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अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और APAAR

भारत की आजीवन सीखने की व्यवस्था

अकादमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट्स: एक परिचय

अकादमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट्स (एबीसी) शिक्षा मंत्रालय का एक क्रांतिकारी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है और इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा विनियमित किया जाता है। इसे हर शिक्षार्थियों की शिक्षा यात्रा में मदद करने के लिए बनाया गया है। यह मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से छात्रों द्वारा अर्जित किए गए अकादमिक क्रेडिट को जमा करने, उन्हें प्रबंधित करने, ट्रांसफर करने और प्रयोग करने के लिए एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म देता है।

APAAR (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी एक विशिष्ट 12-अंकों वाला छात्र पहचान नंबर है, जो एबीसी प्रणाली से जुड़ा है। “वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी पहल के तहत शुरू की गई APAAR आईडी हर सीखने वाले के लिए एकल अकादमिक पहचान बनाती है। डिजिलॉकर के ज़रिए प्रयोग की जा सकने वाली यह सुविधा, स्कूल, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और अन्य शिक्षण कार्यक्रम से छात्र के शैक्षिक रिकॉर्ड को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर लाती है। APAAR ID को पास के कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के ज़रिए बनाया जा सकता है, जिससे यह दूर-दराज और कम सुविधा वाले इलाकों में भी उपलब्ध हो जाती है। जून 2026 तक, पूरे भारत में 26.30 करोड़ सत्यापित APAAR ID बनाई जा चुकी हैं।

एबीसी और छात्र की APAAR ID मिलकर, अलग-अलग संस्थानों और समय के साथ उनकी शिक्षा को एक-एक कदम आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।

एबीसी के उद्देश्य

एबीसी का मुख्य उद्देश्य सीखने वालों के अनुकूल एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाना है, जिसमें सीखने से मिली उपलब्धियों को पहचाना जा सके, उन्हें एकत्रित किया जा सके और किसी व्यक्ति के पूरे जीवनकाल में इस्तेमाल किया जा सके। यह क्रेडिट ट्रांसफर, कई बार एंट्री और एग्जिट के विकल्पों और अलग-अलग संस्थानों और विषयों में सीखने की मान्यता को संभव बनाकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) के दृष्टिकोण का समर्थन करता है। इसका अर्थ है कि अगर कोई छात्र अपनी पढ़ाई को आंशिक रूप से पूरा करने के बाद छोड़ देता है, तो उसके द्वारा अर्जित क्रेडिट इस डेटा बैंक में जमा हो जाते हैं। भविष्य में जब वह दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहे, तो इन क्रेडिट का इस्तेमाल अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए कर सकता है।

एबीसी और APAAR शिक्षार्थियों को अपनी उपलब्धियों का डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखने, संस्थानों के बीच क्रेडिट ट्रांसफर को आसान बनाने और अकादमिक रिकॉर्ड बनाए रखने और पारदर्शिता लाने में मदद करते हैं। यह मंच स्कूलों, विश्वविद्यालयों, कौशल संस्थानों और शिक्षा से जुड़े अन्य लोगों के साथ एकीकरण का भी समर्थन करता है, जिससे एक एकीकृत शिक्षा प्रणाली बनती है।

एबीसी कैसे काम करता है?

 

●       स्टूडेंट्स एबीसी पोर्टल पर रजिस्टर करते हैं और उन्हें एक विशिष्ट एबीसी आईडी या APAAR ID मिलती है, जो उनके आधार और डिजिलॉकर अकाउंट से जुड़ी होती है।

●       योग्य उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) में पढ़ने वाले छात्र एबीसी सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं।

●       अकादमिक संस्थान सीधे एबीसी पोर्टल पर हर स्टूडेंट के खाते में क्रेडिट डेटा अपलोड करते हैं।

●       स्टूडेंट्स अपनी अकादमिक प्रगति खोए बिना अलग-अलग उच्च शिक्षण संस्थानों में क्रेडिट जमा कर सकते हैं, उन्हें ट्रांसफर कर सकते हैं और प्रयोग भी कर सकते हैं।

