मुख्य बिंदु:
- क्लाइमेट साइंस इनटू सर्विसेज फॉर इंडिया फोरम (सीएसएसआईएफ) की पहली हितधारक परामर्श बैठक 17 अक्टूबर 2026 को आईआईटीएम, पुणे में आयोजित की गई थी।
- बैठक का मुख्य उद्देश्य जलवायु विज्ञान को व्यावहारिक सेवाओं से जोड़ना था ताकि नीति-संबंधी जानकारी और सोच-समझकर निर्णय लेने में सहायता मिल सके।
- तकनीकी सत्रों में मौसम और जलवायु उत्पादों, जलवायु मॉडलों, डेटा और देश के लिए जलवायु सेवा सूचना प्रणाली (सीएसआईएस) की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
- क्षेत्रीय परामर्श में स्वास्थ्य, जलवायु चरम सीमाओं के प्रभाव पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ ऊर्जा और वित्त, जलवायु अनुमान और सेवाओं से संबंधित विषयगत समूह शामिल थे।
- विषयगत सत्रों ने क्षेत्र-विशिष्ट जलवायु सूचना आवश्यकताओं और अनुप्रयोगों पर विचार-मंथन और संवादात्मक चर्चाओं के लिए एक मंच प्रदान किया।
IITM पुणे; 17.10.2026: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अधीन भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे ने 17 अक्टूबर 2026 को पुणे स्थित अपने परिसर में जलवायु विज्ञान को भारत के लिए सेवाओं में परिणत करने वाले मंच (CSSIF) की पहली हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के 80 से अधिक संस्थानों के 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें सरकारी मंत्रालयों और विभागों, परिचालन एजेंसियों, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के हितधारक शामिल थे।
इस परामर्श में प्रासंगिक जलवायु सेवाओं के विकास और विभिन्न क्षेत्रों में मौसम और जलवायु संबंधी जानकारी के अनुप्रयोग को मजबूत करने में जलवायु विज्ञान की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत एवं अभिनंदन के साथ हुआ। इसके बाद IITM के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव ने स्वागत भाषण दिया। भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व निदेशक प्रो. वी.के. डढवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित किया। IITM के जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र (CCCR) की परियोजना निदेशक डॉ. सुवर्णा फडणवीस ने हितधारक परामर्श बैठक का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।
तकनीकी सत्र में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के जलवायु अनुप्रयोग एवं सेवा प्रभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. रूपा कुमार कोल्ली ने देश के लिए जलवायु सेवा सूचना प्रणाली की आवश्यकता पर परिचयात्मक व्याख्यान दिया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के वैज्ञानिक श्री अमरदीप राजू ने नीतिगत प्रासंगिक जलवायु परिवर्तन सूचना की आवश्यकता पर आमंत्रित व्याख्यान दिया। सत्र में आईआईटीएम-एमओईएस के मौसम एवं जलवायु उत्पादों और आईआईटीएम के सीसीसीआर की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. स्वप्ना पनिकल द्वारा प्रस्तुत जलवायु मॉडल, डेटा और उत्पादों पर भी चर्चा हुई।
क्षेत्रीय परामर्श में जलवायु विज्ञान के अनुप्रयोग को क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों से निपटने के लिए विचार-विमर्श और संवादात्मक चर्चाओं को प्रोत्साहित करने हेतु विषयगत समूह बनाए गए थे। जल संसाधन और जल विज्ञान, कृषि और खाद्य सुरक्षा, तथा आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण पर विशेष समूह बनाए गए। विशेष रूप से वर्षा, गर्मी और जंगल की आग जैसी चरम जलवायु घटनाओं; नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण, बीमा और आर्थिक जोखिम मूल्यांकन सहित ऊर्जा और वित्त; तथा समुद्री तापप्रसरण, समुद्री उत्पादकता, तटीय भेद्यता और प्रेक्षणों को सेवाओं में परिवर्तित करने के लिए रूपरेखाओं को शामिल करते हुए जलवायु पूर्वानुमान और सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।
