केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगस्त 2024 में देश भर में ‘उच्च प्रदर्शन वाले जैव विनिर्माण को बढ़ावा देने’ के लिए बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) नीति को मंजूरी दी। इसके बाद, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) की दो छत्र योजनाओं को जारी रखने की मंजूरी दी, जिन्हें एक योजना- ‘जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान नवाचार और उद्यमिता विकास (बायो-राइड)’ के रूप में विलय कर दिया गया है, जिसमें बायोमैन्युफैक्चरिंग और बायोफाउंड्री नामक एक नया घटक शामिल है। “उच्च प्रदर्शन वाले जैव विनिर्माण” के दायरे में, स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण के क्षेत्रों में डेटा आधारित और अत्याधुनिक प्रतिमानों के निर्माण के लिए बायो-एआई हब की स्थापना की जाएगी।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) ने जैव विनिर्माण के लिए बायोई3 नीति के तहत जैव-एआई पर प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। एआई और जीवविज्ञान के संयोजन के माध्यम से स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण और नवीन अनुसंधान प्रदान करने के लिए शिक्षा और उद्योग में बायो-एआई हब स्थापित करने का प्रस्ताव है।
बायो-एआई के लिए आशय पत्र (एलओआई) को बायोमॉलिक्यूलर डिजाइन, संधारणीय कृषि, सिंथेटिक बायोलॉजी, आयुर्वेद और जीनोम डायग्नोस्टिक्स में प्रमुख जैविक चुनौतियों को हल करने के लिए जीव विज्ञान में एआई का उपयोग करने के लिए विशिष्ट रूप से डिज़ाइन किया गया है। इसलिए, इन डोमेन में समस्या कथनों के साथ-साथ संभावित शोध समाधान सिंथेटिक बायोलॉजी, एआई/एमएल और कम्प्यूटेशन के क्षेत्रों में अनुसंधान विशेषज्ञता के साथ बहु-विषयक टीमों से जटिल जैविक अनुसंधान चुनौतियों का समाधान करने के लिए आमंत्रित किए जाते हैं। समस्या कथनों को अनुमानित परिणामों के लिए डेटा-संचालित, अत्याधुनिक, बहु-विषयक प्रोग्रामेटिक अनुसंधान पहलों द्वारा संबोधित किया जाना है।
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एनकेआर/पीएसएम









