महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय , राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने 12 जून 2026 को एक विशेष “अखिल भारतीय बचाव एवं पुनर्वास” अभियान शुरू किया, जो 31 अगस्त 2026 तक चला। एनसीपीसीआर ने बाल श्रम में लगे बच्चों और तस्करी एवं शोषण के शिकार बच्चों की पहचान, बचाव और पुनर्वास को तेज करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों, जिला मजिस्ट्रेटों, श्रम विभागों, पुलिस अधिकारियों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वित उपाय किए।
एनसीपीसीआर ने संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर बाल श्रम और तस्करी के प्रमुख क्षेत्रों में गहन और लक्षित बचाव अभियान चलाने का अनुरोध किया । राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से बचाव अभियान, बचाए गए बच्चों की संख्या, दर्ज एफआईआर, पुनर्वास, पुनर्स्थापन, शिक्षा को मुख्यधारा में लाना, मुआवजा और अन्य अनुवर्ती उपायों आदि से संबंधित नियमित आंकड़े उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया।
क्रियान्वयन की निगरानी करने और जमीनी स्तर पर मुद्दों का समाधान करने के लिए, एनसीपीसीआर ने जिला प्रशासनों के साथ बैठकें आयोजित कीं । इन बैठकों में बचाव कार्यों की समीक्षा, परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करना, एटीआर की समयबद्ध प्रस्तुति सुनिश्चित करना और संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना मुख्य उद्देश्य थे ।
एनसीपीसीआर ने सोशल मीडिया और अन्य संचार प्लेटफार्मों के माध्यम से जागरूकता और संपर्क अभियान भी चलाया, जिसमें अभियान, बाल श्रम की रिपोर्टिंग और बचाव के बाद पुनर्वास और शैक्षिक मुख्यधाराकरण के महत्व के बारे में जानकारी प्रसारित की गई।
उपरोक्त अभियान की निरंतर और सक्रिय निगरानी के चलते, एनसीपीसीआर ने राज्य अधिकारियों के सहयोग से 3,800 से अधिक बच्चों को सफलतापूर्वक बचाया। इसके अलावा, अभियान के दौरान 575 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई हैं।









