केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने राज्यसभा को सूचित किया कि जनजातीय कला रूपों, भाषाओं, मौखिक परंपराओं और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों सहित जनजातीय विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और संवर्धन के लिए, जनजातीय मामलों का मंत्रालय केंद्र प्रायोजित योजना “जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता” के तहत झारखंड जनजातीय अनुसंधान संस्थान सहित 29 जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। टीआरआई संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करते हैं और मंत्रालय से प्राप्त वित्तीय सहायता से अनुमोदित वार्षिक कार्य योजनाओं को कार्यान्वित करते हैं। झारखंड टीआरआई जनजातीय भाषाओं, लोककथाओं, रीति-रिवाजों और पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन, जनजातीय संग्रहालयों को सुदृढ़ करने और शोध प्रकाशन जैसी गतिविधियों का संचालन करता है। मंत्रालय ने जनजातीय विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए ट्राइबएक्स (पूर्ववर्ती आदि संस्कृति) डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से झारखंड के जनजातीय सांस्कृतिक संसाधनों के दस्तावेजीकरण और प्रदर्शन के लिए डिजिटल पहल भी विकसित की है। मंत्रालय की ‘ट्राइबएक्स’ पहल के तहत, झारखंड की आदिवासी कला विधाओं, जैसे सोहराई चित्रकला, डोकरा शिल्प और जादुपेटिया चित्रकार, को अल्पकालिक प्रमाण पत्र पाठ्यक्रमों में शामिल किया गया है। इसके अलावा, मंत्रालय ने एआई आधारित अनुवाद उपकरण “आदि वाणी” भी विकसित किया है, जो एआई-सक्षम पाठ और वाक् अनुवाद के माध्यम से झारखंड की आदिवासी भाषाओं, जिनमें संथाली और मुंडारी शामिल हैं, के संरक्षण और व्यापक पहुंच में सहयोग करता है। यह उपकरण आदिवासी भाषाओं और हिंदी/अंग्रेजी के बीच अनुवाद करता है।
अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित संवैधानिक सुरक्षा उपायों और वैधानिक प्रावधानों का कार्यान्वयन, जिनमें संविधान की पांचवीं अनुसूची, पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (पीईएसए) और अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 के प्रावधान शामिल हैं, मुख्य रूप से राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। जनजातीय मामलों का मंत्रालय नीतिगत मार्गदर्शन, सलाह और क्षमता निर्माण सहायता प्रदान करता है, जबकि जनजातीय अनुसंधान संस्थान साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और प्रभावी कार्यान्वयन में सहयोग हेतु अनुसंधान, अध्ययन और प्रलेखन कार्य करते हैं।
जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को “जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता” योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता जनजातीय संस्कृति के अनुसंधान, प्रलेखन, संरक्षण और संवर्धन, जनजातीय संग्रहालयों की स्थापना और सुदृढ़ीकरण, प्रशिक्षण, प्रकाशन और जनजातीय ज्ञान के प्रसार से संबंधित अनुमोदित गतिविधियों के लिए दी जाती है। राज्य सरकार/जनजातीय अनुसंधान संस्थान को अनुमोदित वार्षिक कार्य योजनाओं, निधि की उपलब्धता और निर्धारित शर्तों की पूर्ति के आधार पर निधि जारी की जाती है। जनजातीय सांस्कृतिक संरक्षण के लिए अलग से कोई सहायता राशि जारी नहीं की जाती है। जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को स्वीकृत परियोजनाओं/गतिविधियों का विवरण मंत्रालय के पोर्टल https://tribal.nic.in/Display_Apex_Minutes.aspx पर उपलब्ध है।
वर्तमान तिथि तक, जनजातीय मामलों के मंत्रालय के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।









