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खेलो भारत कॉन्क्लेव में खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने 2036 ओलंपिक के लिए भारत की पदक रणनीति की रूपरेखा तैयार की

“राष्ट्र को सर्वोपरि रखें, अहंकार को त्यागें – केवल एकजुट शक्ति ही भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बना सकती है” डॉ. मंडाविया ने कहा

भारतीय ओलंपिक संघ, भारतीय पैरालंपिक समिति, राष्ट्रीय खेल महासंघ, कॉर्पोरेट्स, शीर्ष खेल प्रशासक 2047 तक भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय विचार-मंथन सत्र में शामिल हुए

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने गुरुवार को 2036 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में शीर्ष 10 देशों में स्थान पाने के लिए भारत की रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की। खेलो भारत कॉन्क्लेव में, जिसमें भारतीय ओलंपिक संघ, भारतीय पैरालंपिक समिति, राष्ट्रीय खेल महासंघों, प्रमुख खेल संस्थानों, प्रमुख कॉर्पोरेट घरानों और भारतीय खेल जगत की वरिष्ठ हस्तियों के प्रमुख हितधारकों ने एक दिवसीय विचार-मंथन सत्र में भाग लिया, जिसका उद्देश्य 2047 तक भारत को एक वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की रूपरेखा तैयार करना था।

इंटरैक्टिव खेलो भारत कॉन्क्लेव में खेलो भारत नीति 2025 (खेल नीति) में निहित कई प्रमुख स्तंभों पर चर्चा की गई। इनमें सुशासन के महत्व और आगामी राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जिसे 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।

यद्यपि एथलीट खेलो भारत नीति के केंद्र में हैं, लेकिन सरकार ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि राष्ट्रीय खेल महासंघों, राज्य सरकारों और कॉर्पोरेट घरानों को यह सुनिश्चित करने में प्रमुख भूमिका निभानी होगी कि भारत 2036 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक और पैरालंपिक में शीर्ष 10 देशों में शामिल हो।

डॉ. मंडाविया ने कहा, “खेल एक जन आंदोलन है। हम लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं और उन्हें तभी प्राप्त कर सकते हैं जब हम सब मिलकर काम करें। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी खेलों के मामले में हमेशा एकजुटता में विश्वास करते हैं और हमें अपना अहंकार त्यागकर, व्यापक योजना पर ध्यान केंद्रित करना होगा और योजनाओं को सार्थक परिणाम में बदलना होगा।”

छह घंटे चले खेलो भारत सम्मेलन में उपस्थित सभी हितधारकों की एकमत राय थी कि सरकार की नीति महत्वाकांक्षी है और खेलों में वैश्विक मानक हासिल करने की दिशा में एक ईमानदार प्रयास है। सम्मेलन में चार प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ हुईं, जिनमें खेल प्रशासन सुधार, खेलो भारत नीति 2025, भारत के पदक जीतने का रोडमैप और ‘एक कॉर्पोरेट एक खेल’ पहल शामिल थीं, जिनमें सामूहिक रूप से भारत को एक वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। प्रत्येक प्रस्तुति के बाद संवाद सत्र हुए जहाँ कई हितधारकों ने सुझाव दिए जिन्हें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने रिकॉर्ड किया।

केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री, श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने कहा कि खेलो भारत नीति का मसौदा भारतीय खेलों की “ज़मीनी हकीकत” और “चुनौतियों” का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है। सरकार को इस दस्तावेज़ को तैयार करने में एक साल से ज़्यादा का समय लगा है, जिसमें प्रमुख हितधारकों के साथ लंबी चर्चा के बाद कई बदलाव किए गए हैं। श्रीमती खडसे ने कहा, “अब हमारे पास खेलों को आगे बढ़ाने का अवसर है और इस एकीकृत नीति को अपनाकर, भारत मनोरंजन की दुनिया में चमक सकता है, रोज़गार प्रदान कर सकता है और वास्तव में भारत के युवाओं को दिशा प्रदान कर सकता है।”

डॉ. मंडाविया ने राष्ट्रीय खेल महासंघों पर नेतृत्व करने और युद्धस्तर पर सुशासन की प्रक्रिया शुरू करने की ज़िम्मेदारी डाली। “हमें तुरंत आकलन करना होगा कि हम कहाँ हैं और कहाँ जाना चाहते हैं। सबसे पहले, मैं राष्ट्रीय खेल महासंघों से आग्रह करता हूँ कि वे मुझे अगस्त तक पाँच साल की नीति प्रदान करें और फिर हम दस साल की योजना बना सकते हैं। 2026 में एशियाई खेलों के साथ, हमें एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है क्योंकि हम न केवल ओलंपिक में पदक जीतना चाहते हैं, बल्कि खेलों को एक व्यावसायिक संपत्ति बनाना चाहते हैं जहाँ हम दुनिया को भारत में आकर खेलने के लिए आमंत्रित कर सकें और खेल पर्यटन को बढ़ावा दे सकें।”

जहां एक ओर अच्छे प्रशासन की आवश्यकता पर बल दिया गया, वहीं दूसरी ओर गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षक तैयार करने, गुणवत्तापूर्ण खेल प्रशासक तैयार करने, खेल सामग्री व्यवसाय को विकसित करने तथा डोपिंग के खतरे को नियंत्रित करने पर भी गहन चर्चा हुई।

डॉ. मंडाविया ने कहा, “खेलो भारत नीति के कार्यान्वयन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम इन पहलों को कितनी कुशलता से क्रियान्वित करते हैं। हमें राष्ट्रीय खेल महासंघों को हर संभव सहायता प्रदान करने में खुशी हो रही है, लेकिन आगे चलकर, हम प्रदर्शन-आधारित अनुदानों पर भी विचार करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि हम अपनी योजना और खेल संचालन के प्रति केंद्रित और गंभीर हैं।” मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल महासंघों से कार्यक्रमों का एक उचित कैलेंडर बनाने का आग्रह किया ताकि एथलीटों को रसद संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

एक विकसित भारत की दिशा में, खेल मंत्रालय एक त्रि-स्तरीय एकीकृत प्रतिभा विकास पिरामिड पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसकी शुरुआत स्कूलों से होगी और प्रस्तावित ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्रों तक पहुँचेगी। सरकार ने पहले ही एक 10-वर्षीय योजना (2026-27 से 2030-31 तक की एक सुविचारित रणनीति और फिर गति को आगे बढ़ाते हुए) की रूपरेखा तैयार कर ली है, जिसकी शुरुआत आवासीय खेल विद्यालय से होगी, जहाँ से प्रतिभाशाली बच्चों को इंटरमीडिएट स्तर तक पहुँचने और फिर अंततः एलीट डिवीजन में पहुँचने का अवसर मिलेगा, जो संभावित अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को प्रशिक्षित करेगा।

डॉ. मंडाविया ने राष्ट्र निर्माण में राज्यों की भूमिका पर ज़ोर दिया है। वैश्विक खेलों में शीर्ष पर पहुँचने के भारत के सपने को साकार करने के लिए सामने मौजूद कार्य की विशालता को देखते हुए, सरकार ने दीर्घकालिक परिणाम प्राप्त करने के लिए आवश्यकतानुसार राज्यों, स्कूलों और कॉर्पोरेट्स के साथ समझौते करने का विचार रखा है।

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मनीष गौतम/दिव्यांशु कुमार

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