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ANN Hindi

सातवें जेंडर संवाद में आजीविका के क्षेत्र में महिलाओं की स्वायत्तता को सुदृढ़ करने पर जोर

दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम), ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इंस्‍टीट्यूट फॉर व्‍हॉट वर्क्स टु एडवांस जेंडर इक्वॅलिटी (आईडब्ल्यूडब्ल्यूएजीई) के सहयोग से “भागीदारी से नेतृत्व की ओर: आजीविका में महिलाओं की स्वायत्तता बढ़ाना” विषय पर जेंडर संवाद के सातवें संस्करण का आयोजन किया।

इस संवाद में देशभर से स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाओं, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के कर्मचारियों, नीति-निर्माताओं, जेंडर विशेषज्ञों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं सहित 6 लाख से अधिक हितधारकों ने भाग लिया। इसने अनुभवों के आदान-प्रदान तथा ग्रामीण आजीविका और आर्थिक संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श के लिए एक मंच प्रदान किया।

अपने मुख्य संबोधन में ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री रोहित कंसल ने अप्रैल 2021 में 1,400 प्रतिभागियों से लेकर सितंबर 2025 में लगभग छह लाख प्रतिभागियों तक जेंडर संवाद की यात्रा का उल्लेख किया, जो इसकी बढ़ती आवाज और नेतृत्व को दर्शाती है। उन्होंने स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) आंदोलन की शक्ति पर जोर दिया, जिसमें 10 करोड़ से अधिक महिलाएं शामिल हैं और जो महिला-नेतृत्व वाले आंदोलन के रूप में दुनियाभर में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। राज्यों के नेतृत्व में किए जा रहे नवाचारों पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने महाराष्ट्र के महिला किसान सशक्तीकरण विधेयक का उल्लेख किया, जिसमें औपचारिक भूमि स्वामित्व दस्तावेज न रखने वाली महिला किसानों को मान्यता दी गई है; ओडिशा की भुवनेश्वर घोषणा का उल्लेख किया, जो महिलाओं के भूमि अधिकारों और कृषि संस्थानों में उनके प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ा रही है; तथा आंध्र प्रदेश के आरवाईएसएस प्राकृतिक खेती मॉडल का उल्लेख किया, जिसे महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा बड़े पैमाने पर संचालित किया जा रहा है।

 

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सालाना 1 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित करने वाली 3.46 करोड़ से अधिक लखपति दीदियां महिलाओं की आर्थिक आकांक्षाओं को समान रूप से सुदृढ़ कर रही हैं। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की उत्पादक, उद्यमी, निर्णयकर्ता और नेता के रूप में भूमिका को मजबूत करने के लिए ऐसे नवाचारों की पहचान करने, उन्हें अपनाने और राज्यों में बड़े पैमाने पर लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव-आरएल, श्री अमित शुक्ला ने डे-एनआरएलएम के तहत जेंडर एकीकरण के क्रमिक विकास पर प्रकाश डाला—महिलाओं को संगठित करने से लेकर कार्यक्रम के डिजाइन और कार्यान्वयन में जेंडर को मुख्यधारा के सरोकार के रूप में संस्थागत रूप देने तक। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2021 में जारी जेंडर एडवाइज़री, वार्षिक राष्ट्रीय जेंडर अभियान के रूप में नई चेतना, जेंडर एकीकरण कार्यशाला और आजीविका में जेंडर एकीकरण के लिए प्रैक्टिस गाइड जैसी पहलों ने क्रमिक रूप से इस दृष्टिकोण को मजबूत किया है। महिलाओं के सामूहिक आर्थिक संस्थानों के अगले फ्रंटियर, जिसमें सीएलएफ, उत्पादक समूह, उत्पादक उद्यम और एफपीओ शामिल हैं, पर जोर देते हुए उन्होंने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के संदर्भ में बेहतर शासन एवं प्रबंधकीय क्षमताओं, वित्तीय रिकॉर्ड-रखरखाव और ऋण-प्राप्ति के लिए तैयारी को मजबूत करने का आह्वान किया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव, श्रीमती स्वाति शर्मा ने 21 अगस्त से 21 नवंबर 2026 तक चल रहे उद्यमिता पर राष्ट्रीय अभियान-II को उद्यम विकास, मूल्य श्रृंखलाओं, डिजिटल प्लेटफॉर्म और बाजार तक पहुंच के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के बीच उद्यमिता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वित्तीय समावेशन, कौशल, प्रौद्योगिकी, बाजार संपर्क और परिसंपत्ति स्वामित्व से समर्थित स्वयं सहायता समूहों, महासंघों, उत्पादक समूहों, एफपीओ/एफपीसी और उत्पादक उद्यमों के माध्यम से सामूहिकीकरण, महिलाओं की आर्थिक स्वायत्तता और नेतृत्व को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने आजीविका और उद्यमिता से जुड़ी पहलों में जेंडर को मुख्यधारा में लाने के लिए समग्र सरकारी और समेकित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया, जिसमें मंत्रालयों और विभागों, तकनीकी और अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और विकास भागीदारों को साथ लाया जाए।

