हवा की आवाज़

हवा की आवाज़ दिसम्बर की एक बेहद सर्द शाम, वक़्त क़रीब 5.00 बजे का रहा होगा। मैं बाराबंकी से वापस लखनऊ लौट रहा था। सरसराती हवा मेरी जैकेट और ग्लव्ज को भेद कर हड्डियों में समा रही थी। एकाएक मुझे हवा में तैरती हुई सी एक दर्द भरी आवाज़ सुनाई दी, “कोई मुझे बचाओ, मुझे […]