल्लेखनीय बढ़ावा मिला है। नए पर्यटन स्थलों के विकास के संदर्भ में समिति कोकेरनागभद्रवाहदूधपथरी और आसपास के क्षेत्रों में अवसंरचना विकास हेतु राज्य कैपेक्स बजट के अंतर्गत ₹26.24 करोड़ तथा स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत ₹20.33 करोड़ के आवंटन को नोट करती है। समिति पारंपरिक पर्यटन केंद्रों जैसे श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम से आगे पर्यटन को विविधीकृत करने के प्रयासों की सराहना करती है।

(पैरा 5.8.27)

          समिति समुक्ति करती है कि पर्यटकों की निरंतर बढ़ती संख्या के कारण लोकप्रिय स्थलों पर अत्यधिक दबाव और पारिस्थितिक तनाव से बचने के लिए व्यापक योजना आवश्यक है। समिति सिफारिश करती है कि उभरते पर्यटन स्थलों के विकास के साथ-साथ पर्याप्त अवसंरचनाअपशिष्ट प्रबंधन प्रणालीवहन क्षमता का आकलनसंपर्क-सुविधाओं में सुधार तथा स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके लिए दीर्घकालिक सतत पर्यटन रणनीति तैयार की जाएजिसमें पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और पर्यटक वहन क्षमता के मानकों को समाहित किया जाए। उभरते स्थलों पर अवसंरचना विकास परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से, स्पष्ट परिणाम संकेतकों के साथ शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए।

(पैरा 5.8.28)

समिति आगे सिफारिश करती है कि ईको-टूरिज्म, साहसिक पर्यटन और शीतकालीन पर्यटन जैसे उच्च-मूल्य पर्यटन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जाए। स्थानीय युवाओं को कौशल विकास और उद्यमिता सहायता प्रदान की जाए ताकि पर्यटन से प्राप्त आजीविका लाभों को अधिकतम किया जा सके। पर्यटकों की संतुष्टिसुरक्षा की धारणा और अवसंरचना की पर्याप्तता के नियमित आकलन के लिए तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। समिति पुनः रेखांकित करती है कि पर्यटन जम्मू और कश्मीर के आर्थिक पुनरुत्थान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरा हैऔर इसकी निरंतर प्रगति बनाए रखने के लिए विविधीकरण, अवसंरचना सुदृढ़ीकरण तथा विश्वास निर्माण उपायों पर सतत ध्यान देना आवश्यक होगा।

(पैरा 5.8.29)

प्रवासी पुनर्वास

समिति नोट करती है कि 47,466 प्रवासी परिवार अभी भी राहत हेतु पंजीकृत हैं और उन्हें पर्याप्त वित्तीय एवं कल्याणकारी सहायता प्रदान की जा रही है। समिति जम्मू में 5,248 दो-कक्षीय टेनमेंट्स के निर्माण और आवंटन को सराहनीय मानती है तथा घाटी में ट्रांजिट आवासों के निर्माण में हुई प्रगति को भी नोट करती है। तथापिसमिति यह समुक्ति करती है कि जहाँ 4,112 ट्रांजिट आवास पूर्ण हो चुके हैंवहीं 1,888 इकाइयाँ अभी निर्माणाधीन हैं। समिति सिफारिश करती है कि शेष इकाइयों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया जाए, ताकि विशेष पैकेज के अंतर्गत नियुक्त कर्मचारियों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जा सके।

(पैरा 5.8.33)

समिति नोट करती है कि स्वीकृत 6,000 पदों में से 5,896 पद भरे जा चुके हैं। यद्यपि यह उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता हैसमिति सिफारिश करती है कि शेष रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, ताकि पुनर्वास पैकेज का रोजगार घटक पूर्ण रूप से साकार हो सके।

(पैरा 5.8.34)

समिति प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) तंत्र के क्रियान्वयनदस्तावेज़ीकरण प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण तथा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई)–सेहत कार्डों के जारी किए जाने की सराहना करती है, जो पारदर्शिता बढ़ाने और सेवाओं तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करने में सहायक हैं।

(पैरा 5.8.35)

समिति सिफारिश करती है कि यद्यपि वित्तीय राहत आवश्यक है, परंतु इसे क्रमिक रूप से दीर्घकालिक आजीविका सृजनउद्यमिता प्रोत्साहन और समावेशन संबंधी उपायों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। समिति का मत है कि प्रवासी पुनर्वास केवल एक कल्याणकारी उपाय नहींबल्कि एक संवेदनशील सामाजिक-आर्थिक और मानवीय मुद्दा भी है। इसलिए निरंतर प्रयासपर्याप्त आवाससुरक्षित रोजगारसामुदायिक विश्वास निर्माण तथा वापसी के क्षेत्रों में अवसंरचनात्मक समर्थन सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि प्रवासी परिवारों का सम्मानजनक और सतत पुनर्समावेशन संभव हो सके।

(पैरा 5.8.36)

मांग संख्या 59 – पुडुचेरी को अंतरण

समिति नोट करती है कि केंद्रीय सहायता संघ राज्य क्षेत्र की संसाधन संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। यद्यपि वर्ष 2026–27 के लिए आवंटन, 2025–26 के संशोधित प्राक्कलन के समान स्तर पर बनाए रखा गया हैफिर भी प्रक्षेपित मांग और आवंटित संसाधनों के बीच, विशेषकर अवसंरचना परियोजनाओं और बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के संदर्भ में, पर्याप्त अंतर मौजूद है।

(पैरा 5.9.6)

समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय वित्तीय वर्ष के दौरान संसाधनों की स्थिति की समीक्षा करे और कार्यान्वयन की प्रगति के आधार पर, विशेषकर अवसंरचना तथा बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिएसंशोधित अनुमान चरण में अतिरिक्त सहायता प्रदान करने पर विचार करे। साथ हीयह भी आवश्यक है कि स्वयं के राजस्व संग्रह को सुदृढ़ करनेव्यय के युक्तिकरण तथा राजकोषीय स्थिरता में सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए जाएँ, ताकि संघ राज्य क्षेत्र दीर्घकाल में केंद्रीय सहायता और उधार पर अपनी निर्भरता को क्रमशः कम कर सके।

(पैरा 5.9.7)

*****

 

समिति की समुक्तियाँ/सिफारिशें – एक नज़र में

‘उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय की अनुदान मांगें (2026–27)’ संबंधी 258वां प्रतिवेदन।

अनुदान मांगों का आकलन

 

बजट- एक नजर में

 

समिति नोट करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय को बजटीय आबंटन में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त हुई है, जो कि संशोधित अनुमान 2025–26 में ₹4479.20 करोड़ से बढ़कर बजट अनुमान 2026–27 में ₹6812.30 करोड़ हो गई हैअर्थात् 52 प्रतिशत की वृद्धि। तथापियदि इसकी तुलना बजट अनुमान 2025–26 में ₹5915 करोड़ के आबंटन से की जाएतो लगभग 15 प्रतिशत की ही सीमांत वृद्धि परिलक्षित होती है। समिति यह जानना चाहेगी कि बजट अनुमान 2025–26 की तुलना में संशोधित अनुमान 2025–26 में इतनी उल्लेखनीय कमी होने तथा उसके पश्चात् बजट अनुमान 2026–27 में पुनः इतनी अधिक वृद्धि होने के क्या कारण हैं। समिति का मत है कि बजट अनुमान तथा संशोधित अनुमान के स्तर पर इस प्रकार के उतारचढ़ाव वित्तीय नियोजन में अंतराल को प्रतिबिंबित करते हैं और इससे प्रगति पर चल रही परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हो सकती है। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय प्रगति पर चल रही तथा नई परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय करे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि राज्य सरकारें तथा कार्यान्वयन एजेंसियां आबंटित निधियों का इष्टतम उपयोग करें और समय पर उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें, ताकि प्रक्रियागत त्रुटियों के कारण संशोधित अनुमान के स्तर पर होने वाली बड़ी कटौतियों से भविष्य में बचा जा सके।

(पैरा 2.1.3)

 

योजना-वार प्रक्षेपण बनाम निधियों का आबंटन

 

          समिति नोट करती है कि वर्ष 2026–27 के लिए कुल प्रक्षेपित व्यय में संशोधित प्राक्कलन 2025–26 की तुलना में 69.54 प्रतिशत तथा बजट प्राक्कलन 2026–27 की तुलना में 11.21 प्रतिशत की समग्र वृद्धि दर्ज की गई है। समिति समुक्ति करती है कि आबंटन में यह उल्लेखनीय वृद्धि मुख्यतः उत्तर-पूर्व विशेष अवसंरचना विकास योजनाविशेष विकास पैकेज तथा प्रधानमंत्री विकास पहल के अंतर्गत बढ़े हुए प्रावधानों के कारण है। यद्यपि समिति इस बढ़े हुए बजटीय समर्थन की सराहना करती हैतथापि वह इस बात पर बल देती है कि आबंटन में इस प्रकार की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ निधियों के दक्ष एवं प्रभावी उपयोग तथा सुदृढ़ निगरानी तंत्र भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जिससे लागत तथा समय की अतिवृद्धि से बचा जा सके।

(पैरा 2.2.5)

          समिति आगे नोट करती है कि उत्तर-पूर्व विशेष अवसंरचना विकास योजना के अंतर्गत (जिसमें सड़केंओटीआरआई तथा एनएलसीपीआर-राज्य घटक सम्मिलित हैं) बजट प्राक्कलन 2026–27 में 2500 करोड़ का आबंटन किया गया हैजो संशोधित प्राक्कलन 2025–26 के 1600 करोड़ के आबंटन की तुलना में 56.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। समिति इसे उत्तर-पूर्वी क्षेत्रविशेषकर संपर्क-वंचित तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखती है। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय उच्च सामाजिक-आर्थिक प्रभाव वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता प्रदान करे, समय-सीमाओं के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करे तथा ऐसे बढ़े हुए निवेशों के ठोस लाभों का आकलन करने के लिए परिणाम-आधारित निगरानी प्रणाली अपनाए।

(पैरा 2.2.6)

 

समिति समुक्ति करती है कि विशेष विकास पैकेजों के अंतर्गत संशोधित अनुमान 2025-26 (₹165 करोड़की तुलना में अनुमानित परिव्यय (₹1350 करोड़में 718.18 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि परिलक्षित होती है। यह वृद्धि मुख्यतः असम और त्रिपुरा में समावेशी विकास को प्रोत्साहित करते हुए हाशिए पर स्थित समुदायों के उत्थान हेतु बढ़ी हुई प्रावधानों के कारण है। समिति आदिवासी तथा वंचित समुदायों की उन्नति और कल्याण को सुनिश्चित करने तथा क्षेत्र में विकास को प्रोत्साहित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की सराहना करती है। समिति सिफारिश करती है कि इन पैकेजों के कार्यान्वयन का संबंधित राज्य सरकारों के साथ घनिष्ठ समन्वय किया जाए ताकि पारदर्शिताजवाबदेही और मापनीय परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें। समिति यह भी सुझाव देती है कि प्रत्येक पैकेज के अंतर्गत भौतिक और वित्तीय उपलब्धियों का संकेत करते हुए संबंधित राज्य सरकारों तथा कार्यान्वयन एजेंसियों से समयसमय पर प्रगति प्रतिवेदन प्राप्त किए जाएं।

(पैरा 2.2.7 )

निधियों का उपयोग

 

          समिति नोट करती है कि वर्ष 2024–25 के दौरान मंत्रालय संशोधित अनुमान ₹4,006.00 करोड़ के विरुद्ध ₹3,447.71 करोड़ का उपयोग कर सकाजिससे 86.06 प्रतिशत उपयोगिता प्राप्त हुईतथा इस अल्पउपयोग का मुख्य कारण राज्य सरकारों और कार्यान्वयन एजेंसियों से अपेक्षा से कम मांग प्राप्त होना बताया गया है। समिति आगे यह भी नोट करती है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025–26 में 31 दिसम्बर, 2025 की स्थिति के अनुसार संशोधित अनुमान ₹4,479.20 करोड़ के विरुद्ध ₹3,451.95 करोड़ का व्यय किया गया हैजो 77.07 प्रतिशत उपयोगिता को दर्शाता है। यद्यपि मंत्रालय ने यह विश्वास व्यक्त किया है कि वित्तीय वर्ष के अंत तक उत्तर पूर्वी विशेष अवसंरचना विकास योजनाउत्तर पूर्वी परिषद् की योजनाएं तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री विकास पहल जैसी प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत संशोधित अनुमान का पूर्ण उपयोग कर लिया जाएगातथापि समिति का मत है कि इन योजनाओं के अंतर्गत शेष बची निधियों का समुचित नियोजन के साथ उपयोग किया जा सकता है। समिति सिफारिश करती है कि आगामी वित्तीय वर्ष के लिए मंत्रालय सभी हितधारकों के साथ परामर्श करते हुए एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करेजिसमें भौतिक तथा वित्तीय उपलब्धियों के स्पष्ट चरण निर्धारित किए जाएंताकि वर्ष 2026–27 के दौरान योजनाओं का समयबद्ध और इष्टतम कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

 

(पैरा 2.3.8)

 

समिति समुक्ति करती है कि प्रस्तावों के प्रस्तुतीकरण में विलंब, लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्रप्रक्रियात्मक अनुपालन तथा परियोजनाओं के धीमे क्रियान्वयन जैसे कारक निधियों के इष्टतम उपयोग को प्रभावित करते हैं। राज्यों तथा क्रियान्वयन एजेंसियों के साथ कठोर निगरानी, नियमित समीक्षा बैठकों तथा सतत अनुवर्तन के लिए मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए समिति सिफारिश करती है कि प्रस्तावों तथा उपयोगिता प्रमाण-पत्रों के समयबद्ध प्रस्तुतीकरण को सुनिश्चित करने तथा प्रक्रियात्मक अवरोधों को न्यूनतम करने के लिए अधिक संरचित एवं समयबद्ध समन्वय तंत्र संस्थागत रूप से स्थापित किया जाए।

(पैरा 2.3.9 )

 

 

