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Thursday, September 24, 2026
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दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना 2.0

by admin
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कुशल और आत्मनिर्भर कार्यबल का निर्माण

ग्रामीण युवाओं को प्रासंगिक कौशल प्रदान करना और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना समावेशी और सतत ग्रामीण परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 25 सितंबर 2014 को दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) शुरू की गई थी । इसी के आधार पर, डीडीयू-जीकेवाई 2.0 योजना वर्तमान में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 749 से अधिक स्वीकृत परियोजनाओं, 760 से अधिक सक्रिय प्रशिक्षण केंद्रों और 455 से अधिक परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है, जो अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों को कवर करती है। 2014-15 में इसकी शुरुआत से लेकर अब तक, 800 से अधिक पदों के लिए 18.47 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और 12.43 लाख से अधिक को रोजगार मिल चुका है। कौशल विकास प्रयासों के पूरक के रूप में, आरएसईटीआई स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देते हैं। आज तक, 634 जिलों में फैले 647 आरएसईटीआई ने 63.47 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया है, जिनमें से 45.60 लाख सफलतापूर्वक रोजगार प्राप्त कर चुके हैं। ये पहलें ग्रामीण युवाओं के लिए उद्योग-अनुकूल प्रशिक्षण, डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान करने, रोजगार बनाए रखने और स्थायी आजीविका के अवसरों को मजबूत करती हैं।

कौशल और अवसरों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को सशक्त बनाना

भारत की युवा आबादी आर्थिक विकास और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। अनुमान है कि 2036 तक युवा आबादी लगभग 34.5 करोड़ तक पहुंच जाएगी । इस जनसांख्यिकीय क्षमता का लाभ उठाने के लिए गुणवत्तापूर्ण कौशल, रोजगार और आजीविका के अवसरों तक अधिक पहुंच आवश्यक है।

इस आवश्यकता को पहचानते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 25 सितंबर 2014 को दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) का शुभारंभ किया । DDU-GKY इस वर्ष अपनी 12वीं वर्षगांठ मना रहा है और यह कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल से रोजगार और स्थायी आजीविका के मार्ग को मजबूत करने का कार्य जारी रखे हुए है। एक दशक से अधिक समय से, यह योजना गरीब परिवारों के 15-35 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।

यह योजना अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों (50%), महिलाओं (33%) और दिव्यांगजनों (5%) को अनिवार्य रूप से शामिल करके सामाजिक समावेश को बढ़ावा देती है । पिछले एक दशक में, इस योजना में रोजगार परिणामों और नियुक्ति के बाद सहायता पर अधिक जोर देने के लिए बदलाव किए गए हैं। सरकार ने मई 2025 में उन्नत डीडीयू-जीकेवाई 2.0 दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया, जिससे प्रशिक्षण, नियुक्ति, रोजगार स्थिरता और नियुक्ति के बाद सहायता से संबंधित ढांचे को मजबूत किया गया है । संशोधित ढांचा उद्योग की आवश्यकताओं के आधार पर कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिनमें एयरोस्पेस और विमानन, कृषि, सौंदर्य और स्वास्थ्य, हरित रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, वस्त्र और अन्य शामिल हैं। ग्रामीण कौशल विकास पर निरंतर ध्यान केंद्रीय बजट 2026-27 में भी परिलक्षित होता है, जिसमें डीडीयू-जीकेवाई के लिए ₹ 750 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

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विशेष पहल: संवेदनशील क्षेत्रों के लिए लक्षित हस्तक्षेप

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत दो विशेष कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं:

रोशनी: यह गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करती है। इसके अंतर्गत आवासीय कौशल प्रशिक्षण अनिवार्य है, जिसमें महिला उम्मीदवारों के लिए 40% कवरेज है। इस पहल को आकांक्षी जिलों तक विस्तारित किया गया है, जिसमें स्थानीय बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधन और पारंपरिक कौशल पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

हिमायत: यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक विशेष डीडीयू-जीकेवाई योजना है। इसमें ग्रामीण और शहरी युवाओं को शामिल किया गया है, जिनमें बीपीएल और एपीएल व्यक्ति भी शामिल हैं, और यह मजदूरी, स्वरोजगार और गिग रोजगार को सहायता प्रदान करती है। यह योजना पूरी तरह से केंद्र द्वारा वित्त पोषित है और समर्पित मिशन प्रबंधन इकाइयों के माध्यम से राज्य के सहयोग से कार्यान्वित की जाती है।

उत्तर पूर्व : उत्तर पूर्वी राज्यों की सामाजिक-सांस्कृतिक भिन्नताओं और विशिष्ट स्थलाकृति के संदर्भ में चुनौतियों को स्वीकार करते हुए, डीडीयू-जीकेवाई के लिए कुल आवंटन में से 10% उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए निर्धारित किया गया है।

