खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने नई दिल्ली में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ज्ञापन एफसीआई के लिए एक व्यापक प्रदर्शन ढांचा स्थापित करता है, जिसमें परिचालन दक्षता में सुधार, जवाबदेही को मजबूत करने और खाद्यान्न प्रबंधन में आधुनिकीकरण को गति देने के उद्देश्य से निर्धारित लक्ष्य शामिल हैं।
इस समझौता ज्ञापन में भंडारण हानि को कम करने, भंडारण क्षमता का अधिकतम उपयोग करने, रसद और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में सुधार करने और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र को मजबूत करने जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है । इसमें एफसीआई के संचालन की दक्षता, पारदर्शिता और निगरानी को बढ़ाने के लिए व्यावसायिक प्रक्रियाओं के अधिक डिजिटलीकरण और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी समाधानों को अपनाने पर भी जोर दिया गया है।
आधुनिकीकरण के एजेंडे के हिस्से के रूप में, समझौता ज्ञापन में एफसीआई कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण और कौशल विकास पहलों का प्रावधान है , जिससे संगठन उभरती प्रौद्योगिकियों और खाद्यान्न प्रबंधन की समकालीन प्रणालियों को प्रभावी ढंग से अपनाने में सक्षम होगा।
खाद्य निगम अधिनियम, 1964 के तहत 1965 में स्थापित, एफसीआई भारत सरकार की ओर से खाद्यान्नों की खरीद, भंडारण, परिवहन और वितरण करके देश की खाद्य सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके संचालन में शामिल सार्वजनिक संसाधनों की विशाल मात्रा को देखते हुए, खाद्य सब्सिडी का कुशल उपयोग और परिचालन प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार इसकी प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।

इस समझौता ज्ञापन के तहत एफसीआई के कामकाज में मापने योग्य और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाया गया है , जिसके तहत इसके प्रदर्शन को स्पष्ट रूप से परिभाषित वार्षिक मापदंडों से जोड़ा गया है। इस ढांचे का उद्देश्य संसाधनों के उपयोग में अधिक दक्षता को बढ़ावा देना, संचालन में पारदर्शिता को मजबूत करना और पूरे संगठन में प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को अपनाने को प्रोत्साहित करना है।
समझौते के लक्ष्यों का एक हिस्सा डिपो दर्पण पोर्टल के माध्यम से एफसीआई के डिपो के प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। डिपो दर्पण पोर्टल डिपो के बुनियादी ढांचे और परिचालन दक्षता का आकलन करने के लिए एक वेब-आधारित मंच है। भौतिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, परिचालन प्रदर्शन में सुधार करने और एफसीआई डिपो में निरंतर सुधार को बढ़ावा देने के लिए परिणाम-आधारित और लक्ष्य-आधारित मानदंड शामिल किए गए हैं।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर सरकार की खाद्यान्न प्रबंधन प्रणाली के आधुनिकीकरण और देश की खाद्य सुरक्षा संरचना की दक्षता और सुदृढ़ता बढ़ाने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं । इस प्रदर्शन-आधारित ढांचे के माध्यम से, डीएफपीडी और एफसीआई यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं कि खाद्य सब्सिडी संसाधनों का उपयोग लागत प्रभावी और पारदर्शी तरीके से किया जाए, जिससे राष्ट्र को अधिक लाभ प्राप्त हो।









