नई दिल्ली, 12 नवंबर (रायटर) – भारत के प्रतिस्पर्धा रोधी नियामक ने सरकारी स्कूल शिक्षा निकाय को कागज की आपूर्ति में कथित मूल्य मिलीभगत की जांच के लिए छह पेपर मिलों पर देशव्यापी छापे मारे हैं, बुधवार को प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले दो लोगों ने यह जानकारी दी।
भारतीय कागज निर्माता संघ के अनुसार, भारत का कागज उद्योग विश्व के उत्पादन का लगभग 5% है, तथा इसका अनुमानित वार्षिक कारोबार 11 बिलियन डॉलर है।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) मंगलवार से पश्चिम में महाराष्ट्र और उत्तर में पंजाब, उत्तर प्रदेश और नई दिल्ली में अचानक छापेमारी कर रहा है। उन्होंने मामला गोपनीय होने के कारण नाम उजागर करने से इनकार कर दिया।
सूत्रों ने बताया कि सतिया इंडस्ट्रीज (SATD.NS) के कार्यालय, नया टैब खुलता है, सिल्वरटन पल्प और चड्ढा पेपर्स (CHAD.BO), नया टैब खुलता हैजिन लोगों पर छापेमारी की गई, उनमें श्रेयांस इंडस्ट्रीज (SHRY.NS) भी शामिल थी। एक सूत्र ने बताया कि श्रेयांस इंडस्ट्रीज (SHRY.NS), नया टैब खुलता हैकार्यालय की भी तलाशी ली जा रही थी।
सूत्रों ने अन्य किसी कंपनी का नाम नहीं बताया।
सतिया इंडस्ट्रीज के मुख्य वित्तीय अधिकारी रचित नागपाल ने टेलीफोन पर रॉयटर्स से सीसीआई के छापों की पुष्टि की तथा कहा कि कंपनी ने जांचकर्ताओं के साथ सहयोग किया है।
सिल्वरटन पल्प के एक अधिकारी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। चड्ढा पेपर्स और श्रेयांस इंडस्ट्रीज ने रॉयटर्स के सवालों का तुरंत जवाब नहीं दिया।
सीसीआई अपने कथित कार्टेलाइजेशन या छापों के मामलों का कोई भी विवरण सार्वजनिक नहीं करता है और पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखता है। नियामक ने रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया।
कथित मिलीभगत का मामला पिछले वर्ष सरकार की राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा की गई शिकायत के बाद शुरू हुआ था, जो स्कूलों के लिए पाठ्यपुस्तकें और अन्य शिक्षण सामग्री बनाने के लिए मिलों से कागज खरीदती है।
परिषद ने टिप्पणी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया।









