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भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा

अतीत का संरक्षण, भविष्य का संवर्धन

भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती प्रदान करना

भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में उसकी सभ्यतागत विरासत और राष्ट्रीय पहचान झलकती है। इसने देश में डिजिटलीकरण, पर्यटन अवसंरचना और सांस्कृतिक संरक्षण के माध्यम से विरासत संरक्षण को मजबूती प्रदान की है। सरकार ने भारत की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और पुनरोद्धार के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की हैं। इन प्रयासों से पर्यटन, संपर्क सुविधा, पर्यटकों के लिए सुविधाओं और स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है तथा देश की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में मदद मिली है।

 

विरासत संरक्षण को बढ़ावा

विरासत गोद लें योजना 2.0

  • विरासत गोद लें योजना 2.0 सितॅबर 2023 में राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों में पर्यटकों के अनुकूल सुविधाओं के विकास और रखरखाव के लिए शुरू की गई थी।
  • विरासत गोद लें योजना 2.0 कार्यक्रम के अंतर्गत मार्च 2026 तक, कुल 30 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।
  • गोद लिए गए स्मारकों में पर्यटकों की उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज की गई, जिसमें वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 1.359 करोड़ पर्यटक पहुंचे।

तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक, विरासत संवर्धन अभियान (प्रसाद)

  • प्रसाद योजना का उद्देश्य अवसंरचना, स्वच्छता, सुरक्षा और पर्यटकों के लिए सुविधाओं में सुधार के माध्यम से तीर्थ एवं विरासत स्थलों का विकास करना है।
  • फरवरी 2026 तक 28 राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों में कुल 54 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
  • पूर्ण की गई परियोजनाएं: 32 (दिसम्‍बर 2025 तक)
  • कुल परियोजना लागत: 1,726.74 करोड़ रुपये।

स्‍वदेश दर्शन

  • स्वदेश दर्शन का उद्देश्य विषयगत पर्यटन परिपथों के माध्यम से एकीकृत पर्यटन अवसंरचना का विकास करना है।
  • टूरिस्‍ट सर्किट : स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत 15 विषयगत टूरिस्‍ट सर्किट (पर्यटन परिपथ) शामिल हैं—बौद्ध, तटीय, मरुस्थलीय, इको, विरासत, हिमालयी, कृष्णा, पूर्वोत्तर, रामायण, ग्रामीण, आध्यात्मिक, तीर्थंकर, जनजातीय, वन्यजीव और सूफी सर्किट।
  • मार्च 2026 तक कुल 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें 5,290.33 करोड़ रुपये का कुल निवेश शामिल है।
  • पूर्ण की गई परियोजनाएं: 75 (मार्च 2026 तक)

स्वदेश दर्शन 2.0 के अंतर्गत सर्किट-आधारित विकास से आगे बढ़ते हुए गंतव्य-केन्‍द्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है।

  • इस योजना के तहत कुल 53 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें 2,208.31 करोड़ रुपये का कुल निवेश शामिल है। ये परियोजनाएं राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों द्वारा कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।

चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी)

  • चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) की शुरुआत मार्च 2024 में स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत की गई थी।
  • इस योजना का उद्देश्य प्रतिस्पर्धी और चुनौती-आधारित ढांचे के माध्यम से स्‍थायी पर्यटन गंतव्यों का विकास करना है।
  • प्रमुख क्षेत्र: समग्र नियोजन, नवाचार, सामुदायिक भागीदारी और गंतव्य विकास।
  • कुल 38 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें 697.94 करोड़ रुपये का कुल निवेश शामिल है।

 