          समिति आगे सिफारिश करती है कि मंत्रालय राज्य सरकारों तथा संबंधित एजेंसियों के साथ परामर्श करते हुए अग्रिम योजना तथा त्रैमासिक व्यय पूर्वानुमान को सुदृढ़ करेताकि प्रक्षेपित उपयोग स्तरों से होने वाले विचलनों की पहचान प्रारंभिक चरण में ही कर उनका समाधान किया जा सके। समिति मंत्रालय से यह भी आग्रह करती है कि वर्ष 2025–26 के लिए संशोधित प्राक्कलन का पूर्ण तथा प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा अंतिम तिमाही में व्यय के संकुचन से बचा जाएजिससे योजनाओं का दक्ष, परिणामोन्मुखी तथा वित्तीय रूप से विवेकपूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 2.3.10)

 

कुल राजस्व तथा पूंजीगत परिव्यय

 

          समिति समुक्ति करती है कि प्रधानमंत्री डिवाइन योजना के अंतर्गत राजस्व अनुभाग में वर्ष 2025–26 के बजट प्राक्कलन में 789.50 करोड़ का आबंटन किया गया थाजबकि संशोधित प्राक्कलन 356.55 करोड़ रहा तथा 31 दिसम्बर, 2025 तक वास्तविक व्यय 201.80 करोड़ हुआ। वर्ष 2026–27 के लिए प्रक्षेपित मांग 859.29 करोड़ हैजबकि बजट प्राक्कलन 2026-27 में ₹ 260.45 करोड़ का आबंटन किया गया है। समिति का मत है कि प्रक्षेपित राशि बजट प्राक्कलन 2026-27 में किए गए आबंटन की तुलना में अत्यधिक अधिक है। समिति इस योजना के अंतर्गत बजट प्राक्कलन 2026-27 में वास्तविक आबंटन के मुकाबले प्रक्षेपित मांग में इस प्रकार की उल्लेखनीय कमी के कारणों से अवगत कराई जाना चाहती है। अतः समिति सिफारिश करती है कि यदि इस योजना के अंतर्गत परियोजनाओं के कार्यान्वयन के दौरान किसी प्रकार की कमी उत्पन्न होती है, तो संशोधित प्राक्कलन चरण पर अतिरिक्त निधि की मांग की जा सकती है।

(पैरा 2.5.3)

 

          समिति नोट करती है कि वर्ष 2025–26 के दौरान पूंजी खंड के अंतर्गत संशोधित अनुमान ₹ 3,067.41 करोड़ के विरुद्ध कुल उपयोगिता 2,438.49 करोड़ रही हैजिससे यह संकेत मिलता है कि वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में व्यय की गति को और तीव्र किए जाने की आवश्यकता है। समिति यह भी नोट करती है कि कुछ योजनाओंजैसे उत्तर पूर्वी विशेष अवसंरचना विकास योजना (अन्य परिवहन एवं संपर्क अवसंरचनातथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री विकास पहल में व्यय की प्रगति अपेक्षाकृत बेहतर रही है और उत्तर पूर्व उद्यम विकास योजनाजो पूर्व में उत्तर पूर्व विकास वित्त निगम को ऋण के रूप में दी जाती थीके अंतर्गत पूर्ण उपयोगिता परिलक्षित हुई हैतथापि अन्य घटकों के अंतर्गत 31 दिसम्बर, 2025 तक तुलनात्मक रूप से कम उपयोगिता दर्ज की गई है। उत्तर पूर्वी परिषद् की योजनाएं पूंजी के अंतर्गत व्यय अत्यंत कम है। समिति इस योजना के पूंजी खंड के अंतर्गत इतने सीमांत व्यय के कारणों से अवगत कराए जाने की अपेक्षा करती है। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय यह सुनिश्चित करे कि निधियों के उपयोग में इस प्रकार के अंतराल से बचा जाए और योजनाओं की वित्तीय विवेकशीलता के साथ योजना बनाते हुए सभी हितधारकों के साथ परामर्श कर प्राप्त करने योग्य लक्ष्य निर्धारित किए जाएंजिनमें स्पष्ट भौतिक तथा वित्तीय उपलब्धियां निर्धारित होंताकि वर्ष 2026–27 के दौरान योजनाओं का समयबद्ध तथा इष्टतम कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

(पैरा 2.5.4)

 

          समिति समुक्ति करती है कि वर्ष 2026–27 के लिए पूंजीगत अनुभाग के अंतर्गत कुल आबंटन मंत्रालय के कुल बजट प्राक्कलन 2026-27 का 67.01% हैजो व्यापक रूप से पूर्ववर्ती वर्ष के पूंजी-प्रधान व्यय प्रतिरूप के अनुरूप हैजब वर्ष 2025–26 के लिए पूंजीगत अनुभाग के अंतर्गत आबंटन बजट प्राक्कलन 2025-26 का 68.10% था। पूंजीगत परिव्यय पर दिया गया यह बल सराहनीय है, क्योंकि यह उत्तर पूर्वी क्षेत्र में अवसंरचना सृजन तथा दीर्घकालिक परिसंपत्ति विकास में प्रत्यक्ष रूप से योगदान देता है।

(पैरा 2.5.5)

 

केंद्रीय क्षेत्र योजनाएं

उत्तर पूर्व परिषद् की योजनाएं

समिति नोट करती है कि उत्तर पूर्वी परिषद् उत्तर पूर्वी क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण विकासात्मक अंतरालों को दूर करने तथा संतुलित सामाजिक-आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने में निरंतर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। समिति इस बात की सराहना करती है कि “उत्तर पूर्वी परिषद् की योजनाएं”, जो भारत सरकार की पूर्णतः केंद्रीय क्षेत्र की योजना हैके अंतर्गत 31.12.2025 की स्थिति के अनुसार 13,297.84 करोड़ की लागत वाले 1810 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई हैजिनमें से 1282 परियोजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं। यह उत्तर पूर्वी क्षेत्र के आठों राज्यों में कार्यान्वयन तथा पहुंच के सराहनीय स्तर को परिलक्षित करता है। तथापिसमिति समुक्ति करती है कि 33.33 करोड़ की लागत वाली परियोजनाएं निरस्त कर दी गई हैं तथा 522 परियोजनाएं अभी प्रगति पर हैं और इनमें पर्याप्त वित्तीय परिव्यय संलग्न है। अतः समिति सिफारिश करती है कि इन परियोजनाओं का समयबद्ध समापन अत्यंत आवश्यक है ताकि लागत में वृद्धि से बचा जा सके और विकासात्मक लाभ बिना विलंब के जनता तक पहुंच सकें। संशोधित अनुमान 2025–26 में आबंटन को 822 करोड़ से बढ़ाकर 1000 करोड़ किए जानेजिसका मुख्य कारण अतिरिक्त निधि की आवश्यकता तथा अगरतला-अखौरा रेल संपर्क परियोजना के संवर्धित लागत घटक सहित अन्य आवश्यकताएं हैं, से यह संकेत मिलता है कि इस योजना के अंतर्गत प्रतिबद्ध देयताओं में वृद्धि हो रही है। समिति का मत है कि इस प्रकार के मध्य-वर्षीय संशोधन अधिक यथार्थवादी बजट निर्माण तथा बेहतर वित्तीय पूर्वानुमान की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। समिति आगे सिफारिश करती है कि मंत्रालय प्रगति पर चल रही परियोजनाओं की प्रगति की सतत निगरानी के लिए उपयुक्त उपाय करे और संशोधित अनुमान के स्तर पर वित्तीय दबाव की स्थिति से बचने का प्रयास करे।

(पैरा 3.1.12 )

 

          समिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्व परिषद् (एनईसी) को अपनी परियोजना मूल्यांकननिगरानी तथा समीक्षा प्रणालियों को और अधिक सुदृढ़ करना चाहिएताकि निर्धारित समय-सीमाओं तथा स्वीकृत लागत अनुमानों का कठोरता से पालन सुनिश्चित किया जा सके। समिति यह भी सिफारिश करती है कि एक सुदृढ़ वित्तीय योजना ढांचा विकसित किया जाएजिससे प्रतिबद्ध देयताओं का यथार्थपरक आकलन पूर्व में ही किया जा सके और संशोधित प्राक्कलन चरण पर उल्लेखनीय वृद्धि की आवश्यकता को न्यूनतम किया जा सके। समिति का यह भी मत है कि अगरतलाअखौरा रेल संपर्क जैसी प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण करने के लिए विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि आगे की लागत वृद्धि को रोका जा सके और क्षेत्र को अपेक्षित सामरिक तथा संपर्क-संबंधी लाभ निर्धारित समय-सीमा में प्राप्त हो सकें।

(पैरा 3.1.13)

 

उत्तर पूर्व और सिक्किम के लिए केंद्रीय संसाधन पूल/उत्तर पूर्व विशेष अवसंरचना विकास योजना (एनईएसआईडीएस)

 

          समिति इस तथ्य का संज्ञान लेती है कि उत्तर पूर्वी विशेष अवसंरचना विकास योजना (अन्य परिवहन एवं संपर्क अवसंरचनाके अंतर्गत 119.13 करोड़ की अनुमानित लागत वाली पाँच परियोजनाओं के संकल्पपत्र तथा 992.60 करोड़ की लागत वाली 26 परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन वर्तमान में विचाराधीन हैं। उत्तर पूर्वी विशेष अवसंरचना विकास योजना (सड़केंश्रेणी के अंतर्गत 326.43 करोड़ की कुल लागत वाली सात परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन भी परीक्षणाधीन हैं। आगे यह अपेक्षित है कि इन परियोजनाओं को योजना के दिशानिर्देशों के अनुपालनबजटीय परिव्यय की उपलब्धता तथा संबंधित रेखा मंत्रालयों के आवश्यक समर्थन के अधीन स्वीकृति प्रदान की जाएगी। समिति यह समझती है कि इन परियोजनाओं का समयबद्ध कार्यान्वयन अन्य संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों पर भी निर्भर करता हैतथापि उसका मत है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास के लिए नोडल मंत्रालय होने के नाते उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय को संबंधित मंत्रालयों के साथ नियमित समन्वय स्थापित करना चाहिए ताकि परियोजनाओं का समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। मंत्रालय को अंतरमंत्रालयी समन्वय तंत्र को सुदृढ़ करना चाहिए तथा विशेष रूप से सड़क परिवहनरेलविद्युतसंचारकृषि आदि मंत्रालयों के साथ उत्तर पूर्वी परियोजनाओं के लिए एक अंतरमंत्रालयी कार्यबल का गठन करना चाहिए। साथ ही परियोजनाओं की प्रगति की समयसमय पर समीक्षा भी की जानी चाहिए, जिससे किसी भी प्रकार की चुनौतियों अथवा अवरोधों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जा सके और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति प्रभावित न हो।

(पैरा 3.2.8)

 

          समिति नोट करती है कि अधिक पूंजीगत परिव्यय की दिशा में झुकाव इस योजना की अवसंरचना-केंद्रित प्रकृति तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र में परिसंपत्ति सृजन पर दिए गए बल को परिलक्षित करता है। तथापिसमिति यह भी समुक्ति करती है कि वर्ष 2025-26 में पूंजीगत शीर्ष के अंतर्गत बजट प्राक्कलन और संशोधित प्राक्कलन के बीच पर्याप्त अंतर परिलक्षित होता है (बजट प्राक्कलन चरण पर ₹ 2385.47 करोड़ से घटकर संशोधित प्राक्कलन चरण पर 1506.65 करोड़), जो परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अवरोधों अथवा परियोजना निष्पादन की धीमी गति का संकेत देता है। अतः समिति सिफारिश करती है कि निधियों के इष्टतम उपयोग तथा रियोजनाओं के समय-सीमा के भीतर और न्यूनतम विलंब के साथ कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए परियोजनाओं के प्रदर्शन की समय-समय पर निगरानी की जानी चाहिए।

(पैरा 3.2.9)

 

उत्तर पूर्व उद्यम विकास योजना (नीड्स) पूर्ववर्ती उत्तर पूर्व विकास वित्त निगम को ऋण

 

समिति उत्तर पूर्व उद्यम विकास योजना (नीड्स) के अंतर्गत प्राप्त प्रगति की सराहना करती हैजो सूक्ष्मलघु और मध्यम उद्यमों तथा सूक्ष्म वित्त क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए ऋण संबद्धता प्रदान करती हैजो दोनों ही उत्तर पूर्वी क्षेत्र में समावेशी और संतुलित विकास को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समिति सूक्ष्मलघु और मध्यम उद्यमों को समर्थन और सुदृढ़ बनाने तथा विविध आर्थिक क्षेत्रों में सूक्ष्म वित्त के विस्तार हेतु नीड्स के माध्यम से की गई पहलों और परियोजनाओं को भी स्वीकार करती है। ये प्रयास वित्तीय सहायता की आवश्यकता वाले युवा उद्यमियों को गति प्रदान कर रहे हैं तथा उन्हें उद्यम विकास के लिए आवश्यक सहयोग और प्रोत्साहन उपलब्ध करा रहे हैं। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय इस योजना के अंतर्गत की गई पहलों के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक अध्ययन कराएजिसमें ग्रामीण कारीगरों की आय में वृद्धिउत्तर पूर्वी राज्यों में लघु और मध्यम उद्यमों की संख्या में वृद्धिपारंपरिक उद्योगों का संवर्धन तथा पारंपरिक कला और शिल्प के संरक्षण आदि जैसे कारकों को सम्मिलित किया जा सकता है।

(पैरा 3.3.6)

 

विशेष विकास पैकेज

 

बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् (बीटीसी)कार्बी आंगलोंग स्वायत्त प्रादेशिक परिषद्(केएएटीसी) दीमा हसाओ स्वायत्त प्रादेशिक परिषद्(डीएचएटीसी) असम के आदिवासी समूह. असम के दिमासा लोग, असम अल्फा समूह और त्रिपुरा के आदिवासियों के लिए विशेष विकास पैकेज

 