दुर्गम क्षेत्र: इसके अतिरिक्त विशेष क्षेत्र भत्ता का प्रावधान है, जिसके तहत परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों को प्रति उम्मीदवार आधार प्रशिक्षण लागत के अतिरिक्त 10% की दर से भुगतान प्राप्त करने की पात्रता होगी ।

डीडीयू-जीकेवाई 2.0: सतत रोजगार की ओर एक बदलाव

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 कौशल विकास और रोजगार के लिए एक अधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाता है , जिसमें प्रशिक्षण और नियुक्ति से लेकर रोजगार बनाए रखने और कैरियर में प्रगति तक की पूरी प्रक्रिया शामिल है।

संशोधित ढांचा प्रशिक्षण मानकों को सुदृढ़ करता है, न्यूनतम नियुक्ति अवधि को बढ़ाता है और नियुक्ति के बाद मिलने वाले समर्थन को बेहतर बनाता है। यह प्रवासन से जुड़ी चुनौतियों का भी समाधान करता है और प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और कार्यान्वयन को मजबूत बनाता है।

प्रशिक्षण ढांचे का मानकीकरण

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 न्यूनतम 576 घंटे की अवधि को बरकरार रखते हुए एक अधिक संरचित प्रशिक्षण ढांचा प्रदान करता है। तीन महीने के इस पाठ्यक्रम में 396 घंटे का डोमेन प्रशिक्षण और 180 घंटे का अनिवार्य गैर-डोमेन प्रशिक्षण शामिल है । गैर-डोमेन घटक को चार क्षेत्रों में मानकीकृत किया गया है: अंग्रेजी संचार (60 घंटे), रोजगार और जीवन कौशल (60 घंटे), कंप्यूटर और डिजिटल साक्षरता (30 घंटे), और उद्यमिता (30 घंटे) । यह सुनिश्चित करता है कि उम्मीदवारों को संचार, कार्यस्थल, डिजिटल और उद्यमशीलता क्षमताओं के साथ-साथ नौकरी-विशिष्ट तकनीकी कौशल भी प्राप्त हों।

प्लेसमेंट की अवधि

पहले, डीडीयू-जीकेवाई प्लेसमेंट को कम से कम तीन महीने के निरंतर रोजगार के रूप में परिभाषित किया गया था । इस मजबूत प्रशिक्षण आधार को आगे बढ़ाते हुए, डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत, न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि को बढ़ाकर छह महीने कर दिया गया है । संशोधित दिशानिर्देशों में निरंतर और अनियमित दोनों प्रकार के रोजगार शामिल हैं, जिनमें वेतनभोगी रोजगार, स्वरोजगार और गिग रोजगार शामिल हैं।

ग्रामीण युवाओं को नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए रोजगार मेले।

स्थानीय युवाओं को संभावित नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए एसआरएलएम द्वारा ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर रोजगार मेले आयोजित किए जाते हैं। इनमें युवा पंजीकरण और परामर्श, नियोक्ता सत्यापन और कौशल पंजी के माध्यम से एक वर्ष तक रोजगार परिणामों की निगरानी शामिल है। ये मेले मुख्य रूप से रोजगार योग्य कौशल वाले युवाओं के लिए हैं, जिनमें डीडीयू-जीकेवाई से प्रशिक्षित उम्मीदवार भी शामिल हैं जो बेहतर रोजगार के अवसर तलाश रहे हैं। डीडीयू-जीकेवाई बजट से ग्राम पंचायत स्तर के मेले के लिए ₹ 50,000 तक और ब्लॉक स्तर के मेले के लिए ₹ 1 लाख तक की धनराशि उपलब्ध है, बशर्ते कि क्रमशः 100 और 200 उम्मीदवारों का रोजगार सुनिश्चित हो।

रोजगार प्रतिधारण और कैरियर प्रगति को मजबूत करना

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत, सतत रोजगार पर अधिक जोर दिया गया है । विस्तारित छह महीने की प्लेसमेंट अवधि का समर्थन करने के लिए, डीडीयू-जीकेवाई 2.0 रोजगार की निरंतरता को सुविधाजनक बनाने के लिए प्लेसमेंट के बाद 12 महीने की ट्रैकिंग प्रदान करता है , विशेष रूप से:

  • चयनित उम्मीदवारों को ₹ 7,620 की वित्तीय सहायता प्राप्त होती है , जो छह महीने तक प्रति माह ₹ 1,270 की दर से दी जाती है ।
  • इसके अतिरिक्त, 365 दिनों तक कार्यरत रहने वाले उम्मीदवारों को प्रति उम्मीदवार ₹5,000 की प्रतिधारण सहायता प्रदान की जाती है , जिसमें रोजगार में अधिकतम 60 दिनों का अंतराल हो सकता है।
  • चयनित उम्मीदवारों को 12 महीने की नियुक्ति के बाद कौशल उन्नयन और पुनः कौशल विकास के अवसर भी प्रदान किए जाते हैं , जिससे वे अपने कौशल को मजबूत कर सकें और निरंतर रोजगार और कैरियर प्रगति की संभावनाओं में सुधार कर सकें।

