दुग्ध उत्पादन सहकारी समितियों को सुदृढ़ बनाना और नस्ल सुधार करना,
पशु रोगों के प्रकोप के खिलाफ तैयारी को बढ़ाना
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा को सूचित किया कि सरकार डेयरी अवसंरचना, नस्ल सुधार, उद्यमिता प्रोत्साहन और पशु स्वास्थ्य तैयारियों में लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से डेयरी और पशुधन क्षेत्रों को मजबूत करना जारी रखे हुए है।
सरकार ने बताया कि दूध की खरीद के मूल्य डेयरी सहकारी समितियों और निजी डेयरियों द्वारा प्रचलित बाजार स्थितियों के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं, और विभाग को ऐसी कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है जिससे यह संकेत मिले कि खरीद और खुदरा कीमतों के बीच अंतर के कारण डेयरी किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहे हैं।
दुग्ध क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए, राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) ने जून 2026 तक 36,611 नई दुग्ध सहकारी समितियों के गठन को सुगम बनाया है और 34,557 ग्राम स्तरीय दुग्ध सहकारी समितियों को सुदृढ़ किया है। प्रतिदिन लगभग 168 लाख लीटर दूध को ठंडा करने की क्षमता सृजित की गई है, जबकि 76,748 दूध गुणवत्ता परीक्षण उपकरण वितरित किए गए हैं।
पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (एएचआईडीएफ) के तहत, प्रतिदिन 418 लाख लीटर दूध प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन क्षमता वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस से एकीकृत दुग्ध आपूर्ति समीक्षा डैशबोर्ड पोर्टल पर वर्तमान में दिल्ली में तीन सक्रिय डेयरी सहकारी समितियां प्रदर्शित हैं।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) के अंतर्गत स्वदेशी नस्लों के विकास, आनुवंशिक सुधार और उत्पादकता बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। तमिलनाडु को पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार से ₹12,521.83 लाख की सहायता प्राप्त हुई, जिसका राज्य ने पूर्णतः उपयोग किया। इस सहायता से 36.13 लाख कृत्रिम गर्भाधान, चार वीर्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण, 475 मैत्रेताओं का प्रशिक्षण एवं उपकरण उपलब्ध कराना, दो आईवीएफ प्रयोगशालाओं की स्थापना, लिंग-आधारित वीर्य परीक्षण सुविधाओं का निर्माण, तीन नस्ल गुणन फार्मों की स्थापना और बछिया पालन केंद्रों के लिए सहायता संभव हुई।
सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) के तहत देशव्यापी उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। पिछले पांच वर्षों में, राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के तहत 17.27 करोड़ से अधिक कृत्रिम गर्भाधान किए गए हैं, जिससे लगभग 5.98 करोड़ किसानों को लाभ हुआ है।
कुल 47,687 मैत्री (ग्रामीण भारत में बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन) को प्रशिक्षित किया गया है, 24 आईवीएफ प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, 48 वीर्य केंद्रों को मंजूरी दी गई है और 28 बछिया पालन केंद्रों को अनुमोदित किया गया है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत, 4,084 नस्ल गुणन फार्मों को मंजूरी दी गई है, 1.61 लाख मीट्रिक टन गुणवत्तापूर्ण चारा बीज का उत्पादन किया गया है और 204 साइलेज और संपूर्ण मिश्रित राशन इकाइयों को मंजूरी दी गई है। एलएचडीसीपी के तहत फुट एंड माउथ डिजीज, ब्रुसेलोसिस, पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स और क्लासिकल स्वाइन फीवर के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण जारी है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत 4,291 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत ₹2,956.79 करोड़ है और ₹1,356.53 करोड़ की सब्सिडी स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं से लगभग 21,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने और लगभग 91,000 किसानों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम पूरी तरह से डिजिटल पोर्टल के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है और सब्सिडी का वितरण सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से किया जाता है।
सरकार ने सदन को यह भी सूचित किया कि मध्य प्रदेश में 29 जून से 3 जुलाई 2026 तक आयोजित राष्ट्रीय मॉक अभ्यास, पशुजन्य युद्ध अभ्यास (PYA), का सफल मूल्यांकन किया गया है। इस अभ्यास से समन्वय, निगरानी, जैव सुरक्षा, प्रयोगशाला प्रोटोकॉल, संक्रमण रोकथाम, आपातकालीन प्रतिक्रिया और अंतर-एजेंसी संचार में सुधार करके पशुजन्य रोगों के प्रकोप से निपटने की तैयारियों को मजबूती मिली है। विभाग पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत रोग निगरानी, टीकाकरण, प्रयोगशाला सुदृढ़ीकरण, मानक संचालन प्रक्रियाओं, संकट प्रबंधन योजनाओं और क्षमता निर्माण के माध्यम से राज्यों को निरंतर सहायता प्रदान कर रहा है।