समिति बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् क्षेत्र में परियोजनाओं के क्रियान्वयन की सतत निगरानी के लिए क्षेत्रीय तकनीकी सहायता इकाइयोंपरियोजना गुणवत्ता पर्यवेक्षकों तथा तृतीय पक्ष तकनीकी निरीक्षण एजेंसियों जैसे निगरानी तंत्रों की तैनाती के संबंध में मंत्रालय की पहलों की सराहना करती है। तथापि समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय वास्तविक समय निगरानी को सुदृढ़ करेसमय-सीमाओं के कठोर अनुपालन को सुनिश्चित करे तथा लागत और समय की अधिकता के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित करे। सामग्री आपूर्तिस्वीकृतियों तथा निधि प्रवाह से संबंधित अवरोधों के समाधान हेतु असम सरकार के साथ समन्वय को और अधिक सुव्यवस्थित किया जा सकता है।

(पैरा 3.10.3)

 

समिति समुक्ति करती है कि वर्ष 2026–27 के लिए बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् हेतु विशेष पैकेज के अंतर्गत ₹156.00 करोड़ का आबंटन किया गया हैजबकि बजट अनुमान 2025–26 में यह आबंटन ₹50.00 करोड़ था। समिति यह भी समुक्ति करती है कि बजट अनुमान 2026–27 में बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् हेतु विशेष पैकेज के अंतर्गत बढ़े हुए आबंटन का प्रक्षेपण मुख्यतः प्रतिबद्ध देयताओं तथा प्रगति पर चल रहे कार्यों को पूरा करने के लिए किया गया है। यद्यपि यह समझौता ज्ञापन के अंतर्गत बढ़ती विकासात्मक आवश्यकताओं और प्रतिबद्धताओं को प्रतिबिंबित करता हैतथापि समिति इस बात पर बल देती है कि मात्र निधियों का आबंटन पर्याप्त नहीं होगाजब तक कि इसके साथ दक्ष उपयोगिता तथा मापनीय परिणाम सुनिश्चित न किए जाएं। समिति का मत है कि नए कार्यों को स्वीकृति प्रदान करने से पूर्वअपवादस्वरूप अत्यावश्यक क्षेत्रों को छोड़करप्रगति पर चल रही अवसंरचना परियोजनाओं के समापन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

(पैरा 3.10.4)

 

समिति सिफारिश करती है कि बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद्कार्बी आंगलोंग स्वायत्त प्रादेशिक परिषद् तथा दीमा हसाओ स्वायत्त प्रादेशिक परिषद् के अंतर्गत प्रगति पर चल रही सभी परियोजनाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित चरणबद्ध मील के पत्थरों के साथ समयबद्ध ढंग से पूर्ण किया जाए। मंत्रालय को संपर्कस्वास्थ्यशिक्षाऊर्जा आपूर्तिकौशल विकास तथा आजीविका सृजन पर केंद्रित एक समग्र विकास रूपरेखा विकसित करनी चाहिएजिससे इन स्वायत्त परिषद् क्षेत्रों में सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके। बेहतर योजना निर्माणअन्य केंद्रीय और राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण तथा विशेष पैकेज निधियों की परिणाम आधारित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तंत्र विकसित किए जाने चाहिए। समिति विशेष पैकेजों के अंतर्गत प्राप्त प्रगति तथा बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद्कार्बी आंगलोंग स्वायत्त प्रादेशिक परिषद् और दीमा हसाओ स्वायत्त प्रादेशिक परिषद् क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए निधियों के इष्टतम और समयबद्ध उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु उठाए गए कदमों के संबंध में अवगत कराए जाने की अपेक्षा करती है।

(पैरा 3.10.5)

 

समिति समुक्ति करती है कि विद्यमान केंद्रीय क्षेत्र योजना विशेष विकास पैकेज’ के अंतर्गत चार अतिरिक्त नए अवयव अर्थात् असम के आदिवासी समूहों के लिए विशेष पैकेजअसम के दीमासा समुदाय के लिए विशेष पैकेजअसम के उल्फा समूहों के लिए विशेष पैकेज तथा त्रिपुरा के जनजातीय समुदायों के लिए विशेष पैकेज को मंत्रिमंडल की दिनांक 08.08.2025 की स्वीकृति के अनुसार अनुमोदित किया गया है। समिति यह भी नोट करती है कि लक्षित और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए परियोजनाओं को समझौता ज्ञापन के प्रावधानों के अनुसार संबंधित राज्य सरकार तथा संबंधित समूहों के साथ परामर्श करके अंतिम रूप दिया जाएगा। समिति सिफारिश करती है कि इन विशेष पैकेजों से लाभान्वित होने वाले लोगों के समग्र विकास के लिए निधियों के इष्टतम और समयबद्ध उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक प्रयास किए जाएं। इन विशेष पैकेजों के अंतर्गत प्रारंभ की गई परियोजनाओं की भौतिक तथा वित्तीय प्रगति को दर्शाने वाली एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट समिति को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

(पैरा 3.10.6)

उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री विकास पहल

 

समिति समुक्ति करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री विकास पहल योजना को 12.10.2022 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषित केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में 2022–23 से 2025–26 की अवधि के लिए ₹6,600 करोड़ के व्यय प्रावधान के साथ अनुमोदित किया गया था। यह योजना प्रधानमंत्री गतिशक्ति के साथ अभिसरण में अवसंरचना सृजनसामाजिक विकास पहलों तथा आजीविका सृजन के माध्यम से उत्तर पूर्वी क्षेत्र के तीव्र और समग्र विकास का लक्ष्य रखती है। समिति इस पहल के अंतर्गत अवसंरचना सृजनसहायक उद्योगों को समर्थनसामाजिक विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका गतिविधियों के सृजन के संबंध में हुई प्रगति के बारे में अवगत कराए जाने की अपेक्षा करती हैजिससे आय और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिला हो। समिति को यह भी अवगत कराया जाए कि इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाएं अपनी स्थापना के पश्चात् भौतिक और वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति में किस सीमा तक सफल रही हैं।

 

(पैरा 3.11.5 )

समिति समुक्ति करती है कि दिनांक 31.01.2026 तक कुल 48 परियोजनाएँजिनकी लागत 6,044.36 करोड़ हैस्वास्थ्यशिक्षाखेलपर्यटनऊर्जा, संपर्कता तथा आजीविका जैसे विभिन्न क्षेत्रों में स्वीकृत की गई हैं। समिति ने बल दिया है कि योजनाओं के अपेक्षित परिणामों की प्राप्ति के लिए समयबद्ध क्रियान्वयन तथा प्रभावी निगरानी अत्यावश्यक है।

(पैरा 3.11.6 )

 

उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में केंद्रीय लोक उपक्रम (सी.पी.एस.ई.)

उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम (नेरामैक)

 

          समिति नोट करती है कि कृषि एवं उद्यानिकी उत्तर-पूर्व क्षेत्र में आजीविका के प्रमुख स्रोतों में से एक है तथा उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम (नेरामैक) थोक विपणनजी.आई. एवं ऑर्गेनिक उत्पादों के प्रचार-प्रसारराष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी के माध्यम से किसानों एवं कृषि-उद्यमियों को सार्थक सहयोग प्रदान कर रहा है। समिति इन प्रयासों की सराहना करती हैक्योंकि इससे बाज़ार तक पहुँच एवं मूल्य श्रृंखला विकास को सुदृढ़ता मिली है। समिति का मत है कि क्षेत्र की विशाल कृषि एवं उद्यानिकी क्षमता को देखते हुए वर्तमान संचालन का स्तर अभी भी सीमित है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम (नेरामैक) अपने क्रयविपणनआधारभूत संरचना विकासब्रांडिंग तथा उद्यमिता सहयोग गतिविधियों को पर्याप्त रूप से विस्तारित करेताकि अधिकाधिक किसानों को आच्छादित किया जा सके, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिले तथा उत्तर-पूर्व क्षेत्र के उत्पादों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में व्यापक पहुँच सुनिश्चित हो।

(पैरा 3.12.4)

उत्तर-पूर्वी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एनईएचएचडीसी)

 

समिति नोट करती है कि उत्तर-पूर्वी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एनईएचएचडीसी) उत्तर-पूर्व क्षेत्र के हस्तशिल्प एवं हथकरघा क्षेत्र को बाज़ार तक पहुँचकौशल विकासआधारभूत संरचना सहयोग तथा मूल्य श्रृंखला विकास के माध्यम से प्रोत्साहित एवं सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2025–26 के दौरान एनईएचएचडीसी ने सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेलाइंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर, हॉर्नबिल उत्सव तथा चियांग माई डिज़ाइन वीक जैसे प्रमुख आयोजनों में भाग लेकर उत्पादों की दृश्यता एवं निर्यात क्षमता को बढ़ाया।

(पैरा 3.13.15)

 

       समिति यह भी नोट करती है कि उत्तर-पूर्वी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एनईएचएचडीसी) का व्यय पैटर्न मुख्यतः पूंजीगत है। वर्ष 2026–27 के बजटीय अनुमान (बी.ई.) में वास्तविक पूंजीगत व्यय 55.75 करोड़ तक बढ़ाया गया हैजबकि 2025–26 के संशोधित अनुमान (आर.ई.) में यह 35.50 करोड़ था। बढ़ा हुआ आवंटन सरकार की आधारभूत संरचना विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समिति सिफ़ारिश करती है कि सभी हितधारक समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि शिल्पकारों की आजीविका सुदृढ़ करने एवं उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लोगों के लिए सतत आर्थिक अवसर सृजित करने हेतु उठाए गए उपायों के सुचारु क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न रहे।

(पैरा 3.13.16)

योजनाएँ, नीतियाँ एवं कार्यक्रम

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र

 

समिति नोट करती है कि प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (पी.एम.के.एस.वाई.)खाद्य प्रसंस्करण उद्योग हेतु उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पी.एल.आई.एस.एफ.पी.आई.) तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पी.एम.एफ.एम.ई.) पूरे देश मेंजिसमें उत्तर-पूर्व क्षेत्र भी सम्मिलित हैलागू की जा रही हैं। इन योजनाओं में उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान एवं निधि आरक्षण किया गया है। समिति यह भी नोट करती है कि एन.ई.सी. की योजनाओं के अंतर्गत उत्तर-पूर्व क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित पाँच परियोजनाएँ 28.86 करोड़ की लागत से स्वीकृत की गई हैंजिनमें से तीन प्रगति पर हैं तथा दो पूर्ण हो चुकी हैं (31.01.2026 तक)। समिति इन पहलों की सराहना करते हुए सिफ़ारिश करती है कि एम.डो.ने.र. मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु प्रयासों को तीव्र करेउपलब्ध योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाएस्थानीय उद्यमियों एवं किसान समूहों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करे तथा क्षेत्र-विशिष्ट परियोजनाओं को प्रोत्साहित करे, ताकि क्षेत्र की कृषि क्षमता का दोहन हो सके एवं रोजगार सृजित हो।

(पैरा 4.1.14)

 

          समिति नोट करती है कि उत्तर-पूर्व परिषद (एन.ई.सी.)उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय के अधीनकिसानों के बाज़ार संपर्क को सुदृढ़ करने हेतु विपणनब्रांडिंग एवं बाज़ार श्रृंखला विकास जैसे घटकों के माध्यम से अनेक परियोजनाओं को समर्थन प्रदान कर रहा है। समिति सराहना करती है कि एन.ई.सी. की योजनाओं के अंतर्गत 29 परियोजनाएँ 211.73 करोड़ की लागत से स्वीकृत एवं लागू की गई हैंजिनमें से 18 परियोजनाएँ 114.72 करोड़ की लागत से 31.01.2026 तक पूर्ण हो चुकी हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय अपने संस्थागत तंत्र को और सुदृढ़ करेताकि क्षेत्र के कृषि एवं संबद्ध उत्पादों के लिए प्रभावी संकलनमूल्य संवर्धनब्रांडिंग एवं लॉजिस्टिक्स सहयोग सुनिश्चित हो सके। इस संदर्भ में समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय किसानों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से बेहतर रूप से जोड़ने हेतु ठंड श्रृंखला अवसंरचनाडिजिटल बाज़ारों तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफ.पी.ओ.) के साथ सहयोग को बढ़ावा दे, ताकि किसानों को लाभकारी मूल्य एवं सतत आजीविका सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 4.1.15)

 

       समिति इस तथ्य को नोट करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालयसूक्ष्मलघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय तथा आयुष मंत्रालय के साथ समन्वय कर कृषि एवं संबद्ध उत्पादों में मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न योजनाओं एवं परियोजनाओं के माध्यम से किए गए प्रयास सराहनीय हैं। समिति का मत है कि इन पहलों की क्रियान्वयन स्थिति की समय-समय पर समीक्षा इनके परिणामों को और बेहतर बना सकती है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों के बीच अभिसरण को और सुदृढ़ करे तथा इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करे। समिति प्रसंस्करण अवसंरचना का विस्तारकौशल विकास तथा किसानों एवं स्थानीय उद्यमियों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी सहयोग की आवश्यक पर भी बल देती हैताकि मूल्य संवर्धन बढ़े, क्षेत्रीय उत्पादों की विपणन क्षमता सुधरे तथा उत्तर-पूर्व क्षेत्र में बेहतर आय के अवसर उत्पन्न हों।

(पैरा 4.1.16)

 

          समिति नोट करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु उत्तर-पूर्व क्षेत्र हेतु मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट(एम.ओ.वी.सी.डी.एन.ई.आर.) योजनाजो कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2015–16 से लागू की जा रही हैउल्लेखनीय है। समिति यह भी नोट करती है कि 2015–16 से 2025–26 तक उत्तर-पूर्व क्षेत्र के आठों राज्यों को एम.ओ.वी.सी.डी.एन.ई.आर. योजना के अंतर्गत जारी 146014.47 लाख में से 129297.24 लाख का उपयोग 31.12.2025 तक किया जा चुका है। यह दर्शाता है कि सभी राज्य जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्ध हैं। समिति यह भी स्वीकार करती है कि जैविक खेती के अंतर्गत पर्याप्त क्षेत्र लाया गया है, 427 किसान उत्पादक संगठन गठित किए गए हैं तथा राज्यों ने अपने स्वयं के जैविक उत्पाद ब्रांड विकसित किए हैं। समिति इन पहलों की सराहना करते हुए यह अवलोकन करती है कि जैविक खेती की वास्तविक क्षमता कुशल ब्रांडिंगविपणन तथा उपभोक्ताओं तक पहुँच से ही प्राप्त की जा सकती है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर नवीनतम प्रौद्योगिकियों एवं विचारों को सम्मिलित करते हुए ऐसा तंत्र विकसित करेजिससे जैविक मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ हो तथा प्रसंस्करणप्रमाणन, ब्रांडिंग एवं बाज़ार पहुँच को बढ़ावा मिले।

