प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि निस्वार्थ सेवा मानवता की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि सेवा और समर्पण की इसी भावना के साथ देश प्रत्येक नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने संस्कृत में एक सुभाषितम साझा किया।
“हितं यत्सर्वभूतानामात्मानश्च सुखावहम्।”
तत्कुरायदीश्वरे ह्येतनमूलं सर्वार्थसिद्धये।। ”
सुभाषितम् यह संदेश देता है कि मनुष्य को केवल वही कर्म करने चाहिए जो समस्त प्राणियों के हित में हों और आत्मा को शांति प्रदान करें। यही ईश्वर के प्रति सच्ची आत्मसमर्पण की प्रक्रिया है, क्योंकि यही मार्ग समस्त मानवीय प्रयासों और आध्यात्मिक उपलब्धियों का मूल आधार है।
प्रधानमंत्री ने X पर लिखा;
“निःस्वार्थ कर्म ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। हम सेवा और इसी भाव के साथ हर किसी के जीवन को बेहतर बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।”
हितं यत्सर्वभूतानामात्मानश्च सुखावहम्।
तत्कुर्यादीश्वरे ह्येतनमूलं सर्वार्थसिद्धये।।”