●       क्रेडिट ज़्यादा से ज़्यादा 7 साल तक या संबंधित अकादमिक विषय के लिए तय समय तक मान्य होते हैं। एक बार रिडीम होने या प्रयोग होने के बाद, क्रेडिट का दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

● अकादमिक संस्थान क्रेडिट को प्रयोग करने और प्रमाणपत्र जारी करने का काम नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए करते हैं।

● एनएडी, एबीसी की रीढ़ के तौर पर काम करता है और सभी अकादमिक अवॉर्ड्स और रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखता है।

 

अकादमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट्स: प्रगति रिपोर्ट

 

इस पहल ने पूरे देश में काफ़ी बड़ा स्तर हासिल कर लिया है। 2026 के लिए, यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे 30 जून, 2026 तक एबीसी पोर्टल पर क्रेडिट डेटा अपलोड करें।

 

संस्था का प्रकार संस्थान का प्रकार एबीसी के लिए पंजीकृत बनाए गए APAAR ID (करोड़ में) शैक्षणिक रिकॉर्ड
स्वायत्त कॉलेज स्वायत्त कॉलेज 1262 0.33 1.27
राष्ट्रीय महत्व के संस्थान

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

एम्स 10 0.00 0.00
आईआईआईटी 25 0.00 0.02
आईआईएम 21 0.00 0.02
आईआईएसईआर 7 0.00 0.01
आईआईटी 23 0.01 0.06
एनआईडी 5 0.00 0.00
एनआईएफटीईएम 1 0.00 0.00
एनआईपीईआर 6 0.00 0.00
एनआईटी 31 0.02 0.10
अन्य आईएनआई 14 0.00 0.01
एसपीए 3 0.00 0.00
स्वतंत्र संस्थान स्वतंत्र संस्थान 254 0.06 0.07
विश्वविद्यालय

 

 

 

केंद्रीय विश्वविद्यालय 57 0.49 1.65
डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय 140 0.15 0.98
निजी विश्वविद्यालय 520 0.34 1.72
राज्य विश्वविद्यालय 488 3.36 26.74
कौशल कौशल 96 1.51 6.55
स्कूली शिक्षा स्कूल 16.62 71.46
अनमैप्ड   3.39 0.00
कुल योग   2963 26.29 110.65

 

 

एबीसी और APAAR में डेटा सुरक्षा का प्रबंधन

ये प्लेटफ़ॉर्म डेटा की गोपनीयता और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए मज़बूत सुरक्षा प्रोटोकॉल और एन्क्रिप्शन मापदंड अपनाते हैं। एक्सेस (पहुंच) को APAAR ID और आधार से जुड़े डिजिलॉकर क्रेडेंशियल के ज़रिए प्रमाणित किया जाता है, जिससे सभी इंटीग्रेटेड सिस्टम और संस्थागत ढांचों में आसानी से एक्सेस (पहुंच) की सुविधा बनी रहती है और उपयोगकर्ता की जानकारी सुरक्षित रहती है।

 

मुख्य विशेषताएँ और परिणाम

  • अकादमिक मोबिलिटी: छात्र कई उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) में पढ़ाई कर सकते हैं और कार्यक्रमों व संस्थानों के बीच अपने क्रेडिट आसानी से ट्रांसफर कर सकते हैं।
  • एबीसी छात्रों को आसानी से इस्तेमाल होने वाला, सहमति-आधारित दस्तावेज़ एक्सचेंज सिस्टम देता है, जिससे सत्यापन आसान हो जाता है और प्रोसेसिंग का समय काफ़ी कम हो जाता है।
  • मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट (एमईई): एबीसी, एनईपी 2020 के तहत एमईई फ्रेमवर्क को लागू करता है। इससे एक साल पूरा होने पर प्रमाण पत्र, दो साल बाद डिप्लोमा और तीन या चार साल बाद डिग्री पाने का प्रावधान मिलता है। अब 153विश्वविद्यालय मल्टीपल एंट्री के विकल्प देते हैं, जिससे 31,156 यूजी और 5,583 पीजी छात्रों को फ़ायदा हो रहा है।
  • छात्र अपने डिजिटल प्रमाण पत्र कहीं से भी और कभी भी देख सकते हैं।
  • इससे पढ़ाई छोड़ने वालों की संख्या कम हुई है और लगातार सीखने के लिए प्रेरणा बढ़ी है।
  • एबीसी औपचारिक, अनौपचारिक और अनुभव से सीखने (अनुभवात्मक कौशल) के बीच के अंतर को कम कर रहा है।
  • इस पहल के तहत छात्रों को कई लाभ मिलते हैं। APAAR ID को प्रमाणित करके, 13 से 30 साल की उम्र के छात्र खास ट्रैवल लाभ पा सकते हैं, जैसे बेस एयरफेयर पर 10% तक की छूट और 10 किग्रा अतिरिक्त बैगेज अलाउंस।
  • SWAYAM एकीकरण: छात्र SWAYAM ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से 40% तक क्रेडिट हासिल कर सकते हैं। लगभग 388विश्वविद्यालयों ने इस नियम को अपनाया है, जिससे अच्छी गुणवत्ता की पढ़ाई तक पहुंच बढ़ी है।
  • नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ): एबीसी, एनसीआरएफ के साथ जुड़ा हुआ है, जिसमें अकादमिक, वोकेशनल और अनुभव से सीखने को शामिल किया गया है। 2026 तक भारत भर की 170 विश्वविद्यालयों ने एनसीआरएफ को अपना लिया है।