(पैरा 4.1.17)

 

पर्यटन

 

          समिति नोट करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र में प्रमुख पर्यटन स्थलों तक संपर्क सुधारने हेतु सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालयरेलवे मंत्रालय तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ समन्वय कर उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा किए गए प्रयास सराहनीय हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनाउड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) तथा भारतनेट जैसी योजनाओं के अंतर्गत हुई प्रगति भी उल्लेखनीय है। समिति सिफ़ारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों के साथ समन्वय को और सुदृढ़ करे, ताकि चल रही संपर्क परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किया जा सके तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों तक अंतिम चरण की संपर्कता (लास्ट-माइल कनेक्टिविटी) सुनिश्चित हो। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि पर्यटन को बढ़ावा देने एवं उत्तर-पूर्व क्षेत्र में संतुलित सामाजिक-आर्थिक विकास को सुगम बनाने हेतु एकीकृत परिवहन एवं संचार अवसंरचना विकसित की जाए।

(पैरा 4.2.7)

         समिति सराहना करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय ने आठों राज्यों में मॉडल पर्यटन परिपथों की पहचान की है तथा सतत एवं उच्च-मूल्य पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन किया है। इस पहल की पूर्ण आर्थिक क्षमता प्राप्त करने हेतु समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय मेघालय (सोहरा) एवं त्रिपुरा (मताबाड़ी) में वर्तमान में लागू एकीकृत विकास मॉडल को शेष छह परिपथों में भी शीघ्रता से लागू करे। अवसंरचना एवं संपर्कता को स्थानीय कौशल विकास तथा समुदाय-आधारित उद्यमिता से जोड़कर मंत्रालय इन विशिष्ट पारिस्थितिक एवं सांस्कृतिक परिपथों को विश्वस्तरीय गंतव्यों में परिवर्तित कर सकता है, जिससे उत्तर-पूर्व क्षेत्र के युवाओं के लिए समावेशी विकास एवं दीर्घकालिक रोजगार सुनिश्चित होगा।

(पैरा 4.2.8)

            

    समिति नोट करती है कि यद्यपि उत्तर-पूर्व क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैंवर्ष 2024 के पर्यटक आगमन के आँकड़े राज्यों में घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों के वितरण में उल्लेखनीय असंतुलन दर्शाते हैं। कुछ राज्यों में उत्साहजनक वृद्धि हुई हैजबकि अन्य राज्यों में पर्यटक आगमन कम या नकारात्मक वृद्धि दर रही है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय पर्यटन मंत्रालय एवं संबंधित राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर लक्षित रणनीतियाँ तैयार करेताकि कम-देखे गए गंतव्यों को बेहतर संपर्कताअवसंरचना विकासकेंद्रित विपणन तथा ईको-टूरिज़्म, सांस्कृतिक पर्यटन एवं साहसिक पर्यटन जैसे विशिष्ट पर्यटन को बढ़ावा देकर प्रोत्साहित किया जा सके। इससे सभी उत्तर-पूर्व राज्यों में संतुलित एवं सतत पर्यटन विकास सुनिश्चित होगा।

(पैरा 4.2.)

परिवहन एवं संपर्कता

 

समिति नोट करती है कि उत्तरपूर्वी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2014 में 10,905 किमी थीजो 2025 में बढ़कर 16,207 किमी हो गई है। समिति 2014 से राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के 48% विस्तार और मैत्री सेतु (उत्तरपूर्वी क्षेत्र से बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह तक संपर्कतथा धोलासादिया पुल (असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सीधा अंतरराज्यीय संपर्कजैसे रणनीतिक ऐतिहासिक कार्यों के सफल वितरण की सराहना करती हैजिन्होंने क्षेत्रीय संपर्कता को मौलिक रूप से बदल दिया है। इस गति को बनाए रखने के लिएसमिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) को कालादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के शेष सड़क घटकों में तेजी लाने के लिए एक केंद्रीय समन्वयक के रूप में अपनी भूमिका तेज करनी चाहिएजो कोलकाता बंदरगाह से म्यांमार के सिट वे बंदरगाह तक संपर्क स्थापित करेगा और आगे मिजोरम के माध्यम से उत्तरपूर्वी क्षेत्र (एनईआरको जोड़ेगा। साथ ही त्रिपक्षीय राजमार्ग, जिसका उद्देश्य देश के एनईआर को दक्षिणपूर्व एशिया से जोड़ना है, के कार्यों में भी तेजी लाई जाए ताकि इन महत्वपूर्ण गलियारों का पूर्ण संचालन सुनिश्चित हो सके। समर्पित वित्त पोषण का लाभ उठाकरमंत्रालय एक्ट ईस्ट पॉलिसी को बुनियादी ढांचे के मील के पत्थर से उत्तरपूर्व के लिए एक मजबूत, एकीकृत आर्थिक प्रवेश द्वार के रूप में प्रभावी ढंग से परिवर्तित कर सकता है।

(पैरा 4.3.7 )

रेल मार्ग

समिति का विचार है कि उत्तरपूर्वी क्षेत्र में रेलवे संपर्कता की अभी भी कमी है। लोगों और वस्तुओं की बेहतर आवाजाही के लिएउत्तरपूर्वी क्षेत्र को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क के साथ एकीकृत करना सामाजिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। बेहतर रेलवे संपर्कता क्षेत्र में रक्षा कर्मियों और रसद (सप्लाईकी तेजी से आवाजाही में भी मदद कर सकती है। समिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय जारी रेलवे परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए रेल मंत्रालय के साथ मिलकर कार्य करे। यह सक्रिय समन्वय लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और राष्ट्रीय रेल ग्रिड में उत्तरपूर्वी शहरों के निर्बाध एकीकरण में सहायता प्रदान करेगा।

 

(पैरा 4.4.4 )

औद्योगिक, बुनियादी ढांचा और कौशल विकास

 

समिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) में तेजी लानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उच्च गति वाली फाइबर संपर्कता प्रशासनिक केंद्रों से आगे बढ़कर शेष गैरग्राम पंचायत (जीपीगांवों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचे। सरकार द्वारा वित्त पोषित इन संपर्कता परियोजनाओं के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करकेमंत्रालय यह सुनिश्चित कर सकता है कि बुनियादी ढांचा विश्वसनीय लास्टमाइल‘ संपर्कता में परिवर्तित होजिससे ईगवर्नेंसडिजिटल शिक्षा और टेलीमेडिसिन के लिए क्षेत्र की क्षमता के द्वार खुल सकें।

(पैरा 4.5.8 )

 

समिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे में भौगोलिक असंतुलन को दूर करने के लिए कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के साथ सहयोग करेविशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) केंद्र स्थापित करके और नागालैंड तथा मिजोरम जैसे छोटे राज्यों में कम शिक्षुता (अपरेंटिसशिपजुड़ाव का विस्तार करके। इन कौशलनिर्माण पहलों को क्षेत्र के उभरते लॉजिस्टिक्स और डिजिटल क्षेत्रों के साथ जोड़करमंत्रालय यह सुनिश्चित कर सकता है कि स्थानीय कार्यबल न केवल प्रमाणित होबल्कि बढ़ते उत्तरपूर्व आर्थिक गलियारों के भीतर उच्चमूल्य वाले रोजगार के अवसरों में प्रभावी ढंग से एकीकृत हो।

(पैरा 4.5.9 )

 

समिति ‘राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर्स समिट 2025′ के माध्यम से निवेश हितों को सुरक्षित करने और इंडस्ट्री 4.0 प्रौद्योगिकियों के भविष्योन्मुखी एकीकरण में मंत्रालय के रणनीतिक प्रयास की सराहना करती है। निजी क्षेत्र की इस अभूतपूर्व रुचि का लाभ उठाने के लिएसमिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय नॉलेज पार्टनर्स‘ को शीघ्रता से जोड़ने और पहचाने गए 30 उच्चतकनीकी परियोजना अवधारणाओं के विवरण तैयार करने हेतु उत्तरपूर्वी राज्यों को तकनीकी सहायता प्रदान करे। उत्तर पूर्व परिवर्तनकारी औद्योगीकरण (उन्नतियोजना के वित्तीय प्रोत्साहनों को लॉजिस्टिक्स रोडमैप के कार्यान्वयन के साथ तालमेल बिठाकरमंत्रालय यह सुनिश्चित कर सकता है कि एआई संचालित प्रणालियों और स्मार्ट कोल्ड चेन की ओर संक्रमण प्रभावी रूप से व्यापार करने की लागत को कम करे, जिससे क्षेत्रीय निवेश संभावनाओं को एक स्थायी और तकनीकी रूप से उन्नत औद्योगिक आधार में बदला जा सके।

(पैरा 4.5.10 )

स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा

 

समिति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पहलों के व्यापक कवरेज की सराहना करती है और सिफारिश करती है कि  उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय एक रणनीतिक सुगमकर्ता के रूप में कार्य करेताकि ये सेवाएँ पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतिम छोर” तक पहुँच सकें। जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई)जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसकेतथा सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (एसयूएमएएनजैसी योजनाओं के प्रभाव को अधिकतम करने के लिए मंत्रालय को आधारभूत भौतिक एवं डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ करने को प्राथमिकता देनी चाहिएजैसे स्वास्थ्य केन्द्रों तक हर मौसम में उपलब्ध सड़क संपर्क तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के लिए विश्वसनीय ट्रैकिंग प्रणालियाँजो पहाड़ी क्षेत्रों में संस्थागत स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में प्रायः प्रमुख बाधाएँ होती हैं। यह सुनिश्चित करते हुए कि वित्तीय प्रोत्साहन लाभार्थियों तथा मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशातक समय पर पहुँचें और ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाएँ पूर्णतः सुसज्जित हों, मंत्रालय राष्ट्रीय नीतियों और क्षेत्रीय स्वास्थ्य परिणामों के बीच की खाई को प्रभावी रूप से पाट सकता है तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्रत्येक माता और बच्चे के लिए सम्मानजनक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर सकता है।   

(पैरा 4.6.12)

 

समिति पूर्वोत्तर क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का संज्ञान लेते हुए संतोष व्यक्त करती है, जिसमें वर्ष 2013–14 के बाद से मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 172.7% की वृद्धि तथा स्नातक (यूजीसीटों में 206.1% की वृद्धि शामिल है। तथापिसमिति यह भी देखती है कि क्षेत्र के भीतर उल्लेखनीय असमानता विद्यमान हैजहाँ कुल मेडिकल कॉलेजों और सीटों में से 50% से अधिक केवल असम में स्थित हैंजबकि सिक्किम जैसे राज्यों में अभी तक कोई सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं है तथा अरुणाचल प्रदेशमिजोरमनागालैंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में केवल एक-एक संस्थान उपलब्ध है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए समिति सिफारिशकरती है कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालयस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के समन्वय सेइन अल्पसेवित राज्यों में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को प्राथमिकता दे तथा स्नातकोत्तर (पीजीसीटों की क्षमता को दोगुना करने पर विशेष ध्यान देक्योंकि यूजी सीटों की तुलना में पीजी सीटों की वृद्धि केवल 108.2% रही है। पूर्वोत्तर के प्रत्येक राज्य में तृतीयक स्वास्थ्य शिक्षा तंत्र को सुदृढ़ कर मंत्रालय विशेषज्ञ चिकित्सकों के अधिक न्यायसंगत वितरण तथा एक मजबूत एवं आत्मनिर्भर स्वास्थ्य कार्यबल के निर्माण को सुनिश्चित कर सकता है।

(पैरा 4.6.13)

 

           समिति मिशन इन्द्रधनुष के माध्यम से टीकाकरण कवरेज में सुधार हेतु अपनाई गई बहु-स्तरीय रणनीति तथा यू-विन (यूनिवर्सल इम्यूनाइज़ेशन विन प्लेटफॉर्म) पोर्टल के माध्यम से डिजिटल एकीकरण की सराहना करती हैकिन्तु सिफारिशकरती है कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय अपनी क्षेत्रीय समन्वय भूमिका का उपयोग करते हुए पूर्वोत्तर के विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों से उत्पन्न अंतिम छोर” से संबंधित संभार चुनौतियों का समाधान करे। राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस (एनआईडीतथा अन्य गतिविधियों/कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय को दूरस्थ पहाड़ी जिलों में शीत-श्रंखला अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु लक्षित समर्थन प्रदान करना चाहिए तथा अवसेवित/अल्पसेवित क्षेत्रों में बिना टीकाकरण वाले बच्चों तक पहुँचने के लिए मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) को क्षेत्र-विशिष्ट गतिशीलता भत्ता प्रदान करने हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए।

(पैरा 4.6.14)

 

समिति नोट करती है कि उत्तर पूर्व क्षेत्र में 54574 प्रथमिक विद्यालय हैं जबकि इसकी तुलना में केवल 5325 उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं, जो यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे विद्यार्थी आगे की कक्षाओं में बढ़ते हैंसंस्थागत उपलब्धता में कमी आती जाती है। अत:, इस असंतुलन को दूर करने तथा संभावित ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए समिति सिफारिशकरती है कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय लक्षित अवसंरचनात्मक वित्तपोषण के माध्यम से मौजूदा माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक स्तर तक उन्नत करने तथा अधिक उच्च माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना को प्राथमिकता दे। जिन राज्यों में संस्थागत अंतर अधिक है वहाँ विशेष ध्यान देते हुए तथा इन उन्नयन कार्यों को भौगोलिक रूप से इस प्रकार वितरित करते हुए कि पहाड़ी क्षेत्रों में अंतिम छोर” तक पहुँच सुनिश्चित हो, मंत्रालय यह सुनिश्चित कर सकता है कि क्षेत्र के युवाओं को अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण करने और आगे उच्च शिक्षा अथवा कौशल विकास कार्यक्रमों में प्रवेश करने के लिए आवश्यक संस्थागत समर्थन उपलब्ध हो।

