हाल ही में, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर अधिनियम के तहत फर्जी कटौती और छूट के दावों के साथ आयकर रिटर्न दाखिल करने में शामिल कई बिचौलियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इस कार्रवाई से पता चला कि कुछ बिचौलियों ने कमीशन के आधार पर गलत दावों के साथ रिटर्न दाखिल करने के लिए पूरे भारत में अपने एजेंटों का नेटवर्क स्थापित किया हुआ था। यह देखा गया कि पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) या धर्मार्थ संस्थानों को दान के नाम पर बड़ी मात्रा में फर्जी दावे किए गए थे, जिससे कर देनदारियों में कमी आई और फर्जी रिफंड का दावा भी किया गया। प्रवर्तन कार्रवाइयों से प्राप्त साक्ष्यों से पता चला कि कई आरयूपीपी, जिनमें से कई रिटर्न दाखिल नहीं करते थे, अपने पंजीकृत पते पर कार्यरत नहीं थे और किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं थे, धन के हस्तांतरण, हवाला लेनदेन, सीमा पार धन प्रेषण और दान के लिए फर्जी रसीदें जारी करने के लिए माध्यम के रूप में उपयोग किए जा रहे थे। सीबीडीटी ने इनमें से कुछ आरयूपीपी और ट्रस्टों के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया और व्यक्तियों द्वारा फर्जी दान और कंपनियों द्वारा फर्जी सीएसआर के संबंध में आपत्तिजनक साक्ष्य एकत्र किए।
सीबीडीटी ने संदिग्ध दावों का शीघ्र पता लगाने और उच्च जोखिम वाले व्यवहार पैटर्न की पहचान करने के लिए अपने डेटा-आधारित दृष्टिकोण को मजबूत किया है। ऐसा ही एक जोखिम पैटर्न आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80GGC या 80G के तहत दावा करने वाले करदाताओं के लिए पहचाना गया है। डेटा विश्लेषण से पता चला है कि कई करदाता संदिग्ध संस्थाओं को दिए गए दान पर कटौती का दावा करने में संलिप्त हैं या उन्होंने संस्थाओं की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए प्रासंगिक जानकारी प्रदान नहीं की है। बड़ी संख्या में करदाताओं ने चालू आयकर रिटर्न (2025-26) के लिए अपने आयकर रिटर्न को संशोधित कर लिया है और पिछले वर्षों के लिए अद्यतन आयकर रिटर्न दाखिल कर दिए हैं।
करदाताओं के हित में एक लक्षित NUDGE अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत उन्हें अपने आयकर रिटर्न को अपडेट करने और यदि कोई गलत दावा हो तो उसे वापस लेने का अवसर दिया जा रहा है। 12 दिसंबर 2025 से ऐसे करदाताओं को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल पते पर एसएमएस और ईमेल के माध्यम से सलाह भेजी जा रही है ।
प्रत्येक करदाता को सलाह दी जाती है कि वे विभाग के साथ अपने सभी दस्तावेजों में सही मोबाइल और ईमेल आईडी अवश्य दर्ज करें ताकि उन्हें किसी भी प्रकार का संचार छूटने से बचाया जा सके।









