श्री भूपेंद्र यादव जैव विविधता संरक्षण में पहुंच और लाभ-साझाकरण के अधिकारों तथा सामुदायिक भागीदारी के महत्व पर जोर देते हैं।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण और विकास सोसायटी की 27वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के सचिव श्री नरेंद्र भूषण, महानिदेशक (वन) और विशेष सचिव श्री संतोष तिवारी, मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और जीबी पंत सोसायटी के सदस्य उपस्थित थे।
बैठक के दौरान, श्री यादव ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका में सुधार लाने और इसके व्यापक कल्याण में योगदान देने के लिए पहुंच और लाभ-साझाकरण अधिकारों और जन जैव विविधता रजिस्टरों (पीबीआर) के महत्व पर जोर दिया।
श्री यादव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक भारतीय हिमालयी क्षेत्र में पारिस्थितिक सुरक्षा और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने वाले नीतिगत ढांचे को विकसित करने पर ठोस ध्यान केंद्रित किया गया है।
बैठक के दौरान चार प्रकाशन जारी किए गए, जिससे संस्थान द्वारा किए गए कार्यों के ज्ञान भंडार में वृद्धि हुई। ये प्रकाशन भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण प्रथाओं, गंगोत्री हिमनदी प्रणाली, ई-पीबीआर प्रशासन और भारतीय हिमालयी क्षेत्र में रामसर आर्द्रभूमि को कवर करते हैं।
जारी की गई चार प्रकाशनें इस प्रकार हैं:
1. भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के लिए जैव विविधता और उसके संरक्षण के उपाय
2. गंगोत्री हिमनद प्रणाली
3. भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लिए ई-पीबीआर शासन
4. भारतीय हिमालयी क्षेत्र की रामसर आर्द्रभूमि

