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वर्षांत समीक्षा

भारतीय विज्ञान के लिए यह वर्ष अनेक अभूतपूर्व उपलब्धियों का साक्षी रहा है। 5,270 मीटर की अत्यधिक गहराई पर गहरे समुद्र में खनन प्रणाली के सफल परीक्षण से लेकर एक क्रांतिकारी मौसम मिशन के सफल प्रक्षेपण तक, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने इस वर्ष अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं की रूपरेखाओं को सफलतापूर्वक साकार किया है।

जैसे-जैसे वर्ष अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, मंत्रालय की नवीनतम रिपोर्ट केवल तकनीकी उपलब्धियों को ही नहीं दर्शाती, बल्कि यह लाखों लोगों के जीवन पर पड़े इनके प्रत्यक्ष प्रभाव को भी उजागर करती है।

मानव प्रभाव: प्रतिफल देने वाला विज्ञान

पहली बार, एक तृतीय-पक्ष ऑडिट के माध्यम से भारत के मौसम विज्ञान में किए गए निवेश के मूल्य का आकलन किया गया है। जहाँ सरकार ने मानसून मिशन और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग पर लगभग 1,000 करोड़ रुपये व्यय किए, वहीं इसके परिणामस्वरूप लगभग 50,000 करोड़ रुपये के आर्थिक लाभ प्राप्त हुए। इन लाभों से गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले लगभग 1.1 करोड़ परिवारों को प्रत्यक्ष सहायता मिली, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों तथा मछुआरों को, जो अपनी आजीविका की सुरक्षा के लिए मंत्रालय की दैनिक मौसम एवं महासागर संबंधी चेतावनियों पर निर्भर हैं।

गहन अंधकार एवं अथाह गहराइयों में नए कीर्तिमान

इस वर्ष संसाधन आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की खोज समुद्र की तलहटी तक पहुँची।

गहन समुद्री खनन: 5,270 मीटर की गहराई पर खनन प्रणाली का सफल परीक्षण कर भारत गहन समुद्री प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्‍व का अग्रणी बना—यह अब तक का सबसे गहराई पर किया गया ऐसा परीक्षण है।

“समुद्रयान” मिशन: मानवयुक्त पनडुब्बी मत्‍स्‍य (MATSYA) ने अपने सुविधा और स्थिरता से जुड़े परीक्षणों को उत्कृष्ट परिणामों के साथ पूर्ण किया। एक अलग ऐतिहासिक गोताखोरी के दौरान, भारतीय वैज्ञानिकों ने अटलांटिक महासागर में सहयोगात्मक मिशन के तहत 5,002 मीटर की गहराई तक पहुँचकर भारतीय समुद्री विज्ञान के लिए एक नया मानक स्थापित किया।

हमारे तटों और द्वीपों का संरक्षण

मंत्रालय केवल दूर क्षितिज तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हमारे तटों पर भी समान रूप से ध्यान केंद्रित कर रहा है।

लक्षद्वीप के लिए स्वच्छ जल: तीन नई पर्यावरण-अनुकूल विलवणीकरण इकाइयों को चालू किया गया, जिससे द्वीपों को स्‍वच्‍छ पेयजल उपलब्ध हुआ।

तटीय संरक्षक: महासागरों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत में ही दो नए अनुसंधान पोत—सागर तारा और सागर अन्वेषिका—का निर्माण किया गया।

सुरक्षा पहले: सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र ने इस वर्ष 32 प्रमुख भूकंपों की निगरानी की, यह सुनिश्चित करते हुए कि भारतीय तटों के किसी भी खतरे को अनदेखा न किया जाए।

अगली सदी के लिए एक विज़न

14 जनवरी को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मिशन मौसम और आईएमडी विज़न 2047 का शुभारंभ करके भविष्य की दिशा निर्धारित की। इन लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए मंत्रालय ने अपनी सुपरकंप्यूटिंग क्षमता को 21 पेटाफ्लॉप्स तक बढ़ाया, जिससे भारत की मौसम पूर्वानुमान सेवाएँ दुनिया में सबसे हाई-रेज़ॉल्‍यूशन सेवाओं में शामिल हो गईं।

तटों की सुरक्षाभविष्य की शक्ति

हम विज्ञान को प्रयोगशाला से बाहर लाकर सीधे अपनी 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा तक पहुँचा रहे हैं! यह काम इस तरह किया जा रहा है:

स्‍वच्‍छ जल: लक्षद्वीप में 3 नई पर्यावरण-अनुकूल विलवणीकरण इकाइयाँ स्थानीय ऊर्जा का उपयोग करके सुरक्षित पेयजल प्रदान कर रही हैं।

