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ANN Hindi

अस्पताल से लेकर पुलिस तक, सीडब्ल्यूसी से लेकर ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ता तक: दिल्ली कार्यशाला ने गैर-कानूनी तरीके से गोद लेने के खिलाफ़ हितधारकों को एकजुट किया


कार्यशाला का आयोजन “कानूनी तरीके से गोद लेना। सुरक्षित बचपन। सुरक्षित भविष्य। गैर-कानूनी गोद लेने को ना कहें” थीम के साथ किया गया

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मातहत सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (सीएआरए) महिला एवं बाल विकास विभाग, एनसीटी दिल्ली सरकार और दिल्ली स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (एसएआरए) के साथ मिलकर नई दिल्ली में दिल्ली सचिवालय के मुख्य सभागार में गोद लेने को लेकर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का थीम “कार्यशाला का आयोजन “कानूनी तरीके से गोद लेना। सुरक्षित बचपन। सुरक्षित भविष्य। गैर-कानूनी गोद लेने को ना कहें” था।

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इस कार्यशाला में सीएआरए की सीईओ श्रीमती भावना सक्सेना; एनसीटी दिल्ली सरकार की महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती रश्मि सिंह; एसपीयूडब्ल्यूएसी डीएसपी श्रीमती नेहा यादव; दिल्ली पुलिस अपराध शाखा में अपर सीपी श्रीमती मोनिका भारद्वाज; डीसीपीसीआर अध्यक्ष श्री ओ.पी. व्यास; आउटर नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के सीएमओ डॉ. अनिल यादव; और बाल सुरक्षा, गोद लेना प्रणाली, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों और हितधारकों की मौजूदगी रही।

इस कार्यशाला में बाल सुरक्षा और गोद लेने से जुड़े लगभग 200 भागीदार एक साथ जुटे ताकि कानूनी, पारदर्शी और गोद लेने की बाल-हित केंद्रित प्रक्रिया के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके और गैर-कानूनी तरीके से बच्चे गोद लेने के जोखिमों और गंभीर नतीजों के बारे में ज़्यादा जागरूकता पैदा की जा सके।

 

इस मौके पर अपने संबोधन में सीएआरए की सीईओ श्रीमती भावना सक्सेना ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चों को गैर-कानूनी तरीके से गोद लेने के चलन से बचाने के लिए पूरे बाल सुरक्षा परितंत्र में जागरूकता और सतर्कता ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “हर बच्चे को एक सुरक्षित बचपन, एक सुरक्षित भविष्य और कानून की सुरक्षा मिलनी चाहिए। गोद लेने के मामले में कोई शॉर्टकट नहीं हो सकता। इस साल के अभियान के ज़रिए, सीएआरए यह पक्का करना चाहता है कि गोद लेने की प्रक्रिया से जुड़ा हर शख्स गैर-कानूनी गोद लेने को रोकने में अपनी भूमिका को समझे और गोद लेने वाला हर व्यक्ति (नए माता-पिता) कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया का पालन करे। हमें मिलकर यह पक्का करना होगा कि गोद लेने के केंद्र में हर बच्चे के सबसे अच्छे हित, अधिकार और सम्मान रहें।”

इस कार्यशाला को संबोधित करते हुए एनसीटी दिल्ली सरकार की महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती रश्मि सिंह ने कहा कि बाल सुरक्षा परितंत्र से जुड़े हितधारकों की भागीदारी – स्वास्थ्य और पुलिस विभाग, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से लेकर जिला बाल सुरक्षा इकाई और बाल कल्याण समितियों तक – बड़े पैमाने पर संवेदनशीलता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि इस तरह के सामूहिक प्रयास सुरक्षित बचपन सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत सांस्थानिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

जागरूकता पहल के हिस्से के रूप में, इस कार्यशाला के दौरान वैध तरीके से गोद लेने पर एक फिक्शन फिल्म लॉन्च की गई। यह फिल्म गोद लेने की प्राधिकृत प्रक्रिया का पालन करने के महत्व को बताने और गैर-कानूनी तरीके से गोद लेने से जुड़े जोखिमों को एक आसान और प्रभावशाली तरीके से उजागर करने की कोशिश करती है।

 

तीन विषयों पर आधारित सत्र में उभरती चुनौतियों पर बात की गई

इस कार्यशाला में तीन केंद्रित तकनीकी सत्र थे जिनमें गैर-कानूनी से गोद लेने को रोकने और उस पर प्रतिक्रिया के महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया: सत्र 1 “गैर-कानूनी तरीके से गोद लेना: उभरते चलन, चुनौतियां और राज्य/राष्ट्रीय प्रतिक्रिया”, सत्र 2 “गैर-कानूनी तरीके से गोद लेने को रोकने में अस्पताल/नर्सिंग होम, स्वास्थ्य प्रणाली, पुलिस और ज्यूडिशियरी की भूमिका” और सत्र 3 “बाल सुरक्षा प्रणालियों एसएआरए, सीडब्ल्यूसी, डीसीपीयू, सीसीआई को मज़बूत करना:”

