प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज संस्कृत ग्रंथ सुभाषितम का पाठ करते हुए इस बात पर जोर दिया कि मानवता को पृथ्वी के साथ सद्भाव में रहना चाहिए, क्योंकि पृथ्वी समस्त जीवन की पालन-पोषण करने वाली माता है और जिस नैतिक व्यवस्था से वह बनी रहती है उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-
विश्वस्वं मातरमोषधिनां ध्रुवां भूमिं पृथ्वीं धर्मणा धृतम्।
शिवं स्योनामनु चरेम विश्वहा॥