घरेलू प्रौद्योगिकी: हमारे नए ‘मेक इन इंडिया’ पोत—सागर तारा और सागर अन्वेषिका—समुद्र के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए आधिकारिक रूप से संचालन में हैं।

24/7 सुरक्षा: हमारे सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र ने इस वर्ष 32 प्रमुख भूकंपों की निगरानी की, जिससे तटीय समुदाय सुरक्षित रहें।

भविष्य अब वास्‍तविकता: मिशन मौसम और आईएमडी विज़न 2047 के तहत, हमने अपनी सुपरकंप्यूटिंग क्षमता 21 पेटाफ्लॉप्स तक बढ़ा दी है। इसका अर्थ है हर नागरिक के लिए तेज़ और अधिक सटीक मौसम अपडेट, जो विश्वस्तरीय भारतीय अनुसंधान द्वारा समर्थित हैं।

डॉ. एम. रविचंद्रन, सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने कहा  “2025 वह वर्ष था जब हमने साबित कर दिया कि उच्च स्तरीय विज्ञान केवल पाठ्यपुस्तकों के लिए नहीं है—यह जनता के लिए है। चाहे विदर्भ का कोई किसान बारिश की चेतावनी की जाँच कर रहा हो या कोई शोधकर्ता आर्कटिक के बर्फ़ीले क्षेत्र का अध्ययन कर रहा हो, हमारा कार्य भारत को अधिक लचीला और आत्मनिर्भर बनाने का है।”

2025 में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की कुछ महत्वपूर्ण घटनाएँआविष्कार और योजनाएँ

