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आईजीएनसीए डॉ. कपिला वात्स्यायन स्मृति व्याख्यान का आयोजन करेगा और उनके संग्रह से वस्त्र प्रदर्शनी का उद्घाटन करेगा

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र का कलानिधि प्रभाग, 29 दिसंबर 2025 को शाम 4:00 बजे आईजीएनसीए के संवेत ऑडिटोरियम में आत्मबोध से विश्वबोध विषय पर डॉ. कपिला वात्स्यायन स्मृति व्याख्यान का आयोजन करेगा। इस स्मृति व्याख्यान को गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष, डॉ. भाग्येश झा, आईएएस (सेवानिवृत्त) द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। सत्र की अध्यक्षता आईजीएनसीए ट्रस्ट के अध्यक्ष, श्री राम बहादुर राय करेंगे। कार्यक्रम का स्वागत भाषण आईजीएनसीए के सदस्य सचिव, डॉ. सच्चिदानंद जोशी देंगे, जबकि कार्यक्रम का परिचय प्रोफेसर (डॉ.) रमेश चंद्र गौड़, डीन (प्रशासन) एवं विभागाध्यक्ष, कलानिधि प्रभाग द्वारा दिया जाएगा।

स्मृति व्याख्यान से पूर्व, दोपहर 3:30 बजे आईजीएनसीए की दर्शनम I और II गैलरी में “अभिव्यक्ति – एक्सप्रेशन ऑफ द लूम फ्रॉम द वॉल्ट ऑफ ए विजनरी” नामक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जाएगा। डॉ. कपिला वात्स्यायन के संग्रह से ली गई यह प्रदर्शनी, उनके निजी वस्त्रों के संग्रह का एक दुर्लभ और सूक्ष्म दृश्य प्रस्तुत करती है। यह प्रदर्शनी इस बात की खोज करती है कि कैसे जीवन भर संचित किए गए वस्त्र, स्मृति, सांस्कृतिक निरंतरता और जीवंत अनुभवों को समाहित करते हैं, जो भारत की भौतिक और बौद्धिक परंपराओं के प्रति डॉ. कपिला वात्स्यायन की व्यापक समझ को दर्शाते हैं।

यह प्रदर्शनी 7 जनवरी 2026 तक जनता के लिए सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुली रहेगी। इसका आयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के कलानिधि प्रभाग द्वारा संरक्षण प्रभाग के सहयोग से किया जाएगा।

प्रदर्शनी पर टिप्पणी करते हुए, आईजीएनसीए के सदस्य सचिव, डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि ‘अभिव्यक्ति’ केवल वस्त्रों का प्रदर्शन मात्र नहीं है, बल्कि एक सुसंगत क्यूरेटोरियल प्रस्तुति है जो शोध, संवेदनशीलता और विजन को एक साथ लाती है। उन्होंने उल्लेख किया कि इसकी पूर्णता का भाव डॉ. कपिला वात्स्यायन के उस आजीवन विश्वास को दर्शाता है कि कलाओं को उनके सांस्कृतिक, सौंदर्यशास्त्रीय और दार्शनिक ढांचे के भीतर ही समझा जाना चाहिए।

इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए, आईजीएनसीए के डीन, प्रोफेसर (डॉ.) रमेश चंद्र गौड़ ने कहा कि वस्त्र मानव सभ्यता के अभिन्न अंग रहे हैं, जो अपने साथ सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक आख्यानों को समेटे हुए होते हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि भारत की वस्त्र परंपराएं इसकी सभ्यता के लोकाचार का एक जीवंत संग्रह हैं। उन्होंने आगे कहा कि ‘अभिव्यक्ति’ डॉ. कपिला वात्स्यायन के उस दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए इस समृद्धि को प्रमुखता से सामने लाती है, जिसमें भौतिक संस्कृति को भारत की बहुलवादी परंपराओं को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है।

संरक्षण के पहलू पर प्रकाश डालते हुए, आईजीएनसीए के संरक्षण प्रभाग के प्रमुख, प्रोफेसर अचल पंड्या ने वस्त्र विरासत को संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया, विशेष रूप से तब जब वह डॉ. कपिला वात्स्यायन जैसी महान हस्ती से जुड़ी हो।

इस प्रदर्शनी में 50 से अधिक वस्त्र प्रदर्शित किए गए हैं, जो पूरे भारत की 50 से अधिक विशिष्ट शिल्प परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसे टेक्सटाइल आर्काइविस्ट और रिसर्चर सुश्री सारिका अग्रवाल ने क्यूरेट किया है।

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