प्रवासन सहायता केंद्र (एमएससी)

प्रशिक्षित उम्मीदवारों का एक बड़ा हिस्सा आजीविका के अवसरों की तलाश में पलायन करता है, इसलिए DDU-GKY 2.0 ने प्रवासन सहायता प्रणालियों को मजबूत करने पर नए सिरे से जोर दिया है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) उन क्षेत्रों में प्रवासन सहायता केंद्र (MSC) स्थापित करते हैं जहां नियोजित उम्मीदवारों की संख्या अधिक होती है। ये केंद्र मूल राज्य और गंतव्य राज्य दोनों में कार्यरत हैं। MSC उम्मीदवारों को इस संक्रमणकालीन अवधि के दौरान सहायता प्रदान करने के लिए कई प्रकार की सेवाएं प्रदान करते हैं, जिनमें आवास सहायता, परामर्श और रोजगार सहायता शामिल हैं।

ये केंद्र रोजगार संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाते हैं, पूर्व छात्रों के बीच नेटवर्किंग को प्रोत्साहित करते हैं और नियोक्ताओं के साथ जुड़ाव को मजबूत करते हैं। इसके अलावा, ये केंद्र स्थानीय प्रशासनिक निकायों और सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय स्थापित करते हैं ताकि उम्मीदवारों को शहरी कार्य वातावरण में व्यवस्थित होने और लंबे समय तक स्थिर रोजगार बनाए रखने में मदद मिल सके। इस सहायता प्रणाली के बढ़ते महत्व को देखते हुए, एमएससी के लिए प्रति केंद्र वार्षिक निधि में काफी वृद्धि की गई है, जो पहले ₹10 लाख थी , उसे संशोधित ढांचे के तहत बढ़ाकर ₹30 लाख तक कर दिया गया है ।

कार्यान्वयन में प्रौद्योगिकी का उपयोग करना

डीडीयू-जीकेवाई की स्थापना से ही प्रौद्योगिकी का एकीकरण इसकी एक प्रमुख विशेषता रही है । यह ढांचा भौगोलिक रूप से चिह्नित और समय-मुहरयुक्त बायोमेट्रिक उपस्थिति रिकॉर्ड, कंप्यूटर लैब और ई-लर्निंग सुविधाओं पर आधारित है । इन उपायों से कार्यक्रम की निगरानी मजबूत हुई और साथ ही प्रशिक्षुओं को डिजिटल उपकरणों से बेहतर तरीके से परिचित कराया गया।

DDU-GKY 2.0 इस तकनीकी आधार को और मजबूत करते हुए संपूर्ण कार्यक्रम जीवनचक्र को समाहित करने वाला एक संपूर्ण डिजिटल समाधान प्रस्तुत करता है। यह प्लेटफॉर्म PIA ऑनबोर्डिंग, परियोजना प्रस्तुति और मूल्यांकन, प्रशिक्षण केंद्र और उम्मीदवार प्रबंधन, आकलन और प्रमाणन, वित्तीय प्रबंधन, और परियोजना निगरानी और प्लेसमेंट ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं को कवर करता है।

संशोधित दृष्टिकोण में निम्नलिखित बातें भी शामिल हैं:

  • वास्तविक समय में कार्यक्रम की निगरानी के लिए उन्नत डैशबोर्ड ।
  • प्रशिक्षण खोज और पीआईए प्रदर्शन रेटिंग देखने के लिए सार्वजनिक उम्मीदवार पोर्टल ।
  • परियोजना पंजीकरण संख्या (पीआरएन) निर्माण, शिकायत निवारण और प्रमाणपत्र सत्यापन सहित स्वचालित प्रक्रियाएं ।
  • चेहरे की पहचान और रीयल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से डिजिटल उपस्थिति और मूल्यांकन ।
  • स्वचालित पाठ्यक्रम विवरण सत्यापन के लिए स्किल इंडिया डिजिटल हब का एकीकरण।

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के कार्यान्वयन का नेतृत्व करना (2025-26)

  • गोवा, डीडीयू जीकेवाई 2.0 के बैच तैयार करने में अग्रणी बनकर उभरा है।
  • आंध्र प्रदेश ने महज तीन महीने की अवधि में 12000 से अधिक उम्मीदवारों का प्रशिक्षण शुरू कर दिया है।
  • जम्मू और कश्मीर को आवंटित लक्ष्यों का 100% हिस्सा पूरा कर लिया गया है और आवंटित हिस्से के 91% के लिए प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है।

