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भारतीय वस्त्र क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी

दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों की आयातित कच्चे माल पर निर्भरता के बावजूद कुछ बाजारों में प्राथमिकता से पहुंच है और उसी के अनुरूप वे सिले सिलाए वस्त्रों का निर्यात करते हैं। भारतीय वस्त्र क्षेत्र एकीकृत है, जिसका घरेलू कच्चे माल का सुदृढ़ आधार और संपूर्ण मूल्य श्रृंखला की निर्माण क्षमता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का वस्त्र और परिधान (हस्तशिल्प सहित) निर्यात 37,755 मिलियन डॉलर रहा  जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि है।

सरकार भारतीय वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र को बढ़ावा देने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं/पहल लागू कर रही है। प्रमुख योजनाओं/पहल में आधुनिक, एकीकृत और वैश्विक स्तर के वस्त्र अवसंरचनात्‍मक ढांचे के लिए प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन्स एंड अपैरल (पीएम मित्र) पार्क योजना; उत्पादन को बढ़ावा देने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने संबंधी मानव निर्मित रेशे से बने कपड़े और परिधान तथा तकनीकी कपड़े पर केंद्रित उत्‍पादन से जुड़ी प्रोत्‍साहन योजना; अनुसंधान, नवाचार एवं विकास, संवर्धन और बाजार विकास पर केंद्रित राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन, मांग आधारित, रोजगारोन्मुखी और कौशल विकास कार्यक्रम प्रदान करने के उद्देश्य से वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण हेतु समर्थ योजना; रेशम उत्पादन मूल्य श्रृंखला के व्यापक विकास हेतु सिल्क समग्र-दो योजना और हथकरघा क्षेत्र को सहयोग देने हेतु राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम शामिल हैं।

वस्त्र मंत्रालय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम और व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना भी लागू कर रहा है। सरकार परिधान/वस्त्र और तैयार कपड़ों के लिए राज्य और केंद्रीय करों और शुल्क में छूट, अन्य वस्त्र उत्पादों के लिए निर्यात उत्पादों पर शुल्क तथा कर छूट संबंधी दो योजनाएं भी चला रही है।

सरकार ने हाल ही में वस्त्र क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के कई उपाय किए हैं। इनमें गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के अनिवार्य अनुपालन से छूट संबंधी अग्रिम प्राधिकरण योजना के तहत निर्यात दायित्व अवधि का विस्तार, मानदंडों को आसान बनाने के लिए एमएमएफ परिधान, एमएमएफ कपड़े और तकनीकी वस्त्रों के लिए पीएलआई योजना का संशोधन, 31.12.2025 तक कपास पर आयात शुल्क से छूट और मूल्य श्रृंखला में जीएसटी दरों का युक्तिकरण शामिल है।

सरकार का उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र के लिए 40 प्रमुख बाजारों की पहचान कर निर्यात में विविधता को बढ़ावा देना है। उसने व्यापारिक साझेदारों के साथ 15 मुक्त व्यापार समझौते और 6 प्राथमिकता व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अतिरिक्त, सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन और निर्यात दिशा के माध्यम से लागू किए जा रहे निर्यात संवर्धन मिशन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य व्यापार में पूंजी, बाजार पहुंच, ब्रांडिंग और अनुपालन प्रदान करना है। साथ ही, निर्यातकों के लिए शत-प्रतिशत ऋण गारंटी योजना भी शुरू की गई है, जिससे लघु एवं मध्यम उद्यमों को विशेष रूप से लाभ पहुंचा है।

इन सभी उपायों से भारतीय वस्त्र उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ रही है।

वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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