प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज संस्कृत में एक सुभाषितम का पाठ किया, जिसमें प्रतिभा के फलने-फूलने के लिए सही वातावरण, मार्गदर्शन और पोषण के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
प्रधानमंत्री ने X पर लिखा;
“सच्ची प्रतिभा को जब सकारात्मक वातावरण मिलता है तो उसमें अद्भुत ऊर्जा का संचार होता है। जहाँ प्रयास में सफलता होती है, वहीं जीवन भी सार्थक होता है।”
पात्रविशेषे न्यास्तं गुणान्तरं व्रजति शिल्पमाधातुः।
जलमिव समुद्रशुक्तौ मुक्तफलतं पयोद्यस्य॥”
किसी व्यक्ति या वस्तु का मूल्य और महानता काफी हद तक उसके परिवेश और मार्गदर्शन पर निर्भर करती है। जैसे पानी की एक साधारण बूंद सीप के खोल में प्रवेश करते ही एक अनमोल मोती बन जाती है, उसी प्रकार साधारण गुण भी सही स्थान, समर्थन और पोषण मिलने पर असाधारण बन सकते हैं।









