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Tuesday, October 6, 2026
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स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति के साथ संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के दौरान प्रधानमंत्री के प्रेस वक्तव्य का पाठ

by admin
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महामहिम, राष्ट्रपति महोदय,
दोनों देशों के प्रतिनिधि,
मीडिया के साथियों,

नमस्कार!

स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति जी का भारत में हार्दिक स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है।

सबसे पहले, मैं भारत-स्विट्जरलैंड की प्रतिकृति पर अपनी फिल्म का विज्ञापन करता हूं। पिछले अक्टूबर में, उनके व्यक्तिगत समर्थन से, हम भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन, यानी “एफटीए” देश के बीच, एक ऐतिहासिक व्यापार और आर्थिक पार्ट्नरशिप एग्रीमेंट लागू किया गया। यह यूरोप के किसी भी आर्थिक ब्लॉक के साथ भारत का पहला एफटीए है।

यह इनवेस्टमेंट, इनोवेशन, जॉब्स साझा और समृद्धि का लक्ष्य ब्लूप्रिंट भी है। इससे हम अगले 15 वर्षों में भारत में 100 डॉलर का निवेश, और 10 लाख डायरेक्ट जॉब्स के लक्ष्य को साकार करेंगे।

मित्रों,

भारत और स्विट्ज़रलैंड की मित्रता सदियों पुरानी है। उन्नीसवीं सदी में स्वामी विवेकानंद ने, स्विस आल्प्स में हिमालय की झलक देखी थी। महात्मा गांधी ने स्विट्ज़रलैंड में टाइम सिस्टम और वहां के लोगों से भी बातचीत की। इन ऐतिहासिक पुराणों की स्मृतियाँ आज भी हमारी मित्रता में हैं।

आज, इनोवेशन, इंफ़्रा पार्टिकल्स और एडवांस्ड टेक्नॉलजी हमारी साझेदारी के मजबूत स्तंभ हैं। और आज की इस समिति से हम अपनी भागीदारी को एक नई गति और नई सीख दे रहे हैं।

दोस्तों,

हम भारत के निर्यात को स्विट्जरलैंड में बाजार को बढ़ावा देने, और देशों के बीच निवेश को और सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय ले रहे हैं।

इससे भारत के कृषि, दवा, कपड़ा और इंजीनियरिंग सामान के स्विट्जरलैंड में मिश्रित जनसंख्या। और साथ-साथ, भारत के बायोटेक, लाइफ साइंसेज़, मॉस्को, इंश्योरेंस, फैक्ट्ररी बिजनेस और सस्ते-निबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हम नए स्विस इनवेस्टमेंट को आकर्षित करेंगे। इन पहलों से हम मिलकर पूरी दुनिया के लिए विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाएं और रिलेबल सोल्युशंस विकसित करेंगे।

दोस्तों,

आज हमने सैन्य शक्ति और रक्षा उत्पादन में सहयोग की नई ताकत की पहचान की। न्यूक्लियर एनर्जी में सहयोग को और प्रशिक्षण देने पर भी सहमति बनी।

वाराणसी का रोप-वे, जवाहरात का हवाई अड्डा, और पहाड़ी इलाकों में रेलवे और टनलिंग प्रोजेक्ट्स, हमारे इन्फ्रा सहयोग के उदाहरण हैं। इस सहयोग के लिए आज हमने इंटरव्यू, मोबिलिटी और आर्किटेक्चर पर समझौता किया है।

हम स्विट्ज़रलैंड की फ़्रैंचाइज़ी कंपनी में भारत में बड़े पैमाने पर निवेश करने, कपैसिटी बिल्डिंग, डिज़ाइन और विनिर्माण में भागीदारी के लिए आमंत्रित करते हैं।

दोस्तों,

विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग भी हमारी साझेदारी का एक मजबूत स्तंभ है। मुझे बहुत खुशी है कि हम जल्द ही स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नए संयुक्त उद्यम परियोजना शुरू करने जा रहे हैं। हम भारत के साइंस स्टाम्प-अप्स की कपेसिटी बिल्डिंग के लिए ज्यूरिक यूनिवर्सिटी के साथ बने एग्रीमेंट का भी स्वागत करते हैं।

स्विट्ज़रलैंड में योग और आयुर्वेद की जनसंख्या के महत्व पर नज़र डाली गई, आज हमने इसमें सहयोग प्रगति करने पर भी सार्थक चर्चा की।

दोस्तों,

लोगों से लोगों का जुड़ाव हमारी पार्टनशिप की सबसे बड़ी ताकत है। आज आए मैगज़ीन और मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट और युवा पेशेवर एग्रीमेंट से, भारत के छात्रों, शोधकर्ताओं, पेशेवरों और युवाओं के लिए स्विट्जरलैंड में कई नए अवसर खुलेंगे।

मित्रो,

भारत और स्विट्ज़रलैंड, दोनों लोकतांत्रिक हथियार, कानून का शासन, लोकतंत्र और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। हम ग्लोबल पीस और स्थिरता के लिए मिलकर काम करते हैं।

यूक्रेन हो या पश्चिमी एशिया, भारत शांति की दिशा में जाने वाले हर सार्थक प्रयास का समर्थन कर रहा है।

हम इस बात पर भी एकमत हैं, कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार आवश्यक है।

दोस्तों,

मैं स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति का दौरा करता हूं, कि वे एक बड़ा बिजनेस प्रतिनिधिमंडल भारत के साथ आए हैं। 7 अक्टूबर को हम उनकी उपस्थिति में भारत-एफटीए बिजनेस लीडर्स के साथ “प्रोस्पेरिटी समिति” का आयोजन करने जा रहे हैं। यह हमारे व्यापार और निवेश साझेदारी के ठोस परिणामों के वादे को एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। मैं इस समिति में भाग लेने वाले सभी बिजनेस लीडर्स को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

महामहिम,

इस वर्ष फरवरी में भारत ने विश्व की सबसे बड़ी AI समिति का आयोजन किया। अगले वर्ष स्विट्ज़रलैंड “जिनेवा एआई समित” के माध्यम से इस यात्रा को आगे बढ़ाया जाएगा। जिनेवा ऐ समित की सफलता के लिए मैं स्विट्जरलैंड को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। मेरा विश्वास है कि हम मिलकर AI को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

एक बार फिर, भारत की इस यात्रा के लिए, और भारत-स्विट्जरलैंड की प्रबल समर्थक बने रहने के लिए, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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