 

ये सत्र न सिर्फ़ स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (एसएआरएज), चाइल्ड वेलफ़ेयर कमेटियों (सीडब्ल्यूसीज), डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट्स (डीसीपीयूज), और चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन्स (सीसीआई) के बीच समन्वय को मज़बूत करने पर केंद्रित थे, बल्कि पुलिस, स्वास्थ्य और आंगनवाड़ी सेक्टर के मुख्य हितधारकों को भी जागरूक करने पर थे ताकि बाल सुरक्षा और वैध तरीके से बच्चा गोद लेने की व्यवस्था को असरदार तरीके से लागू किया जा सके।

असल ज़िंदगी के अनुभव साझा करना: चुनौती से कार्रवाई तक

कार्यशाला के दौरान एक खास अनुभव-साझा सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें गैर-कानूनी गोद से निपटने पर डीसीपीओ श्री अरुण शर्मा के असल ज़िंदगी के अनुभव को दिखाया गया। इस सत्र में प्रतिभागियों को ज़मीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों, समय पर दखल देने की अहमियत और गैर-कानूनी गोद के संदिग्ध मामलों पर कार्रवाई करने में फ़ील्ड-लेवल बाल सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई।

संवादात्मक प्रश्नोत्तरी के साथ कार्यशाला संपन्न हुई

कार्यशाला एक संवादात्मक प्रश्नोत्तरी सत्र के साथ संपन्न हुई, जिसे अलग-अलग सत्र के दौरान साझा की गई ज़रूरी जानकारी को प्रतिभागियों की समझ और याद रखने का अंदाज़ा लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। एक दिलचस्प प्रारूप प्रतिभागियों को कार्यशाला के दौरान चर्चा किए गए कानूनी नियमों, भूमिकाओं और ज़िम्मेदारियों पर सोचने के लिए प्रोत्साहित किया और कानूनी गोद लेने, बच्चों की सुरक्षा और गैर-कानूनी गोद लेने की रोकथाम से जुड़े खास संदेशों को मज़बूत करने में मदद की।

डीएमआरसी सलाम बालक ट्रस्ट की ओर से प्रस्तुत एक नाटक ने प्रतिभागियों को बच्चों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और बचाव के बारे में जागरूक किया। इस नाटक में हर बच्चे के लिए एक सुरक्षित और सहायक माहौल सुनिश्चित करने की सामूहिक ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया गया।

गैर-कानूनी गोद लेने के चलन को रोकने पर ज़ोर

‘गोद लेने के बारे में राष्ट्रीय जागरूकता माह-2026’ के लिए थीम चुनी गई है: ““वैध तरीके से गोद लेना। सुरक्षित बचपन। सुरक्षित भविष्य। अवैध गोद लेने को ना कहें”। इसका मकसद यह बताना है कि गैर-कानूनी तरीके से गोद लेना न केवल ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015’ के प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि इससे बच्चे अपनी कानूनी सुरक्षा, अधिकारों और संरक्षण से भी वंचित हो सकते हैं। गोद लेने के ऐसे चलन कानून के तहत स्थापित पारदर्शी, विनियमित और बाल-केंद्रित गोद लेने की व्यवस्था को कमज़ोर करती हैं।

इस जागरूकता पहल में महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूज), ज़िला बाल संरक्षण इकाइयों (डीसीपीयूज), विशेष गोद लेने वाली एजेंसियों (एसएएज), बाल देखभाल संस्थानों, स्वास्थ्य और पुलिस विभागों, न्यायपालिका, कानूनी सेवा प्राधिकरणों, अस्पताल प्रशासकों, चिकित्सा पेशेवरों, आशा (एएसएचए) और एएनएम (एएनएम) कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों और मीडिया प्रतिनिधियों जैसे विभिन्न हितधारकों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।

प्रतिभागियों को बच्चों के अधिकारों और उनके सर्वोत्तम हितों की रक्षा के लिए समन्वित कार्रवाई, समय पर हस्तक्षेप और कानूनी रूप से गोद लेने की प्रक्रिया का पालन करने के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।

“कानूनी रूप से गोद लेना। सुरक्षित बचपन। सुरक्षित भविष्य। गैर-कानूनी गोद लेने को ना कहें!” केवल एक अभियान का संदेश नहीं है, बल्कि कार्रवाई के लिए एक सामूहिक आह्वान है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर बच्चे की सुरक्षा, सम्मान, पहचान और सुरक्षित पारिवारिक माहौल के अधिकार की रक्षा हो।

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