क्षेत्रवार विषयगत परामर्शों के माध्यम से, हितधारकों ने जलवायु संबंधी जानकारी की अपनी आवश्यकताओं, परिचालन संबंधी चुनौतियों और अपेक्षाओं को उजागर किया, साथ ही IITM के जलवायु अनुसंधान, डेटासेट और उत्पादों तथा उपयोगी एवं व्यावहारिक जलवायु सेवाओं में उनके संभावित रूपांतरण के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त की। परामर्श से प्राप्त प्रमुख सिफारिशें जलवायु विज्ञान, सेवाओं, नीति और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच समन्वय को मजबूत करने में सहायक होंगी।
यह बैठक सीएसएसआईएफ के तहत भारत के लिए वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़, उपयोगकर्ता-उन्मुख और क्षेत्र-प्रासंगिक जलवायु सूचना और सेवाओं के विकास की दिशा में निरंतर जुड़ाव की शुरुआत का प्रतीक है।
प्रतिभागियों ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES), पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), नौसेना मुख्यालय, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM), केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केंद्र (CWPRS), राष्ट्रीय जल अकादमी, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF), राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र (NCPOR), भारतीय राष्ट्रीय महासागरीय सूचना सेवा केंद्र (INCOIS), राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (NCCR), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV), राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (NIE) और ICAR संस्थानों सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संगठनों का प्रतिनिधित्व किया।
राज्य स्तरीय संगठनों, जिनमें राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग, पुणे नगर निगम, कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र, गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्य प्रदेश जलवायु परिवर्तन केंद्र, गोवा राज्य जलवायु परिवर्तन प्रकोष्ठ, असम जलवायु परिवर्तन प्रबंधन सोसायटी, बिहार मौसम सेवा केंद्र और देश भर की अन्य राज्य एजेंसियां शामिल हैं, से भी मजबूत भागीदारी प्राप्त हुई।
इस परामर्श में द नेचर कंजर्वेंसी इंडिया, वाटरशेड ऑर्गनाइजेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूओटीआर), बीएआईएफ डेवलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन, टेरे पॉलिसी सेंटर, स्वयं शिक्षण प्रयोग, डेवलपमेंट सपोर्ट सेंटर, नाम फाउंडेशन, अर्थसाइट फाउंडेशन, ग्राम और इकोलॉजिकल सोसाइटी जैसे प्रमुख गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स, क्रेया विश्वविद्यालय और आईआईटीएम के वैज्ञानिकों सहित विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
यह कार्यक्रम IITM के YouTube चैनल पर उपलब्ध है: https://youtube.com/live/kOTL91NGmFg?feature=share




IITM ने भारत के लिए जलवायु विज्ञान को सेवाओं में बदलने के लिए फोरम (CSSIF) पर पहली हितधारक परामर्श बैठक की मेजबानी की।
17 अक्टूबर 2026, दोपहर 3:45 बजे, पीआईबी दिल्ली द्वारा प्रकाशित
मुख्य बिंदु:
- क्लाइमेट साइंस इनटू सर्विसेज फॉर इंडिया फोरम (सीएसएसआईएफ) की पहली हितधारक परामर्श बैठक 17 अक्टूबर 2026 को आईआईटीएम, पुणे में आयोजित की गई थी।
- बैठक का मुख्य उद्देश्य जलवायु विज्ञान को व्यावहारिक सेवाओं से जोड़ना था ताकि नीति-संबंधी जानकारी और सोच-समझकर निर्णय लेने में सहायता मिल सके।
- तकनीकी सत्रों में मौसम और जलवायु उत्पादों, जलवायु मॉडलों, डेटा और देश के लिए जलवायु सेवा सूचना प्रणाली (सीएसआईएस) की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
- क्षेत्रीय परामर्श में स्वास्थ्य, जलवायु चरम सीमाओं के प्रभाव पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ ऊर्जा और वित्त, जलवायु अनुमान और सेवाओं से संबंधित विषयगत समूह शामिल थे।
- विषयगत सत्रों ने क्षेत्र-विशिष्ट जलवायु सूचना आवश्यकताओं और अनुप्रयोगों पर विचार-मंथन और संवादात्मक चर्चाओं के लिए एक मंच प्रदान किया।
IITM पुणे; 17.10.2026: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अधीन भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे ने 17 अक्टूबर 2026 को पुणे स्थित अपने परिसर में जलवायु विज्ञान को भारत के लिए सेवाओं में परिणत करने वाले मंच (CSSIF) की पहली हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के 80 से अधिक संस्थानों के 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें सरकारी मंत्रालयों और विभागों, परिचालन एजेंसियों, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के हितधारक शामिल थे।
