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केंद्रीय विश्वविद्यालयों का कुलपति सम्मेलन 10-11 जुलाई 2025 को गुजरात के केवडिया में आयोजित किया जाएगा

सम्मेलन का उद्देश्य शैक्षिक परिवर्तन में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की भूमिका और विकसित भारत@2047 में उनके योगदान पर ध्यान केंद्रित करना है

सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा और भविष्य की दिशा निर्धारित की जाएगी

सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख विषयों पर केंद्रित सत्रों पर चर्चा की जाएगी

शिक्षा मंत्रालय 10 और 11 जुलाई 2025 को गुजरात के केवडिया में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम में माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान; माननीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार; और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी 2020) के 29 जुलाई, 2025 तक पांच वर्षों के कार्यान्वयन के भाग के रूप में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के प्रमुख संस्थागत प्रगति की समीक्षा करने और सामूहिक रूप से आगे की दिशा तय करने के लिए शामिल होंगे। दो दिनों की चर्चा में इन तीन प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किए जाने की आशा है:

  1. रणनीतिक संरेखण: यह सुनिश्चित करना कि केंद्रीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अगले चरण के लक्ष्यों के साथ संरेखित हों।
  2. सहकर्मी शिक्षण और ज्ञान का आदान-प्रदान: संस्थागत नवाचारों, सक्षम वातावरण और साझा चुनौतियों पर शिक्षाविदों के बीच संवाद को बढ़ावा देना।
  3. भविष्य की योजना और तत्परता: आगामी योजना, नियामक परिवर्तनों और वर्ष 2047 के वैश्विक शैक्षणिक परिदृश्य के लिए संस्थानों को तैयार करना।

इस सम्मेलन में उच्च शिक्षा के प्रमुख पहलुओं – शिक्षण/अधिगम, अनुसंधान और शासन – पर दस विषयगत सत्रों के माध्यम से चर्चा की जाएगी, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख स्तंभों – समता, जवाबदेही, गुणवत्ता, पहुंच और सामर्थ्य – के अनुरूप होंगे। इनमें शामिल हैं:

    1. चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (एफवाईयूपी) पर ध्यान केंद्रित करते हुए राष्ट्रीय उच्च शिक्षा योग्यता ढांचा (एनएचईक्यूएफ)/नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) की समझ और कार्यान्वयन
    2. कार्य का भविष्य – नौकरी की आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रमों का संरेखण
    3. डिजिटल शिक्षा – स्वयं, स्वयं प्लस, ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (एएपीएआर) क्रेडिट ट्रांसफर पर ध्यान देना
    4. विश्वविद्यालय प्रशासन प्रणाली – समर्थ
    5. उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना- समावेशी और समतापूर्ण वातावरण को बढ़ावा देना।

प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी, वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन

    1. भारतीय भाषा और भारतीय ज्ञान प्रणाली में शिक्षा, भारतीय भाषा पुस्तक योजना
    2. अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (एएनआरएफ), सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (सीओई), प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप (पीएमआरएफ) सहित अनुसंधान और नवाचार
    3. रैंकिंग और मान्यता प्रणाली
    4. भारत में अध्ययन सहित अंतर्राष्ट्रीयकरण
    5. संकाय विकास – मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम

इस सम्मेलन में दिल्ली विश्वविद्यालय, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, असम विश्वविद्यालय, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय, कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय, विश्वभारती, राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), सिक्किम विश्वविद्यालय, त्रिपुरा विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), इलाहाबाद विश्वविद्यालय और कई अन्य शिक्षण संस्थान भाग लेंगे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, वर्ष 2040 तक भारत के उच्च शिक्षा परिदृश्य में परिवर्तन का स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। यह जीवंत, बहु-विषयक संस्थानों की परिकल्पना है जो अन्वेषण, सहयोग और वैश्विक जुड़ाव को प्रोत्साहित करती है। इस दृष्टिकोण के अनुरूप और विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल के लिए, कुलपतियों के सम्मेलन से सार्थक अंतर्दृष्टि उत्पन्न होने, संस्थानों के बीच सहयोग को मज़बूत करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन के अगले चरण के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने में मदद मिलने की आशा है। यह सम्मेलन देश में उच्च शिक्षा के भविष्य को आकार देने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने के राष्ट्र के सामूहिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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