प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि करुणा आत्म-सम्मान लाती है और संतोष सच्ची खुशी लाता है। उन्होंने कहा कि यह भावना समाज में सहयोग और सद्भाव के बंधन को और मजबूत करती है।
प्रधान मंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया-
“कारुण्येनात्मनो मनं तृष्णां च परितोषतः।
उद्घोषेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं सत्याज्जयेत्॥”
सुभाषितम बताता है कि आत्म-सम्मान दूसरों पर दया या करुणा दिखाने से प्राप्त होता है। जीवन में अपने भाग्य पर संतुष्ट रहने से लालच पर काबू पाया जाता है। व्यक्ति को परिश्रम और उद्यमिता से आलस्य, संदिग्ध तर्क और अनिर्णय पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
“करुणा से आत्म-सम्मान और संतोष से सच्चा सुख मिलता है। इसी भाव से समाज में सहयोग और सहयोग की डोर और समानता है।
करुण्येनात्मनो मनं तृष्णां च परितोषतः।
उद्येन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं सत्याज्जयेत्॥”