इस परामर्श में प्रासंगिक जलवायु सेवाओं के विकास और विभिन्न क्षेत्रों में मौसम और जलवायु संबंधी जानकारी के अनुप्रयोग को मजबूत करने में जलवायु विज्ञान की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत एवं अभिनंदन के साथ हुआ। इसके बाद IITM के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव ने स्वागत भाषण दिया। भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व निदेशक प्रो. वी.के. डढवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित किया। IITM के जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र (CCCR) की परियोजना निदेशक डॉ. सुवर्णा फडणवीस ने हितधारक परामर्श बैठक का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।
तकनीकी सत्र में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के जलवायु अनुप्रयोग एवं सेवा प्रभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. रूपा कुमार कोल्ली ने देश के लिए जलवायु सेवा सूचना प्रणाली की आवश्यकता पर परिचयात्मक व्याख्यान दिया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के वैज्ञानिक श्री अमरदीप राजू ने नीतिगत प्रासंगिक जलवायु परिवर्तन सूचना की आवश्यकता पर आमंत्रित व्याख्यान दिया। सत्र में आईआईटीएम-एमओईएस के मौसम एवं जलवायु उत्पादों और आईआईटीएम के सीसीसीआर की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. स्वप्ना पनिकल द्वारा प्रस्तुत जलवायु मॉडल, डेटा और उत्पादों पर भी चर्चा हुई।
क्षेत्रीय परामर्श में जलवायु विज्ञान के अनुप्रयोग को क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों से निपटने के लिए विचार-विमर्श और संवादात्मक चर्चाओं को प्रोत्साहित करने हेतु विषयगत समूह बनाए गए थे। जल संसाधन और जल विज्ञान, कृषि और खाद्य सुरक्षा, तथा आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण पर विशेष समूह बनाए गए। विशेष रूप से वर्षा, गर्मी और जंगल की आग जैसी चरम जलवायु घटनाओं; नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण, बीमा और आर्थिक जोखिम मूल्यांकन सहित ऊर्जा और वित्त; तथा समुद्री तापप्रसरण, समुद्री उत्पादकता, तटीय भेद्यता और प्रेक्षणों को सेवाओं में परिवर्तित करने के लिए रूपरेखाओं को शामिल करते हुए जलवायु पूर्वानुमान और सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।
क्षेत्रवार विषयगत परामर्शों के माध्यम से, हितधारकों ने जलवायु संबंधी जानकारी की अपनी आवश्यकताओं, परिचालन संबंधी चुनौतियों और अपेक्षाओं को उजागर किया, साथ ही IITM के जलवायु अनुसंधान, डेटासेट और उत्पादों तथा उपयोगी एवं व्यावहारिक जलवायु सेवाओं में उनके संभावित रूपांतरण के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त की। परामर्श से प्राप्त प्रमुख सिफारिशें जलवायु विज्ञान, सेवाओं, नीति और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच समन्वय को मजबूत करने में सहायक होंगी।
यह बैठक सीएसएसआईएफ के तहत भारत के लिए वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़, उपयोगकर्ता-उन्मुख और क्षेत्र-प्रासंगिक जलवायु सूचना और सेवाओं के विकास की दिशा में निरंतर जुड़ाव की शुरुआत का प्रतीक है।
प्रतिभागियों ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES), पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), नौसेना मुख्यालय, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM), केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केंद्र (CWPRS), राष्ट्रीय जल अकादमी, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF), राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र (NCPOR), भारतीय राष्ट्रीय महासागरीय सूचना सेवा केंद्र (INCOIS), राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (NCCR), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV), राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (NIE) और ICAR संस्थानों सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संगठनों का प्रतिनिधित्व किया।