(पैरा 4.6.15)

कला और संस्कृति 

 

          समिति संस्कृति मंत्रालय तथा क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों द्वारा गुरु-शिष्य परंपरा योजना तथा ओसीटीएवीई और राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव जैसे राष्ट्रीय उत्सवों के माध्यम से क्षेत्रीय विरासत के संरक्षण हेतु किए गए कार्यों की सराहना करती है। इन प्रयासों को और सुदृढ़ करने के लिए समिति सिफारिशकरती है कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय स्थानीय कलाकारों को उनके पारंपरिक शिल्प और प्रस्तुतियों को स्थायी आजीविका में परिवर्तित करने में सहायता प्रदान करेइसके लिए इन्हें क्षेत्र के मॉडल पर्यटन परिपथों में सीधे एकीकृत किया जाए। ग्राम स्तर पर स्थायी प्रदर्शन स्थलों का निर्माण कर तथा लुप्तप्राय कला रूपों के प्रलेखन हेतु गैर-सरकारी संगठनों को बेहतर वित्तीय सहायता प्रदान कर मंत्रालय यह सुनिश्चित करे है कि पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान न केवल आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहे, बल्कि स्थानीय आर्थिक विकास का एक प्रमुख प्रेरक भी बने।

(पैरा 4.7.10)

 

समिति पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में स्थापित “करु बिपोनी” नामक शिल्प विक्रय केंद्र के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र के हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री हेतु उपलब्ध कराए गए बाजार संपर्क की सराहना करती है। साथ ही शिल्पग्राम क्राफ्ट्स विलेजगुवाहाटीस्टोन स्कल्प्चर गार्डनदीमापुर तथा अन्य स्थानों पर शिल्प प्रदर्शनियोंबिक्री स्टॉलों और सांस्कृतिक उत्सवों के आयोजन की भी प्रशंसा करती हैजिससे कारीगरों को प्रत्यक्ष बाजार उपलब्धताप्रचार-प्रसार और व्यापक पहचान प्राप्त होती है। समिति सिफारिशकरती है कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय इन प्रयासों का विस्तार करते हुए विशेष रूप से पूर्वोत्तर के हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों के लिए एक सुदृढ़ ई-कॉमर्स मंच स्थापित करेजिससे वैश्विक खरीदारों तक पहुँच सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्तमंत्रालय प्रमुख भारतीय महानगरों में स्थायी विपणन केंद्र स्थापित करने तथा कारीगरों को डिजिटल विपणन और गुणवत्ता मानकीकरण का प्रशिक्षण प्रदान करने पर भी ध्यान दे। साथ हीमंत्रालय पूर्वोत्तर राज्यों में भौगोलिक संकेतक (जीआईटैगिंग के विस्तार को प्रोत्साहित करे, जिससे इन उत्पादों की बाजार-योग्यता में वृद्धि हो सके।

(पैरा 4.7.11  )

 

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समिति की समुक्तियाँ/सिफारिशें – एक नज़र में

 

अनुदान मांगों का आकलन

 

बजट- एक नजर में

 

समिति नोट करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय को बजटीय आबंटन में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त हुई है, जो कि संशोधित अनुमान 2025–26 में ₹4479.20 करोड़ से बढ़कर बजट अनुमान 2026–27 में ₹6812.30 करोड़ हो गई हैअर्थात् 52 प्रतिशत की वृद्धि। तथापियदि इसकी तुलना बजट अनुमान 2025–26 में ₹5915 करोड़ के आबंटन से की जाएतो लगभग 15 प्रतिशत की ही सीमांत वृद्धि परिलक्षित होती है। समिति यह जानना चाहेगी कि बजट अनुमान 2025–26 की तुलना में संशोधित अनुमान 2025–26 में इतनी उल्लेखनीय कमी होने तथा उसके पश्चात् बजट अनुमान 2026–27 में पुनः इतनी अधिक वृद्धि होने के क्या कारण हैं। समिति का मत है कि बजट अनुमान तथा संशोधित अनुमान के स्तर पर इस प्रकार के उतारचढ़ाव वित्तीय नियोजन में अंतराल को प्रतिबिंबित करते हैं और इससे प्रगति पर चल रही परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हो सकती है। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय प्रगति पर चल रही तथा नई परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय करे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि राज्य सरकारें तथा कार्यान्वयन एजेंसियां आबंटित निधियों का इष्टतम उपयोग करें और समय पर उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें, ताकि प्रक्रियागत त्रुटियों के कारण संशोधित अनुमान के स्तर पर होने वाली बड़ी कटौतियों से भविष्य में बचा जा सके।

(पैरा 2.1.3)

 

योजना-वार प्रक्षेपण बनाम निधियों का आबंटन

 

     समिति नोट करती है कि वर्ष 2026–27 के लिए कुल प्रक्षेपित व्यय में संशोधित प्राक्कलन 2025–26 की तुलना में 69.54 प्रतिशत तथा बजट प्राक्कलन 2026–27 की तुलना में 11.21 प्रतिशत की समग्र वृद्धि दर्ज की गई है। समिति समुक्ति करती है कि आबंटन में यह उल्लेखनीय वृद्धि मुख्यतः उत्तर-पूर्व विशेष अवसंरचना विकास योजनाविशेष विकास पैकेज तथा प्रधानमंत्री विकास पहल के अंतर्गत बढ़े हुए प्रावधानों के कारण है। यद्यपि समिति इस बढ़े हुए बजटीय समर्थन की सराहना करती हैतथापि वह इस बात पर बल देती है कि आबंटन में इस प्रकार की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ निधियों के दक्ष एवं प्रभावी उपयोग तथा सुदृढ़ निगरानी तंत्र भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जिससे लागत तथा समय की अतिवृद्धि से बचा जा सके।

(पैरा 2.2.5)

     समिति आगे नोट करती है कि उत्तर-पूर्व विशेष अवसंरचना विकास योजना के अंतर्गत (जिसमें सड़केंओटीआरआई तथा एनएलसीपीआर-राज्य घटक सम्मिलित हैं) बजट प्राक्कलन 2026–27 में 2500 करोड़ का आबंटन किया गया हैजो संशोधित प्राक्कलन 2025–26 के 1600 करोड़ के आबंटन की तुलना में 56.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। समिति इसे उत्तर-पूर्वी क्षेत्रविशेषकर संपर्क-वंचित तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखती है। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय उच्च सामाजिक-आर्थिक प्रभाव वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता प्रदान करे, समय-सीमाओं के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करे तथा ऐसे बढ़े हुए निवेशों के ठोस लाभों का आकलन करने के लिए परिणाम-आधारित निगरानी प्रणाली अपनाए।

(पैरा 2.2.6)

 

समिति समुक्ति करती है कि विशेष विकास पैकेजों के अंतर्गत संशोधित अनुमान 2025-26 (₹165 करोड़की तुलना में अनुमानित परिव्यय (₹1350 करोड़में 718.18 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि परिलक्षित होती है। यह वृद्धि मुख्यतः असम और त्रिपुरा में समावेशी विकास को प्रोत्साहित करते हुए हाशिए पर स्थित समुदायों के उत्थान हेतु बढ़ी हुई प्रावधानों के कारण है। समिति आदिवासी तथा वंचित समुदायों की उन्नति और कल्याण को सुनिश्चित करने तथा क्षेत्र में विकास को प्रोत्साहित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की सराहना करती है। समिति सिफारिश करती है कि इन पैकेजों के कार्यान्वयन का संबंधित राज्य सरकारों के साथ घनिष्ठ समन्वय किया जाए ताकि पारदर्शिताजवाबदेही और मापनीय परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें। समिति यह भी सुझाव देती है कि प्रत्येक पैकेज के अंतर्गत भौतिक और वित्तीय उपलब्धियों का संकेत करते हुए संबंधित राज्य सरकारों तथा कार्यान्वयन एजेंसियों से समयसमय पर प्रगति प्रतिवेदन प्राप्त किए जाएं।

(पैरा 2.2.7 )

निधियों का उपयोग

 

     समिति नोट करती है कि वर्ष 2024–25 के दौरान मंत्रालय संशोधित अनुमान ₹4,006.00 करोड़ के विरुद्ध ₹3,447.71 करोड़ का उपयोग कर सकाजिससे 86.06 प्रतिशत उपयोगिता प्राप्त हुईतथा इस अल्पउपयोग का मुख्य कारण राज्य सरकारों और कार्यान्वयन एजेंसियों से अपेक्षा से कम मांग प्राप्त होना बताया गया है। समिति आगे यह भी नोट करती है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025–26 में 31 दिसम्बर, 2025 की स्थिति के अनुसार संशोधित अनुमान ₹4,479.20 करोड़ के विरुद्ध ₹3,451.95 करोड़ का व्यय किया गया हैजो 77.07 प्रतिशत उपयोगिता को दर्शाता है। यद्यपि मंत्रालय ने यह विश्वास व्यक्त किया है कि वित्तीय वर्ष के अंत तक उत्तर पूर्वी विशेष अवसंरचना विकास योजनाउत्तर पूर्वी परिषद् की योजनाएं तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री विकास पहल जैसी प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत संशोधित अनुमान का पूर्ण उपयोग कर लिया जाएगातथापि समिति का मत है कि इन योजनाओं के अंतर्गत शेष बची निधियों का समुचित नियोजन के साथ उपयोग किया जा सकता है। समिति सिफारिश करती है कि आगामी वित्तीय वर्ष के लिए मंत्रालय सभी हितधारकों के साथ परामर्श करते हुए एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करेजिसमें भौतिक तथा वित्तीय उपलब्धियों के स्पष्ट चरण निर्धारित किए जाएंताकि वर्ष 2026–27 के दौरान योजनाओं का समयबद्ध और इष्टतम कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

 

(पैरा 2.3.8)

 

समिति समुक्ति करती है कि प्रस्तावों के प्रस्तुतीकरण में विलंब, लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्रप्रक्रियात्मक अनुपालन तथा परियोजनाओं के धीमे क्रियान्वयन जैसे कारक निधियों के इष्टतम उपयोग को प्रभावित करते हैं। राज्यों तथा क्रियान्वयन एजेंसियों के साथ कठोर निगरानी, नियमित समीक्षा बैठकों तथा सतत अनुवर्तन के लिए मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए समिति सिफारिश करती है कि प्रस्तावों तथा उपयोगिता प्रमाण-पत्रों के समयबद्ध प्रस्तुतीकरण को सुनिश्चित करने तथा प्रक्रियात्मक अवरोधों को न्यूनतम करने के लिए अधिक संरचित एवं समयबद्ध समन्वय तंत्र संस्थागत रूप से स्थापित किया जाए।

(पैरा 2.3.9 )

 

     समिति आगे सिफारिश करती है कि मंत्रालय राज्य सरकारों तथा संबंधित एजेंसियों के साथ परामर्श करते हुए अग्रिम योजना तथा त्रैमासिक व्यय पूर्वानुमान को सुदृढ़ करेताकि प्रक्षेपित उपयोग स्तरों से होने वाले विचलनों की पहचान प्रारंभिक चरण में ही कर उनका समाधान किया जा सके। समिति मंत्रालय से यह भी आग्रह करती है कि वर्ष 2025–26 के लिए संशोधित प्राक्कलन का पूर्ण तथा प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा अंतिम तिमाही में व्यय के संकुचन से बचा जाएजिससे योजनाओं का दक्ष, परिणामोन्मुखी तथा वित्तीय रूप से विवेकपूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 2.3.10)

 

कुल राजस्व तथा पूंजीगत परिव्यय

 

     समिति समुक्ति करती है कि प्रधानमंत्री डिवाइन योजना के अंतर्गत राजस्व अनुभाग में वर्ष 2025–26 के बजट प्राक्कलन में 789.50 करोड़ का आबंटन किया गया थाजबकि संशोधित प्राक्कलन 356.55 करोड़ रहा तथा 31 दिसम्बर, 2025 तक वास्तविक व्यय 201.80 करोड़ हुआ। वर्ष 2026–27 के लिए प्रक्षेपित मांग 859.29 करोड़ हैजबकि बजट प्राक्कलन 2026-27 में ₹ 260.45 करोड़ का आबंटन किया गया है। समिति का मत है कि प्रक्षेपित राशि बजट प्राक्कलन 2026-27 में किए गए आबंटन की तुलना में अत्यधिक अधिक है। समिति इस योजना के अंतर्गत बजट प्राक्कलन 2026-27 में वास्तविक आबंटन के मुकाबले प्रक्षेपित मांग में इस प्रकार की उल्लेखनीय कमी के कारणों से अवगत कराई जाना चाहती है। अतः समिति सिफारिश करती है कि यदि इस योजना के अंतर्गत परियोजनाओं के कार्यान्वयन के दौरान किसी प्रकार की कमी उत्पन्न होती है, तो संशोधित प्राक्कलन चरण पर अतिरिक्त निधि की मांग की जा सकती है।

(पैरा 2.5.3)

 

     समिति नोट करती है कि वर्ष 2025–26 के दौरान पूंजी खंड के अंतर्गत संशोधित अनुमान ₹ 3,067.41 करोड़ के विरुद्ध कुल उपयोगिता 2,438.49 करोड़ रही हैजिससे यह संकेत मिलता है कि वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में व्यय की गति को और तीव्र किए जाने की आवश्यकता है। समिति यह भी नोट करती है कि कुछ योजनाओंजैसे उत्तर पूर्वी विशेष अवसंरचना विकास योजना (अन्य परिवहन एवं संपर्क अवसंरचनातथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री विकास पहल में व्यय की प्रगति अपेक्षाकृत बेहतर रही है और उत्तर पूर्व उद्यम विकास योजनाजो पूर्व में उत्तर पूर्व विकास वित्त निगम को ऋण के रूप में दी जाती थीके अंतर्गत पूर्ण उपयोगिता परिलक्षित हुई हैतथापि अन्य घटकों के अंतर्गत 31 दिसम्बर, 2025 तक तुलनात्मक रूप से कम उपयोगिता दर्ज की गई है। उत्तर पूर्वी परिषद् की योजनाएं पूंजी के अंतर्गत व्यय अत्यंत कम है। समिति इस योजना के पूंजी खंड के अंतर्गत इतने सीमांत व्यय के कारणों से अवगत कराए जाने की अपेक्षा करती है। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय यह सुनिश्चित करे कि निधियों के उपयोग में इस प्रकार के अंतराल से बचा जाए और योजनाओं की वित्तीय विवेकशीलता के साथ योजना बनाते हुए सभी हितधारकों के साथ परामर्श कर प्राप्त करने योग्य लक्ष्य निर्धारित किए जाएंजिनमें स्पष्ट भौतिक तथा वित्तीय उपलब्धियां निर्धारित होंताकि वर्ष 2026–27 के दौरान योजनाओं का समयबद्ध तथा इष्टतम कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

