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भारत की ज़ाइडस लाइफ ने मूत्राशय की दवा को लेकर एस्टेलस के साथ 120 मिलियन डॉलर का समझौता किया।

एस्टेलस फार्मा का लोगो 3 दिसंबर, 2019 को टोक्यो, जापान स्थित उसके मुख्यालय में प्रदर्शित किया गया। 
12 फरवरी (रॉयटर्स) – भारत की ज़ाइडस लाइफसाइंसेज (ZYDU.NS)नया टैब खुलता हैऔर इसकी अमेरिकी इकाई एस्टेलस फार्मा (4503.T) को 120 मिलियन डॉलर का भुगतान करेगी।भारतीय कंपनी ने गुरुवार को कहा कि यह समझौता जापानी दवा निर्माता कंपनी की मूत्राशय विकार की दवा मिराबेग्रोन पर पेटेंट विवाद को निपटाने के लिए किया गया है।
कंपनी ने कहा कि ज़ाइडस और उसकी इकाई समझौते की तारीख से लेकर सितंबर 2027 तक अमेरिका में अपनी जेनेरिक दवा मिराबेग्रोन की बिक्री पर प्रति यूनिट अग्रिम लाइसेंसिंग शुल्क का भुगतान भी करेगी।
ज़ाइडस ने कहा कि इस समझौते से कंपनी को संयुक्त राज्य अमेरिका में अपनी जेनेरिक दवा मिराबेग्रोन का विपणन जारी रखने में मदद मिलेगी, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के अन्य नियम और शर्तें गोपनीय हैं।
इस घोषणा के तुरंत बाद ज़ाइडस के शेयरों में 1.3% तक की बढ़ोतरी हुई।
यह घोषणा स्थानीय समकक्ष लुपिन (LUPN.NS) के कुछ दिनों बाद आई है।नया टैब खुलता हैउसने उसी दवा को लेकर एस्टेलस के साथ अपने विवाद को 90 मिलियन डॉलर में निपटाने का फैसला किया ।
उस समय, ब्रोकरेज फर्म सिटी के विश्लेषकों ने कहा था कि इस घटनाक्रम से अमेरिकी बाजार में अन्य जेनेरिक प्रतिद्वंद्वियों के प्रवेश में देरी हो सकती है, जिससे ज़ाइडस और ल्यूपिन को सीमित प्रतिस्पर्धा की अवधि मिल सकती है।
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