अन्य वक्ताओं ने विविध विचारों और दृष्टिकोणों के साथ संवाद को समृद्ध किया। मध्य प्रदेश की एसपीएम–गैर-कृषि आजीविका, श्रीमती गरिमा साई सुंदरम ने रेखांकित किया कि आर्थिक सशक्तीकरण और संसाधनों तक पहुंच महिलाओं की सौदेबाजी की शक्ति को मजबूत करती है और उनके नेतृत्व को बनाए रखने में सहायक होती है। एमएकेएएएम की श्रीमती सीमा कुलकर्णी ने महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को सक्षम बनाने के लिए सामाजिक सुरक्षा और सहायता प्रणालियों की आवश्यकता पर जोर दिया। जेंडर और आजीविका विशेषज्ञ प्रो. नित्या राव ने महिलाओं की आर्थिक पहचान, प्रतिनिधित्व और सतत् नेतृत्व को मजबूत करने के लिए एकीकरण, संस्थागत सहायता, बिना पारिश्रमिक वाले देखभाल कार्यों को संबोधित करने और संसाधनों के स्वामित्व में मौजूद कमियों को दूर करने तथा उपयुक्त उपकरणों और प्रौद्योगिकियों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

असम और महाराष्ट्र की महिला नेताओं ने स्वयं सहायता समूह की सदस्यता से लेकर उद्यमिता, नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता हासिल करने तक की अपनी यात्रा साझा की। असम के सोनितपुर की श्रीमती निहारिका भुइयां ने स्वयं सहायता समूह की सदस्य से महिला-नेतृत्व वाले एफपीसी में एक नेता के रूप में अपनी यात्रा पूरी की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार सामूहिक प्रयास, प्रशिक्षण और संस्थागत सहायता ने महिला किसानों को अपनी आर्थिक भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने में सक्षम बनाया। महाराष्ट्र के अकोला की श्रीमती कीर्ति ताई देशमुख ने गृहिणी से उद्यमी बनने की यात्रा तय की। उन्होंने यह प्रदर्शित किया कि स्वयं सहायता समूह-आधारित प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं तक पहुंच ने उन्हें अपना उद्यम स्थापित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और अन्य महिलाओं को उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित करने में कैसे मदद की।

 

संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के अनुरूप आयोजित सातवें जेंडर संवाद ने महिला किसानों तथा उनकी आजीविका से जुड़ी संस्थाओं के ग्रामीण आजीविका, खाद्य प्रणालियों और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में योगदान को मान्यता देने और उसे व्यापक स्तर पर सामने लाने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया। अप्रैल 2021 में डे-एनआरएलएम और आईडब्ल्यूडब्ल्यूएजीई की संयुक्त पहल के रूप में शुरू किया गया जेंडर संवाद अब ज्ञान के आदान-प्रदान और नीतिगत संवाद के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित हो चुका है, जिसने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और समावेशी ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने में स्‍त्री-पुरुष समानता को एक प्रमुख कारक के रूप में पुनः स्थापित किया है।

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