पुरातत्व एवं स्मारक संरक्षण

भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भारत की सांस्कृतिक विरासत के पुरातात्विक अनुसंधान और संरक्षण के लिए एक प्रमुख संस्था है।
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण देशभर में लगभग 38 सर्किलों के नेटवर्क के माध्यम से अपने कार्यों का संचालन करता है।
  • यह 3,686 केन्‍द्रीय संरक्षित स्मारकों का संरक्षण करता है। इसके लिए सुदृढ़ संरक्षण प्रणालियों और वैज्ञानिक पुनरुद्धार पद्धतियों का उपयोग किया जाता है (अप्रैल 2026 तक)
  • वित्त वर्ष 2024-25 में संरक्षित स्मारकों के संरक्षण और रखरखाव के लिए 374 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
  • पिछले पांच वर्षों के दौरान, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने देशभर में पुरातात्विक परियोजनाओं के लिए 121 अनुमतियां जारी की हैं।

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राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरावशेष मिशन (एनएमएमए)

  • राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरावशेष मिशन (एनएमएमएका कार्यान्वयन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किया जाता है।
  • एनएमएमए का उद्देश्य संरक्षण योजना और प्रबंधन में सहायता के लिए स्मारकों और पुरावशेषों का एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना है।
  • मार्च 2026 तक, इस मिशन के तहत पूरे भारत में 1.84 लाख स्मारकों और 17.20 लाख पुरावशेषों का दस्तावेजीकरण किया जा चुका है। 

हृदय योजना

विरासत शहर विकास एवं संवर्धन योजना (हृदय)

  • हृदय योजना का उद्देश्य विरासत शहरों के विशिष्ट स्वरूप को संरक्षित रखते हुए शहरी विकास को विरासत संरक्षण के साथ जोड़ना है।
  • इस योजना के तहत जल निकायों और हरित क्षेत्रों का पुनरुद्धार, स्मार्ट प्रौद्योगिकी एवं सुरक्षा उपायों में सुधार तथा पर्यटन के माध्यम से स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
  • कवरेज: भारत के 12 विरासत शहर।
  • प्रमुख उपलब्धियां:
  • अजमेरअमरावती और बादामी में स्वच्छता, पर्यटन और सामुदायिक विकास में सुधार।
  • अमृतसरगया और वाराणसी में विरासत के पुनरोद्धार, समावेशिता और आर्थिक विकास को बढ़ावा।
  • वारंगल और पुरी में पर्यटन अवसंरचना और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार।
  • कांचीपुरम और मथुरा में सुरक्षा और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया।
  • वेलंकन्नी में पर्यावरणीय स्थिरता और विरासत संरक्षण को बढ़ावा दिया गया।
  • द्वारका में व्यापक विरासत क्षेत्रों, शोभायात्रा मार्गों, सीसीटीवी नेटवर्क और बेट द्वारका दर्शन सर्किट का विकास किया गया।
  • समग्र प्रभाव: निवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार तथा पर्यटन की संभावनाओं को मजबूती।
  • मिशन अवधि: 31 मार्च 2019 को समाप्त

 

भारत के सांस्कृतिक खजाने की पुनर्प्राप्ति

सरकार ने औपनिवेशिक शोषण, विदेशी कब्जों और अवैध तस्करी के माध्यम से विदेश ले जाई गई पवित्र धरोहरों और पुरावशेषों को भारत वापस लाने के प्रयास तेज किए हैं।

पवित्र अवशेषों की वापसी

स्वदेश वापसी की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:

  • भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष 127 वर्ष बाद 2025 में भारत वापस लाए गए।
  • देवी अन्नपूर्णा की प्रतिमा 108 वर्ष बाद 2021 में कनाडा से भारत वापस लाई गई।
  • रामसीता और लक्ष्मण की कांस्य प्रतिमाएं 2020 में ब्रिटेन से वापस लाई गईं।
  • ऑस्ट्रेलियाअमेरिकाब्रिटेनजर्मनीसिंगापुर और कनाडा से भी पवित्र एवं सांस्कृतिक वस्तुएं भारत वापस लाई गई हैं।

पवित्र अवशेषों की वैश्विक प्रदर्शनी :

भारत ने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करने के लिए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का विस्तार किया।