 

डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढ़ांचे के तौर पर एबीसी

एबीसी, डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत शिक्षा के लिए भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) का एक अहम हिस्सा है।

  • एनएडीडिजीलॉकर के साथ एकीकरण से छात्र अपने सत्यापित अकादमिक रिकॉर्ड्स को कभी भी सुरक्षित तरीके से एक्सेस कर सकते हैं।
  • एनईजीडी (इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय) ने नवंबर 2024 में अपनी डिजिटल इंडिया आस्क अवर एक्सपर्ट्स श्रृखंला में एबीसी-एनएडी को शामिल किया था।
  • एबीसी इंटीग्रेशन के लिए समर्थ ईआरपी (एक प्रमुख, क्लाउड-बेस्ड ई-गवर्नेंस प्लेटफ़ॉर्म) को लागू करने से छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन को एक एकीकृत और मानकीकृत गेटवे मिलता है।
  • दूर-दराज़ के गांवों में सीएससी अब एबीसी और APAAR पंजीकरण के लिए ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे हैं, जिससे डिजिटल अंतर को कम करने में मदद मिल रही है।

 

एक भरोसेमंद डिजिटल शिक्षा व्यवस्था की ओर

एबीसी और APAAR मिलकर अकादमिक रिकॉर्ड के लिए एक भरोसेमंद डिजिटल व्यवस्था बना रहे हैं, जिससे हर सीखने वाले के लिए शिक्षा ज़्यादा सरल, पारदर्शी और सुलभ हो रही है। आसानी से क्रेडिट ट्रांसफर, सुरक्षित रिकॉर्ड प्रबंधन और जीवन भर सीखने की सुविधा देकर, ये पहल भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणाली की नींव रख रही हैं।

जैसे-जैसे ये प्लेटफ़ॉर्म विकसित हो रहे हैं, नई तकनीकें डिजिटल अकादमिक क्रेडेंशियल्स की सुरक्षा और प्रमाणिकता को और मज़बूत करने के नए अवसर दे रही हैं। इस संदर्भ में, भारत प्रमाण चेन एक उम्मीद भरा अगला कदम है। डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) द्वारा विकसित, यह भारत का अपना ब्लॉकचेन प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे बड़े पैमाने पर सुरक्षित, सत्यापित करने योग्य और छेड़छाड़-रोधी डिजिटल क्रेडेंशियल्स की सुविधा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

तेज़ी से लागू करने के लिए डीआईसी द्वारा प्रबंधित ब्लॉकचेन ढ़ांचे के ज़रिए भारत प्रमाण चेन को अपनाया जा सकता है, जबकि संस्थानों के पास ज़्यादा आज़ादी और सुगमता के लिए अपने खुद के ब्लॉकचेन नोड्स चलाने का विकल्प भी है। यह प्लेटफ़ॉर्म सुनिश्चित करता है कि अकादमिक डेटा भारत के अपने डिजिटल ढ़ांचे के भीतर रहे और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम का पूरी तरह से पालन करे।

 

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