राज्य स्तरीय संगठनों, जिनमें राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग, पुणे नगर निगम, कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र, गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्य प्रदेश जलवायु परिवर्तन केंद्र, गोवा राज्य जलवायु परिवर्तन प्रकोष्ठ, असम जलवायु परिवर्तन प्रबंधन सोसायटी, बिहार मौसम सेवा केंद्र और देश भर की अन्य राज्य एजेंसियां शामिल हैं, से भी मजबूत भागीदारी प्राप्त हुई।
इस परामर्श में द नेचर कंजर्वेंसी इंडिया, वाटरशेड ऑर्गनाइजेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूओटीआर), बीएआईएफ डेवलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन, टेरे पॉलिसी सेंटर, स्वयं शिक्षण प्रयोग, डेवलपमेंट सपोर्ट सेंटर, नाम फाउंडेशन, अर्थसाइट फाउंडेशन, ग्राम और इकोलॉजिकल सोसाइटी जैसे प्रमुख गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स, क्रेया विश्वविद्यालय और आईआईटीएम के वैज्ञानिकों सहित विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
यह कार्यक्रम IITM के YouTube चैनल पर उपलब्ध है: https://youtube.com/live/kOTL91NGmFg?feature=share




IITM ने भारत के लिए जलवायु विज्ञान को सेवाओं में बदलने के लिए फोरम (CSSIF) पर पहली हितधारक परामर्श बैठक की मेजबानी की।
मुख्य बिंदु:
- क्लाइमेट साइंस इनटू सर्विसेज फॉर इंडिया फोरम (सीएसएसआईएफ) की पहली हितधारक परामर्श बैठक 17 अक्टूबर 2026 को आईआईटीएम, पुणे में आयोजित की गई थी।
- बैठक का मुख्य उद्देश्य जलवायु विज्ञान को व्यावहारिक सेवाओं से जोड़ना था ताकि नीति-संबंधी जानकारी और सोच-समझकर निर्णय लेने में सहायता मिल सके।
- तकनीकी सत्रों में मौसम और जलवायु उत्पादों, जलवायु मॉडलों, डेटा और देश के लिए जलवायु सेवा सूचना प्रणाली (सीएसआईएस) की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
- क्षेत्रीय परामर्श में स्वास्थ्य, जलवायु चरम सीमाओं के प्रभाव पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ ऊर्जा और वित्त, जलवायु अनुमान और सेवाओं से संबंधित विषयगत समूह शामिल थे।
- विषयगत सत्रों ने क्षेत्र-विशिष्ट जलवायु सूचना आवश्यकताओं और अनुप्रयोगों पर विचार-मंथन और संवादात्मक चर्चाओं के लिए एक मंच प्रदान किया।
IITM पुणे; 17.10.2026: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अधीन भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे ने 17 अक्टूबर 2026 को पुणे स्थित अपने परिसर में जलवायु विज्ञान को भारत के लिए सेवाओं में परिणत करने वाले मंच (CSSIF) की पहली हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के 80 से अधिक संस्थानों के 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें सरकारी मंत्रालयों और विभागों, परिचालन एजेंसियों, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के हितधारक शामिल थे।
इस परामर्श में प्रासंगिक जलवायु सेवाओं के विकास और विभिन्न क्षेत्रों में मौसम और जलवायु संबंधी जानकारी के अनुप्रयोग को मजबूत करने में जलवायु विज्ञान की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत एवं अभिनंदन के साथ हुआ। इसके बाद IITM के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव ने स्वागत भाषण दिया। भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व निदेशक प्रो. वी.के. डढवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित किया। IITM के जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र (CCCR) की परियोजना निदेशक डॉ. सुवर्णा फडणवीस ने हितधारक परामर्श बैठक का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।