  • वियतनाम (2025): 1.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आकर्षित हुए।
  • कल्मिकियारूस (2025): 90,000 से अधिक आगंतुकों ने स्‍वागत किया।
  • भूटान (2025): ग्लोबल पीस प्रेयर फेस्टिवल के दौरान प्रदर्शनी आयोजित की गई।
  • श्रीलंका (2026): गंगारामया मंदिरकोलंबो में प्रदर्शनी आयोजित की गई।

नई दिल्ली और लद्दाख में भी 2026 में घरेलू प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया, जिनमें भारत वापस लाए गए पिपरहवा अवशेषों को प्रदर्शित किया गया।

पुरावशेषों की स्वदेश वापसी

  • पिछले पांच वर्षों के दौरान 30 जून 2026 तक कुल 615 पुरावशेष वापस प्राप्त किए गए हैं।
  • सत्यापित वस्तुओं में से 11 वस्तुएं संबंधित संगठनों और संस्थानों को सौंप दी गई हैं।
  • 09 वस्तुएं नए संसद भवन में प्रदर्शित करने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्‍द्र (आईजीएनसीए) को ऋण के आधार पर दी गई हैं, 01 वस्तु राष्ट्रीय संग्रहालय को तथा 14 वस्तुएं भारतीय विरासत संस्थान को दी गई हैं।

संग्रहालय और सांस्कृतिक बुनियादी ढांचा

संग्रहालय अनुदान योजना

  • संग्रहालय अनुदान योजना के तहत क्षेत्रीय, राज्य और जिला स्तर पर नए संग्रहालय स्थापित करने तथा मौजूदा संग्रहालयों की मजबूती के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • सहायता के प्रमुख क्षेत्र: आधुनिकीकरण, संग्रहालय संग्रहों का डिजिटलीकरण और संग्रहालय पेशेवरों का क्षमता निर्माण।
  • इस योजना के तहत वर्चुअल संग्रहालयोंविषय-आधारित संग्रहालयों और वर्चुअल एक्सपीरिएंशियल म्यूजियम (वीईएम‍) के विकास के लिए विभिन्न पहल की गई हैं।
  • पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान स्वीकृत कुल राशि: 184.39 करोड़ रुपये।
  • पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान उपयोग की गई कुल राशि: 101.19 करोड़ रुपये।

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प्रत्‍यक्ष अनुभव देने वाला भारत का पहला पुरातात्विक संग्रहालय – वडनगर, गुजरात

  • प्रत्‍यक्ष अनुभव देने वाला पुरातात्विक संग्रहालय’ दुनिया का एकमात्र ऐसा संग्रहालय है, जहां इतिहास और खुदाई एक साथ देखने को मिलती है।
  • संग्रहालय 12,500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला है और इसका निर्माण 298 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत से किया गया है।
  • संग्रहालय में 5,000 से अधिक कला‍कृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें खाद्यान्न, डीएनए नमूने और कंकाल अवशेष शामिल हैं।
  • इसमें 4,000 वर्ग मीटर का खुला खुदाई क्षेत्र भी है, जहां 16–18 मीटर की गहराई में मिले पुरातात्विक अवशेषों को प्रदर्शित किया गया है।
  • एक अनुभवात्मक वॉकवे के माध्यम से आगंतुक खुदाई के दौरान सामने आए पुरातात्विक अवशेषों को देख सकते हैं।

यूनेस्को के माध्यम से वैश्विक पहचान

  • भारत ने पिछले एक दशक के दौरान वैश्विक विरासत के क्षेत्र में अपनी पहचान उल्लेखनीय रूप से मजबूत की है।
  • भारत में अब 45 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं।
  • भारत ने 2024 में नई दिल्ली में यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र की मेजबानी की।

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डिजिटलीकरण के जरिये ज्ञान का संरक्षण

सांस्कृतिक विरासत का डिजिटलीकरण (ज्ञान भारतम)

