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डीपीआईआईटी और हाफेल इंडिया ने विनिर्माण नवाचार और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) और हाफेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 07 मई 2025 को नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य उत्पाद स्टार्टअप, एमएसएमई और उद्यमियों को सशक्त बनाकर भारत के विनिर्माण और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। यह साझेदारी लचीली स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के भारत के दृष्टिकोण को गति देने के लिए साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस रणनीतिक सहयोग के तहत, हाफेल ऐसी पहलों को आगे बढ़ाएगा जो लक्षित निवेश, मार्गदर्शन और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण के माध्यम से उत्पाद नवाचार, स्थानीय सोर्सिंग और उद्यमशीलता का समर्थन करेंगे।

हाफेल बुनियादी ढांचे, आपूर्तिकर्ता विकास के अवसरों, तकनीकी सहयोग और बाजार तक पहुंच प्रदान करके स्टार्टअप और एमएसएमई को अपना समर्थन बढ़ाएगा। हाफेल ने पहले ही एक भारतीय उपकरण निर्माण स्टार्टअप में 2.5 मिलियन अमरीकी डालर से अधिक की प्रतिबद्धता जताई है और आर्किटेक्चरल हार्डवेयर और फर्नीचर फिटिंग के भारतीय एमएसएमई निर्माताओं को खरीद ऑर्डर दिए हैं। DPIIT स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र तक पहुंच की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे स्टार्टअप कनेक्शन, कार्यक्रम भागीदारी और सह-ब्रांडिंग सक्षम होगी।

डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव श्री संजीव ने कहा, “हाफ़ेल इंडिया के साथ साझेदारी सहयोगी औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के हमारे दृष्टिकोण का उदाहरण है। यह मेक इन इंडिया विज़न के साथ संरेखित टिकाऊ विनिर्माण विकास को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और स्थानीय उद्यमशीलता ऊर्जा को एक साथ लाता है।”

हैफेल के प्रबंध निदेशक (दक्षिण एशिया) फ्रैंक श्लोएडर ने कहा, “हैफेल में, हम मानते हैं कि भारत की नवाचार और विनिर्माण क्षमता बेजोड़ है। इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से, हम भारतीय उद्यमियों और स्टार्टअप के साथ अपने जुड़ाव को गहरा करने और आज के ‘भारत के लिए भारत’ और कल के ‘विश्व के लिए भारत’ के विजन की दिशा में मिलकर काम करने के लिए उत्साहित हैं।”

इस समझौता ज्ञापन पर डीपीआईआईटी के निदेशक डॉ. सुमीत जारंगल और हाफेल इंडिया के प्रबंध निदेशक (दक्षिण एशिया) श्री फ्रैंक श्लोएडर ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए। यह हस्ताक्षर की तारीख से दो साल की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा, जिसमें आपसी सहमति के आधार पर विस्तार की गुंजाइश होगी।

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अभिषेक दयाल/अभिजीत नारायणन

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