(पैरा 2.5.4)

 

     समिति समुक्ति करती है कि वर्ष 2026–27 के लिए पूंजीगत अनुभाग के अंतर्गत कुल आबंटन मंत्रालय के कुल बजट प्राक्कलन 2026-27 का 67.01% हैजो व्यापक रूप से पूर्ववर्ती वर्ष के पूंजी-प्रधान व्यय प्रतिरूप के अनुरूप हैजब वर्ष 2025–26 के लिए पूंजीगत अनुभाग के अंतर्गत आबंटन बजट प्राक्कलन 2025-26 का 68.10% था। पूंजीगत परिव्यय पर दिया गया यह बल सराहनीय है, क्योंकि यह उत्तर पूर्वी क्षेत्र में अवसंरचना सृजन तथा दीर्घकालिक परिसंपत्ति विकास में प्रत्यक्ष रूप से योगदान देता है।

(पैरा 2.5.5)

केंद्रीय क्षेत्र योजनाएं

उत्तर पूर्व परिषद् की योजनाएं

 

समिति नोट करती है कि उत्तर पूर्वी परिषद् उत्तर पूर्वी क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण विकासात्मक अंतरालों को दूर करने तथा संतुलित सामाजिकआर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने में निरंतर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। समिति इस बात की सराहना करती है कि उत्तर पूर्वी परिषद् की योजनाएं”, जो भारत सरकार की पूर्णतः केंद्रीय क्षेत्र की योजना हैके अंतर्गत 31.12.2025 की स्थिति के अनुसार 13,297.84 करोड़ की लागत वाले 1810 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई हैजिनमें से 1282 परियोजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं। यह उत्तर पूर्वी क्षेत्र के आठों राज्यों में कार्यान्वयन तथा पहुंच के सराहनीय स्तर को परिलक्षित करता है। तथापिसमिति समुक्ति करती है कि 33.33 करोड़ की लागत वाली परियोजनाएं निरस्त कर दी गई हैं तथा 522 परियोजनाएं अभी प्रगति पर हैं और इनमें पर्याप्त वित्तीय परिव्यय संलग्न है। अतः समिति सिफारिश करती है कि इन परियोजनाओं का समयबद्ध समापन अत्यंत आवश्यक है ताकि लागत में वृद्धि से बचा जा सके और विकासात्मक लाभ बिना विलंब के जनता तक पहुंच सकें। संशोधित अनुमान 2025–26 में आबंटन को 822 करोड़ से बढ़ाकर 1000 करोड़ किए जानेजिसका मुख्य कारण अतिरिक्त निधि की आवश्यकता तथा अगरतलाअखौरा रेल संपर्क परियोजना के संवर्धित लागत घटक सहित अन्य आवश्यकताएं हैंसे यह संकेत मिलता है कि इस योजना के अंतर्गत प्रतिबद्ध देयताओं में वृद्धि हो रही है। समिति का मत है कि इस प्रकार के मध्यवर्षीय संशोधन अधिक यथार्थवादी बजट निर्माण तथा बेहतर वित्तीय पूर्वानुमान की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। समिति आगे सिफारिश करती है कि मंत्रालय प्रगति पर चल रही परियोजनाओं की प्रगति की सतत निगरानी के लिए उपयुक्त उपाय करे और संशोधित अनुमान के स्तर पर वित्तीय दबाव की स्थिति से बचने का प्रयास करे।

(पैरा 3.1.12 )

 

          समिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्व परिषद् (एनईसीको अपनी परियोजना मूल्यांकननिगरानी तथा समीक्षा प्रणालियों को और अधिक सुदृढ़ करना चाहिएताकि निर्धारित समयसीमाओं तथा स्वीकृत लागत अनुमानों का कठोरता से पालन सुनिश्चित किया जा सके। समिति यह भी सिफारिश करती है कि एक सुदृढ़ वित्तीय योजना ढांचा विकसित किया जाएजिससे प्रतिबद्ध देयताओं का यथार्थपरक आकलन पूर्व में ही किया जा सके और संशोधित प्राक्कलन चरण पर उल्लेखनीय वृद्धि की आवश्यकता को न्यूनतम किया जा सके। समिति का यह भी मत है कि अगरतलाअखौरा रेल संपर्क जैसी प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण करने के लिए विशेष ध्यान दिया जाना चाहिएताकि आगे की लागत वृद्धि को रोका जा सके और क्षेत्र को अपेक्षित सामरिक तथा संपर्कसंबंधी लाभ निर्धारित समयसीमा में प्राप्त हो सकें।

(पैरा 3.1.13)

 

उत्तर पूर्व और सिक्किम के लिए केंद्रीय संसाधन पूल/उत्तर पूर्व विशेष अवसंरचना विकास योजना (एनईएसआईडीएस)

 

     समिति इस तथ्य का संज्ञान लेती है कि उत्तर पूर्वी विशेष अवसंरचना विकास योजना (अन्य परिवहन एवं संपर्क अवसंरचनाके अंतर्गत 119.13 करोड़ की अनुमानित लागत वाली पाँच परियोजनाओं के संकल्पपत्र तथा 992.60 करोड़ की लागत वाली 26 परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन वर्तमान में विचाराधीन हैं। उत्तर पूर्वी विशेष अवसंरचना विकास योजना (सड़केंश्रेणी के अंतर्गत 326.43 करोड़ की कुल लागत वाली सात परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन भी परीक्षणाधीन हैं। आगे यह अपेक्षित है कि इन परियोजनाओं को योजना के दिशानिर्देशों के अनुपालनबजटीय परिव्यय की उपलब्धता तथा संबंधित रेखा मंत्रालयों के आवश्यक समर्थन के अधीन स्वीकृति प्रदान की जाएगी। समिति यह समझती है कि इन परियोजनाओं का समयबद्ध कार्यान्वयन अन्य संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों पर भी निर्भर करता हैतथापि उसका मत है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास के लिए नोडल मंत्रालय होने के नाते उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय को संबंधित मंत्रालयों के साथ नियमित समन्वय स्थापित करना चाहिए ताकि परियोजनाओं का समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। मंत्रालय को अंतरमंत्रालयी समन्वय तंत्र को सुदृढ़ करना चाहिए तथा विशेष रूप से सड़क परिवहनरेलविद्युतसंचारकृषि आदि मंत्रालयों के साथ उत्तर पूर्वी परियोजनाओं के लिए एक अंतरमंत्रालयी कार्यबल का गठन करना चाहिए। साथ ही परियोजनाओं की प्रगति की समयसमय पर समीक्षा भी की जानी चाहिए, जिससे किसी भी प्रकार की चुनौतियों अथवा अवरोधों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जा सके और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति प्रभावित न हो।

(पैरा 3.2.8)

 

     समिति नोट करती है कि अधिक पूंजीगत परिव्यय की दिशा में झुकाव इस योजना की अवसंरचना-केंद्रित प्रकृति तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र में परिसंपत्ति सृजन पर दिए गए बल को परिलक्षित करता है। तथापिसमिति यह भी समुक्ति करती है कि वर्ष 2025-26 में पूंजीगत शीर्ष के अंतर्गत बजट प्राक्कलन और संशोधित प्राक्कलन के बीच पर्याप्त अंतर परिलक्षित होता है (बजट प्राक्कलन चरण पर ₹ 2385.47 करोड़ से घटकर संशोधित प्राक्कलन चरण पर 1506.65 करोड़), जो परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अवरोधों अथवा परियोजना निष्पादन की धीमी गति का संकेत देता है। अतः समिति सिफारिश करती है कि निधियों के इष्टतम उपयोग तथा रियोजनाओं के समय-सीमा के भीतर और न्यूनतम विलंब के साथ कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए परियोजनाओं के प्रदर्शन की समय-समय पर निगरानी की जानी चाहिए।

(पैरा 3.2.9)

 

उत्तर पूर्व उद्यम विकास योजना (नीड्स) पूर्ववर्ती उत्तर पूर्व विकास वित्त निगम को ऋण

 

समिति उत्तर पूर्व उद्यम विकास योजना (नीड्स) के अंतर्गत प्राप्त प्रगति की सराहना करती हैजो सूक्ष्मलघु और मध्यम उद्यमों तथा सूक्ष्म वित्त क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए ऋण संबद्धता प्रदान करती हैजो दोनों ही उत्तर पूर्वी क्षेत्र में समावेशी और संतुलित विकास को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समिति सूक्ष्मलघु और मध्यम उद्यमों को समर्थन और सुदृढ़ बनाने तथा विविध आर्थिक क्षेत्रों में सूक्ष्म वित्त के विस्तार हेतु नीड्स के माध्यम से की गई पहलों और परियोजनाओं को भी स्वीकार करती है। ये प्रयास वित्तीय सहायता की आवश्यकता वाले युवा उद्यमियों को गति प्रदान कर रहे हैं तथा उन्हें उद्यम विकास के लिए आवश्यक सहयोग और प्रोत्साहन उपलब्ध करा रहे हैं। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय इस योजना के अंतर्गत की गई पहलों के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक अध्ययन कराएजिसमें ग्रामीण कारीगरों की आय में वृद्धिउत्तर पूर्वी राज्यों में लघु और मध्यम उद्यमों की संख्या में वृद्धिपारंपरिक उद्योगों का संवर्धन तथा पारंपरिक कला और शिल्प के संरक्षण आदि जैसे कारकों को सम्मिलित किया जा सकता है।

(पैरा 3.3.6)

 

विशेष विकास पैकेज

 

बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् (बीटीसी)कार्बी आंगलोंग स्वायत्त प्रादेशिक परिषद्(केएएटीसी) दीमा हसाओ स्वायत्त प्रादेशिक परिषद्(डीएचएटीसी) असम के आदिवासी समूह. असम के दिमासा लोग, असम अल्फा समूह और त्रिपुरा के आदिवासियों के लिए विशेष विकास पैकेज

 

समिति बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् क्षेत्र में परियोजनाओं के क्रियान्वयन की सतत निगरानी के लिए क्षेत्रीय तकनीकी सहायता इकाइयोंपरियोजना गुणवत्ता पर्यवेक्षकों तथा तृतीय पक्ष तकनीकी निरीक्षण एजेंसियों जैसे निगरानी तंत्रों की तैनाती के संबंध में मंत्रालय की पहलों की सराहना करती है। तथापि समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय वास्तविक समय निगरानी को सुदृढ़ करेसमय-सीमाओं के कठोर अनुपालन को सुनिश्चित करे तथा लागत और समय की अधिकता के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित करे। सामग्री आपूर्तिस्वीकृतियों तथा निधि प्रवाह से संबंधित अवरोधों के समाधान हेतु असम सरकार के साथ समन्वय को और अधिक सुव्यवस्थित किया जा सकता है।

(पैरा 3.10.3)

 

समिति समुक्ति करती है कि वर्ष 2026–27 के लिए बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् हेतु विशेष पैकेज के अंतर्गत ₹156.00 करोड़ का आबंटन किया गया हैजबकि बजट अनुमान 2025–26 में यह आबंटन ₹50.00 करोड़ था। समिति यह भी समुक्ति करती है कि बजट अनुमान 2026–27 में बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् हेतु विशेष पैकेज के अंतर्गत बढ़े हुए आबंटन का प्रक्षेपण मुख्यतः प्रतिबद्ध देयताओं तथा प्रगति पर चल रहे कार्यों को पूरा करने के लिए किया गया है। यद्यपि यह समझौता ज्ञापन के अंतर्गत बढ़ती विकासात्मक आवश्यकताओं और प्रतिबद्धताओं को प्रतिबिंबित करता हैतथापि समिति इस बात पर बल देती है कि मात्र निधियों का आबंटन पर्याप्त नहीं होगाजब तक कि इसके साथ दक्ष उपयोगिता तथा मापनीय परिणाम सुनिश्चित न किए जाएं। समिति का मत है कि नए कार्यों को स्वीकृति प्रदान करने से पूर्वअपवादस्वरूप अत्यावश्यक क्षेत्रों को छोड़करप्रगति पर चल रही अवसंरचना परियोजनाओं के समापन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

(पैरा 3.10.4)

 

समिति सिफारिश करती है कि बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद्कार्बी आंगलोंग स्वायत्त प्रादेशिक परिषद् तथा दीमा हसाओ स्वायत्त प्रादेशिक परिषद् के अंतर्गत प्रगति पर चल रही सभी परियोजनाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित चरणबद्ध मील के पत्थरों के साथ समयबद्ध ढंग से पूर्ण किया जाए। मंत्रालय को संपर्कस्वास्थ्यशिक्षाऊर्जा आपूर्तिकौशल विकास तथा आजीविका सृजन पर केंद्रित एक समग्र विकास रूपरेखा विकसित करनी चाहिएजिससे इन स्वायत्त परिषद् क्षेत्रों में सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके। बेहतर योजना निर्माणअन्य केंद्रीय और राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण तथा विशेष पैकेज निधियों की परिणाम आधारित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तंत्र विकसित किए जाने चाहिए। समिति विशेष पैकेजों के अंतर्गत प्राप्त प्रगति तथा बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद्कार्बी आंगलोंग स्वायत्त प्रादेशिक परिषद् और दीमा हसाओ स्वायत्त प्रादेशिक परिषद् क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए निधियों के इष्टतम और समयबद्ध उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु उठाए गए कदमों के संबंध में अवगत कराए जाने की अपेक्षा करती है।