तकनीकी सत्र में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के जलवायु अनुप्रयोग एवं सेवा प्रभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. रूपा कुमार कोल्ली ने देश के लिए जलवायु सेवा सूचना प्रणाली की आवश्यकता पर परिचयात्मक व्याख्यान दिया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के वैज्ञानिक श्री अमरदीप राजू ने नीतिगत प्रासंगिक जलवायु परिवर्तन सूचना की आवश्यकता पर आमंत्रित व्याख्यान दिया। सत्र में आईआईटीएम-एमओईएस के मौसम एवं जलवायु उत्पादों और आईआईटीएम के सीसीसीआर की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. स्वप्ना पनिकल द्वारा प्रस्तुत जलवायु मॉडल, डेटा और उत्पादों पर भी चर्चा हुई।
क्षेत्रीय परामर्श में जलवायु विज्ञान के अनुप्रयोग को क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों से निपटने के लिए विचार-विमर्श और संवादात्मक चर्चाओं को प्रोत्साहित करने हेतु विषयगत समूह बनाए गए थे। जल संसाधन और जल विज्ञान, कृषि और खाद्य सुरक्षा, तथा आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण पर विशेष समूह बनाए गए। विशेष रूप से वर्षा, गर्मी और जंगल की आग जैसी चरम जलवायु घटनाओं; नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण, बीमा और आर्थिक जोखिम मूल्यांकन सहित ऊर्जा और वित्त; तथा समुद्री तापप्रसरण, समुद्री उत्पादकता, तटीय भेद्यता और प्रेक्षणों को सेवाओं में परिवर्तित करने के लिए रूपरेखाओं को शामिल करते हुए जलवायु पूर्वानुमान और सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।
क्षेत्रवार विषयगत परामर्शों के माध्यम से, हितधारकों ने जलवायु संबंधी जानकारी की अपनी आवश्यकताओं, परिचालन संबंधी चुनौतियों और अपेक्षाओं को उजागर किया, साथ ही IITM के जलवायु अनुसंधान, डेटासेट और उत्पादों तथा उपयोगी एवं व्यावहारिक जलवायु सेवाओं में उनके संभावित रूपांतरण के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त की। परामर्श से प्राप्त प्रमुख सिफारिशें जलवायु विज्ञान, सेवाओं, नीति और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच समन्वय को मजबूत करने में सहायक होंगी।
यह बैठक सीएसएसआईएफ के तहत भारत के लिए वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़, उपयोगकर्ता-उन्मुख और क्षेत्र-प्रासंगिक जलवायु सूचना और सेवाओं के विकास की दिशा में निरंतर जुड़ाव की शुरुआत का प्रतीक है।
प्रतिभागियों ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES), पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), नौसेना मुख्यालय, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM), केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केंद्र (CWPRS), राष्ट्रीय जल अकादमी, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF), राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र (NCPOR), भारतीय राष्ट्रीय महासागरीय सूचना सेवा केंद्र (INCOIS), राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (NCCR), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV), राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (NIE) और ICAR संस्थानों सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संगठनों का प्रतिनिधित्व किया।
राज्य स्तरीय संगठनों, जिनमें राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग, पुणे नगर निगम, कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र, गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्य प्रदेश जलवायु परिवर्तन केंद्र, गोवा राज्य जलवायु परिवर्तन प्रकोष्ठ, असम जलवायु परिवर्तन प्रबंधन सोसायटी, बिहार मौसम सेवा केंद्र और देश भर की अन्य राज्य एजेंसियां शामिल हैं, से भी मजबूत भागीदारी प्राप्त हुई।
इस परामर्श में द नेचर कंजर्वेंसी इंडिया, वाटरशेड ऑर्गनाइजेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूओटीआर), बीएआईएफ डेवलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन, टेरे पॉलिसी सेंटर, स्वयं शिक्षण प्रयोग, डेवलपमेंट सपोर्ट सेंटर, नाम फाउंडेशन, अर्थसाइट फाउंडेशन, ग्राम और इकोलॉजिकल सोसाइटी जैसे प्रमुख गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स, क्रेया विश्वविद्यालय और आईआईटीएम के वैज्ञानिकों सहित विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
यह कार्यक्रम IITM के YouTube चैनल पर उपलब्ध है: https://youtube.com/live/kOTL91NGmFg?feature=share