    • 17 जनवरी 2025 को माननीय उपराष्ट्रपति ने चेटलात (लक्षद्वीप) में एनआईओटी द्वारा स्थापित 1.5 लाख लीटर क्षमता वाले लो-टेम्परेचर थर्मल डीसैलिनेशन (एलटीटीडी) संयंत्र का उद्घाटन किया।
    • 12 अप्रैल 2025 को माननीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने भारत में जलमंडल ध्वनिकी के लिए निर्दिष्ट प्रयोगशाला के रूप में ध्वनिक परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया।
    • माननीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन-3 के दौरान एनसीसीआर द्वारा विकसित प्लेटफ़ॉर्म एसएएचएवी  का अनावरण किया, जिसे प्रौद्योगिकी-सक्षम महासागर गवर्नेंस के लिए वैश्विक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
    • 27 नवम्बर 2025 को माननीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने रायपुर और मैंगलोर में डॉपलर वेदर राडार (डीडब्‍ल्‍यूआर) का उद्घाटन किया।
    • 22 मई 2025 को माननीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की उपस्थिति में एनसीपीओआर की नई अत्याधुनिक सुविधाओं—पोलर भवन, साइंस ऑन स्फियर (एसओएस) और सागर भवन—का उद्घाटन किया। पोलर भवन (11,378 वर्ग मीटर; ₹55 करोड़) में उन्नत प्रयोगशालाएँ और एक गतिशील पृथ्वी-दृश्य प्रणाली (शैक्षिक उपकरण) शामिल हैं, जो दक्षिण एशिया के पहले पोलर और महासागर संग्रहालय का फेज़-I बनाती है; सागर भवन (1,772 वर्ग मीटर; ₹13 करोड़) में विशेष बर्फ़ीली प्रयोगशालाएँ और क्लीनरूम सुविधाएँ हैं।
    • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रवीचंद्रन ने 11 फरवरी 2025 को एनआईओटी में मोर्ड ब्यू सेंसर्स कैलिब्रेशन टेस्ट सुविधा का उद्घाटन किया, जो भारत में संवाहकता और तापमान सेंसर कैलिब्रेशन सुविधा स्थापित करने वाला पहला संस्थान है।
    • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रवीचंद्रन ने 17 अप्रैल 2025 को उत्तरी अंडमान में 10 मीटर व्यास वाले खुले समुद्र पनडुब्बी पिंजरे का समुद्री परीक्षण प्रदर्शन लॉन्च किया, जिसमें एक सब-सी फीडर सिस्टम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता/मशीन लर्निंग आधारित मत्‍स्‍य जैव द्रव्यमान प्रणाली और निगरानी प्रणाली शामिल है।
    • 30 अक्टूबर 2025 को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रवीचंद्रन ने एनसीईएसएस में क्वाड्रुपोल इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज़्मा मास स्पेक्ट्रोमीटर (Q-ICP-MS) प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। यह सुविधा भूवैज्ञानिक नमूनों के रासायनिक और तत्वीय विश्लेषण की सटीक क्षमता प्रदान करती है।
    • सितंबर 2025 को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रवीचंद्रन ने एनसीपीओआर द्वारा आयोजित चौथे राष्ट्रीय पोलर विज्ञान सम्मेलन में ओपन साइंस सेशंस का उद्घाटन किया, जिसमें आठ विषयों में 265 प्रतिभागियों, 160 युवा शोधकर्ताओं सहित, ने हिस्‍सा लिया। इसमें मुख्य सत्र और पुरस्कार भी शामिल थे, और इस प्रकार भारत की पोलर विज्ञान में बढ़ती नेतृत्व क्षमता की पुष्टि हुई।
    • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 6-9 दिसंबर 2025 के दौरान पंचकुला, हरियाणा में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल का सह-आयोजन किया।
    • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने हाइड्रोकार्बन्स महानिदेशालय के सहयोग से उत्तर पश्चिमी ऑफशोर क्षेत्र में तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के माध्यम से बहु-चैनल सिस्मिक डेटा संग्रहण किया। ओएनजीसी ने भारत की संशोधित विस्‍तृत महाद्वीपीय शेल्फ प्रस्तुतियों का समर्थन करने के लिए प्रारंभिक डेटा प्रोसेसिंग पूर्ण की।
    • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने एनडीएमए और राज्य सरकारों के सहयोग से हीट एक्शन प्लान विकसित किए, जिससे देश में गर्मी से संबंधित मौतों और रोगों को कम किया जा सके।
    • उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधा को लगभग 21 पेटाफ्लॉप्स तक बढ़ाया गया, जिससे हाई-रेज़ॉल्‍यूशन मौसम और संयुक्त जलवायु मॉडलिंग के माध्यम से विश्वस्तरीय मौसम और जलवायु सेवाएँ प्रदान की जा सकें।
    • 15 दिसंबर 2025 को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव, डॉ. एम. रविचंद्रन और श्री एम. कृष्णा, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में अर्बन एनवायरनमेंट- साइंस टू सोसाइटी (यूईएस25) का शुभारंभ किया। यह उत्पाद राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) के अर्बन मॉडलिंग प्रोजेक्ट के तहत विकसित किया गया है, जिसे भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय  द्वारा वित्त पोषित किया गया है। यह प्लेटफ़ॉर्म मौसम, वायु गुणवत्ता और शहरी बाढ़ संबंधी जानकारी के लिए एक एकीकृत ढांचा प्रदान करता है, जो संचालन एजेंसियों, नगर निगमों, शोधकर्ताओं और आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को सशक्त बनाता है।
    • गहन महासागर मिशन के अंतर्गत चौथी गहन महासागर परिषद की बैठक का उद्घाटन एवं आयोजन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन द्वारा 17 दिसंबर 2025 को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में किया गया। बैठक के दौरान मिशन के विभिन्न घटकों पर चर्चा की गई, जिनमें गहरे समुद्र में खनन एवं मानव-संचालित सबमर्सिबल, महासागर–जलवायु परिवर्तन परामर्श सेवाएँ, गहरे समुद्र की जैव-विविधता का अन्वेषण एवं संरक्षण, गहन महासागर सर्वेक्षण एवं अन्वेषण, महासागर से ऊर्जा एवं स्‍वच्‍छ जल का उत्पादन तथा महासागर जीवविज्ञान के लिए उन्नत समुद्री स्टेशन शामिल रहे।
    • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अर्थ सिस्टम साइंस ऑर्गनाइजेशन (ईएसएसओ) समीक्षा बैठक पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रवीचंद्रन की अध्यक्षता में  19 दिसंबर 2025 को शिलॉन्‍ग, मेघालय में आयोजित की गई। कार्यक्रम में मौसम विज्ञान के महानिदेशक डॉ. मृत्‍युंजय मोहापात्रा और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संस्थानों के प्रमुख और निदेशक उपस्थित थे। बैठक में कई मुख्‍य बिंदुओं पर चर्चा की गई—जैसे अंतर-संस्थागत सहयोग को मजबूत करना, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी अंतर की पहचान करना, और ईएसएसओ के रोडमैप को भारत के विज़न 2047 के साथ मौसम, जलवायु, महासागर और पृथ्वी प्रणाली विज्ञान में संरेखित करना।
    • 9वां राष्ट्रीय लाइटिंग सम्मेलन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में 22 दिसंबर 2025 को आयोजित किया गया, इसका सह-आयोजन पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय-एनडीएमए-आईएमडी-सीआरओपीसी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय था—“वायुमंडलीय बिजली में बढ़ोतरी के प्रति संवेदनशील समुदायों में लचीलेपन के विकास की चुनौती, इसका चरम मौसमी घटनाओं और नागरिक विज्ञान से संबंध।” कार्यक्रम में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रवीचंद्रन और आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्‍युंजय मोहापात्रा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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