(पैरा 3.10.5)

 

समिति समुक्ति करती है कि विद्यमान केंद्रीय क्षेत्र योजना विशेष विकास पैकेज’ के अंतर्गत चार अतिरिक्त नए अवयव अर्थात् असम के आदिवासी समूहों के लिए विशेष पैकेजअसम के दीमासा समुदाय के लिए विशेष पैकेजअसम के उल्फा समूहों के लिए विशेष पैकेज तथा त्रिपुरा के जनजातीय समुदायों के लिए विशेष पैकेज को मंत्रिमंडल की दिनांक 08.08.2025 की स्वीकृति के अनुसार अनुमोदित किया गया है। समिति यह भी नोट करती है कि लक्षित और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए परियोजनाओं को समझौता ज्ञापन के प्रावधानों के अनुसार संबंधित राज्य सरकार तथा संबंधित समूहों के साथ परामर्श करके अंतिम रूप दिया जाएगा। समिति सिफारिश करती है कि इन विशेष पैकेजों से लाभान्वित होने वाले लोगों के समग्र विकास के लिए निधियों के इष्टतम और समयबद्ध उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक प्रयास किए जाएं। इन विशेष पैकेजों के अंतर्गत प्रारंभ की गई परियोजनाओं की भौतिक तथा वित्तीय प्रगति को दर्शाने वाली एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट समिति को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

(पैरा 3.10.6)

उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री विकास पहल

 

समिति समुक्ति करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री विकास पहल योजना को 12.10.2022 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषित केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में 2022–23 से 2025–26 की अवधि के लिए ₹6,600 करोड़ के व्यय प्रावधान के साथ अनुमोदित किया गया था। यह योजना प्रधानमंत्री गतिशक्ति के साथ अभिसरण में अवसंरचना सृजनसामाजिक विकास पहलों तथा आजीविका सृजन के माध्यम से उत्तर पूर्वी क्षेत्र के तीव्र और समग्र विकास का लक्ष्य रखती है। समिति इस पहल के अंतर्गत अवसंरचना सृजनसहायक उद्योगों को समर्थनसामाजिक विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका गतिविधियों के सृजन के संबंध में हुई प्रगति के बारे में अवगत कराए जाने की अपेक्षा करती हैजिससे आय और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिला हो। समिति को यह भी अवगत कराया जाए कि इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाएं अपनी स्थापना के पश्चात् भौतिक और वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति में किस सीमा तक सफल रही हैं।

 

(पैरा 3.11.5 )

समिति समुक्ति करती है कि दिनांक 31.01.2026 तक कुल 48 परियोजनाएँजिनकी लागत 6,044.36 करोड़ हैस्वास्थ्यशिक्षाखेलपर्यटनऊर्जा, संपर्कता तथा आजीविका जैसे विभिन्न क्षेत्रों में स्वीकृत की गई हैं। समिति ने बल दिया है कि योजनाओं के अपेक्षित परिणामों की प्राप्ति के लिए समयबद्ध क्रियान्वयन तथा प्रभावी निगरानी अत्यावश्यक है।

(पैरा 3.11.6 )

 

उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में केंद्रीय लोक उपक्रम (सी.पी.एस.ई.)

उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम (नेरामैक)

 

     समिति नोट करती है कि कृषि एवं उद्यानिकी उत्तर-पूर्व क्षेत्र में आजीविका के प्रमुख स्रोतों में से एक है तथा उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम (नेरामैक) थोक विपणनजी.आई. एवं ऑर्गेनिक उत्पादों के प्रचार-प्रसारराष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी के माध्यम से किसानों एवं कृषि-उद्यमियों को सार्थक सहयोग प्रदान कर रहा है। समिति इन प्रयासों की सराहना करती हैक्योंकि इससे बाज़ार तक पहुँच एवं मूल्य श्रृंखला विकास को सुदृढ़ता मिली है। समिति का मत है कि क्षेत्र की विशाल कृषि एवं उद्यानिकी क्षमता को देखते हुए वर्तमान संचालन का स्तर अभी भी सीमित है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम (नेरामैक) अपने क्रयविपणनआधारभूत संरचना विकासब्रांडिंग तथा उद्यमिता सहयोग गतिविधियों को पर्याप्त रूप से विस्तारित करेताकि अधिकाधिक किसानों को आच्छादित किया जा सके, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिले तथा उत्तर-पूर्व क्षेत्र के उत्पादों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में व्यापक पहुँच सुनिश्चित हो।

(पैरा 3.12.4)

उत्तर-पूर्वी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एनईएचएचडीसी)

समिति नोट करती है कि उत्तर-पूर्वी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एनईएचएचडीसी) उत्तर-पूर्व क्षेत्र के हस्तशिल्प एवं हथकरघा क्षेत्र को बाज़ार तक पहुँचकौशल विकासआधारभूत संरचना सहयोग तथा मूल्य श्रृंखला विकास के माध्यम से प्रोत्साहित एवं सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2025–26 के दौरान एनईएचएचडीसी ने सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेलाइंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर, हॉर्नबिल उत्सव तथा चियांग माई डिज़ाइन वीक जैसे प्रमुख आयोजनों में भाग लेकर उत्पादों की दृश्यता एवं निर्यात क्षमता को बढ़ाया।

(पैरा 3.13.15)

 

  समिति यह भी नोट करती है कि उत्तर-पूर्वी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एनईएचएचडीसी) का व्यय पैटर्न मुख्यतः पूंजीगत है। वर्ष 2026–27 के बजटीय अनुमान (बी.ई.) में वास्तविक पूंजीगत व्यय 55.75 करोड़ तक बढ़ाया गया हैजबकि 2025–26 के संशोधित अनुमान (आर.ई.) में यह 35.50 करोड़ था। बढ़ा हुआ आवंटन सरकार की आधारभूत संरचना विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समिति सिफ़ारिश करती है कि सभी हितधारक समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि शिल्पकारों की आजीविका सुदृढ़ करने एवं उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लोगों के लिए सतत आर्थिक अवसर सृजित करने हेतु उठाए गए उपायों के सुचारु क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न रहे।

(पैरा 3.13.16)

योजनाएँ, नीतियाँ एवं कार्यक्रम

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र

 

समिति नोट करती है कि प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (पी.एम.के.एस.वाई.)खाद्य प्रसंस्करण उद्योग हेतु उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पी.एल.आई.एस.एफ.पी.आई.) तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पी.एम.एफ.एम.ई.) पूरे देश मेंजिसमें उत्तर-पूर्व क्षेत्र भी सम्मिलित हैलागू की जा रही हैं। इन योजनाओं में उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान एवं निधि आरक्षण किया गया है। समिति यह भी नोट करती है कि एन.ई.सी. की योजनाओं के अंतर्गत उत्तर-पूर्व क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित पाँच परियोजनाएँ 28.86 करोड़ की लागत से स्वीकृत की गई हैंजिनमें से तीन प्रगति पर हैं तथा दो पूर्ण हो चुकी हैं (31.01.2026 तक)। समिति इन पहलों की सराहना करते हुए सिफ़ारिश करती है कि एम.डो.ने.र. मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु प्रयासों को तीव्र करेउपलब्ध योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाएस्थानीय उद्यमियों एवं किसान समूहों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करे तथा क्षेत्र-विशिष्ट परियोजनाओं को प्रोत्साहित करे, ताकि क्षेत्र की कृषि क्षमता का दोहन हो सके एवं रोजगार सृजित हो।

(पैरा 4.1.14)

 

     समिति नोट करती है कि उत्तर-पूर्व परिषद (एन.ई.सी.)उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय के अधीनकिसानों के बाज़ार संपर्क को सुदृढ़ करने हेतु विपणनब्रांडिंग एवं बाज़ार श्रृंखला विकास जैसे घटकों के माध्यम से अनेक परियोजनाओं को समर्थन प्रदान कर रहा है। समिति सराहना करती है कि एन.ई.सी. की योजनाओं के अंतर्गत 29 परियोजनाएँ 211.73 करोड़ की लागत से स्वीकृत एवं लागू की गई हैंजिनमें से 18 परियोजनाएँ 114.72 करोड़ की लागत से 31.01.2026 तक पूर्ण हो चुकी हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय अपने संस्थागत तंत्र को और सुदृढ़ करेताकि क्षेत्र के कृषि एवं संबद्ध उत्पादों के लिए प्रभावी संकलनमूल्य संवर्धनब्रांडिंग एवं लॉजिस्टिक्स सहयोग सुनिश्चित हो सके। इस संदर्भ में समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय किसानों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से बेहतर रूप से जोड़ने हेतु ठंड श्रृंखला अवसंरचनाडिजिटल बाज़ारों तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफ.पी.ओ.) के साथ सहयोग को बढ़ावा दे, ताकि किसानों को लाभकारी मूल्य एवं सतत आजीविका सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 4.1.15)

 

  समिति इस तथ्य को नोट करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालयसूक्ष्मलघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय तथा आयुष मंत्रालय के साथ समन्वय कर कृषि एवं संबद्ध उत्पादों में मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न योजनाओं एवं परियोजनाओं के माध्यम से किए गए प्रयास सराहनीय हैं। समिति का मत है कि इन पहलों की क्रियान्वयन स्थिति की समय-समय पर समीक्षा इनके परिणामों को और बेहतर बना सकती है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों के बीच अभिसरण को और सुदृढ़ करे तथा इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करे। समिति प्रसंस्करण अवसंरचना का विस्तारकौशल विकास तथा किसानों एवं स्थानीय उद्यमियों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी सहयोग की आवश्यक पर भी बल देती हैताकि मूल्य संवर्धन बढ़े, क्षेत्रीय उत्पादों की विपणन क्षमता सुधरे तथा उत्तर-पूर्व क्षेत्र में बेहतर आय के अवसर उत्पन्न हों।

(पैरा 4.1.16)

 

     समिति नोट करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु उत्तर-पूर्व क्षेत्र हेतु मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट(एम.ओ.वी.सी.डी.एन.ई.आर.) योजनाजो कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2015–16 से लागू की जा रही हैउल्लेखनीय है। समिति यह भी नोट करती है कि 2015–16 से 2025–26 तक उत्तर-पूर्व क्षेत्र के आठों राज्यों को एम.ओ.वी.सी.डी.एन.ई.आर. योजना के अंतर्गत जारी 146014.47 लाख में से 129297.24 लाख का उपयोग 31.12.2025 तक किया जा चुका है। यह दर्शाता है कि सभी राज्य जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्ध हैं। समिति यह भी स्वीकार करती है कि जैविक खेती के अंतर्गत पर्याप्त क्षेत्र लाया गया है, 427 किसान उत्पादक संगठन गठित किए गए हैं तथा राज्यों ने अपने स्वयं के जैविक उत्पाद ब्रांड विकसित किए हैं। समिति इन पहलों की सराहना करते हुए यह अवलोकन करती है कि जैविक खेती की वास्तविक क्षमता कुशल ब्रांडिंगविपणन तथा उपभोक्ताओं तक पहुँच से ही प्राप्त की जा सकती है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर नवीनतम प्रौद्योगिकियों एवं विचारों को सम्मिलित करते हुए ऐसा तंत्र विकसित करेजिससे जैविक मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ हो तथा प्रसंस्करणप्रमाणन, ब्रांडिंग एवं बाज़ार पहुँच को बढ़ावा मिले।

(पैरा 4.1.17)

 

पर्यटन

 

     समिति नोट करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र में प्रमुख पर्यटन स्थलों तक संपर्क सुधारने हेतु सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालयरेलवे मंत्रालय तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ समन्वय कर उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा किए गए प्रयास सराहनीय हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनाउड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) तथा भारतनेट जैसी योजनाओं के अंतर्गत हुई प्रगति भी उल्लेखनीय है। समिति सिफ़ारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों के साथ समन्वय को और सुदृढ़ करे, ताकि चल रही संपर्क परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किया जा सके तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों तक अंतिम चरण की संपर्कता (लास्ट-माइल कनेक्टिविटी) सुनिश्चित हो। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि पर्यटन को बढ़ावा देने एवं उत्तर-पूर्व क्षेत्र में संतुलित सामाजिक-आर्थिक विकास को सुगम बनाने हेतु एकीकृत परिवहन एवं संचार अवसंरचना विकसित की जाए।

(पैरा 4.2.7)

         समिति सराहना करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय ने आठों राज्यों में मॉडल पर्यटन परिपथों की पहचान की है तथा सतत एवं उच्च-मूल्य पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन किया है। इस पहल की पूर्ण आर्थिक क्षमता प्राप्त करने हेतु समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय मेघालय (सोहरा) एवं त्रिपुरा (मताबाड़ी) में वर्तमान में लागू एकीकृत विकास मॉडल को शेष छह परिपथों में भी शीघ्रता से लागू करे। अवसंरचना एवं संपर्कता को स्थानीय कौशल विकास तथा समुदाय-आधारित उद्यमिता से जोड़कर मंत्रालय इन विशिष्ट पारिस्थितिक एवं सांस्कृतिक परिपथों को विश्वस्तरीय गंतव्यों में परिवर्तित कर सकता है, जिससे उत्तर-पूर्व क्षेत्र के युवाओं के लिए समावेशी विकास एवं दीर्घकालिक रोजगार सुनिश्चित होगा।

(पैरा 4.2.8)

       

    समिति नोट करती है कि यद्यपि उत्तर-पूर्व क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैंवर्ष 2024 के पर्यटक आगमन के आँकड़े राज्यों में घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों के वितरण में उल्लेखनीय असंतुलन दर्शाते हैं। कुछ राज्यों में उत्साहजनक वृद्धि हुई हैजबकि अन्य राज्यों में पर्यटक आगमन कम या नकारात्मक वृद्धि दर रही है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय पर्यटन मंत्रालय एवं संबंधित राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर लक्षित रणनीतियाँ तैयार करेताकि कम-देखे गए गंतव्यों को बेहतर संपर्कताअवसंरचना विकासकेंद्रित विपणन तथा ईको-टूरिज़्म, सांस्कृतिक पर्यटन एवं साहसिक पर्यटन जैसे विशिष्ट पर्यटन को बढ़ावा देकर प्रोत्साहित किया जा सके। इससे सभी उत्तर-पूर्व राज्यों में संतुलित एवं सतत पर्यटन विकास सुनिश्चित होगा।

(पैरा 4.2.)