योजना के अंतर्गत हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियाँ

डीडीयू-जीकेवाई कार्यक्रम वर्तमान में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक व्यापक कौशल विकास नेटवर्क के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। आज की तारीख में, इस कार्यक्रम के तहत 749 स्वीकृत परियोजनाएं और 760 सक्रिय प्रशिक्षण केंद्र हैं, जो 455 से अधिक पीआईए (व्यक्तिगत सहयोग अभिकर्ता) के साथ साझेदारी में काम कर रहे हैं ।

2014-15 में अपनी स्थापना के बाद से, डीडीयू-जीकेवाई ने अर्थव्यवस्था के सभी 36 क्षेत्रों और 800 से अधिक रोजगार भूमिकाओं को कवर करते हुए 18.47 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया है और 12.43 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दिलाया है । यह योजना की व्यापक क्षेत्रीय पहुंच और ग्रामीण युवाओं के लिए उद्योग-अनुकूल कौशल विकास पर इसके फोकस को दर्शाता है।

इस योजना के तहत 9.71 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया और 6.34 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार प्राप्त हुआ।

ग्रामीण युवा उद्यमिता को समर्थन देने वाली अन्य पहलें

जहां एक ओर DDU-GKY कार्यक्रम रोजगार से संबंधित वेतन पर केंद्रित है, वहीं सरकार ने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (RSETI) के माध्यम से स्वरोजगार और उद्यमिता के मार्ग को भी मजबूत किया है। यह कार्यक्रम 18-50 वर्ष की आयु के ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण प्रदान करता है , जिसके बाद स्थायी आजीविका स्थापित करने के लिए उन्हें मार्गदर्शन भी दिया जाता है। कार्यक्रम देश के प्रत्येक जिले में कौशल विकास के लिए समर्पित अवसंरचना का निर्माण करता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं, विशेष रूप से गरीबी रेखा से नीचे (BPL) और DAY-NRLM परिवारों के युवाओं के कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करना है।

आज की तारीख में, 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 634 जिलों में कुल 647 आरएसईटीआई कार्यरत हैं । अपनी स्थापना (2009) से लेकर अब तक , इस योजना ने 63.47 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया है। कुल 45.60 लाख उम्मीदवारों को स्थायी रोजगार भी मिल चुका है । आरएसईटीआई के तहत स्थायी रोजगार पाने वाले उम्मीदवारों में से लगभग 94% ने स्थायी स्वरोजगार उद्यम स्थापित किए हैं। लगभग 6% को वेतनभोगी रोजगार प्राप्त हुआ है।

भविष्य के लिए ग्रामीण भारत के कार्यबल को आकार देना

भारत में समावेशी आर्थिक विकास के लिए ग्रामीण युवाओं के कौशल, रोजगार क्षमता और उद्यमिता को मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के माध्यम से सरकार एक अधिक उत्तरदायी, प्रौद्योगिकी-आधारित और परिणाम-उन्मुख कौशल विकास प्रणाली का निर्माण कर रही है। ये कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करते हैं और उनकी आजीविका को स्थायी बनाते हैं। गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योग साझेदारी और उत्तरदायी सहयोग पर निरंतर ध्यान देने से कौशल को स्थायी आजीविका में परिवर्तित किया जा सकता है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 भविष्य के लिए एक कुशल, सशक्त और आत्मनिर्भर ग्रामीण कार्यबल के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत के 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देता है, जिसका उद्देश्य देश को एक वैश्विक आर्थिक और ज्ञान केंद्र में बदलना है।

संदर्भ

ग्रामीण विकास मंत्रालय

https://kaushal.rural.gov.in/#/about-us
https://kaushal.rural.gov.in/#/training-center-list
https://kaushal.rural.gov.in/assets/files/Deen%20Dayal%20Upadhyaya%20Grameen%20Kaushal%20Yojana.pdf
https://kaushal.rural.gov.in/#/key-features
https://ddugkysop.in/pluginfile.php/21940/mod_resource/content/2/DDUGKY_CNN_aligned_Guidelines_July_2016.pdf
https://www.dord.gov.in/static/uploads/2024/07/ee7db3320bf3aa165fdb69f12cbb2c38.pdf
https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/187/AU3964_UIXOj8.pdf?source=pqals
https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/187/AU5192_zshReo.pdf?source=pqals

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2148466®=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2294539®=3&lang=1

https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3e9412ee564384b987d086df32d4ce6b7/uploads/2025/06/20250625554506571.pdf

https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3e9412ee564384b987d086df32d4ce6b7/uploads/2025/06/20250625108042813.pdf

वित्त मंत्रित्व

https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/sbe87.pdf

नीति आयोग

https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2026-02/Revitalizing-India-Apprenticeship-Ecosystem-Insights-Challenges-Recommendations-and-Best-Practices.pdf

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

https://www.newsonair.gov.in/bulletins-detail/parikrama-688

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