ज्ञान भारतम मिशन

  • मिशन की शुरुआत 2025 में भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण और उस तक पहुंच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
  • प्रौद्योगिकी को जोड़ना : दीर्घकालिक संरक्षण और वैश्विक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाया जा रहा है।

राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण

  • राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण मार्च 2026 में पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण और उनका एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के उद्देश्य से शुरू किया गया।
  • इस सर्वेक्षण के दौरान 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई है।
  • देशभर में डिजिटलीकृत पांडुलिपियों की कुल संख्या लाख से अधिक है। इनमें से 4.40 लाख से अधिक पांडुलिपियां वर्तमान में ज्ञान भारतम पोर्टल पर सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध हैं।
  • डिजिटलीकरण और पहुंच को व्यापक स्तर पर बढ़ाने के लिए 2024–31 की अवधि के लिए 482.85 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मिशन को मंजूरी दी गई है।

संग्रहालय के संग्रहों का डिजिटलीकरण

  • संस्कृति मंत्रालय तकनीकी सहयोग से विकसित जतन सॉफ्टवेयर के जरिये संग्रहालयों के संग्रहों और अभिलेखीय संसाधनों का डिजिटलीकरण कर रहा है। यह सॉफ्टवेयर सी-डैकपुणेमहाराष्ट्र के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है।
  • संग्रहालयों के संग्रहों तक डिजिटल पहुंच उपलब्ध कराने के लिए म्यूजियम्स ऑफ इंडिया पोर्टल के माध्यम से एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी तैयार की गई है।
  • इस पोर्टल पर राष्ट्रीय स्तर के संग्रहालयों, 2 एएसआई स्थल संग्रहालयों और डॉ. बाबासाहेब अम्‍बेडकर संग्रहालयपुणेमहाराष्ट्र के डिजिटलीकृत संग्रह उपलब्ध हैं।
  • 4,88,983 कलाकृतियों में से 3,75,707 कलाकृतियों का डिजिटलीकरण कर उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है (15 जुलाई 2026 तक)।

प्रौद्योगिकी-सक्षम विरासत संरक्षण

विरासत के दस्तावेजीकरण और संरक्षण को मजबूत करने के लिए एलआईडीएआर (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) स्कैनिंग, जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली)-आधारित मैपिंग और ड्रोन सर्वेक्षण जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जा रहा है। सरकार सांस्कृतिक परिसंपत्तियों और विरासत संबंधी आंकड़ों के डिजिटलीकरण, दस्तावेजीकरण और उनकी सुलभता में सहायता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का भी उपयोग कर रही है।

संस्कृति और ज्ञान के संरक्षण के लिए एआई का उपयोग

भारत भाषाओं, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए एआई का उपयोग कर रहा है।

  • भाषिणी (2022 में शुरू) 22 भाषाओं (वॉयस) और 36 भाषाओं (टेक्स्ट) को पढ़-लिख और अनुवाद कर सकती है। इसमें 350 से अधिक एआई मॉडल हैं और अब तक अरब से अधिक भाषा लेन-देन किए जा चुके हैं। इसने काशी तमिल संगमम और महाकुंभ 2025 जैसे आयोजनों में तत्‍काल अनुवाद को सक्षम बनाया।
  • भारतजेन 22 अनुसूचित भाषाओं के लिए एआई मॉडल विकसित कर रहा है, जबकि आदि-वाणी डिजिटल संरक्षण और अनुवाद के माध्यम से संथालीभीलीमुंडारी और गोंडी जैसी जनजातीय भाषाओं को सहयोग प्रदान करता है। आदि-वाणी भारत की जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए एआईआधारित मंच है। यह हिंदी, अंग्रेजी और जनजातीय भाषाओं के बीच तत्‍काल अनुवाद, ऑडियो पाठ से लिखित पाठ में परिवर्तन, युवा पीढ़ी के लिए भाषा सीखने तथा लोककथाओं और मौखिक परंपराओं के डिजिटलीकरण की सुविधा प्रदान करता है।
  • अनुवादिनीई-कुंभएसपीपीईएलसंचिका और ज्ञान-सेतु जैसे मंच बहुभाषी शिक्षा के विस्तार तथा विलुप्‍त होने का संकट झेल रही भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण में योगदान दे रहे हैं।
  • स्‍वयंम जैसे डिजिटल शिक्षा मंचों के माध्यम से करोड़ से अधिक शिक्षार्थी जुड़े हुए हैं।

