उपराष्ट्रपति ने लक्षद्वीप में सजावटी मत्स्य पालन विकास के लिए “मिशन रंगीन मछली 2031” रणनीतिक कार्य योजना का विमोचन किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि भारत की नीली क्रांति को गति दे रही है; लक्षद्वीप मत्स्य पालन आधारित विकास के एक नए युग के लिए तैयार है।” उपराष्ट्रपति ने आगे कहा,
“नीली क्रांति हरित और श्वेत क्रांतियों जितनी ही परिवर्तनकारी होगी।”
उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज लक्षद्वीप के अगाटी में आयोजित मत्स्य पालन जागरूकता कार्यक्रम में भाग लिया और सजावटी मत्स्य पालन विकास के लिए रणनीतिक कार्य योजना “मिशन रंगीन मछली 2031” का विमोचन किया। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र के लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी लाभ और सहायता भी वितरित की।
सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को लक्षद्वीप के लिए एक ऐतिहासिक दिन और भारत की नीली क्रांति में एक नया मील का पत्थर बताया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज में नीला चक्र नीली क्रांति और समुद्री अर्थव्यवस्था की क्षमता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत का मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था के एक प्रमुख उभरते क्षेत्र के रूप में सामने आया है।
श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि सरकार लोगों के सरकार से संपर्क करने का इंतजार करने के बजाय सीधे मछली पकड़ने वाले समुदायों तक सहायता और योजनाएं पहुंचाकर शासन प्रणाली में बदलाव ला रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत लक्षद्वीप के लिए 62 करोड़ रुपये से अधिक की मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
लक्षद्वीप की विशाल समुद्री क्षमता पर प्रकाश डालते हुए श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि द्वीपों में एक लाख टन से अधिक की मत्स्य क्षमता का अनुमान है, जिसमें लगभग 94,000 टन टूना और टूना जैसी प्रजातियां शामिल हैं। उन्होंने द्वीपीय समुदायों की समृद्धि सुनिश्चित करते हुए, इस क्षमता का वैज्ञानिक और सतत तरीके से उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उपराष्ट्रपति ने भारत के बढ़ते समुद्री खाद्य निर्यात पर भी प्रकाश डाला, जो पिछले वित्तीय वर्ष में 73,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया और 120 से अधिक देशों तक पहुँच गया। उन्होंने कहा कि ईईजेड और खुले समुद्र से संबंधित पहल भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र और वैश्विक समुद्री खाद्य बाजारों में भारत की उपस्थिति को और मजबूत करेंगी।
सतत विकास पर जोर देते हुए, श्री सीपी राधाकृष्णन ने जिम्मेदार मत्स्य पालन, समुद्री संसाधनों के संरक्षण और अवैध, अनधिकृत और अनियमित मत्स्य पालन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से मत्स्य पालन को केवल एक पैतृक व्यवसाय के रूप में नहीं, बल्कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और वैश्विक अवसरों से प्रेरित एक आधुनिक पेशे के रूप में देखने का आग्रह किया।
हरित क्रांति और श्वेत क्रांति से तुलना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि नीली क्रांति में भी मत्स्य पालन समुदायों के जीवन को इसी तरह बदलने की क्षमता है। उन्होंने सभी हितधारकों से भारत की नीली अर्थव्यवस्था को विकसित भारत 2047 का एक सशक्त स्तंभ बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह; लक्षद्वीप के प्रशासक श्री प्रफुल के. पटेल; केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल; और मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।









