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Saturday, October 10, 2026
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कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने गुजरात के हलोल में प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया

by admin
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गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवरात जी ने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक खेती की पद्धतियाँ प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और मानवीय आवश्यकताओं की परस्पर निर्भरता को पहचानती हैं। आज गुजरात के हलोल स्थित गुजरात प्राकृतिक खेती विज्ञान विश्वविद्यालय में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्राकृतिक खेती पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती से मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है, प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र बहाल होता है और किसानों की बाहरी बाजार पर निर्भरता कम होती है, इनपुट लागत कम होती है, जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक लचीलापन मिलता है और सबसे बढ़कर हमारी भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ भोजन और पर्यावरण मिलता है।

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 2025 में स्वीकृत राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) देश भर के उन किसानों और समुदायों से प्रेरित है जो दशकों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। एनएमएनएफ योजना का उद्देश्य किसानों के खेतों पर अभ्यास के माध्यम से कृषि पद्धतियों को वैज्ञानिक रूप से मजबूत करना है। इस प्रकार एनएमएनएफ योजना कार्यान्वयन में प्राकृतिक खेती के अनुभव वाले सभी किसानों, वैज्ञानिकों और संस्थानों को सक्रिय रूप से शामिल किया जाता है ताकि देश भर में प्राकृतिक खेती की क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और विस्तार किया जा सके।

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राष्ट्रीय कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, तमिलनाडु, जम्मू और कश्मीर, पश्चिम बंगाल आदि के सात प्राकृतिक खेती केंद्रों (सीओएनएफ) के 90 संसाधन व्यक्तियों ने भाग लिया। मेजबान विश्वविद्यालय, गुजरात प्राकृतिक खेती विज्ञान विश्वविद्यालय, मिशन के लिए पहचाने गए सीओएनएफ में से एक है। कार्यशाला में गुजरात से प्राकृतिक खेती करने वाले 10 स्थानीय किसानों और गुजरात प्राकृतिक खेती विज्ञान विश्वविद्यालय के 52 छात्रों और प्रोफेसरों ने भी भाग लिया।

इस अवसर पर गुजरात सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि) डॉ. अंजू शर्मा, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव (एनआरएम/आरएफएस/आईएनएम) श्री फ्रैंकलिन एल. खोबंग, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की उप सचिव (आईएनएम/एनएफ) सुश्री रचना कुमार भी उपस्थित थीं।

यह दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) में की जाने वाली आगामी प्रशिक्षण गतिविधियों में से पहली है। संसाधन व्यक्तियों को इस ऐतिहासिक मिशन के राजदूत बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जिससे भारतीय कृषि प्रणाली में स्थिरता की दिशा में एक आदर्श बदलाव का मार्ग प्रशस्त होगा।

 पृष्ठभूमि:

भारत सरकार ने 2025 में स्वीकृत एक ऐतिहासिक मिशन – राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) का शुभारंभ करके मिट्टी, पानी और पर्यावरण के स्वास्थ्य को फिर से जीवंत करने, किसानों के जीवन में समृद्धि लाने और सुरक्षित और स्वस्थ भोजन की ओर अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) का लक्ष्य 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती शुरू करना और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 15000 क्लस्टरों में 10,000 जरूरत आधारित जैव-इनपुट संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्थापित करना है। मिशन 18.75 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रशिक्षित करेगा और जो बदले में एक करोड़ किसानों तक पहुंचेंगे। एनएमएनएफ मिशन केवीके, केंद्रीय और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थानों और प्राकृतिक खेती केंद्रों (सीओएनएफ) के राज्य और जिला अधिकारियों के वैज्ञानिकों और किसान मास्टर प्रशिक्षकों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के दौर के माध्यम से क्षेत्र में शुरू होता है। CoNFs कृषि विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय स्तर के प्राकृतिक खेती संस्थान हैं जो प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं, उनके पास प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का अनुभव, विश्वसनीयता और विशेषज्ञता है और उनके पास निरंतर शोध पहल हैं। CoNFs के पास प्रशिक्षण गतिविधियों और प्रदर्शन यात्राओं के लिए किसानों के खेतों में प्राकृतिक खेती के मॉडल प्रदर्शन फार्म हैं।

एमजी/केएसआर

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