इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान गलगोटियास यूनिवर्सिटी लगातार चर्चा में बनी हुई है। पहले चीनी रोबोडॉग को अपना इनोवेशन बताने को लेकर सवाल उठे, अब वहीं लगा थर्माकोल से बना तथाकथित “AI प्लेन” सोशल मीडिया पर हंसी का कारण बन गया है।
थर्माकोल का ‘AI प्लेन’ और सोशल मीडिया की चुटकी
समिट में जब यूनिवर्सिटी का स्टॉल खाली कराया गया, तो वहां थर्माकोल से तैयार एक विमाननुमा मॉडल पड़ा रह गया। लोगों ने मौके पर ही उसकी फोटो और वीडियो बनाकर इंटरनेट पर डाल दिए, जिन पर यूज़र्स ने तंज कसते हुए लिखा कि यह प्लेन तो पाकिस्तान को भी “उड़ा” सकता है। कई यूज़र्स ने इसे सीरियस टेक्नोलॉजी के बजाय सिर्फ दिखावे की कोशिश बताया।
चीनी रोबोडॉग से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला तब सुर्खियों में आया, जब गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने अपने स्टॉल पर एक रोबोटिक डॉग को इस तरह पेश किया जैसे वह उनका खुद का डेवलप किया हुआ प्रोजेक्ट हो। टेक विशेषज्ञों ने तुरंत पहचान लिया कि यह यूनिट्री कंपनी का Go2 मॉडल है, जिसे विदेशों में पहले से रिसर्च और ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। जैसे ही यह बात सामने आई, आयोजकों ने कड़ा रुख अपनाया, स्टॉल की सप्लाई बंद की गई और यूनिवर्सिटी को जगह खाली करनी पड़ी।
यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया और सफाई
विवाद बढ़ने पर यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक बयान जारी कर खेद व्यक्त किया और गलती का ठीकरा इवेंट पर मौजूद अपने प्रतिनिधि पर फोड़ दिया। उनका कहना था कि प्रतिनिधि को प्रोडक्ट के स्रोत और तकनीकी विवरण की पूरी व सही जानकारी नहीं थी, और इसी वजह से उसने कैमरे के सामने गलत बात कह दी। यूनिवर्सिटी ने दावा किया कि उनका असली उद्देश्य छात्रों को AI और रोबोटिक्स के ज़रिए प्रेरित करना है, न कि किसी और की तकनीक को अपना बताना।
प्रोफेसर के बयान से बढ़ी परेशानी
कम्युनिकेशन विभाग की प्रोफेसर नेहा सिंह ने डीडी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि यह रोबोट गलगोटियास यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की देन है। इस बयान के बाद आलोचना और तेज हो गई, क्योंकि वीडियो में साफ लग रहा था कि डिवाइस बाहरी कंपनी का है। बाद में प्रोफेसर ने सफाई दी कि शोरगुल, समय की कमी और बातचीत के दौरान हुई गड़बड़ियों के कारण बात सही तरीके से रखी नहीं जा सकी और गलतफहमी पैदा हो गई।
सरकार का सख्त संदेश
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि सरकार नए प्रयोगों और इनोवेशन को प्रोत्साहित करती है, लेकिन किसी भी तरह की भ्रामक प्रस्तुति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने साफ कहा कि अगर कोई संस्था किसी तैयार प्रोडक्ट को अपना बताकर दिखाती है और लोगों में गलत धारणा बनाती है, तो ऐसे मामलों पर कार्रवाई होगी। रोबोडॉग से लेकर थर्माकोल प्लेन तक हुई घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि टेक इवेंट में केवल मॉडल दिखाना काफी नहीं, ईमानदार क्रेडिट और पारदर्शिता भी उतनी ही ज़रूरी है।









