एमएसएमई क्षेत्र सहित नीति निर्माण में हितधारकों का परामर्श एक सतत प्रक्रिया है। भारत सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वित्त तक पहुँच में सुधार हेतु सहायता प्रदान करने हेतु कई पहल और उपाय किए हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
i. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने संयुक्त रूप से वर्ष 2000 में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी ट्रस्ट फंड (सीजीटीएमएसई) की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य सदस्य ऋण संस्थानों (एमएलआई) द्वारा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) को दिए जाने वाले ऋणों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएस) के अंतर्गत बिना किसी संपार्श्विक प्रतिभूति या तृतीय-पक्ष गारंटी के ऋण गारंटी प्रदान करना है। हाल ही में गारंटी सीमा 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है।
ii. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम गैर-कृषि क्षेत्र में विनिर्माण और सेवा उद्यमों के लिए क्रमशः 50 लाख रुपये और 20 लाख रुपये की परियोजना लागत वाले नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के लिए 35% तक मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान करता है।
iii. पीएम विश्वकर्मा योजना 17.09.2023 को शुरू की गई थी ताकि 18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगरों और शिल्पकारों को, जो अपने हाथों और औज़ारों से काम करते हैं, संपूर्ण सहायता प्रदान की जा सके। इस योजना में अधिकतम 8% ब्याज छूट के साथ 3 लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान शामिल है।
iv. एमएसएमई में इक्विटी फंडिंग के रूप में 50,000 करोड़ रुपये डालने के लिए आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) फंड की स्थापना की गई है, जिसमें भारत सरकार से 10,000 करोड़ रुपये और निजी इक्विटी/वेंचर कैपिटल फंड के माध्यम से 40,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।
इसके अलावा, सरकार ने एमएसएमई के लिए ऋण तक पहुंच बढ़ाने के लिए कई अन्य उपाय भी किए हैं, जिनमें एमएसई को संपार्श्विक मुक्त ऋण, व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली (टीआरईडीएस) का कार्यान्वयन, मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए 100 करोड़ रुपये तक के ऋण की आवश्यकता वाली परियोजनाओं के लिए म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी योजना, बैंकों द्वारा ऋण निर्णयों के लिए समयसीमा में कमी आदि शामिल हैं।
यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री (सुश्री शोभा करंदलाजे) ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।









