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Tuesday, October 6, 2026
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केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने चिंतन शिविर 2026 का उद्घाटन किया और भविष्य के लिए तैयार राजमार्ग अवसंरचना के लिए एजेंडा निर्धारित किया।

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‘गतिशक्ति से प्रगति’ दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का मार्गदर्शन करेगी; एकीकृत योजना, सुरक्षित और हरित राजमार्ग, सड़क सुरक्षा, टोल सुधार और गुणवत्तापूर्ण परियोजना कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के टेंट सिटी 2 में “चिंतन शिविर 2026 – राजमार्ग अवसंरचना पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन” का उद्घाटन किया। इसके साथ ही भारत की राजमार्ग अवसंरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से दो दिनों तक चलने वाले गहन विचार-विमर्श की दिशा निर्धारित की गई। “गतिशक्ति से प्रगति” के आदर्श वाक्य के तहत आयोजित इस चिंतन शिविर में विभिन्न राज्यों के परिवहन एवं सार्वजनिक परिवहन मंत्री, राज्य सार्वजनिक परिवहन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, कार्यान्वयन एजेंसियां ​​और अन्य हितधारक राजमार्ग विकास, परियोजना कार्यान्वयन और अवसंरचना वितरण से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित हुए हैं। उद्घाटन सत्र में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ​​ने भी संबोधित किया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्री गडकरी ने कहा कि चिंतन शिविर केंद्र और राज्यों को एक साथ विचार करने, जमीनी स्तर के अनुभवों को साझा करने और राजमार्ग विकास में उभरती चुनौतियों के व्यावहारिक समाधानों की दिशा में मिलकर काम करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई गई सफल पद्धतियों को साझा किया जाना चाहिए, उनका मूल्यांकन किया जाना चाहिए और जहां भी उपयुक्त हो, उन्हें दोहराया जाना चाहिए ताकि देश भर में परियोजना कार्यान्वयन और बुनियादी ढांचे के परिणामों में सुधार हो सके।

मंत्री जी ने इस बात पर जोर दिया कि राजमार्ग विकास में गुणवत्ता, सुरक्षा, गति और विश्व स्तरीय मानकों पर ध्यान केंद्रित रहना चाहिए। उन्होंने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) चरण में ही अग्रिम योजना और तैयारी पर अधिक बल देने का आह्वान किया, जिसमें उचित सर्वेक्षण, संरेखण योजना, भूमि अधिग्रहण, उपयोगिता स्थानांतरण और समय पर वैधानिक मंजूरी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक चरण में बेहतर तैयारी से देरी को कम करने, लागत वृद्धि से बचने और राजमार्ग परियोजनाओं की दक्षता में सुधार करने में मदद मिल सकती है।

श्री गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि राजमार्ग नियोजन और परियोजना डिजाइन में शुरू से ही सड़क सुरक्षा को शामिल किया जाना चाहिए। दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान करना और नियोजन एवं निर्माण चरणों के दौरान उचित सुरक्षा उपायों को शामिल करना सुरक्षित राजमार्गों और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में योगदान दे सकता है।

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राष्ट्रीय आर्थिक विकास के लिए राजमार्ग अवसंरचना के महत्व पर जोर देते हुए मंत्री जी ने कहा कि आधुनिक राजमार्गों से शहरों, कस्बों, बंदरगाहों, बाजारों और औद्योगिक केंद्रों के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित होना चाहिए। बेहतर संपर्क से व्यापार, निवेश, रोजगार और समग्र आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने केंद्र, राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों से देश के बढ़ते विकास और आवागमन संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप समय पर अवसंरचना उपलब्ध कराने के लिए समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया।

दो दिवसीय चिंतन शिविर में प्रधानमंत्री गतिशक्ति और एकीकृत अवसंरचना नियोजन; भूमि अधिग्रहण और भूमि राशि; आदर्श रियायत समझौते और रेटिंग; सुरक्षित और हरित राजमार्गों का डिज़ाइन; सड़क सुरक्षा और टोल सुधार; और गुणवत्ता आश्वासन और परियोजना निगरानी जैसे प्रमुख विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों का उद्देश्य कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों का समाधान करना, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना और अधिक कुशल राजमार्ग विकास के लिए व्यावहारिक और अनुकरणीय समाधानों की पहचान करना है।

मंत्री ने गुणवत्ता में सुधार लाने और निर्माण एवं रखरखाव लागत को कम करने के लिए नई तकनीकों, नवीन निर्माण पद्धतियों और किफायती सामग्रियों को व्यापक रूप से अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों को नवाचारों और जमीनी स्तर के समाधानों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया और राजमार्ग निर्माण एवं रखरखाव में अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और निरंतर सुधार के महत्व पर जोर दिया।

स्थिरता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व चिंतन शिविर के एजेंडे का एक महत्वपूर्ण घटक हैं। श्री गडकरी ने पर्यावरण के अनुकूल निर्माण पद्धतियों को बढ़ावा देने और नवीन एवं पुनर्चक्रित सामग्रियों के अधिक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए उचित उपाय सुनिश्चित करने की बात कही। इसी संदर्भ में, उद्घाटन सत्र के दौरान पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण उपायों पर एक दस्तावेज का विमोचन किया गया।

इस सत्र के दौरान सतत परिवहन में दृष्टिकोणों पर एक ब्रिक्स संकलन भी लॉन्च किया गया, जो परिवहन क्षेत्र में टिकाऊ दृष्टिकोणों पर परिप्रेक्ष्यों को एक साथ लाता है और भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचे पर विचार-विमर्श में एक अंतरराष्ट्रीय आयाम जोड़ता है।

श्री गडकरी ने राजमार्ग यात्रा की दक्षता और सुविधा में सुधार लाने के उद्देश्य से किए गए प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें फास्टैग वार्षिक पास और मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) शामिल हैं। ये पहलें टोलिंग प्रणालियों के आधुनिकीकरण, यातायात प्रवाह में सुधार और राजमार्ग उपयोगकर्ताओं के समग्र अनुभव को बढ़ाने पर मंत्रालय के निरंतर ध्यान को दर्शाती हैं।

उद्घाटन सत्र ने आगे की चर्चाओं के लिए व्यापक दिशा तय की, जिसमें चिंतन शिविर ने केंद्र-राज्य संवाद, अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और नवीन एवं अनुकरणीय समाधानों की पहचान के लिए एक मंच प्रदान किया। दो दिनों तक चलने वाली चर्चाओं का उद्देश्य परियोजना नियोजन और निगरानी को मजबूत करना, राजमार्गों की गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार करना, टिकाऊ अवसंरचना को बढ़ावा देना और भविष्य के लिए तैयार राजमार्ग अवसंरचना के निर्माण में तेजी लाना होगा।

श्री गडकरी ने सभी हितधारकों से विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप, सुरक्षित, उच्च गुणवत्ता वाले और भविष्य के लिए तैयार राजमार्ग अवसंरचना के निर्माण की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया, जिससे तीव्र आर्थिक विकास और मजबूत कनेक्टिविटी में योगदान मिलेगा।

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