वैदिक विरासत पोर्टल

  • मार्च 2023 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्‍द्र (आईजीएनसीएके अंतर्गत शुरू किए गए इस पोर्टल का उद्देश्य भारत की वैदिक ज्ञान परंपराओं का संरक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटल पहुंच उपलब्ध कराना है।
  • कवरेज: ऋग्वेदयजुर्वेदसामवेद और अथर्ववेद की परंपराएं।
  • इसमें व्यापक श्रव्य-दृश्य सामग्री, पांडुलिपियां और अनुष्ठान संबंधी दस्तावेजी सामग्री शामिल है तथा मंच पर 500 घंटे से अधिक की रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई गई हैं।
  • यह जीवंत ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण के लिए वैदिक शाखाओं (पाठ-परंपराओं) और मौखिक परम्‍पराओं का दस्तावेजीकरण करता है।

यूनेस्को की मान्यता :

  • वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • ऋग्वेद की पांडुलिपियों को यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल किया गया है।.

 

भारत की सिनेमाई विरासत का संरक्षण

राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन (एनएफएचएम)

  • शुरुआत: 2015, भारत की सिनेमाई विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण और पुनरुद्धार पर ध्यान केन्‍द्रित करते हुए।
  • इसके अंतर्गत भारतीय भाषाओं की फीचर फिल्मों, लघु फिल्मों और वृत्तचित्रों को शामिल किया गया है।
  • दिसम्‍बर 2025 तक, 1,469 फिल्मों/शीर्षकों को डिजिटलीकृत किया जा चुका है, जो 4.3 लाख मिनट की फिल्म सामग्री के बराबर है।
  • पुनरुद्धार की गई फिल्मों का रखरखाव राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार (एनएफएआईद्वारा किया जाता है और वे इसकी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से मांग पर उपलब्ध हैं।

भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय (एनएमआईसी)

  • भारतीय सिनेमा के राष्ट्रीय संग्रहालय का उद्घाटन 2019 में 140.61 करोड़ रुपये की परियोजना लागत से किया गया।
  • संग्रहालय प्राचीन कलाकृतियों, पुराने फिल्म उपकरणों, तस्वीरों, स्मृति-चिह्नों, इंटरैक्टिव प्रदर्शनों और मल्टीमीडिया प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सिनेमा के 100 से अधिक वर्षों के इतिहास को प्रदर्शित करता है।
  • पर्यटक संख्या: मई 2026 में 17,000 से अधिक पर्यटकों ने संग्रहालय का दौरा किया, जिससे एक प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत हुई।

 

भारत की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना

भारत की सांस्कृतिक विरासत उसके अतीतवर्तमान और भविष्य के बीच एक जीवंत कड़ी है। निरंतर संरक्षण, डिजिटलीकरण, पुनरुद्धार और संवर्धन के माध्यम से सरकार ने इस विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ आम जनता की पहुंच को व्यापक बनाने के प्रयासों को मजबूत किया है। ये प्रयास ऐसा भविष्य निर्मित करने में सहायक होंगे, जहां विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान, पहचान और प्रेरणा के एक गतिशील स्रोत के रूप में बनी रहेगी।

 

संदर्भ:

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पर्यटन मंत्रालय:

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आवास और शहरी कार्य मंत्रालय:

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गृह मंत्रालय :

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सूचना और प्रसारण मंत्रालय :

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पीआईबी बैकग्राउंडर:

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