परिवहन एवं संपर्कता

 

समिति नोट करती है कि उत्तरपूर्वी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2014 में 10,905 किमी थीजो 2025 में बढ़कर 16,207 किमी हो गई है। समिति 2014 से राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के 48% विस्तार और मैत्री सेतु (उत्तरपूर्वी क्षेत्र से बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह तक संपर्कतथा धोलासादिया पुल (असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सीधा अंतरराज्यीय संपर्कजैसे रणनीतिक ऐतिहासिक कार्यों के सफल वितरण की सराहना करती हैजिन्होंने क्षेत्रीय संपर्कता को मौलिक रूप से बदल दिया है। इस गति को बनाए रखने के लिएसमिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) को कालादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के शेष सड़क घटकों में तेजी लाने के लिए एक केंद्रीय समन्वयक के रूप में अपनी भूमिका तेज करनी चाहिएजो कोलकाता बंदरगाह से म्यांमार के सिट वे बंदरगाह तक संपर्क स्थापित करेगा और आगे मिजोरम के माध्यम से उत्तरपूर्वी क्षेत्र (एनईआरको जोड़ेगा। साथ ही त्रिपक्षीय राजमार्ग, जिसका उद्देश्य देश के एनईआर को दक्षिणपूर्व एशिया से जोड़ना है, के कार्यों में भी तेजी लाई जाए ताकि इन महत्वपूर्ण गलियारों का पूर्ण संचालन सुनिश्चित हो सके। समर्पित वित्त पोषण का लाभ उठाकरमंत्रालय एक्ट ईस्ट पॉलिसी को बुनियादी ढांचे के मील के पत्थर से उत्तरपूर्व के लिए एक मजबूत, एकीकृत आर्थिक प्रवेश द्वार के रूप में प्रभावी ढंग से परिवर्तित कर सकता है।

(पैरा 4.3.7 )

रेल मार्ग

समिति का विचार है कि उत्तरपूर्वी क्षेत्र में रेलवे संपर्कता की अभी भी कमी है। लोगों और वस्तुओं की बेहतर आवाजाही के लिएउत्तरपूर्वी क्षेत्र को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क के साथ एकीकृत करना सामाजिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। बेहतर रेलवे संपर्कता क्षेत्र में रक्षा कर्मियों और रसद (सप्लाईकी तेजी से आवाजाही में भी मदद कर सकती है। समिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय जारी रेलवे परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए रेल मंत्रालय के साथ मिलकर कार्य करे। यह सक्रिय समन्वय लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और राष्ट्रीय रेल ग्रिड में उत्तरपूर्वी शहरों के निर्बाध एकीकरण में सहायता प्रदान करेगा।

 

(पैरा 4.4.4 )

औद्योगिक, बुनियादी ढांचा और कौशल विकास

 

समिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) में तेजी लानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उच्च गति वाली फाइबर संपर्कता प्रशासनिक केंद्रों से आगे बढ़कर शेष गैरग्राम पंचायत (जीपीगांवों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचे। सरकार द्वारा वित्त पोषित इन संपर्कता परियोजनाओं के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करकेमंत्रालय यह सुनिश्चित कर सकता है कि बुनियादी ढांचा विश्वसनीय लास्टमाइल‘ संपर्कता में परिवर्तित होजिससे ईगवर्नेंसडिजिटल शिक्षा और टेलीमेडिसिन के लिए क्षेत्र की क्षमता के द्वार खुल सकें।

(पैरा 4.5.8 )

 

समिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे में भौगोलिक असंतुलन को दूर करने के लिए कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के साथ सहयोग करेविशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) केंद्र स्थापित करके और नागालैंड तथा मिजोरम जैसे छोटे राज्यों में कम शिक्षुता (अपरेंटिसशिपजुड़ाव का विस्तार करके। इन कौशलनिर्माण पहलों को क्षेत्र के उभरते लॉजिस्टिक्स और डिजिटल क्षेत्रों के साथ जोड़करमंत्रालय यह सुनिश्चित कर सकता है कि स्थानीय कार्यबल न केवल प्रमाणित होबल्कि बढ़ते उत्तरपूर्व आर्थिक गलियारों के भीतर उच्चमूल्य वाले रोजगार के अवसरों में प्रभावी ढंग से एकीकृत हो।

(पैरा 4.5.9 )

 

समिति ‘राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर्स समिट 2025′ के माध्यम से निवेश हितों को सुरक्षित करने और इंडस्ट्री 4.0 प्रौद्योगिकियों के भविष्योन्मुखी एकीकरण में मंत्रालय के रणनीतिक प्रयास की सराहना करती है। निजी क्षेत्र की इस अभूतपूर्व रुचि का लाभ उठाने के लिएसमिति सिफारिश करती है कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय नॉलेज पार्टनर्स‘ को शीघ्रता से जोड़ने और पहचाने गए 30 उच्चतकनीकी परियोजना अवधारणाओं के विवरण तैयार करने हेतु उत्तरपूर्वी राज्यों को तकनीकी सहायता प्रदान करे। उत्तर पूर्व परिवर्तनकारी औद्योगीकरण (उन्नतियोजना के वित्तीय प्रोत्साहनों को लॉजिस्टिक्स रोडमैप के कार्यान्वयन के साथ तालमेल बिठाकरमंत्रालय यह सुनिश्चित कर सकता है कि एआई संचालित प्रणालियों और स्मार्ट कोल्ड चेन की ओर संक्रमण प्रभावी रूप से व्यापार करने की लागत को कम करे, जिससे क्षेत्रीय निवेश संभावनाओं को एक स्थायी और तकनीकी रूप से उन्नत औद्योगिक आधार में बदला जा सके।

(पैरा 4.5.10 )

स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा

 

समिति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएमके अंतर्गत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पहलों के व्यापक कवरेज की सराहना करती है और सिफारिश करती है कि  उत्तरपूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय एक रणनीतिक सुगमकर्ता के रूप में कार्य करेताकि ये सेवाएँ पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतिम छोर” तक पहुँच सकें। जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई)जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके) तथा सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (एसयूएमएएन) जैसी योजनाओं के प्रभाव को अधिकतम करने के लिए मंत्रालय को आधारभूत भौतिक एवं डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ करने को प्राथमिकता देनी चाहिएजैसे स्वास्थ्य केन्द्रों तक हर मौसम में उपलब्ध सड़क संपर्क तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के लिए विश्वसनीय ट्रैकिंग प्रणालियाँजो पहाड़ी क्षेत्रों में संस्थागत स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में प्रायः प्रमुख बाधाएँ होती हैं। यह सुनिश्चित करते हुए कि वित्तीय प्रोत्साहन लाभार्थियों तथा मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशातक समय पर पहुँचें और ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाएँ पूर्णतः सुसज्जित हों, मंत्रालय राष्ट्रीय नीतियों और क्षेत्रीय स्वास्थ्य परिणामों के बीच की खाई को प्रभावी रूप से पाट सकता है तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्रत्येक माता और बच्चे के लिए सम्मानजनक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर सकता है।  

(पैरा 4.6.12)

 

समिति पूर्वोत्तर क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का संज्ञान लेते हुए संतोष व्यक्त करती है, जिसमें वर्ष 2013–14 के बाद से मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 172.7% की वृद्धि तथा स्नातक (यूजीसीटों में 206.1% की वृद्धि शामिल है। तथापिसमिति यह भी देखती है कि क्षेत्र के भीतर उल्लेखनीय असमानता विद्यमान हैजहाँ कुल मेडिकल कॉलेजों और सीटों में से 50% से अधिक केवल असम में स्थित हैंजबकि सिक्किम जैसे राज्यों में अभी तक कोई सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं है तथा अरुणाचल प्रदेशमिजोरमनागालैंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में केवल एकएक संस्थान उपलब्ध है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए समिति सिफारिशकरती है कि उत्तरपूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालयस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के समन्वय सेइन अल्पसेवित राज्यों में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को प्राथमिकता दे तथा स्नातकोत्तर (पीजीसीटों की क्षमता को दोगुना करने पर विशेष ध्यान देक्योंकि यूजी सीटों की तुलना में पीजी सीटों की वृद्धि केवल 108.2% रही है। पूर्वोत्तर के प्रत्येक राज्य में तृतीयक स्वास्थ्य शिक्षा तंत्र को सुदृढ़ कर मंत्रालय विशेषज्ञ चिकित्सकों के अधिक न्यायसंगत वितरण तथा एक मजबूत एवं आत्मनिर्भर स्वास्थ्य कार्यबल के निर्माण को सुनिश्चित कर सकता है।

(पैरा 4.6.13)

 

           समिति मिशन इन्द्रधनुष के माध्यम से टीकाकरण कवरेज में सुधार हेतु अपनाई गई बहुस्तरीय रणनीति तथा यूविन (यूनिवर्सल इम्यूनाइज़ेशन विन प्लेटफॉर्म) पोर्टल के माध्यम से डिजिटल एकीकरण की सराहना करती हैकिन्तु सिफारिशकरती है कि उत्तरपूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय अपनी क्षेत्रीय समन्वय भूमिका का उपयोग करते हुए पूर्वोत्तर के विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों से उत्पन्न अंतिम छोर” से संबंधित संभार चुनौतियों का समाधान करे। राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस (एनआईडी) तथा अन्य गतिविधियों/कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय को दूरस्थ पहाड़ी जिलों में शीतश्रंखला अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु लक्षित समर्थन प्रदान करना चाहिए तथा अवसेवित/अल्पसेवित क्षेत्रों में बिना टीकाकरण वाले बच्चों तक पहुँचने के लिए मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशाको क्षेत्रविशिष्ट गतिशीलता भत्ता प्रदान करने हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए।

(पैरा 4.6.14)

 

समिति नोट करती है कि उत्तर पूर्व क्षेत्र में 54574 प्रथमिक विद्यालय हैं जबकि इसकी तुलना में केवल 5325 उच्च माध्यमिक विद्यालय हैंजो यह दर्शाता है कि जैसेजैसे विद्यार्थी आगे की कक्षाओं में बढ़ते हैंसंस्थागत उपलब्धता में कमी आती जाती है। अत:, इस असंतुलन को दूर करने तथा संभावित ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए समिति सिफारिशकरती है कि उत्तरपूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय लक्षित अवसंरचनात्मक वित्तपोषण के माध्यम से मौजूदा माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक स्तर तक उन्नत करने तथा अधिक उच्च माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना को प्राथमिकता दे। जिन राज्यों में संस्थागत अंतर अधिक है वहाँ विशेष ध्यान देते हुए तथा इन उन्नयन कार्यों को भौगोलिक रूप से इस प्रकार वितरित करते हुए कि पहाड़ी क्षेत्रों में अंतिम छोर” तक पहुँच सुनिश्चित हो, मंत्रालय यह सुनिश्चित कर सकता है कि क्षेत्र के युवाओं को अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण करने और आगे उच्च शिक्षा अथवा कौशल विकास कार्यक्रमों में प्रवेश करने के लिए आवश्यक संस्थागत समर्थन उपलब्ध हो।

(पैरा 4.6.15)

कला और संस्कृति 

 

          समिति संस्कृति मंत्रालय तथा क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों द्वारा गुरुशिष्य परंपरा योजना तथा ओसीटीएवीई और राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव जैसे राष्ट्रीय उत्सवों के माध्यम से क्षेत्रीय विरासत के संरक्षण हेतु किए गए कार्यों की सराहना करती है। इन प्रयासों को और सुदृढ़ करने के लिए समिति सिफारिशकरती है कि उत्तरपूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय स्थानीय कलाकारों को उनके पारंपरिक शिल्प और प्रस्तुतियों को स्थायी आजीविका में परिवर्तित करने में सहायता प्रदान करेइसके लिए इन्हें क्षेत्र के मॉडल पर्यटन परिपथों में सीधे एकीकृत किया जाए। ग्राम स्तर पर स्थायी प्रदर्शन स्थलों का निर्माण कर तथा लुप्तप्राय कला रूपों के प्रलेखन हेतु गैरसरकारी संगठनों को बेहतर वित्तीय सहायता प्रदान कर मंत्रालय यह सुनिश्चित करे है कि पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान न केवल आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहे, बल्कि स्थानीय आर्थिक विकास का एक प्रमुख प्रेरक भी बने।

(पैरा 4.7.10)

 

समिति पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में स्थापित करु बिपोनी नामक शिल्प विक्रय केंद्र के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र के हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री हेतु उपलब्ध कराए गए बाजार संपर्क की सराहना करती है। साथ ही शिल्पग्राम क्राफ्ट्स विलेजगुवाहाटीस्टोन स्कल्प्चर गार्डनदीमापुर तथा अन्य स्थानों पर शिल्प प्रदर्शनियोंबिक्री स्टॉलों और सांस्कृतिक उत्सवों के आयोजन की भी प्रशंसा करती हैजिससे कारीगरों को प्रत्यक्ष बाजार उपलब्धताप्रचारप्रसार और व्यापक पहचान प्राप्त होती है। समिति सिफारिशकरती है कि उत्तरपूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय इन प्रयासों का विस्तार करते हुए विशेष रूप से पूर्वोत्तर के हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों के लिए एक सुदृढ़ कॉमर्स मंच स्थापित करेजिससे वैश्विक खरीदारों तक पहुँच सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्तमंत्रालय प्रमुख भारतीय महानगरों में स्थायी विपणन केंद्र स्थापित करने तथा कारीगरों को डिजिटल विपणन और गुणवत्ता मानकीकरण का प्रशिक्षण प्रदान करने पर भी ध्यान दे। साथ हीमंत्रालय पूर्वोत्तर राज्यों में भौगोलिक संकेतक (जीआईटैगिंग के विस्तार को प्रोत्साहित करेजिससे इन उत्पादों की बाजारयोग्यता में वृद्धि हो सके।

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