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अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की जियो पारसी योजना चिकित्सा सहायता, बाल देखभाल और बुजुर्गों की देखभाल को बढ़ावा देती है।

वर्ष 2013 में जियो पारसी योजना की शुरुआत से लेकर अब तक   , चिकित्सा घटकों के अंतर्गत बांझपन, गर्भधारण, प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल के उपचार हेतु वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले पारसी समुदाय के लाभार्थियों की संचयी संख्या वर्षवार 582 है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2018-19 से लेकर अब तक, योजना के सामुदायिक स्वास्थ्य घटक के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की संचयी संख्या वर्षवार 1055 है। योजना की शुरुआत से अब तक कुल व्यय 37.43 करोड़ रुपये है। वर्ष 2014-15 से अब तक समुदाय में कुल 534 जन्म दर्ज किए गए हैं। इन जन्मों ने पारसी समुदाय में घटती जनसंख्या को स्थिर करने की दिशा में आशा की किरण जगाई है। स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मूल्यांकन अध्ययनों में भी योजना को अपने लक्ष्य को पूरा करने में सफल बताया गया है।

  1. पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान योजना के चिकित्सा एवं सामुदायिक स्वास्थ्य घटकों के अंतर्गत प्रदान की गई वित्तीय सहायता का विवरण इस प्रकार है:
क्रम संख्या वर्ष चिकित्सा (करोड़ रुपये) समुदाय का स्वास्थ्य (करोड़ रुपये) वकालत (करोड़ रुपये)
2023-24 0.11 2.53 0.10
2024-25 0.39 2.66 0.06
2025-26 0.24 2.93 0.29

(घ) पारसी समुदाय में योजना के प्रति जागरूकता और पहुंच बढ़ाने के लिए, योजना का प्रचार किया जाता है। इसके अलावा, कई कार्यशालाएं/संवाद सत्र, पंजीकरण अभियान और जैव प्रमाणीकरण अभियान आयोजित किए जाते हैं। जियो पारसी योजना के कार्यान्वयन से संबंधित जानकारी प्रमुख पारसी समाचार पत्रों के माध्यम से मासिक आधार पर प्रसारित की जाती है। योजना के इस घटक के अंतर्गत लाभार्थियों को कोई प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की जाती है।

यह जानकारी केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने आज राज्यसभा में लिखित जवाब में दी।

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